Category : लघुकथा

  • पराजय

    पराजय

    संध्या और विशाल के बीच जम कर आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा था। “तुम्हें हर चीज़ का दोष मुझ पर मढ़ने की आदत है। क्योंकी तुम तो किसी चीज़ की ज़िम्मेदारी लेना जानते नहीं हो।”...

  • सिफारिशी पत्र

    सिफारिशी पत्र

    रमण भारती एक कंपनी में ऊंचे ओहदे पर कार्यरत था । कई साल बाद एक बार फिर उसका तबादला उसके गृहनगर ‘ राजनगर ‘ में ही हो गया था । घर लौटते हुए रास्ते में एक...

  • लघुकथा – लोभ

    लघुकथा – लोभ

    बाजार पूरी तरह से सजा था, सारी दुकानें खचाखच भरी थीं | भीड़ भाड भी बहुत थी, भीड़ को काबू में करने व बाजार में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए तमाम पुलिसबल को सरकार ने...


  • “समझ”

    “समझ”

    -एक्सपायरिंग डेट हो गई हैं आप अम्मा जी” -चल इसी बात पर कुछ चटपटा बना खिला” खिलखिलाते हुए पचासी साल की सास और अड़तीस-चालीस साल की बहू चुहल कर रही थी -आज मुझे *एक दीया शहीदों...



  • तेजाब !

    तेजाब !

    होंठो पर झूठी मुस्कान लिए रीना ने सास ससुर का स्वागत किया। रवि सब जानता था पर घर में कलेश से डरते कुछ न कहता, पर ये बात उसे तेजाब की तरह जलन देती थी कि...

  • चुगली

    चुगली

    विनीता परेशान थी। अभी अभी बेटे के बोर्डिंग स्कूल के प्रिंसिपल का फोन आया था। वही शिकायत “अनुशासनहीन है अध्यापकों का कहना नहीं मानता है।” कितना प्रयास किया था उसने कि पिता के दुर्गुण उसमें ना...

  • “धूमिल पहचान”

    “धूमिल पहचान”

    बहुत सौभाग्यशाली हूँ कि जन्मभूमि का दर्शन हुआ, रामायण का सम्पूर्ण पाठ, सत्यनारायण भगवान का कथा पूजन, हवन, ब्राह्मण व वंधु बान्धव भोज, व मेरे जुड़वा नातिन के मूल पूजनोपरांत आज कर्म भूमि का दर्शन होगा।...