आत्मकथा

आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 14)

एच.ए.एल. में एक उच्च अधिकारी भी स्वयंसेवक थे। उनका नाम था श्री अरुणाकर मिश्र। वे बहुत योग्य थे और कम उम्र में ही मुख्य प्रबंधक जैसे ऊँचे पद पर पहुँच गये थे। जब मैं एच.ए.एल. में आया था तब वे वरिष्ठ प्रबंधक थे। वे प्रारम्भ से ही स्वयंसेवक थे और एक शाखा के मुख्य शिक्षक […]

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आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 13)

ये थे मेरे एच.ए.एल. के कम्प्यूटर विभाग के संगी-साथी। विभाग के बाहर के भी अनेक सज्जनों से मेरा घनिष्ट परिचय था। उन सबकी सूची तो बहुत लम्बी हो जाएगी और सम्भव है कि कई नाम मैं भूल भी जाऊँ। इसलिए उनके नामों का उल्लेख नहीं करूँगा। इसके लिए उनसे क्षमा चाहता हूँ। लेकिन अपने आगरा […]

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आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 12)

हमारे सेक्शन में एक मात्र मुसलमान आॅपरेटर थे श्री सैयद अब्दुल हसन रिजवी। वे शिया थे और किसी नबाबी खानदान से थे। देखने में बहुत सुन्दर लगते थे। उनकी पत्नी हिन्दू महिलाओं की तरह अपने माथे पर बिन्दी लगाती थीं और माँग भी भरती थीं। वे संजय नागर के पिताजी के आॅफिस में सेवा करती […]

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आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 11)

दूसरे आॅपरेटर जिनके साथ मेरी बहुत घनिष्टता थी वे थे सरदार कुलदीप सिंह। वे बहुत सज्जन और हँसमुख व्यक्ति थे। उनमें कई प्रतिभाएँ थीं। वे एच.ए.एल. के अपने काम में तो माहिर थे ही, इसके अलावा बहुत अच्छे पेशेवर फोटोग्राफर थे। वे विवाह-शादियों तथा अन्य कार्यक्रमों में फोटोग्राफी किया करते थे और अच्छी आमदनी कर […]

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आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 10)

हमारा नया और बड़ा कम्प्यूटर बरोज कम्पनी का था। उसकी देखरेख का ठेका सीएमसी लि. नामक कम्पनी को दिया गया था। उस कम्पनी के एक हार्डवेयर इंजीनियर हमारे सेक्शन में स्थायी रूप से पदस्थ थे। उनका नाम था श्री बाला सुब्रह्मण्यम्। उनको बोलचाल में सब ‘बालू’ कहते थे, लेकिन मैं उन्हें पीछे से ‘भालू’ कहता […]

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आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 9)

हमारे सेक्शन के भवन में कोरबा डिवीजन (जिला अमेठी) के जो दो अधिकारी बैठते थे वे थे श्री अजय अग्रवाल और श्री राजीव श्रीवास्तव। दोनों बहुत मस्तमौला आदमी थे। चुटकुले सुनाने में माहिर थे। खास तौर से अजय अग्रवाल लगभग हर हफ्ते या 15 दिन मेंएक धाँसू चुटकुला लाते थे (जाने कहाँ से) और अपनी […]

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आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 8)

कु. किरण मालती अखौरी हमारे विभाग में एक मात्र महिला अधिकारी थीं। वे बिहार की रहने वाली थीं। उनके पिताजी डाक्टर थे और माँ केरल की थीं, जिनको वह ‘अम्मा’ कहती थी। किरण देखने में बहुत सुन्दर लगती थीं। उनकी आँखें बहुत सुन्दर थीं। उनकी आवाज भी काफी मीठी थी (जैसा कि दूसरे लोग बताते […]

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आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 7)

श्री सैयद शकील परवेज़ चिश्ती (संक्षेप में एसएसपी चिश्ती) बहुत सज्जन व्यक्ति हैं। देखने में कुछ खास नहीं, लेकिन दिल के बहुत अच्छे हैं। मेरी काफी मदद किया करते थे। वे धीरे-धीरे उन्नति करते हुए वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर पहुँच चुके हैं। हमने लखनऊ में साथ-साथ मकान खरीदे थे और उनका घर हमारे ही […]

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आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 6)

एच.ए.एल. में मेरे समूह के प्रमुख थे श्री राजीव किशोर। आप यों तो ‘अग्रवाल’ थे, परन्तु जातिवाद में विश्वास नहीं करते थे। उन्होंने विवाह भी अन्तर्जातीय किया था। उनकी पत्नी श्रीमती सुजाता शर्मा या पाण्डेय, जो बाद में अपना नाम ‘सुजाता किशोर’ लिखने लगी थीं, एच.ए.एल. में ही एक अन्य विभाग में ग्रेड-2 अधिकारी थीं। […]

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आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 5)

एच.ए.एल. में अपनी सेवा प्रारम्भ करने के तीन-चार माह बाद ही मेरी नौकरी खतरे में पड़ गयी। कारण बने ज.ने.वि. में हमारे खिलाफ लगाये गये झूठे केस। सरकारी नौकरी शुरू करने वालों को अन्य सूचनाओं के साथ ही अपने ऊपर लगे हुए सभी केसों की भी जानकारी देनी पड़ती है और उस सूचना का पुलिस […]