Category : कथा साहित्य


  • मेरी कहानी-13

    कौन सी घटना, किस कक्षा के समय में  हुई यह तो पूरा याद नहीं, लेकिन बहुत घटनाएं हुई जो हर एक के बचपन में होती हैं। एक नई बात यह हुई कि उन दिनों चर्मकारों के बच्चों को...

  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 54)

    49. भावी सम्राट की भूमिका ‘सुल्ताना देवल, आपको हासिल करके हमें बहुत खुशी मिली है।’ मुबारक शाह देवलदेवी के रूखसारों पर उँगुली घुमाते हुए बोला। मुबारक शाह खिलजी इस वक्त शाही हरम में था, उसने आज ही अपने...


  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 53)

    48. देह विडंबना का पूर्ण प्रतिशोध दो घड़ी रात गए द्वार पर कोलाहल सुन देवलदेवी वस्त्र संभालकर शय्या से उठ गई। देवलदेवी इस समय कक्ष में अकेली थी। कोलाहल सुनकर उनके मुख पर भय के स्थान हर्ष के...

  • मेरी कहानी-12

    स्कूल हम रोज़ाना जाते थे और स्कूल खुलते ही स्कूल की एक खुली जगह पर एकत्र हो जाते। हर क्लास की अपनी अपनी लाइन होती। हर रोज़ दो हुशिआर लड़कों को सारे स्कूल के आगे खड़े...



  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 52)

    47. स्त्रैण सुल्तान देवगिरी में शाही खेमा लगा है। उस खेमे में सुल्तान मुबारक और वजीर खुशरव शाह मौजूद हैं। देवगिरी के राजा हरपाल देव की जीवित खाल खिंचवाने के बाद शाही खेमे में जश्न का माहौल है।...

  • देवी पूजा

    देवी पूजा

    आंख खुलते ही हर रोज की तरह आज भी रसोईघर से मम्मी  की आवाज के साथ -साथ बरतनों की उठापटक की आवाज सुनाई दी,पर हैरानी की बात आज कामवाली बाई की आवाज नहीं आ रही थी।...