उपन्यास अंश

उपन्यास : शान्तिदूत (पेंतीसवीं कड़ी)

कृष्ण के आने से पहले ही राजसभा में सभी लोग उपस्थित हो गये थे और अपने-अपने स्थान पर बैठे थे। कृष्ण के लिए एक आसन प्रमुख स्थान पर रिक्त रखा गया था। जैसे ही कृष्ण राजसभा में आते हुए दिखायी दिये वैसे ही वहां उपस्थित सभी लोग उनके सम्मान में खड़े हो गये। केवल महाराज […]

उपन्यास अंश

लघु उपन्यास : करवट (तीसरी क़िस्त)

अगली सुबह रमुआ को लेकर धनुवा दीवानपुर प्राइमरी पाठशाला पर पहँुचा तो प्रधानाचार्य तिवारी जी से सीधे बात हुई। तिवारी जी ने धनुवा के साथ चपरासी को कक्षा तक छोड़ने के लिए भेजा और धनुवा को वापस घर जाने के लिए कहते हुए अपने कक्ष में चले गये। धनुवा बेटे को लेकर कक्षा तक पहँुचा तो वहां पर गुरु […]

लघुकथा

लगाव (लघु कहानी)

“बुढऊ देख रहें हो न हमारे हँसते-खेलते घर की हालत!” कभी यही आशियाना गुलजार हुआ करता था! आज देखो खंडहर में तब्दील हो गया|” “हा बुढिया चारो लड़कों ने तो अपने-अपने आशियाने बगल में ही बना लिए है! वह क्यों भला यहाँ की देखभाल करते|” “रहते तो देखभाल करते न” चारो तो लड़लड़ा अलग-अलग हो […]

कहानी

आॅटिज्म

खूब गोल मटोल बच्चा काले घुंघराले बाल चेहरे पर इधर उधर छितराई हुई सी लटें। बड़ी बड़ी आॅंखों में मोटा काजल और माथे पर काला टीका। एक सुन्दर सा बच्चा मेरे सामने है। जी चाहता है अपने सीने से लगा कर उसे चूम लूं और उससे ढेर सारी बातें करुं। कितना सुखद होगा सुनना उसका […]

लघुकथा

नई राह

जब भी रीना ने अपनी माली हालत सुधारने के लिए घर से बाहर जाकर कुछ करना चाहा, सास हीरा देवी उसका रास्ता रोक लेती । अब रीना करे तो क्या करे! दो बच्चो और सास को खिलाना था । पति दुर्घटना में असमय ही काल कवलित हो गये। आखिर रीना ने रास्ता निकाल ही लिया। […]

कहानी

भूख

श्वेता जो की अमीर बाप की बेटी है जिसने घर में किसी चीज़ की कभी कोई कमी नहीं देखी ! उसका जन्मदिन था और उसने अपने सभी फ्रेंड्स को पार्टी के लिए घर पर बुलाया और घर की बावर्चिन को खाने का मेनू पकड़ाते हुए कहा की आज ये सब खाने में बनना चाहिए और […]

उपन्यास अंश

उपन्यास : शान्तिदूत (चौंतीसवीं कड़ी)

अगले दिन प्रातःकाल कृष्ण और सात्यकि नित्यकर्मों से निवृत्त हुए। फिर राजसभा में जाने के लिए तैयार होने लगे। वहां जाने से पहले कृष्ण ने सात्यकि को एक बार पुनः स्मरण कराया कि उनको राजसभा के भीतर नहीं जाना है, बल्कि उस कक्ष के मुख्य द्वार पर ही रहकर सावधान और सजग रहना है। कृष्ण […]

कहानी

फर्ज

ट्रिन-ट्रिन अचानक फोन की घंटी घनघना उठी, पीहू ने फोन उठाया सामने से बेटे रंजन की आवाज आई ”ममा, मै ,कल आ रहा हूँ; मेरा दीक्षांत समारोह सम्पन हो गया,अब मै आपके साथ कुछ दिन तो आराम से मस्ती करूंगा|’ उसने सब एक साँस मे बोल कर फोन कट कर दिया; पीहू को कुछ बोलने […]

उपन्यास अंश

लघु उपन्यास : करवट (दूसरी क़िस्त)

रधिया ने चार आलू काटकर, दो प्याज की महीन फाँकें काटकर कराही में छौंक लगा दी और दूसरी तरफ चूल्हे पर रोटी के सेंकने को जारी रखा। रमुआ खुशी से उछल पड़ा, बोला- ‘माई मोर चिरइया रोटी बन गईल बा, तनी मोर रोटी पका दे माई।’ रधिया ने रमुआ की मेहनत को पहचाना और उसकी […]

उपन्यास अंश

उपन्यास : शान्तिदूत (तेंतीसवीं कड़ी)

अतिथि शाला में सात्यकि और अपने सारथी के निवास की व्यवस्था देखकर कृष्ण अकेले ही अपनी बुआ कुंती से मिलने महामंत्री विदुर के निवास पर गये, जो नगर के बाहरी क्षेत्र में साधारण सा घर था। कुंती को विदुर से यह तो पता चल गया था कि कृष्ण शान्ति के लिए प्रयास करने हस्तिनापुर आ […]