संस्मरण

पापा चुप रहते हैं

21 जून 2020, हैपी फ़ादर डे पापा, आज मुझे मम्मी बने हुए 6 साल 5 महीने पूरे हो गये हैं! ईश्वर से दिन रात एक ही दुआ माँगी थी कि मुझे बेटी हो! आपने तो आने से 2 महीने पहले नाम भी रख दिया था ‘लिली”!आप तो यह भी सोचने लग गए थे कि बेटा […]

संस्मरण

एक पिता और एक बेटी की कहानी

21 जून 2020, फ़ादर डे स्पेशल एक पिता को एक बेटी का पत्र आपके ही नाम से जानी जाती हूँ “पापा” इससे बड़ी शोहरत “मिली”के लिए क्या होगी आप पिता हें, पर एक माँ से कम नहीं हैपी फ़ादर डे वर्ल्ड के बेस्ट पापा दुनिया के सबसे अच्छे पापा, “दादी की प्राणदुलारी हो, मम्मी की […]

संस्मरण

वो रामगढ़ था ये लालगढ़

यादों के जनरल स्टोर में कुछ स्मृतियां स्पैम फोल्डर में पड़े रह कर समय के साथ अपने-आप डिलीट हो जाती है, लेकिन कुछ यादें बेताल की तरह हमेशा सिर पर सवार रहती है, मानो चीख-चीख कर कह रही हो मेरा जिक्र किए बगैर तुम्हारी जिंदगी की किताब पूरी नहीं हो सकती। किस्सा 2008 के मध्य […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूंज -16 : पितु मात सहायक स्वामि सखा…

यह मेरा बीता हुआ कल नहीं है, यह एक अमर स्मृति है। जून की दो तारीख को मेरा जन्मदिन है। इस अवसर पर मैं भगवान् को धन्यवाद करते हुए अपना यह अनमोल अनुभव आप सबसे साझा करना चाहती हूँ। पिछले सितम्बर की बात है। हम, मैं और मेरे पति मॉस्को देखने गए, मुझे चलने में […]

भाषा-साहित्य लेख संस्मरण

साहित्य के डॉन ‘राजेन्द्र यादव’ के साथ

मैं दिल्ली रहा हूँ और कई-कई बार दिल्ली गया भी हूँ । जब भी राजेन्द्र यादव के जीवित रहते गया, उनसे गप्पें हाँक कर ही, सौग़ात पाकर ही और उनके दरोगाओं, वकीलाओं, प्रोफेसराओं से चाय, (मैं तो !) नाश्ता कर ही लौटा हूँ…. उनसे लिए अनौपचारिक साक्षात्कार से कई पुस्तकें लिखी जा सकती हैं…. 1995 […]

कथा साहित्य संस्मरण

माँ

संस्मरण “””””””””” माँ “” वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए भले ही भारत में 25 मार्च, 2020 से लॉकडाऊन की शुरुआत हुई हो, परंतु हमारे शहर रायपुर (छत्तीसगढ़ की राजधानी) में 18 मार्च, 2020 की दोपहर को पहला कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के तत्काल बाद पूरे शहर में धारा 144 लागू […]

आत्मकथा संस्मरण

क्रांतिकारी लेखक मित्रो को मेरा सलाम

साहित्यिक मासिक पत्रिका हंस, मार्च 2016 में प्रकाशित ‘आत्मकथ्य’ (अभियान की छाया / लेखक- सांत्वना निगम) के बहाने मैं भी लिखने बैठ गया…मैंने अपनी ज़िन्दगी के कई-कई वसंत-पतझड़ ‘पटना’ में बिताये हैं, लगभग 2 दशक की अवधि कतई कम नहीं होती ! पटना-प्रवास के दौरान मेरे कई साहित्यिक मित्र हुए , जिनमें अभी दो के […]

संस्मरण

नर्सों के सेवा समर्पण को सलाम

नर्सों के सेवा समर्पण को सलाम मुझे याद आते हैं वे दिन जब ग्वालियर के एक निजी नर्सिग हॉम, ममता हॉस्पिटल में जुलाई सन दो हजार चार में मेरा किडनी का ऑपरेशन हुआ। मेरी अब तक कि जीवन यात्रा में वे दस दिवस ऐसे गुजरे मानो किसी ने नरक में डाल दिया हो। इन नरकीय […]

विविध संस्मरण

हड़ताल बाद नियोजित शिक्षकों के योगदानार्थ फिजिकल डिस्टेंसिंग का खुला खेल फर्रूखाबादी !

हड़ताल समाप्ति के बाद बिहार के नियोजित शिक्षकों के योगदानार्थ फिजिकल डिस्टेंसिंग का खुला खेल फर्रूखाबादी ! …. क्योंकि अभी देशवासी ‘लॉकडाउन’ का पूर्ण पालन कर ही रहे हैं कि इसी बीच बिहार के शिक्षक संघों ने बिहार शिक्षा विभाग को एक अघोषित समझौता के आलोक में चल रही नियोजित शिक्षकों की हड़ताल को समाप्त […]

संस्मरण

बहन की डायरी भाई के नाम।

#बहन #की #डायरी #भाई #के #नाम# कैसे हो भैया ! मैं तुम्हारी छोटी सी,मोटी सी और शरारती बहन क्रांति, पहचानते हो ना मुझे? मैं वही क्रांति हूं जो आज से 14 वर्ष पूर्व तुम से लड़ती,झगड़ाती थी,तुम्हारे मजबूत कंधों में झूलती थी । आह! कितना मनोरम दृश्य था वह एक कंधे में मैं,दूसरे कंधे में […]