लघुकथा

दुआ

उसने बड़े प्यार से कहा बेटा मेरी मदद करोगे तो तुम्हें मैं ढेर सारी दुआ दूंगा बाबा अभी मेरे पास पैसे तो है नहीं दो रोटी है जो मेरी मां ने सफर निकलने से पहले लरख दी थी अगर तुम चाहो तो मैं वो तुम्हे दे दूंगा पर बेटा फिर तुम्हें भूखा रहना पड़ेगा कोई बात नहीं बाबा जी आपकी दुआ है […]

लघुकथा

दु:खी संसार 

पत्र साल दो हजार बीस के नाम… समय- मध्य/ नवम्बर /2020 आदरणीया साल 2020 ,              डरते हुए प्रणाम !           तुम प्रसन्न हो या दु:खी हम नहीं जानते, पर हाँ हम सब दुखी हैं ये हमें, तुम्हें बताते हुये खेद हो रहा है ।   […]

लघुकथा

बढ़ना ही अविराम

घड़ी की सुई एक बजा रही थी ,नींद आँखों से कोसों दूर ।बावड़ा मन किसी निश्चय की घड़ी की तलाश में बिना थके दौड़ता ही जा रहा था । विनी से गलती कहाँ हुई थी वह तो माँ के कहने पर भाभी की जचगी पर उनके मायके भाभी और अपनी नन्हीं गुड़िया को संभालने गई […]

लघुकथा

उज्ज्वलता

अतीत की खिड़कियों से कई बार ताज़ी हवा आती है. आज किसी कोने से उज्ज्वल की उज्ज्वलता याद आ रही है, मानो कह रहा है- ”दिया ज़रुर जलाऊंगा चाहे मुझे ईश्वर मिले न मिले, हो सकता है दीपक की रोशनी से कोई मुसाफिर को, ठोकर लगने से बच जाए और उसे सही राह मिले.” यही […]

लघुकथा

काम की बाई

जया की बेटी जयंती का जन्मदिन था। रात्रि में बारह बजे व्हाट्सएप स्टेटस नहीं डाला। फेसबुक पर भी कुछ पोस्ट नहीं किया। अपनों परायों संबंधियों रिश्तों फ्रेंड्स ग्रुप मेंबर्स का मूल्यांकन करना चाहती थीं कि देखती हूं किन किन को मेरी बेटी का जन्मदिन स्मरण है। कोरोना के कारण कोई पार्टी सम्भव भी नहीं थी। […]

लघुकथा

ठूंठ

हम दूध गर्म करते हैं, तो अन्य लाम करते हुए भी सारा ध्यान दूध में ही रहता है, कहीं उबलकर गिर न जाए. बड़ों ने डरा रखा है- ”दूध उबलना अपशकुन होता है.” जानते भी हैं कि बड़ों ने यह डर किसलिए बिठा रखा है! एक तो दूध की बरबादी होती है, फिर दुबारा लाना […]

लघुकथा

फिनिशर बाबा

ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट में 2017 का आखिरी मैच 24 दिसंबर को। भारत-श्रीलंका सीरीज में सभी मैच भारत ने जीते । कम स्कोर के मैच अंतिम ओवर तक चला गया । सर्वाधिक 32 रन मनीष पांडे ने बनाये । चेस तो 136 करने थे और 135 पर बराबर कर अपना धौनी खेल रहे थे और उसने लगा […]

लघुकथा

धरती मैया

धरती मैया ————– रामदीन के चारों बेटे अर्ध शिक्षित होने की वजह से देश के अलग अलग शहरों में रहते थे और मेहनत मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते थे । रामदीन अकेले ही गाँव में रहकर खेतों में पसीना बहाता और कुदरत के कोपभाजन का शिकार होते हुए भी बड़े आराम से अपना गुजर […]

लघुकथा

अब सिर्फ यादें !

उच्च विद्यालय, मनिहारी में सहायक रहे ‘रवि’ की पहली पुण्यतिथि ! नवाबगंज चौक से मनिहारी जाते समय कई बार, फिर दो-चार बार कटिहार जाने के क्रम में उनके बाइक पर उनके पीछे बैठे – बैठे मुझे ऊर्जस्विन ऊष्मा लिए उनके साथ की यात्रा खूब गुदगुदाता था, अब 17 तारीख से ही रुला रहा है । […]

लघुकथा

यादों के झरोखे से- 28

पुनः आदेश बिंदु (लघुकथा) नई-नवेली दुल्हिन शालू का ससुराल में पहला ही दिन था. कल ही तो दिन में रिंग सेरिमनी और फेरे हुए थे और रात में रिसेप्शन. उसके बाद विदाई और ससुराल में अनेक रीति-रिवाजों का निभाव. यह निभाव उसके लिए एम.बी.ए की परीक्षा से भी मुश्किल हो गया था, फिर भी वह विशेष […]