लघुकथा

पश्चाताप चक्र

सुबह-सुबह भुविका का फोन आया. उसका सुबकना उसके दर्द की दास्तां कह रहा था. पिता ने सुना तो सन्न रह गए! दामाद जी की इतनी हिम्मत! कि जरा-सी बात पर बेटी को थप्पड़ रसीद कर दिया! कितनी शारीरिक-मानसिक पीड़ा हुई होगी मेरी बेटी भुविका को! उसका दोष भी क्या था! बस सेमीनार पर जाते हुए […]

लघुकथा

लघुकथा : सीधी-सच्ची बात

काँइं – काँइं करती हुई लँगड़ी कुतिया अपना टूटा पैर खींचती हुई बाहर चली गई | काकी ने बड़ी जोर से बेचारी कुतिया की पीठ पर डडोका (लट्ठ) जो मारा था | काकी की ये हरकत आर्यन को कतई अच्छी नहीं लगी | वो रुआँसा सा होकर काकी से बोला – ‘काकी तुम बुरी हो, […]

लघुकथा

लघुकथा – “खरी बात”

“वह देखो शर्मा जी कितने खुश रहते हैं ।” “कितने संतुष्ट रहते हैं ।” ” आनंद से कितने लबालब रहते हैं ।” “पति-पत्नी में आपस में कितना अधिक प्रेम है ।” “उनके बच्चे भी उनकी कितनी अधिक बात मानते हैं ।” “बिलकुल सही है ।” ” हम दोनों उनसे कितने ऊंचे ओहदों पर हैं,हमारे पास […]

लघुकथा

शैंडलेयर

समाचार पत्र में सुर्खी- ‘भारत और वेस्ट इंडीज दोनों टीम्स के कप्तान ‘गोल्डन डक’ का शिकार,” देखकर बादल का अतीत मुखर हो उठा था. ”एक समय मैं भी खुद को ‘गोल्डन डक’ समझने लग गया था. तब हर्षा ने ही मुझे प्रोत्साहन का संबल थमाया था. आज मैं सफलता के उस सोपान पर पहुंच गया […]

लघुकथा

लघुकथा : धर्मनिरपेक्ष

नफरत की आग से सारा शहर धू-धू करके जल रहा था और विपक्ष एक जुट होकर सत्तारूढ़ पार्टी को पानी पी पी कर कोस रहा था। आखिरकार सौहार्द की कमान आपके प्रिय नेता जी ने संभाली और रैली में आए लोगों को बताया कि कैसे साम्प्रदायिक ताकतें धर्म के नाम पर नफरत फैला, इस देश का […]

लघुकथा

नई आस

‘‘ऑस्ट्रेलिया के झाड़ीनुमा जंगलों में पिछले साल सितंबर से आग लगी है. करीब 63000 वर्ग किमी जमीन का पूरा पारिस्थितिक तंत्र जलकर तबाह हो गया है. ऑस्ट्रेलिया में आग से अब तक 28 लोगों की जान चली गई है. दो हजार से ज्यादा घर जलकर खाक हो गए हैं.” एक रिपोर्ट. ”तो क्या सब कुछ […]

लघुकथा

मौज का दरिया

”सर, 95 साल की उम्र में भी आप इतने सक्रिय और चुस्त-दुरुस्त कैसे रह पाए हैं?” क्रिसमस की छुट्टियां शुरु होने से पहले ऑस्ट्रेलिया में 75 साल की सामाजिक सेवा-कक्षा की शिष्या प्रियंका ने डेविड सर से पूछा. ”मौजां-ही-मौजां” डेविड सर ने फरमाया. ”वो कैसे सर!” प्रियंका का हैरान रहना स्वाभाविक था. ”आपको पता है […]

लघुकथा

पहली बरसी

सुबह-सुबह जैसे ही वर्तिका ने खिड़की खोली, फूलों-पत्तों को छूकर उनसे वार्तालाप करती 90 साल की ऑस्ट्रेलियन आंटी प्रिटिशा को देखकर सिर्फ ड्राइंग रूम की ही नहीं उसकी यादों की खिड़की भी खुल गई. ”फूलों-पत्तों से वार्तालाप करना मुझे बहुत अच्छा लगता है. जानती हो क्यों?” प्रिटिशा आंटी बोली थीं. ”आंटी प्लीज़, बताइए न!” उसने […]

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विवश

”बंजर भूमि में अब खिलेंगे फूल”. बंजर भूमि में संवेदनाएं शेष थीं, इसलिए वह फूलों की तरह हर्षित थी. ”बंजर भूमि पर उगने वाले कैक्टस में हैं कई प्रकार के औषधीय गुण”. बंजर भूमि अपने कैक्टस के औषधीय गुणों पर गर्वित थी. ”बंजर होता भारत: 30 प्रतिशत जमीन पर नहीं उग रहा अनाज का एक […]

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पापड़वाला

आलोक को निजी नौकरी की आमदनी से घर चलाने में अड़चनें आती देखकर, पत्नी खुशबू ने सुझाव दिया पापड़ बनाने का गृह उद्योग शुरु करने का। सलाह पसंद आने पर, तुरंत हामी भर दी। 100 / 200 ग्राम के छोटे – छोटे पैकेट बनाए और छुट्टी के दिन, सुबह – सुबह साइकिल पर पापड़ों से […]