कविता पद्य साहित्य

बेटियाँ

  घर का सोलह श्रृंगार है बेटियाँ , धरती पर संस्कार है ये बेटियाँ , मेरे जीवन का उपकार है बेटियाँ , प्रकृति पर रब का वरदान है बेटियाँ , घर की रीत-प्रीत गजल है ये बेटियाँ , जीवन का सुर संगीत है ये बेटियाँ , बञ्जर जमीं पर खिलता बसन्त है बेटियाँ , खूद […]

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मै संदिग्ध कोरोना मरीज

    बड़ी अजीब है दूनिया , वर्तमान में दूनिया में कोरोना का सक्रंमण तेज गति से फैल रहा है , जिसने सोच ही बदल दी है अब फोन पर किसी से मिलने का समय माँगे वह देता ही नहीं , बिना बताए चले जाओ तो व्यवहार ऐसा कि वह हमें जानते ही नहीं , […]

कविता पद्य साहित्य

साथ

    साथ देता हूँ दिन-रात , सिसकियाँ भरने में , कभी न पनपने दूँगा , तेरे स्वप्नों को , तेरे दीप जल गए तो मेरी कौन सुनेगा , हर विपरीत दस्तक में साथ देता हूँ दिन-रात , प्यासे तुम मरो , आग में तुम जलो , पैदल तुम थकते रहो , फैसले कहीं होते […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

देश हित

आराधक हम राष्ट्र वाद के , राष्ट्र हित सब काज करें । जब तक जान है शरीर में , राष्ट्र हित आगाज करें ।।   मजदूरों के नियोजन को , करने ढेरों काम तुम्हें । उत्पादन की गुणवत्ता को , करना है आगाज तुम्हें । घर-घर देशी सामग्री को , पहूँचाने का काम तुम्हें । […]

कविता पद्य साहित्य

खुद तैयार रहो

कोरोना को बढने से रोकना है तो सावधानी ही उपाय है तो. हम कहाँ गुनाह कर रहे है , मै तबलीगी जमाती मरकज ही तो कर रहा हूँ मै एक छात्र अपने घर ही तो जा रहा हूंँ , मै प्रवासी दिहाड़ी मजदूर घर ही तो जा रहा हूँ , कोरोना से मरे या भुख […]

कविता पद्य साहित्य

हौसला रखिये

भूल गए है सभ्यता , भूल गए है संस्कृति , कर रहे है सियासत , मर रहा है आमजन , छात्र हो या मजदूर., राज को क्या पड़ी , बस अच्छी हो या बुरी , ठीक हो या भंगार , घर या सडक पर मरें , कर रहे है सियासत , मर रहा है आमजन […]

कविता पद्य साहित्य

बदले जीवन

आओ कुछ रङ्ग बदले , जीवन का ढङ्ग बदले , प्रीत ओर बढे हर दिल , बस कुछ रीत बदलै ।।   टोह लिए वह बैठा है दूर हुआ रस पैंठा है कोरोना बेहाल हुआ सङ्गत ने जो उमेठा है ।।   तीज त्यौहार खुब मने , विवाह बिन भीड मने , दूर नहीं है […]

कविता पद्य साहित्य

डरते नहीं किसी से

  मौन आँखे , जब उगले शोले , पिघल गयी दहशत , कहती है काया , हम डरते नहीं किसी से ।   खौफ का शहर , कोरोना का कहर , आतंकी फसलें बोये , नित हमले करे पाक पर हम डरते नहीं किसी से ।   खोल दी है बाँहे , चहूँ ओर है […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

कितने बदल गये अरमान

देख तेरे संसार की हालत, क्या हो गयी भगवान कि कितने बदल गये अरमान…2… मनमर्ज़ी सब करके अपनी दिखते है इनसान कि कितने बदल गये अरमान….2… कोरोना के काल में भी क्यों बने रहे हैवान कि कितने बदल गये अरमान….2… थरती लूटी , सागर लूटा , लूटा हर दिनमान कि कितने बदल गये अरमान….2… भौतिकता […]

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चिन्ता न करें

ये दुनिया आँकड़ों का खेल है और अभी सारी दुनिया कोरोना की मार झेल रही है सभी देशों के आँकड़े नयूज चैनल दिखा रहे है , बस इन सबको हम कितना गम्भीरता से ले रहे है ये हम पर निर्भर है ,,, आज की रिपोर्ट के अनुसार यह बताया जा रहा है कि 12 दिन […]