संस्मरण

मेरे प्रिय मित्र, प्रकाश कुमार मिश्र, आप कहाँ हो?

मेरे मित्र प्रकाश कुमार मिश्रा, आप कहाँ हो? आज अंतर्जाल की सिमटती दुनियां में नित्य नए मित्र बनते है, बिछुड़ते हैं, फिर मिल जाते हैं. वहीं काफी पुराने मित्रों से मिलना बड़ा मुश्किल लगता है. गांव के मित्र, स्कूल के मित्र, कॉलेज के मित्र विभिन्न कार्यस्थलों के मित्र, विभिन्न निवास-स्थलों के मित्र बनते हैं, बिछुड़ते […]

संस्मरण

गोबर से तलवार !

बचपन से सुनती आई हूँ …. कभी खुद की आँखों से देखी नहीं …… लेकिन बात सही होने का , पूरा विश्वास है …. पहले वर्षा के दिनों में गोबर का ढेर लगाया जाता था या हो सकता है कि वर्षा के दिनों में गोबर के ना तो उपले/गोइंठा बनाया जाता है और सूखे होने […]

संस्मरण

मेरी कहानी – 10

मेरी बहन मुझ से तीन वर्ष बड़ी थी और क्योंकि लड़किओं के लिए स्कूल होता नहीं था तो उसने  घर में  रहकर ही माँ से पंजाबी सीख ली और जल्दी ही सिख धर्म की किताबें पढ़ने लगी। क्योंकि माँ रोज़ाना पाठ करती थी इसलिए वोह भी काफी कुछ सीख गई थी। घर के सभी कामों में वोह […]

कथा साहित्य संस्मरण

आज

आज 20/3/2015 सुबह सुबह की वार्तालाप ….. इसी माह माँ की पुण्यतिथि थी न …. किस दिन थी ….. हाँ थी तो …. किस डेट को ….. अच्छा ये बताइए …. आज क्या है ….. आज क्या है …. आज क्या है ….. हाँ बोलो ना , आज क्या है …… हाँ बोलिए न , […]

संस्मरण

मेरी कहानी-9

एक दिन दादा जी मुझे कहने लगे, “गेली! कल को फगवारे शहर जाना है , तेरे लिए नए कपडे लेने हैं , क्योंकि तुम को स्कूल दाखल कराना है.” नए कपडे सुन कर तो मन खुश हो गया लेकिन स्कूल का नाम सुन कर डर सा लगा, क्योंकि मैंने सुन रखा था कि वहां का  मास्टर […]

संस्मरण

मेरी कहानी-8

इन पीपलों के नज़दीक जो खूही थी वह मुसलमानों की थी। कभी कभी वे कोई त्योहार मनाते और गुड़ वाले चावल बांटते जिसको वोह निआज़ बोलते थे। हालांकि हमें उन से कोई खाने की चीज़ लेने की मनाही थी फिर भी हम  डरते डरते आगे आकर अपने दोनों हाथ आगे कर देते और वोह हमें चावल […]

संस्मरण

मेरी कहानी – 7

ताऊ नन्द सिंह के घर में अब शान्ति हो गई थी। नन्द सिंह के घर के बिलकुल सामने ही ताऊ रतन सिंह का घर था जिस के घर में लूट मार का सामान फेंका गिया था। ताऊ नन्द सिंह तो भमरा खानदान की तीन चार पीडीआं पीछे से हमारा ताऊ था लेकिन रतन सिंह तो […]

संस्मरण

मेरी कहानी – 6

लूट मार के बाद गाँव में कुछ दिन शांत रहे, लेकिन अब और अजीब बातें  सुनने को मिलने लगीं। लोग बातें कर रहे थे कि पाकिस्तान से एक गाड़ी आई थी  जो हिन्दू और सिखों की लाशों से भरी हुई थी। यह भी बोल रहे थे कि हिन्दू सिखों के घरों को लूट कर उन की लड़किओं […]

संस्मरण

मेरी कहानी – 5

हमारे घर की बाईं तरफ परतापो बुआ का मकान था तो दाईं ओर ताऊ नन्द सिंह का मकान था , नन्द सिंह के मकान के बिलकुल सामने ताऊ रतन सिंह का मकान था । रतन सिंह के मकान की दुसरी तरफ से मुसलमानों का मुहल्ला शुरू हो जाता था। इन लोगों की अपनी एक मस्जिद […]

संस्मरण

नहीं रहे बालसाहित्य के पुरोधा दादा राष्ट्रबंधु – एक संस्मरण और श्रद्धांजलि

लगता है जैसे कल की ही बात हो | 27 दिसंबर 14 को राजसमंद बालसाहित्य समागम मे राष्ट्रबंधु जी पधारे थे | बड़ी आत्मीयता से मिले –पहली बार | तब ये नहीं पता था कि ये आखिरी बार भी है | मैंने पैर छूए , उन्होने जी भर कर आशीर्वाद दिया | वहाँ तीन दिनों […]