कविता पद्य साहित्य

भँवरा डोले

भँवरा बनकर डोल रहा है , मारा मारा फिर रहा है , हर एक से बातें करता , कहता है वह सँवर रहा है ।। गुलदस्ता बनकर मुस्काना , अपनी पीड़ा को झुठलाना , बात बहुत गहरी करते है , पर काम न आया इठलाना ।। बलि चढे या फूल खिले , गूलों से कब […]

कविता पद्य साहित्य

वह पल फिर लौट के आयेगा

वह पल फिर लौट के आएगा , नेह की गङ्गा धरा पर लाएगा , हर आँगन बगिया बन महकेगा, स्वर्ग सुख धरा पर छलकेगा , फिर खिले-खिले होंगे दर , मन्दिर मस्जिद से होंगे घर , हर दिल तीरथ बन जाएगा , मनुज मनुजता के गुण गाएगा , हर रिश्ता मनभावन होगा , हर चेहरे […]

कविता पद्य साहित्य

कविता

बिन मिले ही बिछुड़े, पलकें रह गयी प्यासी , चित्र बने अवशेष , फिर ढूँढे ख़ुशियाँ , नये-नये चित्र , सब मिले विचित्र , एक- एक कर सबका, यूँ ही मिलना-बिछुड़ना , तलाश में अपनत्व की , क्या-क्या न किया , फिर भी सब यारों , बिन मिले ही बिछुड़े, न मिलना शुमार था , […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

कुछ भी हो

कैसी हो गजल जलालत कुछ भी हो दलों की सियासत हजामत कुछ भी हो । जानवरों से भी बदतर है ये सब लोग , मरघट में बैठकर अदावत कुछ भी हो । देख रहे आँखें मूँद सरहद के सब नजारे , तू-तू मै-मै में लगे है नजाकत कुछ भी हो । मत उड नेपाल-पाक मसनवी […]

कविता पद्य साहित्य

मोबाइल वानिकी

  अद्भुत है मोबाइल वानिकी तहरीर भी बिन देखे होती है, तफसील की चलती दुकानें तफरीह लफ्जों का खेल है , दास्ताँ प्यार की उकेर रहे , अब संचार की पटरियों पर , प्यार बना शब्दों का खेल., पर जीवन में न होता मैल , घर में भी टंकण से बात , नहीं रहा अब […]

कविता पद्य साहित्य

विपक्ष पर प्रहार में

  नेता दिन में जागते नहीं है. रात में सोते नहीं है बिजी रहते है. विपक्ष पर प्रहार में ।   न कोरोना की समझ , न चीन की पापी पाक के नापाक कदमों पर , नेपाल की हरकतों पर , सियासती सवालों में , बिजी रहते है. विपक्ष पर प्रहार में ।   न […]

कविता पद्य साहित्य

सियासत

साधु सन्तों पर सियासत , सेना के काज पर सियासत , कोरोना काल पर सियासत , मजदूर पलायन पर सियासत , न्युनतम मजदूरी पर सियासत , मनरेगा कार्य पर सियासत , आयुष्मान भारत पर सियासत , जात-पात के नाम पर सियासत , धर्म कर्म के नाम पर सियासत , आदमी की आदमी पर सियासत , […]

कविता पद्य साहित्य

पेड

पेड़ हूँ मै भौतिकता के हर रुप में , फर्नीचर हो या बर्तन की राख , प्राणवायु कहो या प्राणिन् का आधार , बिन मेरे अधूरी , आपकी है दूनिया , काट रहे है पेड , बढ रही तपन , ढूँढते है छाँव , शहर हो या गाँव , कामयाबी बड़ी है पर पेड़ से […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

बर्बरता

  बर्बरता हर ह्रदय में , बर्बर है हर प्रश्न , निरुत्तर इसाँ भी , हुए यहाँ बर्बर , मरे हथिनी फिर यहाँ , फिर मरे कोई सन्त , कोख लूटते लाज कहाँ , इसाँ भये बर्बर , कुछ मामले खूए गये , बंद लिफाफे खौफ के , जहर देकर ढाये कहर , इसाँ भये […]

कविता पद्य साहित्य

बेटियाँ

  घर का सोलह श्रृंगार है बेटियाँ , धरती पर संस्कार है ये बेटियाँ , मेरे जीवन का उपकार है बेटियाँ , प्रकृति पर रब का वरदान है बेटियाँ , घर की रीत-प्रीत गजल है ये बेटियाँ , जीवन का सुर संगीत है ये बेटियाँ , बञ्जर जमीं पर खिलता बसन्त है बेटियाँ , खूद […]