जय विजय के अंक

कोरोना के बढ़ते प्रभाव, आपदा या अवसर

कोरोना के बढ़ते प्रभाव, आपदा या अवसर   दोस्तों, आज हम सभी लोग जानते हैं कि इस समय हमारा देश कोरोना की तीसरी लहर में पहुंच रहा है। जिसके चलते देश का हर नागरिक परेशान हो रहा है । जहांँ इस समय हमें एक साथ खड़े होकर इस समस्या का समाधान खोजना चाहिए, वही हम […]

जय विजय के अंक

जल सरंक्षण हमारा दायित्व ही नही, हमारा कर्तव्य भी हैं।

    जल सरंक्षण हमारा दायित्व ही नही, हमारा कर्तव्य भी हैं।   दोस्तों, हम हमेशा से सुनते आये हैं “जल ही जीवन है”। जल के बिना जीवन की कल्पना भी मुश्किल है जीवन के सभी कार्यों का निष्पादन करने के लिये जल की आवश्यकता है। कवि एवं सन्त रहीम दास जी ने सदियों पहले […]

जय विजय के अंक

शीर्षक :- प्यार की मर्यादा

कुछ चेहरों को कभी भुलाया नहीं जाता गैर तो गैर हैं उन्हें कभी पाया नहीं जाता प्यार की मर्यादाओं में जो बंध जाते हैं तो बंदिशों की सीमाओं को लांँघा नहीं जाता मरता तो रोज है खयालों में हर आदमी मौन होठों में दर्द कभी छुपाया नहीं जाता प्यार तो समर्पण , त्याग की एक […]

कविता जय विजय के अंक

युवा मांगे जवाब अब

भर्ती निकली तो इंतिहान नहीं परीक्षा हो तो परिणाम नहीं परीक्षा हो तो जॉइनिंग नहीं आखिर क्यों युवाओं का सम्मान नहीं? युवा मांगे जवाब अब…… बस करो मजाक अब युवा मांगे हिसाब अब बात करो, संवाद करो दो हमारे प्रश्नों का जवाब अब युवा मांगे जवाब अब……. क्यों हर भर्ती पर पंचवर्षीय योजना है? किस […]

कविता जय विजय के अंक

सशंकित-श्रवण

जिंदगी में कभी -कभी ऐसा दौर भी आता है दिल का चैन,सुकून ,करार कोई और चुरा ले जाता है !! मौखिक विष से ज्यादा कर्ण विष घातक होता है जीवन का बड़ा सा हिस्सा श्रवण आधारित होता है ना जाने कब कौन आकर शक का बीज बो दे विषम और उसकी बातों में आकर होश-ओ […]

जय विजय के अंक धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

हम ईश्वर के उपकारों को जानें और उसके प्रति कृतज्ञ हों

ओ३म् मनुष्य का कर्तव्य होता है कि वह जिससे अपना कोई प्रयोजन सिद्ध करे, उसके उपकारों के बदले में उसके प्रति कृतज्ञता की भावना व्यक्त करे। कृतज्ञ होना मनुष्य का एक श्रेष्ठ गुण होता है। कृतज्ञ न होना अमानवीय होना एवं निन्दित कर्म होता है। यदि दूसरे मनुष्य व ईश्वर हम पर उपकार व सहयोग […]

जय विजय के अंक

चाहत-ए-हरियाली

  शहरों में जीने की ठान ली मैंने हां, गमलों में हरियाली पाल ली मैंने, गमले में बलखाती लता गिलोय की गमले में इठलाती कली अनार की…. गमले में पुदीना और बेल पान की तुलसी का पौधा संग छोटा सा देवस्थान भी…. कहीं गुलाब की सुगंध, कहीं खिलती अश्वगंध कहीं कद्दू करेला तो कहीं फूलों […]

कविता जय विजय के अंक

दिल तोड़ कर चली गई

दिल तोड़कर चली गई यह कैसी मोहब्बत थी दिल तोड़ कर चली गई, हम रह गए अकेले वह छोड़ कर चली गई। वादा किया था उसने ना छोड़कर मैं जाऊंगी, गर छोड़कर गई तो फिर लौट कर मैं आऊंगी। जब थी पड़ी जरूरत मुंह मोड़ कर चली गई, हम रह गए अकेले वो छोड़ कर […]