Category : लघुकथा

  • निरुत्तर

    निरुत्तर

    उस घुमावदार गुफानुमा बाजार से तगड़ी खरीदारी करने के बाद पसीने से लथपथ होतीं सुधा और सुरुचि बेहद थक चुकी थीं. प्यास से बेहाल होकर बाहर आकर इधर उधर नज़र दौड़ाई तो आसपास कोई होटल नज़र...

  • लघुकथा — फर्क़

    लघुकथा — फर्क़

    “मेरे लिए एक अच्छा-सा लेडीज सूट दिखाओ” लड़के ने दुकान में पहुंचकर कहा ! “जी साब,दिखाता हूं ! दुकानदार ने स्मार्टनेस दिखाई ! कुछ देर बात वह  लड़का  अपने घर पहुंचा , और एकांत का लाभ उठाकर घर...

  • जय – पराजय

    जय – पराजय

    रोहन क्रिकेट का शौकीन था । लेकिन जब भी भारतीय टीम पाकिस्तान से भिड़ रही होती क्रिकेट के प्रति उसकी दीवानगी आसमान छूने लगती । रविवार को हुए मुकाबले में पाकिस्तान के हाथों हुई अनअपेक्षित शर्मनाक...

  • लघुकथा

    लघुकथा

    सखी रे, मोरा नैहर छूटा जाए फूल लोढ़ने की डलिया हर सुबह, बसंती के हाथों में उछल- ककूदकर अपने आप ही आ जाती है मानों उसके नित्य के दैनिक कर्म में यह एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर...

  • लघु कथा…….

    लघु कथा…….

    “हीत मीत नात घर जोहा, तब खेतन में मुजहँन शोहा” मटका का कुर्ता और परमसुख की धोती झहरा के झिनकू भैया, पान दबाये, मुस्की मारते हुए खूब झलक रहे थे। बहुत दिनों बाद नबाबी लिवास में...

  • लघु कथा – ‘आगे की सोच’

    लघु कथा – ‘आगे की सोच’

    रसिक लाल ने कस्बे में कोल्ड वाटर सप्लाई का काम शुरू करने का इरादा अपने मित्रों को बताया तो उसके मित्रों ने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा – ‘अरे रसिक! अपने कस्बे में छोटे-बड़े 18 तालाब...

  • सच्चा सेवक

    सच्चा सेवक

    रात के दस बजे थे। दीपेन्द्र खाना खा कर अपने बंगले के पीछे बने पार्क में टहल रहा था। तभी नौकर दौड़ा-दौड़ा आया ओर सूचना दी कि मंत्री महोदय का फोन आया हुआ है लैंडलाइन पर,...

  • हसरत

    हसरत

    विमला ने पैसे एक प्लास्टिक की डिब्बी में रख भगवान के सामने रख दिए. हाथ जोड़ कर उसने मन ही मन ईश्वर का धन्यवाद किया. अब उसका बेटा स्कूल जा सकेगा. उसकी हसरत थी कि उसका...

  • बिछोह

    बिछोह

    आज राजेंद्र बाबू का पछत्तरवां जन्मदिन था. पोती ने बर्थडे का केक डाइनिंग टेबल पर सजा दिया था. इंतज़ार था तो उनके मित्र अरोड़ा जी का. उनके आते ही केक काटा जाना था. आज सुबह से...

  • छोटी सी ख्वाहिश

    छोटी सी ख्वाहिश

    शहर की एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाला मुकेश गाँव के एक छोटे से स्कूल में बच्चों को कॉपी किताब चाकलेट जैसी चीज़ें बाटने आया था। उसकी निगाह तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले श्याम पर...