Category : बोधकथा

  • प्रेम : एक अनकहा अहसास

    प्रेम : एक अनकहा अहसास

    भरी दोपहरी में टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों पर वह चला जा रहा था…सूर्य की तीखी किरणें उसके शरीर को बेधती जा रही थी…उसका विश्रांत-क्लांत मन छाया की तलाश करने लगा…जहाँ..वह दो पल ठहर विश्राम कर ले…और…फिर अपने गंतव्य...



  • बोधकथा : कौवे

    बोधकथा : कौवे

    एक समय की बात है सयाने कौवों की बस्ती में खलबली मच गयी , हुआ यूँ की उन्हीं सा दिखने वाला कौवों की बस्ती का सरपंच बन गया और उसने कौवों की नकेल कसनी शुरू करदी...

  • पत्थर की मूरत

    पत्थर की मूरत

    कमल एक मेधावी छात्र था । छमाही इम्तिहान के नतीजे घोषित हो चुके थे । कमल को सत्तर प्रतिशत अंक मिले थे । अपने इस प्रदर्शन से वह स्वयं ही काफी निराश था । लेकिन वह...


  • स्वर्ग का टिकट

    स्वर्ग का टिकट

    शेठ धनीराम तीर्थयात्रा पर निकले । कुछ आवश्यक सामान व एक हजार अशर्फियाँ थैले में डाल कर साथ ले गए थे । रात्रि विश्राम के लिए एक धर्मशाला में रुके । वहीँ उनकी मुलाकात पड़ोस के...


  • अनुपम आनंद का अनुभव

    अनुपम आनंद का अनुभव

    हम अपने लिए तो बहुत कुछ व्यय करके अपनी ज़रूरतें पूरी करते हैं, लेकिन उसमें हमें शायद ऐसे अनुपम आनंद का अनुभव न होता हो, जैसा, इन बच्चों को हुआ होगा. अनिता की मां हाल ही...

  • बोधकथा : हीरे की परख

    बोधकथा : हीरे की परख

    एक राजमहल में कामवाली और उसका बेटा काम करते थे. एक दिन राजमहल में कामवाली के बेटे को हीरा मिलता है. वो माँ को बताता है. कामवाली होशियारी से वो हीरा बाहर फेककर कहती है ये कांच है हीरा नहीं….. कामवाली घर...