संस्मरण

अतीत की अनुगूंज -14 : ईस्टर और मैं

इस देश में आई तो जनवरी का महीना था।  और दो महीने लगे घर ज़माने में।  एक कमरा और सांझी रसोई  . उसमे एक ही छोटी सी मेज़ जिसपर रोटी बेली जा सके। मैं अपना खाना बनाकर कमरे में ले जाती थी।  मकान मालकिन एक नाइजीरिया से आई नर्स थी। बेहद भली. . अक्सर मेरी देखभाल करती थी।  मई […]

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बंबई  के मुंबई बनने तक बहुत कुछ बदला

बंबई के मुंबई बनने के रास्ते शायद  इतने  जटिल और घुमावदार नहीं होंगे जितनी मुश्किल मेरी दूसरी  मुंबई यात्रा रही ….महज 11 साल का था जब पिताजी की अंगुली पकड़ कर एक दिन अचानक बंबई  पहुंच गया …विशाल बंबई की गोद में पहुंच कर मैं हैरान था क्योंकि तब बंबई किंवदंती  की तरह थी ….ना […]

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पतिदेव का सरप्राइज

शादी को अभी तीन महीनें ही हुए थे। पतिदेव बैंक में सीनियर मैनेजर के पद पर पदस्थापित थे। जिनकी पोस्टिंग शहर से बहुत ही दूर थी। बैंक में काम की व्यस्तता के चलते उनका घर पर कम ही आना होता था। मार्च के महीने की बात है। होली का त्यौंहार भी नजदीक ही था। शादी […]

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मेरा क्या कसूर है ?

बुजुर्गो का आशीर्वाद ,सलाह सदैव  काम आती है ये  उनके पास  अनुभव का ऐसा अनमोल खजाना होता है जिनको पीढ़ी दर पीढ़ी एक दूसरे प्रेरणा स्वरूप  मिलता रहता है ,बस उनकी बातों को सही तरीके से समझा जाए। कुछ लोग उनकी नेक सलाह को ठीक तरीके समझ से नहीं पाते या उनका ध्यान कही और रहता […]

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अतीत की अनुगूँज – 13 : पंछियों की वापसी और एक याद

         मार्च आ गया है। ठण्ड बहुत पडी है और तूफ़ान भी एक के बाद एक अलग अलग नाम धरकर आये हैं।  तूफानों को इंसानों के नाम देना मौसम विभाग की परम्परा है। अभी डेनिस नामक तूफ़ान ख़तम नहीं हुआ है। हवा तेज है और उसमे बर्फानी खुनक है।  मगर फूल अपनी […]

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माँ से कम नहीं

बाल दिवस 2003 – पत्नी का असामयिक निधन  – इकलौती सन्तान 17 वर्षीया बेटी के लिए मम्मी की भी भूमिका निभाने का दायित्व  – परमाणु वैज्ञानिक की जिम्मेदारी  – अशक्त अम्मा की भी देखभाल करना  – कुछ समय के लिए अम्मा की सेवा हेतु बहन का सहारा मिला  – पर युवा होती बेटी को आत्मनिर्भर […]

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शेरू का पुनर्जन्म

कुत्ते तब भी पाले जाते थे, लेकिन विदेशी नस्ल के नहीं। ज्यादातर कुत्ते आवारा ही होते थे, जिन्हें अब  स्ट्रीट डॉग कहा जाता है। गली – मोहल्लों में  इंसानों के बीच उनका  गुजर – बसर हो जाता था। ऐसे कुत्तों के प्रति किसी प्रकार का विशेष  लगाव या नफरत की भावना भी तब बिल्कुल नहीं  […]

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अतीत की अनुगूँज -12 : पूर्वाग्रहों के साथ-साथ

पिछले सत्तर वर्ष हमने देखे हैं।  हममे से कोई भी छाती पर हाथ धरकर यह नहीं कह सकता कि हमें होश संभालने के साथ साथ मुसलामानों, नौकरों, जमादारिन आदि के प्रति आदर सिखाया गया था।  ये बात और है कि वकील नियाज़ी साहब के आने पर पापा या बाबूजी अदब से खड़े होकर सलाम करते […]

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जन्म शताब्दी संस्मरण

इस वर्ष मेरे पूज्य पिता श्री लक्ष्मी चरण जी की जन्म शताब्दी है।  पापाजी अत्यंत मेधावी व्यक्ति थे।  अपने स्वभाव में वह अतिशय उदार एवं सकारात्मक सोंच रखते थे।  उनके निकट जो भी कभी आया था उनको वर्षों के बाद भी याद करता है।  इस अवसर पर मैं उनके जीवन से जुड़े कुछ तथ्य उल्लिखित कर […]

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आत्मकथ्य : कैसा रहा साल – 2019 मेरे लिए 

निरन्तर चलना ही जिंदगी है, फिर चाहे जाड़ा हो, गर्मी हो, बरसात हो बस चलना ही है और मैं निरन्तर चल रहा हूँ | परन्तु चलने के बाद भी ऐसा लग रहा है कि जिंदगी ठहर सी गई है | न जाने क्यों लगता है कि अब बाकी कुछ करने को बचा ही नहीं | […]