Category : बोधकथा

  • कहानी : वृद्ध पिता

    कहानी : वृद्ध पिता

    एक बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए एक अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया। रेस्टॉरेंट में बैठे दूसरे खाना खा रहे लोग वृद्ध को...

  • जैसी करनी वैसी भरनी

    जैसी करनी वैसी भरनी

    एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी.. वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती...

  • प्रेम : एक अनकहा अहसास

    प्रेम : एक अनकहा अहसास

    भरी दोपहरी में टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों पर वह चला जा रहा था…सूर्य की तीखी किरणें उसके शरीर को बेधती जा रही थी…उसका विश्रांत-क्लांत मन छाया की तलाश करने लगा…जहाँ..वह दो पल ठहर विश्राम कर ले…और…फिर अपने गंतव्य...



  • बोधकथा : कौवे

    बोधकथा : कौवे

    एक समय की बात है सयाने कौवों की बस्ती में खलबली मच गयी , हुआ यूँ की उन्हीं सा दिखने वाला कौवों की बस्ती का सरपंच बन गया और उसने कौवों की नकेल कसनी शुरू करदी...

  • पत्थर की मूरत

    पत्थर की मूरत

    कमल एक मेधावी छात्र था । छमाही इम्तिहान के नतीजे घोषित हो चुके थे । कमल को सत्तर प्रतिशत अंक मिले थे । अपने इस प्रदर्शन से वह स्वयं ही काफी निराश था । लेकिन वह...


  • स्वर्ग का टिकट

    स्वर्ग का टिकट

    शेठ धनीराम तीर्थयात्रा पर निकले । कुछ आवश्यक सामान व एक हजार अशर्फियाँ थैले में डाल कर साथ ले गए थे । रात्रि विश्राम के लिए एक धर्मशाला में रुके । वहीँ उनकी मुलाकात पड़ोस के...