कविता जय विजय के अंक

दिल तोड़ कर चली गई

दिल तोड़कर चली गई यह कैसी मोहब्बत थी दिल तोड़ कर चली गई, हम रह गए अकेले वह छोड़ कर चली गई। वादा किया था उसने ना छोड़कर मैं जाऊंगी, गर छोड़कर गई तो फिर लौट कर मैं आऊंगी। जब थी पड़ी जरूरत मुंह मोड़ कर चली गई, हम रह गए अकेले वो छोड़ कर […]