बोधकथा

मिस छिल्लर

हरियाणा से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान शुरू हुई थी और सोनीपत, हरियाणा की 20 वर्षीया मेडिकल छात्रा मानुषी छिल्लर मिस हरियाणा, मिस इंडिया से भी आगे बढ़ 2017 की ‘मिस वर्ल्ड’ बन गयी। भारत की पहली डॉक्टर, जो महिला की ‘माहवारी चिकित्सा’ से आगे बढ़ अपनी सुंदरता की भी परचम पूरे संसार में लहराई […]

बोधकथा

शादी की लिबास

एक देश की सच्ची कहानी है, उस देश की 25 वर्ष की मिस फु सूवै ने 87 वर्ष के दादा जी की इच्छा पूर्ण करने के लिए ‘शादी’ की लिबास सिलवाई तथा इसे पहन दादाजी के हाथ थामे चर्च गयी, हालांकि सूवै की शादी की इच्छा अब भी नहीं है । सूवै के माता – […]

बोधकथा

बेंग का बेटा बेंग, पर…..

मेढ़क का बेटा मेढ़क होता है, लेकिन मनुष्य में चपरासी का बेटा लाट-गवर्नर और कलक्टर का बेटा कबाड़खाने में ताला ठोंकनेवाला हो सकता है ! मजदूर तो पूँजीपतियों के अग्रज हैं, क्योंकि कोयले की खान से ही हीरे निकलते हैं और बालू के संपर्क में आने से सीप मोती बन जाता है । कोयला सस्ता […]

बोधकथा

उदाहरण का अंत संभव नहीं !

समाचारपत्रों की सुर्खियों में रहना और हमेशा ही चर्चित रहना महानता नहीं, हीनताबोध है । सवर्णों के बीच अनुसूचित जाति के डॉ. भीमराव अंबेडकर की विद्वता चहुँओर सराहे गए । वे संविधान के प्रारूप समिति के अध्यक्ष है । इस्लामिक देश पाकिस्तान के संविधान के निर्माता डॉ. योगेंद्र नाथ मंडल हिन्दू थे, तो ‘सारे जहाँ […]

बोधकथा

सुंदरता फ़ख्त फिनाइल की सफेद गोली भर है !

एक समय की बात है, अवंतिका युवराज को अपने रूप का घमंड हो गया था। एक दिन जब उसके द्वारा म्लेच्छ खोपड़ी देखा गया, तब उसने यह जाना कि मानवीय खोपड़ी में ऊपरी त्वचा की सुंदरता तो मात्र दिखावा है, तो उसी दिन वे वैरागी हो गए ! सुंदरता तो फिनाइल की सफेद गोली है, […]

बोधकथा

वाह रे जागरूकता!

आज के दौर में हम सभी सफलता की सीढियों पर आंखे बंद करके इस कदर आगे बढ़ रहें है कि उसके नीचे क्या दब गया, क्या छूट गया, इसका ख्याल जरा सा भी नही है। हम लोग आज मंगल पर जीवन खोज रहें है, बगैर यह सोंचे कि वास्तव में हमारे जीवन में मंगल है […]

बोधकथा

परिश्रम की कमाई

असली संत-महंत कितनी सहजता से, स्तर के अनुरूप शिक्षा दे जाते हैं, यह आज भगवान गौतम बुद्ध का एक प्रेरक प्रसंग पढ़कर समझ में आ गया. एक बार एक खानदानी सेठ उनकी सभा में पधारे और धर्म चर्चा में लीन हो गए. प्रवचन सुनने के पश्चात उन्होंने बुद्ध को अपने घर पर भोजन के लिए […]

बोधकथा

तीन प्रश्न और नानक जी के उत्तर

बग़दाद के एक शहर में पीर दस्तगीर का महल था । दस्तगीर अक्सर अपने में ही मगन रहते थे । एक दिन उनकी बेगम ने कहा की आप किसी गहरी सोच में डूबे रहते हैं आखिर ऐसी क्या बात है ? क्या बताऊँ बेगम कुछ अनसुलझी पहेलियों को सुलझाने में लगा रहता हूँ । पता […]

बोधकथा

4 पत्नियां

एक समृद्ध व्यापारी था जिसकी 4 पत्नियां थीं। वह चौथी पत्नी से सबसे ज्यादा प्यार करता था और उसे समृद्ध वस्त्रों से सजाता था और उसे सबसे स्वादिष्ट व्यंजन आदि खिलाता था । उसने उसकी बहुत अच्छी देखभाल करता था और उसे सदा सर्वश्रेष्ठ के अलावा उसने कुछ और नहीं दिया। वह तीसरी पत्नी से […]

बोधकथा

मेहरबानी की मेहरबानी

आज वह सोने के पंख वाला हंस न रहकर, एक सामान्य हंस हो गया था. रह-रहकर उसे यह बात याद आ रही थी. सोने के पंख वाले हंस को अपने पिछले जन्म की बात याद थी. तब वह बचपन से ही अत्यंत मेधावी था. महल जैसे बड़े-से घर में उसकी पत्नि और तीन पुत्रियां थीं. […]