लघुकथा

सम्पन्न दुनिया

माँ अपनी अटैची में कपड़े ठूँसते हुए बोली-“चल बेटा, अपने पुराने मुहल्ले में। मुझे अब यहाँ नहीं रहना।” “क्यों माँ! तुम्हें तो यहाँ की हरियाली, फलदार पेड़ और उस पर चहकते पक्षी, सुगन्ध बिखराते फूल तो बड़े ही भाये थे। छोटे से पाण्ड में बत्तखों को देखकर कैसे तुम बच्चों-सी मचल गयी थी।” “हाँ, लेकिन..” […]

लघुकथा

लघुकथा – महर्षि धौम्य की चिंता

अपने गुरू महर्षि धौम्य की आज्ञा पाकर आज शाम को आरूणि खेत गया। खेत पहुँचकर देखा कि मेड़ कटी हुई है। पानी खेत से निकल रहा है। बारिश भी हो रही है; और थमने का कोई आसार नहीं। रात गहरी होती जा रही है। उसने आश्रम लौटना उचित समझा। आरूणि को देखते ही महर्षि धौम्य […]

लघुकथा

इन्तजार

आज दिल बहुत उदास था । कहते हैं भोर के सपने सचप्रकाशक होते हैं आज सुबह सपना आया विमल दा बहुत दूर खड़े है और कह रहे हैं सुमि चलें अब चलने का समय आगया । वह उसे सुमित्रा ना कह कर सुमि ही कहते थे । वह विमल दा को कैसे भूल जाये सगे […]

लघुकथा

तबादला

शाम को दफ्तर से आते ही राकेश ने कहा “सामान बांधना शुरू कर दो हमारा तबादला हो गया।” तबादले का नाम सुनते ही स्नेहा की घबराहट शुरू हो जाती है। फिर से एक-एक सामान बांधों और चल दो किसी नए शहर को। देहरादून आए अभी एक ही साल तो हुआ, और तबादले का आर्डर आ गया। शुरू […]

लघुकथा

गवाही

साहित्य- सम्पदा ; हमारी लघुकथाएं मंच पर विजेता लघुकथा सुलेखा को सम्मान पर सम्मान, उपाधि पर उपाधि मिलती जा रही थी. आज भी उसे उपन्यास “जीवन-रेखा” पर प्रकाशक की ओर से “साल का सर्वश्रेष्ठ लेखक” होने का सम्मान मिला था. मां सरस्वती की कांस्य-प्रतिमा और शॉल से सम्मानित किए जाने के साथ ही 51 हजार […]

लघुकथा

“काका की चाय!”

“काका चाय मिलेगी?” धनखड़ ने पूछा. “बचवा चाय ही तो मिलेगी यहां! घणी अदरक डाल के?” “काका, आप मुझे पहचान गए क्या?” “पहचानेंगे कैसे नहीं! इतने प्यार से काका और कौन बोल सकता है बचवा! हमारी आंख बंद होती तो भी मीठी आवाज से पहचान जाते.” “काका, छः साल पहले तो मेरी मूंछें फूटनी ही […]

लघुकथा

लघुकथा – फूलन देवी

ट्रेन सरपट दौड़ी जा रही थी । सामने वाली सीट पर भरे हुए बदन की एक उदास औरत बैठी थी । उसका दो साल का नटखट लड़का पूरी बोगी में धमाल मचाए हुए था । प्रणव उस औरत  के गठे हुए बदन की ओर आकर्षित हुआ तो दिखावटी प्रेम से उसके लड़के से खेलने लगा […]

लघुकथा

अनमोल उपहार

विवाह के बाद पहली बार मायके आयी बेटी का स्वागत सप्ताह भर चला. सप्ताह भर बेटी को जो पसन्द है, वही सब किया गया. वापिस ससुराल जाते समय पिता ने बेटी को एक अति सुगंधित अगरबत्ती का पैकेट दिया और कहा- “बेटी, तुम जब ससुराल में पूजा करने जाओगी, तब यह अगरबत्ती जरूर जलाना.” माँ […]

लघुकथा

जागरूकता

रेलवे प्लेटफार्म साफ सुथरा चमक रहा था ,सफाई कर्मचारी अभी अभी झाडू लगा कर गया था | एक बेंच पर एक नव विवाहित युगल दंपत्ति बैठा था | पुरुष ने अपने थैले से मूमफली से भरा एक  लिफाफा निकाला | मूमफली से दाने निकालकर प्यार से अपनी पत्नी को दिए | पर छिलके वहीँ प्लेटफार्म […]

लघुकथा

अज्ञानता

अजी सुनते हो,देखो रूपाली के छुने भर से इसमें कीड़े पड़ गए है।अब तो आप मेरी बात को सही मानते हो न, मैं हमेशा कहती थी रूपाली इन दिनों में कुछ ओर ही बन जाती हैं। रूपाली की जेठानी दिशा ने अपने पति रमेश को बुलाते हुए ये सब बात कही। एक छोटे से गांव […]