Category : कथा साहित्य


  • जा रहा था—मैं !

    जा रहा था—मैं !

    मैं कुद्रा रेलवे स्टेशन पर ज्यों ही पहुंचा तभी एक आवाज़ सुनाई दी कि गाड़ी थोड़ी देर में प्लेट फार्म नम्बर दो पहुंचने वाली है। आवाज़ को सुनते ही मेरे अन्दर इधर टिकट कटाने की तो...

  • यशोदानंदन-५०

    ढोल-नगाड़ों की ध्वनि मथुरा नगर के बाहर भी पहुंच रही थी। स्नानादि प्रातःकर्मों से निवृत्त होने के पश्चात् श्रीकृष्ण तथा बलराम ने मल्लयुद्ध की रंगभूमि से आ रही नगाड़ों की ध्वनि सुनी। शीघ्र ही तैयार होकर...


  • लघु कथा : रण बाँकुरा

    लघु कथा : रण बाँकुरा

    अगले दिन दीपावली थी लेकिन छावनी में कहीं भी चहल-पहल नहीं थी । 1987 में मेरे पति भी भारतीय शान्ति रक्षक सेना (IPKF) में थे ।पूरी पलटन श्री लंका में थी। यही सोचते हुए मासिक परीक्षा...

  • लघु कथा : खिलवाड़

    लघु कथा : खिलवाड़

    मै  एक  ऐसे  शहर  मे रहती  हूं  जहां  कैफेटारिया  भी  नही    और  ना  ही  गाँव की   तरह   खुशनुमा प्राकृतिक वातावरण जहां  इत्मिनान  से शाम बिताई जा सके।  पड़ोसियों से  देश  दुनियाँ   की  चर्चा  या...

  • यशोदानंदन-49

    श्रीकृष्ण अपने सभी बन्धु-बान्धवों और अनुचरों के साथ मथुरा आए थे। अपने साथ प्रचूर मात्रा में खाद्य-सामग्री भी लाना नहीं भूले थे। शिविर में पहुंचते ही अनुचर सेवा में तत्पर हो गए। उन्होंने दोनों भ्राताओं के...


  • स्मृति के पंख – 3

    यात्रा बहुत अच्छी रही। अब हम घर वापिस पहुँच गए। कुछ दिन दुकान को बनाने संवारने में लगे। फिर से मदरसा, खेल-कूद, हंसना और हंसाना। भ्राताजी का रिश्ता भी गढ़ी कपूरा में धवन खानदान में हुआ।...

  • बिटिया की पेरिस से पाती आई है….!

    बिटिया की पेरिस से पाती आई है….!

    कुछ बड़े सवाल छोड़ता कोलकाता की श्रीमती पूनम दीक्षित की बेटी अनन्या दीक्षित का पेरिस से अपनी माँ को लिखा पत्र !!!! मम्मा… पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी जी के कार्यक्रम में मेरा अनुभव कैसा रहा यह...