Category : कथा साहित्य


  • संकल्पिता

    संकल्पिता

    “माँ, देखो न! जीतू ने फिर से गुलाब का फूल तोड़ लिया, आप उसे मना क्यों नहीं करतीं” “अरे बेटी, वो भगवान् को ही तो चढ़ाता है न…फिर घर में भी कितनी सुगंध बनी रहती है”!...

  • दरकते रिश्ते

    दरकते रिश्ते

    जेठ का वह भी अधिक जेठ का मास, शिमला में जलसंकट, बारिश के इंतजार में उत्तराखंड के दहकते जंगल, ताल-तलैया सूखे, नदी सिकुड़कर बन गई थी नाला, गांव के सारे हैंडपंप खराब, सिर्फ एक कुआं, जिसमें...

  • बड़े पापा

    बड़े पापा

    ”Good morning पापा, हैप्पी फादर्स डे, Bye, शाम को मिलते हैं.” कहकर मुनीष सपरिवार मित्र परिवारों के साथ पिकनिक पर निकल गया. ”Good morning पापा, हैप्पी फादर्स डे. मैं भी आज दोस्तों के संग बाहर ही...

  • अमल

    अमल

    उस दिन मैं सैर पर जा रही थी और मनीषा कार में ड्राइविंग सीट पर बैठने वाली थी. उसने मुझसे नमस्ते की. पतली-सी मासूम चेहरे वाली मनीषा को कार की ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए देखकर...

  • अँधी सोच….

    अँधी सोच….

    मेघा एक बेबस लाचार असहाय वक़्त की मारी हुई वो लड़की थी, ‘जिसे ईश्वर ने बेहद खूबसूरती से नवाज कर साथ में गरीबी, अपाहिज बाप, दमे की मरीज मां व तीन छोटे भाई बहनों की जिम्मेदारी...

  • कमली

    कमली

    कमली। ###### कमली ….कमली पुकार पुकार के बच्चे उसके पीछे हाथ में पत्थर लिए दौड़ रहे थे. अपने फूले पेट को आंचल से ढ़के वह इधर से उधर बेबस हिरनी की तरह भाग रही थी. अचानक...

  • “वक्त का गणित”

    “वक्त का गणित”

    कलाकारी करते समय कूँची थोड़ा आडा-तिरछा कमर की और जरा सा दूसरे जगह भी अपना रंग दिखा दी… हाथी पर चढ़े, टिकने में टक टाका टक अव्यवस्थित ऐसे कलश को देख मटका आँख मटका दिया… कलश...

  • पलटू

    पलटू

    रंजन की गुप्ता जी पर नज़र पड़ी। उनके बेटे ने फाइव स्टार होटल की अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर अपना रेस्टोरेंट खोलने का निश्चय किया था। इस बात से गुप्ता जी नाराज़ थे। मुंह देखी बात...

  • मासूम जिद्द

    मासूम जिद्द

    कोर्ट में तीनों ने मिलकर आइसक्रीम खाई थी और एक साथ घर वापिस आए थे. बच्चा खुश हो खेलने में लग गया था, पति-पत्नी के मन में आलोड़न चल रहा था. ”लड़-झगड़कर कोर्ट में मामला दर्ज...