Category : कथा साहित्य

  • ख़ुशी

    ख़ुशी

    ‘सूरज,की पहली किरण जैसे ही धरती पर अपनी लालिमा बिछाती है…नीरू रोज सुबह सूरज निकलने से पहले ही उठ जाती थी…और सूरज का स्वागत करती थी | ये ही वो वक़्त था जिसे वो अपने लिये...





  • रमा

    रमा

    ज़िन्दगी क्या चीज है, समझ न आए कभी — हँसी थमी नहीं, रुला देती है. बड़ी जटिल हैं इसकी राहें. आदमी बहुत कोशिश करता है कि अपनी राहों को हमेशा कंटकों से मुक्त रखे. लेकिन सबकुछ...

  • बड़े बाप की बेटी

    बड़े बाप की बेटी

    बड़े बाप की बेटी से अपने बेटे का रिश्ता पक्का करते हुए,रामलाल जी ने सोचा भी नहीं था कि ये दिन भी देखना पड़ेगा| रीना के पापा उ.प्र. के मथुरा में जिला कलेक्टर के पद पर...


  • नकेल

    नकेल

     राधिका जी के सामने अख़बार पड़ा था। ख़बर कल की थी। यह खबर  उन्ही के शहर की एक दुर्घटना की थी। विचलित थी वह , अख़बार की  खबर  से नहीं बल्कि उनके सामने ही घटी थी वह दुर्घटना। वह कल...