जय विजय के अंक धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

हम ईश्वर के उपकारों को जानें और उसके प्रति कृतज्ञ हों

ओ३म् मनुष्य का कर्तव्य होता है कि वह जिससे अपना कोई प्रयोजन सिद्ध करे, उसके उपकारों के बदले में उसके प्रति कृतज्ञता की भावना व्यक्त करे। कृतज्ञ होना मनुष्य का एक श्रेष्ठ गुण होता है। कृतज्ञ न होना अमानवीय होना एवं निन्दित कर्म होता है। यदि दूसरे मनुष्य व ईश्वर हम पर उपकार व सहयोग […]

जय विजय के अंक

चाहत-ए-हरियाली

  शहरों में जीने की ठान ली मैंने हां, गमलों में हरियाली पाल ली मैंने, गमले में बलखाती लता गिलोय की गमले में इठलाती कली अनार की…. गमले में पुदीना और बेल पान की तुलसी का पौधा संग छोटा सा देवस्थान भी…. कहीं गुलाब की सुगंध, कहीं खिलती अश्वगंध कहीं कद्दू करेला तो कहीं फूलों […]

कविता जय विजय के अंक

दिल तोड़ कर चली गई

दिल तोड़कर चली गई यह कैसी मोहब्बत थी दिल तोड़ कर चली गई, हम रह गए अकेले वह छोड़ कर चली गई। वादा किया था उसने ना छोड़कर मैं जाऊंगी, गर छोड़कर गई तो फिर लौट कर मैं आऊंगी। जब थी पड़ी जरूरत मुंह मोड़ कर चली गई, हम रह गए अकेले वो छोड़ कर […]