Category : कथा साहित्य


  • जन्मदिन

    जन्मदिन

    ये लो नये कपड़े और कल जल्दी उठकर तैयार हो जाना तुम्है मेरे साथ चलना है।एक पैकेट छोटू की तरफ फैंकते हुऐ संगीता देवी ने कहा। संगीता देवी एक समाज सेविका थी और कल उन्हें बाल...


  • प्रेम

    प्रेम

    दया और दिनेश पडौसी होने के नाते एक स्कूल में पढ़ते थे | धीरे -धीरे उनमे मित्रता बढ़ी मित्रता ने प्रेम का रूप ले लिया | दोनो के घर वालो से ये बात छिपी हुई नहीं...


  • घर का मोह

    घर का मोह

    चाचा (पड़ोसी ,हम 10 साल से साथ थे) की मिट्टी ( 29-07-2013)मिट्टी में मिल गई …. चाची अकेली रह गई …. चाची बहुत ,बहुत , बहुत जल्दी-जल्दी और अस्पष्ट बोलती हैं …. और … एक ही...




  • भाग्यशाली ……

    भाग्यशाली ……

    राधे लाल जी ने एक पल के लिए भी नही सोचा था कि उनको बिना लाठी की मार खानी पड़ेगी | लाडले बेटे शिव की सगाई, बड़ी धूम-धाम से कुछ दिन पहले ही की थी| दो...