आत्मकथा

आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 51)

परिवार का लखनऊ आगमन मार्च 2011 के तीसरे सप्ताह में मैं पंचकूला पहुँच गया। श्रीमती जी ने एक पैकर्स एंड मूवर्स से पहले ही बात की हुई थी। उसी से हमने सामान पैक कराया और सामान भेजकर रात की गाड़ी से चलकर अगले ही दिन लखनऊ पहुँच गये। दोपहर बाद तक हमारा सामान भी आ […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 50)

पुरानी पत्र-मित्रों से सम्पर्क जब दीपांक अपने प्रशिक्षण पर पंचकूला से मैसूर चला गया और मैं लखनऊ वापिस आने की तैयारी में था, तभी मुझे अपनी दो घनिष्टतम पत्र-मित्रों का ई-मेल प्राप्त हुआ। वे हैं श्रीमती अनिता अग्रवाल और श्रीमती नफ़ीसा नाज़। इनके बारे में मैं अपनी आत्मकथा के पहले भाग ‘मुर्गे की तीसरी टाँग’ […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 49)

बाल निकेतन का हाल  महामना मालवीय मिशन द्वारा संचालित किये जाने वाले महामना बाल निकेतन में उस समय 16 विद्यार्थी रह रहे थे। मैंने उनकी शिक्षा की जानकारी ली, तो पता चला कि कई बच्चे मासिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं में या तो फेल हो गये हैं या बहुत कम अंक आये हैं। विशेष रूप से […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 48)

संघ कार्य मैं चाहे देश के किसी भी भाग में रहूँ, संघ के कार्यकर्ताओं के सम्पर्क में सबसे पहले आ जाता हूँ। लखनऊ तो मेरा पुराना कार्यक्षेत्र रहा है, इसलिए अनेक स्वयंसेवक बंधु मेरे पूर्व परिचित हैं। विश्व संवाद केन्द्र, जहाँ मैं ठहरा था, लखनऊ में संघ के चार प्रमुख केन्द्रों में से एक है। […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 47)

लखनऊ में मैं 8 मार्च 2010 को प्रातःकाल ही लखनऊ आ गया और निर्धारित समय पर अपने कार्यालय में भी उपस्थिति दे दी। मेरे निवास की व्यवस्था विश्व संवाद केन्द्र में हुई थी। वहाँ के पिछले प्रमुख श्री राजेन्द्र जी सक्सेना मेरे घनिष्ट मित्र हैं। वे उस समय गोरखपुर में थे और अभी वाराणसी में […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 46)

दीपावली समारोह श्रीमती जी के आॅपरेशन के बाद जो दीपावली आयी, वह हमने पंचकूला में ही मनाना तय किया। सूरत से मेरे बड़े साढ़ू श्री हरिओम जी अग्रवाल अपनी पत्नी श्रीमती सुमन और बड़े पुत्र मोनू के साथ दीपावली पर पंचकूला आ गये। उनके साथ हमारा त्यौहार अच्छा मन गया। उनका छोटा पुत्र ईशान्त (ईशू) […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 45)

बांगिया जी का स्थानांतरण हरिद्वार शिविर में जाने से कुछ दिन पहले हमारे बैंक में बड़े पैमाने पर उच्च अधिकारियों के स्थानांतरण हो रहे थे। लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन एक सूची आ जाती थी, जिनमें स्केल 4 और 5 के उन अधिकारियों के नाम होते थे, जिनका स्थानांतरण किया जाता था। जब भी ऐसी सूची […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 44)

कुल्लू-मनाली भ्रमण (जारी) फिर हम मणिकर्ण की ओर चले। यह पार्वती नदी के किनारे है। पार्वती नदी नीचे आकर व्यास नदी में मिल जाती है। रास्ता बहुत सँकरा और खतरनाक भी है। बीच-बीच में कई अच्छे अर्थात् विकसित गाँव तथा कस्बे भी मिले। शाम को 5-6 बजे हम मणिकर्ण पहुँच गये। वहाँ एक बड़ा गुरुद्वारा […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 43)

कुल्लू-मनाली भ्रमण (जारी..) दूसरे दिन हम मनाली के स्थानीय दर्शनीय स्थलों को देखने गये। मुख्य रूप से हिडिम्बा देवी का मंदिर देखा। अच्छा लगा। यह भीम की पत्नी हिडिम्बा की याद में बनाया गया है, जिसको देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है। वहाँ से हमें मनु महाराज के मन्दिर में जाना था, जो काफी […]

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आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 42)

‘कपिल’ को पुनः प्रेम-रोग मैं अपनी ससुराल में एक भतीजे ‘कपिल’ के प्रेम-रोग के बारे में पीछे लिख चुका हूँ। वह अपनी महरी के चक्कर में पड़ गया था, जिससे बड़ी मुश्किल से मैंने निकाला। अब वह ब्रश बनाने की एक फैक्टरी चलाता है। प्रारम्भ में जहाँ उसकी फैक्टरी लगी थी, उसी मोहल्ले में सामने […]