Category : कथा साहित्य


  • यशोदानंदन-१३

    कंस एक क्रूर अधिनायक था। पर साथ ही चतुर और धूर्त राजनीतिज्ञ भी था। मथुरा का वह राजा बन ही गया था। वहां की प्रजा, ऐसा प्रतीत होता था कि एक सांस लेने के बाद दूसरी...

  • यशोदानंदन-१२

    योगमाया का प्रभाव समाप्त होते ही मातु यशोदा की निद्रा जाती रही। जैसे ही उनकी दृष्टि बगल में लेटे और हाथ-पांव मारते शिशु पर पड़ी, वे आनन्दातिरेक से भर उठीं। शिशु एक पवित्र मुस्कान के साथ...

  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 38)

    34. सखी से मंत्रणा दिल्ली के शाही हरम में गुजरात की जबरन अपहृत की गई राजकुमारी देवलदेवी का कक्ष। अब वहाँ साजो सम्मान की हर वस्तु उपलब्ध है जो शाही हरम की शहजादियों और बेगमों के कक्षों में...

  • वह भिखारी

    वह भिखारी

    ” बाबू जी … बाबू जी .. दस पांच रूपये दे दीजिये , बहुत भूंख लगी है बच्चे को मेरे दूध लाना है ” जैसे ही चन्दन ने अपनी गाडी एक शानदार बिल्डिंग के सामने रोक...

  • अधूरे ख़्वाब

    अधूरे ख़्वाब

    नेहा के पास जीने का कोई मकसद नहीं रहा, बस जी रही थी, क्युकि मरना उसके लिए इतना आसान नहीं था | एक के बाद एक समस्याओ से उसका जीवन घिरा रहता था| पता नहीं वो...



  • यशोदानंदन-११

    कंस तो कंस था। वह पाषाण की तरह देवी देवकी की याचना सुनता रहा, पर तनिक भी प्रभावित नहीं हुआ। देवी देवकी ने कन्या को अपनी गोद में छिपाकर आंचल से ढंक दिया था, परन्तु कंस...