लघुकथा

दु:खी संसार 

पत्र साल दो हजार बीस के नाम… समय- मध्य/ नवम्बर /2020 आदरणीया साल 2020 ,              डरते हुए प्रणाम !           तुम प्रसन्न हो या दु:खी हम नहीं जानते, पर हाँ हम सब दुखी हैं ये हमें, तुम्हें बताते हुये खेद हो रहा है ।   […]

लघुकथा

लघुकथा – विकल्प

दीपावली कुछ दिनों बाद आने बाली थी पर अबकी बार मौसम भी कुछ विचित्र सा गर्मी लिए हुए था साथ ही वायु का प्रदुषित होना भी दुविधा का कारण बना हुआ था । वायु प्रदूषण की भयाभयता का अंदाजा लगाते हुए सरकार की मंशा के अनुरूप स्थानीय प्रशासन ने भी पटाखों की दुकान व पटाखे […]

गीत/नवगीत

तोता पिंजरा दाना पानी

तोता पिंजरा दाना पानी सदियों से रही यही कहानी बंधन चंदन या अभिशाप बना जीवन छोटी सी नाप रटे जिह्वा एक ही जाप खुश-नाखुश ना हैरानी तोता पिंजरा दाना पानी सदियों से रही यही कहानी इच्छा मर गई चाव ना रहा नींद विस्मृत ख्वाब ना रहा नियति समझ ताव ना रहा कातर नजरें लगे विरानी […]

गीत/नवगीत

गीत- कुछ कह दें …

अगर तुम साथ दो तो, हम बात कुछ कह दें कदम-दर-कदम चलो मिल, राह कुछ कह दें हमारे दिन हमारी रात और संगदिल इच्छाएं बसा दे प्रेम की नगरी, तो बात कुछ कह दें । अगर तुम साथ दो तो, हम बात कुछ कह दें ।। रहोगे तुम हमसे दूर, जो भर पूर मद में […]

भजन/भावगीत

श्री हनुमान इकतीसा

दोहा :– प्रथम सुमिर श्रीगुरु चरण, ध्याऊं श्री रघुवीर । किंचित  दृष्टि  मात्र से, हरे सकल  भव पीर ।।1।। प्रखर बुद्धि जिन संग में,  जो बल के भंडार । राम  प्रभू   के  दास  का,  वंदन    बारंबार ।।2।। चौपाई :– जय जय जय हनुमत बलधारी । आसुरी  शक्ति    तुमसे    हारी ।।1।। प्रिय श्रीराम […]

गीत/नवगीत

मंदिर बनेगा

श्री राम  का  मंदिर बनेगा हृदय  में अभिमान जगेगा दिशाएं उद्घोषों  से गुंजायेगी ध्वनि जयश्रीराम की आयेंगी सदियों  का  वनवास हटेगा बुरी यादों का  भार  मिटेगा भक्तों  को ये  अच्छा लगेगा दुष्टों को जो सच में  खलेगा बीत  गई अब  काली सदी इठला  रही है  तमसा नदी झुका  सिर फिर  से तनेगा बलिदानों का फल […]

कविता

बूँद बरसा दो

बूँद बरसा दो मन हरसा दो गगन हो मगन धरा सरसा दो गिरी श्रृंगार धरें दिशा टंकार करें सर छुएं मेड़ नदी हुंकार भरें बिखरें हर रंग पुरवा करें तंग दादुर के बोल झींगुर के संग माह सावन का मन भावन का हर हर बम बम वक़्त उच्चारण का — व्यग्र पाण्डे

कविता

कविता – संकेत तो नहीं…

कुछ तो समझ खुदा बने इंसान या यूँहीं करता रहेगा पूजा स्वयं को समझ भगवान ये बीसवां वर्ष तेरे हर्ष का नहीं जागृत स्वप्न के दर्श का नहीं अपने से दूसरे के स्पर्श का नहीं वाइरस का आना लौट करके ना जाना कुछ माना या ना माना बदला हुआ जमाना अब तूफान भी सर उठाने […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : समय की यात्रा आदमी का भ्रम 

महाभारत सीरियल जब आरंभ होने को होता तब एक प्रभावी ध्वनि ध्वनित होती ” मैं समय हूँ ,, अर्थात एक अदृश्य सत्ता जिसे हम भगवान कहते हैं अपने को समय रूप में भी संसार को बतलाना चाहती हैं । ये सब रही अध्यात्म की बातें जिसे श्रेष्ठ बुद्धि संपन्न व्यक्ति ही समझ सकता है सामान्य […]

लघुकथा

लघुकथा – राष्ट्रीय कवि 

यूँ तो कवितापुरम् शहर पुराने समय से साहित्यकारों की भूमि रहा है वर्तमान में भी चार-छ कवि देश में अपनी पहचान बनायें हुए हैं । यद्यपि नयी संतति का रुझान साहित्य के प्रति कुछ कम ही है पर एक नवयुवक मोन्टी को भी कविता लिखने के संस्कार जागे और वह भी आजकल कविता लिखने लगा। […]