Category : संस्मरण

  • संस्मरण : बीस पैसा

    संस्मरण : बीस पैसा

    हमारे लिए गर्मी की छुट्टियों में हिल स्टेशन तथा सर्दियों में समुद्री इलाका हमारा ननिहाल या ददिहाल ही हुआ करता था! जैसे ही छुट्टियाँ खत्म होती थी हम अपने ननिहाल पहुंच जाया करते थे जहाँ हमें...

  • संस्मरण : अभी मन भरा नहीं

    संस्मरण : अभी मन भरा नहीं

    सुविख्यात साहित्यकार श्रद्देय देवेन्द्र शर्मा ‘इन्द्र’ जी (गाज़ियाबाद) से कई बार फोन पर बात होती— कभी अंग्रेजी में, कभी हिन्दी में, कभी ब्रज भाषा में। बात-बात में वह कहते कि ब्रज भाषा में भी मुझसे बतियाया...




  • मित्रता की एक और तस्वीर

    मित्रता की एक और तस्वीर

    हम अपने मित्र दम्पत्ति से मिलने लॉन्ग बीच कैलिफ़ोर्निया गए। उनका घर एक गोल परिधि में बनी कोठियों में एक था। करीब बीस एक जैसी इमारतें। बहुत सुन्दर आवासीय संरचना। बीच में गोल घास का घेरा।...