बोधकथा

भगवान का घर

  वैकुंठ लोक में भगवान श्री राम कुछ चिंतित मुद्रा में चहलकदमी कर रहे हैं । बगल में ही खड़े भ्राता लक्ष्मण व माता सीता उनसे कई बार उनकी चिंता का कारण पूछ चुके हैं लेकिन भगवान श्री राम उनकी तरफ कोई विशेष ध्यान दिए बिना सिर झुकाए चिंता में डूबे बस चहलकदमी किये जा […]

बोधकथा

कर्मयोगी दादाजी

मेरे दादाजी सत्संगी जी जन्मजात शाकाहारी, आदर्श कर्मयोगी और 1942 अगस्त क्रान्ति के अमरसेनानी थे. ध्यान और योग के अध्येता सहित जीवनपर्यंत सन्तमत सत्संग और बिहार, झारखंड, नेपाल के लोगों के अन्तेवासी संत महर्षि मेंहीं के विचारों और शाकाहार के वरेण्य प्रचारक रहे. जन्म बंगाल के पुरैनिया जिला, वर्तमान में बिहार के कटिहार जिला के […]

बोधकथा

वैर का अंत वैर से नहीं

डॉ. राधाकृष्णन विश्व पर्यटक थे । इनकी यात्राएं धर्म और संस्कृति को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र तथा विश्व के संत-समाज में भारत का सम्मान बढ़ाने के लिए थी। स्तालिन रूस के ऐसे व्यक्ति थे, जो धर्म और आध्यात्मिकता से परे भौतिकवाद पर विश्वास करते थे, लेकिन दूसरी मुलाकात में जब डॉ. राधाकृष्णन ने उनसे कहा- “भारत […]

बोधकथा

असली शिक्षक

….तो आप उसे शिक्षक किस मुँह से कह रहे हैं ? असली शिक्षक आप हैं आप ही बेहतर तरीके से अपने बच्चे का भविष्य गढ़ सकते हैं ! जैसा कि आपने अपना भविष्य गढ़ा है ! रही बात, शिक्षकों के ‘नेता’ बनने की ! तो क्या सिर्फ MP, MLA, MLC ही नेता है ? सही […]

बोधकथा

रियल स्टोरी

भारतरत्न और अभूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साहब की आत्मकथा की ओर बरबस आकृष्ट होता चला जाता हूँ, जो वैमानिकी इंजिनियरिंग का स्नातक डिग्री लेने के बाद उनके सामने भविष्य संवारने व घर का आर्थिक संकट दूर करने के लिए दो विकल्प थे और दोनों के साक्षात्कार के लिए कलाम साहब को उत्तर भारत […]

बोधकथा

पति पर्व !

कोई भी आस्था स्वार्थी नहीं हो सकता ! हम देश की संस्कृति की बात करते हैं, किन्तु भारतीय संविधान अंतर्गत ‘कर्त्तव्य’ में नव सृजन, अन्वेषण व वैज्ञानिक प्रगति की बात लिखा है, नील आर्मस्ट्रॉन्ग व चंद्रयान-2 के बाद तो ‘चाँद’ को निहार कर किस ‘विज्ञान’ का उन्नयन कर रहे हैं, जब हम जान रहे हैं […]

बोधकथा

अतीत में सावन

मनिहारी में 2017 का रोजनामचा लिए…. कटिहार की ओर से आये टेम्पो को मनिहारी पहुँचने के 2.5 कि.मी. पहले ही जबरिया खाली कराते देखा, वैसे यात्री जो काँवरिया नहीं हैं, उसे भाड़ा भी देने पड़े और मनिहारी के लिए कड़ी धूप में 2.5 कि.मी. पैदल चलना पड़ा । स्थानीय प्रशासन को काँवरियों व श्रावणी भक्तों […]

बोधकथा

राजनीतिक मार्त्तण्ड

अटल सरकार ने जेपी को और मोदी सरकार ने नानाजी देशमुख को ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किये, दोनों को मरणोपरांत । अब डॉ. लोहिया को भारतरत्न से विभूषित किये जाने की बारी है। जहाँ जेपी ने सम्पूर्ण क्रांति का विगुल फूँक प्रियदर्शिनी इंदु गांधी की चूलें हिला कर रख दी, तो वहीं राममनोहर लोहिया भी इंदु […]

बोधकथा

बारिश में नहाने से बहते आँसू का पता नहीं !

‘मेरा नाम जोकर’ का जोकर की भूमिका में राज कपूर ने बिल्कुल ही चार्ली को जिया है। मेरा नाम जोकर में राजू की माँ मर जाती है और मृतका की देह घर पर पड़ी है, बावजूद वे सर्कस में लोगों को अपने अभिनय का छाप छोड़ रहे होते हैं। राज कपूर के पोते रणवीर कपूर […]

बोधकथा

बौद्धिक टॉनिक

लॉकडाउन में काफी लोग विचलित रहे, क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग और फिर फिजिकल डिस्टेंसिंग से घर के भी सभी सदस्य अलग-थलग रहे, ऐसे में सिर्फ एक व्यक्ति को लेकर जो तात्कालिक खेल दिखाई पड़ा, वह सुडोकु पहेली को हल करना ही है, जो कि बौद्धिक टॉनिक है और खिलाड़ी के स्वयं के अंदर गणित ज्ञान का […]