आत्मकथा कथा साहित्य

रोल मॉडल : अपना ही पीठ थपथपा लेता हूँ !

रोल मॉडल : खुद के पीठ को थपथपा लेता हूँ ! लगातार 14 बार पद्म अवार्ड के लिए नामांकित; एकबार ‘रेमन मैग्सेसे अवार्ड’ के लिए नामांकित; अमेरिकन मैथेमैटिकल सोसाइटी से गणित-शोध प्रशंसित; कविता के क्षेत्र में नेशनल अवार्ड; ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ के रूप में नाम दर्ज; 8 बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स […]

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वजह

आज सुबह-सुबह वेलेंटाईन डे के दिन वैलेंटाइन क्लिक प्रतियोगिता का नतीजा आया था, सर्वश्रेष्ठ वैलेंटाइन क्लिक के लिए सुहास को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया था. सुहास की आंखों के सामने अतीत की लड़ियां एक एक कर खुल रही थीं. ”एक प्यारा-सा दिल जो कभी नफरत नहीं करता, एक प्यारी-सी मुस्कान जो कभी फीकी नहीं पड़ती, […]

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डांसिंग फ्लोर की अभिलाषा

डांसिंग फ्लोर की अभिलाषा ‘कितनी बेरहमी से कुचला है, जगह जगह चोट लगी है, कई जगह से फट गया है’ पट्टी लगाते लगाते मोहन कह रहा था। ‘तुम्हें तनिक भी दर्द नहीं होता, इतनी पीड़ा, पर कैसे झेल लेते हो इतना सब कुछ’ मोहन ने डांसिंग फ्लोर पर पट्टी लगाते हुए पूछा। डांसिंग फ्लोर मोहन […]

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गुरमैल भाई: 11 ई.बुक्स की बधाई

आज गुरमैल भाई की भावभीनी मेल आई. लिखा था- लीला बहिन , बुक ९ के लिए आप को बहुत बहुत बधाई हो। आप की मेहनत रंग लाई है। घुमा-घुमू कर बात नहीं लिखूंगा, यह सच है कि जिंदगी में मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि कभी मेरी भी ईबुक्स बनेगी जब कि बहुत […]

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आत्म-कथ्य : आमने-सामने

26 दिसम्बर, 1947 को जन्मा, बाबूजी (पिता) पोस्टमास्टर थे, 5 भाई-बहनों में मैं सबसे बड़ा हूँ। मेरे दादाजी झालरापाटन सिटी (जिला-झालावाड़, राज.) में एक फर्म में रोकड़िया (केशियर) थे। दादाजी की छत्रछाया मुझे 1963 तक मिली। मेरी शिक्षा कोटा झालावाड़ क्षेत्र के अनेक स्कूलों में होती रही, क्योंकि बाबूजी का स्थानांतरण होता रहता था। लाखेरी, […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 55- अन्तिम)

हाउस बोट में हमारी रात ठीक से कट गयी हालांकि सारी व्यवस्था के बावजूद मच्छरों ने कुछ परेशान किया और जनरेटर की आवाज भी सोने नहीं दे रही थी। प्रातःकाल हम दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर और स्नान-जलपान करके लौटने के लिए तैयार हो गये। यहां हाउसबोट चलाने वाले नाविक भोजन बनाने में भी निपुण […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 54)

अगले दिन हमने कोच्चि शहर के दर्शनीय स्थान देखे। एक दो मंदिर, एक चर्च और समुद्र जिसमें पानी के छोटे जहाज खड़े थे। वहां मछलियां पकड़ने का कार्य व्यापक पैमाने पर होता है। कोच्चि एक ऐतिहासिक शहर है जिसे पहले कोचीन कहा जाता था। वहां का बंदरगाह विश्व प्रसिद्ध है जिससे पहले बहुत व्यापार होता […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 53)

अपनी दक्षिण भारत की यात्रा में पहले हम लखनऊ से दिल्ली गये, फिर वहाँ से मद्रास। मद्रास में हमें एक होटल में एक रात रुकना था और अगली सुबह ही लक्षद्वीप के अगत्ती कस्बे की उड़ान पकड़नी थी। यह उड़ान इंडियन एयरलाइंस की थी। जब हम अगली सुबह मद्रास हवाई अड्डे पहुँचे, तो पता चला […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 52)

अनिता की पुस्तक का कार्य लगभग 28 साल बाद मिली अपनी पत्र-मित्र श्रीमती अनिता अग्रवाल के बारे में मैं ऊपर लिख चुका हूँ। कभी-कभी हम नेट पर चैटिंग किया करते थे। एक दिन बात करते हुए उसने बताया कि जुलाई 2011 में उसके जन्मदिन की 50वीं वर्षगाँठ आ रही है और इस अवसर पर वह […]