Category : संस्मरण

  • संस्मरण – मण्डप के नीचे

    संस्मरण – मण्डप के नीचे

    अभी कुछ साल पहले मेरी नन्द की बेटी की शादी फिरोजपुर जाकर करनी पड़ी |नन्द-नन्दोई इंतजाम के लिये पहले चले गये|हम नानका मेल और उनकी दो बेटियां और दामाद साथ थे| रास्ते भर गाडियों में बैठे...




  • संस्मरण : आखिर नाम याद आया

    पति को ब्रेनहेमरेज के साथ पैरालाइज होने के पन्द्रह-सोलह दिन बाद उनके दिमाग की सर्जरी हुई थी। इस ऑपेरशन के बाद धीरे धीरे उनकी आवाज लौटने लगी थी। टूटे-फूटे शब्दों में वे थोड़ा बहुत बोलने लगे...

  • पिता की गोद

    पिता की गोद

    काश मैं फिर से छोटी बच्ची बन जाती और तुम्हारी गोद में खेल पाती । झूल जाती तुम्हारे कंधों पर तुम्हारे बालों से छेड़ पाती । न होती कोई कमी कभी भी प्यार की दुलार की...

  • सदमा ही सदमा

    सदमा ही सदमा

    सदमा तभी लगा जब आज के समाचार पत्र के मुख्य पृष्ठ पर खबर देखी – गिफ्ट पैक में आया बम दादी समेत दूल्हा उड़ा – ओड़िसा के बलांगीर की घटना, नववधू गंभीर रूप से घायल दूसरा...


  • संस्मरण : बीस पैसा

    संस्मरण : बीस पैसा

    हमारे लिए गर्मी की छुट्टियों में हिल स्टेशन तथा सर्दियों में समुद्री इलाका हमारा ननिहाल या ददिहाल ही हुआ करता था! जैसे ही छुट्टियाँ खत्म होती थी हम अपने ननिहाल पहुंच जाया करते थे जहाँ हमें...

  • संस्मरण : अभी मन भरा नहीं

    संस्मरण : अभी मन भरा नहीं

    सुविख्यात साहित्यकार श्रद्देय देवेन्द्र शर्मा ‘इन्द्र’ जी (गाज़ियाबाद) से कई बार फोन पर बात होती— कभी अंग्रेजी में, कभी हिन्दी में, कभी ब्रज भाषा में। बात-बात में वह कहते कि ब्रज भाषा में भी मुझसे बतियाया...