Category : आत्मकथा



  • आत्म-कथ्य : आमने-सामने

    आत्म-कथ्य : आमने-सामने

    26 दिसम्बर, 1947 को जन्मा, बाबूजी (पिता) पोस्टमास्टर थे, 5 भाई-बहनों में मैं सबसे बड़ा हूँ। मेरे दादाजी झालरापाटन सिटी (जिला-झालावाड़, राज.) में एक फर्म में रोकड़िया (केशियर) थे। दादाजी की छत्रछाया मुझे 1963 तक मिली।...