जय विजय के अंक

हिन्दी के प्रति

हिन्दी के प्रति ========== हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है।संस्कृत के बाद विश्व की सबसे प्रतिष्ठित भाषा है।वैसे तो पूरे देश में इसका प्रचार प्रसार है।लेकिन राष्ट्रभाषा के रूप मे हिन्दी को जो गौरव मिलना चाहिए, वह हम नहीं दिला सकें है।इसीलिए तो हमें हिन्दी दिवस के अतिरिक्त हिन्दी सप्ताह, पखवाड़ा भी मनाना पड़ रहा है।दुर्भाग्य यह […]

जय विजय के अंक

चाहत-ए-हरियाली

  शहरों में जीने की ठान ली मैंने हां, गमलों में हरियाली पाल ली मैंने, गमले में बलखाती लता गिलोय की गमले में इठलाती कली अनार की…. गमले में पुदीना और बेल पान की तुलसी का पौधा संग छोटा सा देवस्थान भी…. कहीं गुलाब की सुगंध, कहीं खिलती अश्वगंध कहीं कद्दू करेला तो कहीं फूलों […]

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उत्तरांचली के आलेख-संस्मरण

मेरे आलेख और संस्मरण पर एक मात्र पुस्तक “उत्तरांचली के आलेख-संस्मरण” ऑनलाइन हेतु पीडीएफ भेज रहा हूँ। इसे पढ़ने के लिए लिंक को क्लिक करें। Uttranchali–Aalekh — महावीर उत्तरांचली

आत्मकथाएं

पुस्तक “रामभक्त शिव”

लेखक महावीर उत्तरांचली की पुस्तक “रामभक्त शिव” तैयार है। इस पुस्तक में जीवनी व 108 दोहे हैं।   इसका लिंक नीचे दिया जा रहा है। इसे क्लिक करके आप पुस्तक को पढ़ सकते हैं। आपका ही महावीर उत्तरांचली   RAMBHAKT_SHIV

अन्य पुस्तकें ई-बुक

कविता संग्रह- ई. बुक सदाबहार काव्यालय- 2

हमने फिर सदाबहार काव्यालय में प्रकाशन के लिए कविताएं आमंत्रित की थीं, जिसमें जय विजय के लेखकों ने भी अपनी कविताएं भेजी थीं. आज वह सदाबहार काव्यालय- 2 ई.बुक के रूप में प्रकाशित हो गई है. प्रस्तुत है उसका लिंक- ”ई. बुक सदाबहार काव्यालय- 2” का लिंक है-

उपन्यास

गर्ल्स हॉस्टल में रात (उपन्यास)

…….मनोमस्तिष्क में रोने, बिलखने, सिहरने, चिंघाड़ने और दहाड़ने की आवाज कई दिनों से आ रही थी. कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था । अपना संतुलन जवाब दे रहा था. ऐसा था कि मानो कोहराम-सी मच गई थी, मनोमस्तिष्क में…… धाड़-धाड़, साँय-साँय, मार-काट, बम-ब्लास्ट इत्यादि के स्वर यथावत थे. जिंदगी पिरो-सी गई थी माला में– […]

ई-बुक कविता पद्य साहित्य

ऐसा नहीं कि इन को दर्द नही होता

लड़के रोते नही तो क्या उन को दर्द नही होता। होता तो बहुत है पर वो उस को जाहिर नही करते। सिर्फ बेटियां विदा ही नही होती घर से। बेटे भी अकेले विदा हो जाते है घर से। बस उन की विदाई में बारात नही होती। उन की विदाई का अहसास दुनियां को नही होता। […]

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“ढाई कदम”: एक समीक्षा

प्रिय पाठकगण, आपको भलीभांति विदित है कि हम नए-नए लेखकों / कलाकारों से आपका परिचय करवाते रहते हैं. राकेश भाई हमको कैसे जानते हैं, ये तो हमें मालूम नहीं, पर हमारे पास मेल से उनके उपन्यास “ढाई कदम” पर समीक्षा लिखने का स्नेह-सिक्त अनुरोध आया था. हमने उपन्यास पढ़कर उस पर समीक्षा लिखी थी, जो […]

उपन्यास

भूमिका, घाट-84 “रिश्तों का पोस्टमार्टम” .डाॅ शीतल बाजपेई

भूमिका कविता सिंह तथा सौरभ दीक्षित “मानस” की संयुक्त रूप की यह पहली कृति है पर ऐसा बिल्कुल भी नही लगा मुझे,, बल्कि ऐसा लग रहा था कि मैं मंझे हुए लेखकों को पढ़ रही हूँ। आप जब कहानी पढ़ना आरम्भ करेंगे तो विश्वास कीजिये आप स्वयं को पूरी कहानी पढ़ने से रोक नही सकेंगे, […]