बोधकथा

खुद बदलिए, सब बदल जाएंगे !

“बहनों एवं भाइयों ! आप ही बताइए, अगर हम बेटे-बेटी को एकसमान समझते हैं, तो हम इसे अलग न मान इनके लिए सिर्फ ‘संतान’ शब्द का ही उपयोग क्यों नहीं करते हैं ? इससे हमारे विचार स्वस्थ, स्पर्द्धायुक्त और उन्नतशीलता लिए हमेशा तरोताज़ा रहेगी!” मेरे इस विचार पर मेरे एक मित्र ने टिप्पणी किया- “बेटी […]

बोधकथा

यथा प्रसंग

किसी ने ठीक ही लिख भेजा है, यथा- सेनेगल (वेस्ट अफ्रीका) के विश्वप्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी “सादिओ माने” की आय भारतीय मुद्रा में प्रतिसप्ताह 1 करोड़ 40 लाख रुपये है, बावजूद वे साधारण फोन का इस्तेमाल करते हैं, किसी कारण फोन टूट गयी, तो वे उस फोन को छोड़ नहीं रहे हैं और उसी का इस्तेमाल […]

बोधकथा

अंदरूनी बातें शेयर मत कीजिए

स्वयं, परिवार, ऑफिस या देश की अंदरूनी बातें इतर शेयर मत करें ! महर्षि दयानंद सरस्वती एकबार जापान घूमने गये थे, जब भूख तलब हुई, वे वहां के होटलों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए, क्योंकि सभी होटलों व जलपानगृह में पकी मछलियाँ ही टँगी थी । शाकाहारी महर्षिजी समझ नहीं पा रहे थे…. क्या […]

बोधकथा

सिम्पलीसिटी

कुछ देर पहले ही बाहर से घर आया हूँ ! बारिश में भींग गया हूँ ! अब तो धूप खिल आई है, प्रकृति हरीभरी और निराली है! ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जो सफल और संपन्न होकर भी सिम्पलीसिटी में जीते हैं । यह तो बड़प्पन है । कहने का मकसद है, सम्पन्नता पाकर अगर […]

बोधकथा

सिंध, इल्म और आबरू

भारत-विभाजन के बाद विस्थापित ‘सिन्धी’ समाज काफी बर्बाद हो गए, जो पाकिस्तान में नहीं रहे, वो भारत तीन चीज लेकर आये । एक तो ‘राष्ट्रगान’ में ‘सिंध’ शब्द, दूजे- ‘इल्म’ और तीजे- ‘आबरू’ ! पाकिस्तान में आबरू नहीं बच पाए, किन्तु भारतीय राष्ट्रगान में ‘सिंध’ बचा रहा और ‘इल्म’ के बल पर देशभर में रोजगार […]

बोधकथा

कोजागर पूर्णिमा

कोजागरी या कोजागर या उजागर पूर्णिमा में होती है लक्खी पूजा। मूलत: बंगाल में लक्खी पूजा का प्रचलन है और मनिहारी क्षेत्र भी बंगाली संस्कृति से जुड़ी है ! लक्खी में ‘ख’ बांग्ला टोन है, ‘क्ष’ के लिए ! कहा जाता है, लक्ष्मी-गणेश पूजन से इतर बिल्कुल सामान्य लोगों ने ‘लक्खी’ शब्द प्रचलित कर इसे […]

बोधकथा

मीरा की जन्म-जयंती

भक्तिन मीराबाई की जन्म-जयंती व शरद पूर्णिमा पर सादर नमन । “मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई….” संत-कवयित्री मीराबाई की जन्म-जयंती पर सादर नमन। भक्तिन मीराबाई श्रीकृष्ण भक्ति में बाल्यावस्था से मृत्युपर्यन्त तल्लीन रही…. वे श्रीकृष्ण को पति-परमेश्वर के रूप में देखती रही ! सोलहवीं सदी में जन्मी मीरा जी राजा रतन सिंह राठौर […]

बोधकथा

घरेलू हिंसा

क्या गाँधीजी ने भी पत्नी (कस्तूर बा) पर हाथ उठाये थे ? तब गाँधीजी उड़ीसा दौरे पर थे, तब पुरी के मंदिर में अनुसूचित जाति के लोगों की प्रवेश पर रोक थी । गाँधीजी ने कस्तूर को यह निर्देश दे रखा था कि वह ऐसी किसी भी जगह नहीं जाय, जहाँ जातिवाद, छुआछूत व भेदभाव […]

बोधकथा

भगवान का घर

  वैकुंठ लोक में भगवान श्री राम कुछ चिंतित मुद्रा में चहलकदमी कर रहे हैं । बगल में ही खड़े भ्राता लक्ष्मण व माता सीता उनसे कई बार उनकी चिंता का कारण पूछ चुके हैं लेकिन भगवान श्री राम उनकी तरफ कोई विशेष ध्यान दिए बिना सिर झुकाए चिंता में डूबे बस चहलकदमी किये जा […]

बोधकथा

कर्मयोगी दादाजी

मेरे दादाजी सत्संगी जी जन्मजात शाकाहारी, आदर्श कर्मयोगी और 1942 अगस्त क्रान्ति के अमरसेनानी थे. ध्यान और योग के अध्येता सहित जीवनपर्यंत सन्तमत सत्संग और बिहार, झारखंड, नेपाल के लोगों के अन्तेवासी संत महर्षि मेंहीं के विचारों और शाकाहार के वरेण्य प्रचारक रहे. जन्म बंगाल के पुरैनिया जिला, वर्तमान में बिहार के कटिहार जिला के […]