आत्मकथा

खुद में ‘रोल मॉडल’ हूँ मैं !

“देश के लिए दौड़े तो किसी ने ना पूछा ! अब बागी बन गए, तो इही नाम जप रहे हैं, पान सिंह, पान सिंह !“ वहीं फिर- “जरूरी नहीं  कि हर बात  मतलब की हो ! या हर बात की  मतलब ही हो !” मैं- सदानंद पॉल। रोल मॉडल की बात जब आती है, तो […]

आत्मकथा

कैसा रहा साल 2021-आत्मकथा

संघर्ष एवं कष्ट दायक रहा साल 2021 मेरे लिए साथ ही जीवन में उतार चढाव तो लगे ही रहते हैं, बात करते हैं साल 2021की जो निम्न है – जनवरी- साल के पहले महीने में आई० सी० एम० आर०,आर० ०एम० आर० सी० से सम्बद्ध ऐन० आई० आर० टी० के टीबी के प्रोजेक्ट में स्वास्थ सहायक […]

आत्मकथा

मेरी जीवन कहानी से

सुबह चार बजे उठ गए, नहा धो कर कपड़े पहने, कुलवंत ने चाय बनाई और पी कर कमरे से बाहर आ गए। अभी अँधेरा ही था और कुछ कुछ ठंड थी लेकिन मौसम सुहावना था। सभी दुकाने अभी बन्द थी। यहां से कोच चलनी थी, हम ने पिछले दिन ही देख लिया था, इस लिए […]

आत्मकथा कथा साहित्य

हम सब अपने माता-पिता जैसे ही तो हैं

एक दिन,  मैं और मेरा आठ  वर्षीय बेटा शतरंज खेल रहे थे, तब उसने पूछा कि मुझे ये खेल किसने सिखाया । मैंने कहा “मेरे पिता ने” और  मैंने बताया कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के शतरंज के चैंपियन को भी हराया था। उस समय अखबार में उनका नाम भी छपा था। पिताजी ने मुझे और […]

आत्मकथा

इस फानी दुनिया में अपनी जज्बात रोक नहीं सका !

अपनी बात : अपनी जज्बात –‘गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ और ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ सहित शताधिक वर्ल्ड रिकॉर्ड्स लिए नाम दर्ज करानेवाले बिहार के एकमात्र इंटेलेक्चुअल पर्सन; –बिहार मानव शृंखला (Bihar Human Chain 2018) के लिए 5,42,934 संदेशों का एक व्यक्ति द्वारा प्रेषण/संकलन पर ‘लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स’ में नाम दर्ज; –लगातार 14 बार पद्म अवार्ड […]

आत्मकथा कथा साहित्य

असली कोरोना वारियर्स (लघुकथा)

एक-दूसरे से वे दोनों कई वर्षों से प्रेम करते थे । दोनों के बालिग हुए भी कई बरस हो गए थे। इसबार की होली में दोनों खूब होली खेले थे, परंतु शादी से पहले दोनों ने ही शारीरिक-संबंध को ‘ना’ कहे थे। दोनों प्रेम के प्रति बेहद अनुशासित थे। ××× कोरोना कहर के कारण देश […]

आत्मकथा

सारिका भाटिया की कहानी – 7

(26) 2014 में पापा का निधन और मेरे सुसराल की परेशानी 2013 में मेरी शादी के बाद पापा बीमार हो गए थे। मेरी शादी के बाद ससुराल में सब ठीक चल रहा था। होली के दिन 17 मार्च को पापा का निधन हो गया था। मेरी मां उदास थी। घर का माहौल भी ठीक नहीं […]

आत्मकथा

सारिका भाटिया की कहानी – 6

(22) 2010 में पहली नौकरी अभी मेरी तलाक की प्रकिया चल रही थी। मैं बहुत गुमसुम थी, कुछ समझ नहीं आ रहा था। मुझे पापा और मेरे छोटे भाई ने संभाला। जगह जगह नौकरी के लिए इंटरव्यू भी दिया था। पर मेरी विकलांगता के कारण सबने मना कर दिया। मेरे पापा मुझसे एक बात बोलते […]

आत्मकथा संस्मरण

क्रांतिकारी लेखक मित्रो को मेरा सलाम

साहित्यिक मासिक पत्रिका हंस, मार्च 2016 में प्रकाशित ‘आत्मकथ्य’ (अभियान की छाया / लेखक- सांत्वना निगम) के बहाने मैं भी लिखने बैठ गया…मैंने अपनी ज़िन्दगी के कई-कई वसंत-पतझड़ ‘पटना’ में बिताये हैं, लगभग 2 दशक की अवधि कतई कम नहीं होती ! पटना-प्रवास के दौरान मेरे कई साहित्यिक मित्र हुए , जिनमें अभी दो के […]

आत्मकथा

सारिका भाटिया की कहानी – 5

(18) छोटे भाई का हौसला और पापा की हिम्मत जब 2004 सगाई टुटने से बहुत उदास थी। अभी सिर्फ एम.ए. किया था। खाली बैठी हुई थी। एक पापा मेरे पास आये और बोले तू इस दुनिया को जरूर हरा देगी। मुझे उनकी बात समझ नहीं आई। उन्होंने मुझे कहा तुम यूपीएससी की परीक्षा दो। मुझे […]