जय विजय के अंक धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

हम ईश्वर के उपकारों को जानें और उसके प्रति कृतज्ञ हों

ओ३म् मनुष्य का कर्तव्य होता है कि वह जिससे अपना कोई प्रयोजन सिद्ध करे, उसके उपकारों के बदले में उसके प्रति कृतज्ञता की भावना व्यक्त करे। कृतज्ञ होना मनुष्य का एक श्रेष्ठ गुण होता है। कृतज्ञ न होना अमानवीय होना एवं निन्दित कर्म होता है। यदि दूसरे मनुष्य व ईश्वर हम पर उपकार व सहयोग […]

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सृष्टि की उत्पत्ति रक्षण एवं प्रलय का ज्ञान विज्ञान सम्मत वैदिक सिद्धान्त

ओ३म् हम संसार में रहते हैं और इस सृष्टि का साक्षात् व प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं। हम जानते व मानते हैं कि इस सृष्टि का अस्तित्व सत्य एवं यथार्थ है। हमारी सभी ज्ञान इन्द्रियां हमारे सृष्टि के प्रत्यक्ष एवं यथार्थ होने की पुष्टि करती हैं। हम आंखों से इस सृष्टि को देखते हैं, कानों से […]

जय विजय के अंक

चाहत-ए-हरियाली

  शहरों में जीने की ठान ली मैंने हां, गमलों में हरियाली पाल ली मैंने, गमले में बलखाती लता गिलोय की गमले में इठलाती कली अनार की…. गमले में पुदीना और बेल पान की तुलसी का पौधा संग छोटा सा देवस्थान भी…. कहीं गुलाब की सुगंध, कहीं खिलती अश्वगंध कहीं कद्दू करेला तो कहीं फूलों […]

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उत्तरांचली के आलेख-संस्मरण

मेरे आलेख और संस्मरण पर एक मात्र पुस्तक “उत्तरांचली के आलेख-संस्मरण” ऑनलाइन हेतु पीडीएफ भेज रहा हूँ। इसे पढ़ने के लिए लिंक को क्लिक करें। Uttranchali–Aalekh — महावीर उत्तरांचली

आत्मकथाएं

पुस्तक “रामभक्त शिव”

लेखक महावीर उत्तरांचली की पुस्तक “रामभक्त शिव” तैयार है। इस पुस्तक में जीवनी व 108 दोहे हैं।   इसका लिंक नीचे दिया जा रहा है। इसे क्लिक करके आप पुस्तक को पढ़ सकते हैं। आपका ही महावीर उत्तरांचली   RAMBHAKT_SHIV

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कविता संग्रह- ई. बुक सदाबहार काव्यालय- 2

हमने फिर सदाबहार काव्यालय में प्रकाशन के लिए कविताएं आमंत्रित की थीं, जिसमें जय विजय के लेखकों ने भी अपनी कविताएं भेजी थीं. आज वह सदाबहार काव्यालय- 2 ई.बुक के रूप में प्रकाशित हो गई है. प्रस्तुत है उसका लिंक- ”ई. बुक सदाबहार काव्यालय- 2” का लिंक है-

उपन्यास

गर्ल्स हॉस्टल में रात (उपन्यास)

…….मनोमस्तिष्क में रोने, बिलखने, सिहरने, चिंघाड़ने और दहाड़ने की आवाज कई दिनों से आ रही थी. कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था । अपना संतुलन जवाब दे रहा था. ऐसा था कि मानो कोहराम-सी मच गई थी, मनोमस्तिष्क में…… धाड़-धाड़, साँय-साँय, मार-काट, बम-ब्लास्ट इत्यादि के स्वर यथावत थे. जिंदगी पिरो-सी गई थी माला में– […]

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ऐसा नहीं कि इन को दर्द नही होता

लड़के रोते नही तो क्या उन को दर्द नही होता। होता तो बहुत है पर वो उस को जाहिर नही करते। सिर्फ बेटियां विदा ही नही होती घर से। बेटे भी अकेले विदा हो जाते है घर से। बस उन की विदाई में बारात नही होती। उन की विदाई का अहसास दुनियां को नही होता। […]

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“ढाई कदम”: एक समीक्षा

प्रिय पाठकगण, आपको भलीभांति विदित है कि हम नए-नए लेखकों / कलाकारों से आपका परिचय करवाते रहते हैं. राकेश भाई हमको कैसे जानते हैं, ये तो हमें मालूम नहीं, पर हमारे पास मेल से उनके उपन्यास “ढाई कदम” पर समीक्षा लिखने का स्नेह-सिक्त अनुरोध आया था. हमने उपन्यास पढ़कर उस पर समीक्षा लिखी थी, जो […]