बोधकथा

वाह रे जागरूकता!

आज के दौर में हम सभी सफलता की सीढियों पर आंखे बंद करके इस कदर आगे बढ़ रहें है कि उसके नीचे क्या दब गया, क्या छूट गया, इसका ख्याल जरा सा भी नही है। हम लोग आज मंगल पर जीवन खोज रहें है, बगैर यह सोंचे कि वास्तव में हमारे जीवन में मंगल है […]

बोधकथा

परिश्रम की कमाई

असली संत-महंत कितनी सहजता से, स्तर के अनुरूप शिक्षा दे जाते हैं, यह आज भगवान गौतम बुद्ध का एक प्रेरक प्रसंग पढ़कर समझ में आ गया. एक बार एक खानदानी सेठ उनकी सभा में पधारे और धर्म चर्चा में लीन हो गए. प्रवचन सुनने के पश्चात उन्होंने बुद्ध को अपने घर पर भोजन के लिए […]

बोधकथा

तीन प्रश्न और नानक जी के उत्तर

बग़दाद के एक शहर में पीर दस्तगीर का महल था । दस्तगीर अक्सर अपने में ही मगन रहते थे । एक दिन उनकी बेगम ने कहा की आप किसी गहरी सोच में डूबे रहते हैं आखिर ऐसी क्या बात है ? क्या बताऊँ बेगम कुछ अनसुलझी पहेलियों को सुलझाने में लगा रहता हूँ । पता […]

बोधकथा

4 पत्नियां

एक समृद्ध व्यापारी था जिसकी 4 पत्नियां थीं। वह चौथी पत्नी से सबसे ज्यादा प्यार करता था और उसे समृद्ध वस्त्रों से सजाता था और उसे सबसे स्वादिष्ट व्यंजन आदि खिलाता था । उसने उसकी बहुत अच्छी देखभाल करता था और उसे सदा सर्वश्रेष्ठ के अलावा उसने कुछ और नहीं दिया। वह तीसरी पत्नी से […]

बोधकथा

मेहरबानी की मेहरबानी

आज वह सोने के पंख वाला हंस न रहकर, एक सामान्य हंस हो गया था. रह-रहकर उसे यह बात याद आ रही थी. सोने के पंख वाले हंस को अपने पिछले जन्म की बात याद थी. तब वह बचपन से ही अत्यंत मेधावी था. महल जैसे बड़े-से घर में उसकी पत्नि और तीन पुत्रियां थीं. […]

बोधकथा

जैसी सोच वैसा जवाब

एक गांव के नजदीक एक साधु ने झोपड़ी बना रखी थी। धूप और थकान से व्याकुल राहगीर जब दो क्षण के लिए वहां आराम करने के लिए रुकते तो वह उनको पानी पिलाते, छाया में बैठाते और उनका हालचाल पूछते। बातों-बातों में चर्चा छिड़ती कि आगे के गांव के लोग कैसे हैं, उनका स्वभाव कैसा […]

बोधकथा

प्रेम : एक अनकहा अहसास

भरी दोपहरी में टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों पर वह चला जा रहा था…सूर्य की तीखी किरणें उसके शरीर को बेधती जा रही थी…उसका विश्रांत-क्लांत मन छाया की तलाश करने लगा…जहाँ..वह दो पल ठहर विश्राम कर ले…और…फिर अपने गंतव्य की ओर बढ़ चले…लेकिन दूर-दूर तक उसे कोई ऐसा आश्रय-स्थल नहीं दिखाई दे रहा था….आखिर वह चला ही जा […]

बोधकथा

शेरो को जंजीर से मत बाँधिये

बहुत पहले चीन मे एक महात्मा हुआ करते थे जो सदा शान्ती का उपदेश दिया करते थे लेकिन कमर मे हमेशा तलवार बांधे रहते थे / शिष्य बड़ी हिम्मत करके एक दिन पूछे की गुरु जी आप हमेशा तलवार क्यो लिये रहते है और इसे आप कबतक लिये रहेंगे ? गुरु ने संक्षिप्त उत्तर दिया […]

बोधकथा लघुकथा

मेहरबानी की मेहरबानी

आज वह सोने के पंख वाला हंस न रहकर, एक सामान्य हंस हो गया था. रह-रहकर उसे यह बात याद आ रही थी. सोने के पंख वाले हंस को अपने पिछले जन्म की बात याद थी. तब वह बचपन से ही अत्यंत मेधावी था. महल जैसे बड़े-से घर में उसकी पत्नि और तीन पुत्रियां थीं. […]

बोधकथा

बोधकथा : कौवे

एक समय की बात है सयाने कौवों की बस्ती में खलबली मच गयी , हुआ यूँ की उन्हीं सा दिखने वाला कौवों की बस्ती का सरपंच बन गया और उसने कौवों की नकेल कसनी शुरू करदी । कौवे अपने में से सबसे सयाने को उस से मुकाबला करने भेजते और जो भी जाता उसकी नाक […]