Category : कथा साहित्य

  • बाबाजी की  भभूत

    बाबाजी की भभूत

    ” सासु माँ मेरा लाल रमिया आँख ही नहीं खोल रहा है,कुछ करो ना जल्दी से इसे डाकदर के पास ले चलो |, सीता ने रोते हए अपनी सास को कहा | सास निम्मो ने देखा...





  • लघुकथा : हूर बनने का खौफ

    लघुकथा : हूर बनने का खौफ

    ‘आज तुम्हे क्या हो गया है तहज़ीब।’ अपने सीने से चिपटी एक गोरी, छरहरी, कमसिन लड़की को अपने सीने से अलग करके अपने से पर लगभग धक्का देते हुए वो बोला। ज़मीन पर पड़े कुछ लम्हे...

  • कहानी : फर्ज

    कहानी : फर्ज

    ट्रिन-ट्रिन अचानक फोन की घंटी घनघना उठी,पीहू ने फोन उठाया सामने से बेटे रंजन की आवाज आई- ”ममा, मै ,कल आ रहा हूँ;मेरा दीक्षांत समारोह सम्पन हो गया,अब मै आपके साथ कुछ दिन तो आराम से...