Category : जय विजय के अंक

  • अटल कहानी दे गये

    अटल कहानी दे गये

    रोता अंबर भी आज व्यथित हो धरती पर छाया सन्नाटा कैसा। जो थे अटल स्वयं एक रक्षक। सोते हैं आज धरती की गोदी में। होनहार थे जन्म से ही वो शिक्षा में भी उन्नत थे। सेवा...

  • भारत निर्माण

    भारत निर्माण

    जिस दिन भ्रष्ट,नीच दुष्कर्मी,फाँसी पर लटकाये जाएंगे । ठीक  उसी  दिन  भारत  मे फिर  से अच्छे दिन आएंगे । आरक्षण  दीनों  को होगा,बाकी प्रतिस्पर्धा एक समान । उसी दिवस  होगा  भारत का,मित्रों सच नूतन निर्मान ।।...




  • मेरे मुक्तक

    मेरे मुक्तक

    श्रृंगार लिए कंचन सी’ काया वो,उतर आई नजारों में । करें  वो  बात  बिन  बोले,अकेले  में इशारो में । बिना देखे कही पर भी,मिले ना चैन अब मुझको, गगन के चाँद जैसी वो,हसीं  लगती हजारों मे...