Category : संस्मरण




  • संस्मरण – जंगल में मंगल

    संस्मरण – जंगल में मंगल

    एक उनींदी दोपहर में डायरी के पन्नों से एकाएक मेरा बचपन यादों की खिड़की से झाँककर मुस्कुराता है, और मैं भाव-विभोर हो एक आर्दृ हंसी हंसने लगती हूँ। बचपन के इस कोलाहल में झरनों का संगीत,...

  • विरहिन की गली मत जाना रे भौंरा

    विरहिन की गली मत जाना रे भौंरा

    जाफरी साहब…! हाँ….जाफरी साहब..यही नाम था उनका। बचपन की कुछ यादों के बीच जाफरी साहब भी स्मृतियों में अकसर आते रहते हैं। व्यक्तित्व आकर्षक…! गोरा-चिट्टा..लम्बा कद…लम्बी सफ़ेद दाढ़ी…आज भी याद है। वही जाफरी साहब कभी-कभी गोल...


  • मेरी कहानी 201

    मेरी कहानी 201

    अब मैं चाहता हूँ कि लीला बहन के मुझ पर लिखे सभी ब्लॉग एक एक करके “मेरी कहानी” की कड़ियां बनाऊं, क्योंकि इन के बगैर यह मेरी कहानी सम्पूर्ण नहीं हो सकती। यूँ तो इन ब्लॉग्ज़...


  • संस्मरण         रसूूलपुर की गंगा

    संस्मरण रसूूलपुर की गंगा

      जी हाँ! मैं रसूलपुर में स्थापित महादेवी वर्मा की साहित्यकार संसद की ही बात कर रही हूँ। मेरे लिए वह क्षण विलक्षण ही था जिस क्षण मैंने वहाँ कविता पाठ किया, परन्तु वहाँ तक पहुँचने...