Category : लघुकथा

  • “लंगोटिया यार” देश विदेश, न जाने मेरे लंगोटिया यार (आज के दौर में कहें तो डायपरिया यार) मित्र हीरालाल यादव जी, अपनी बिना सीट वाली सायकल से लगभग बीस वर्षों से यात्रा कर रहें हैं। परिचय...



  • मोह का दीया

    मोह का दीया

    शाम ढलने लगी थी लेकिन पिछले दो पहर से बंगले के बाहर एक पत्थर पर बैठे बिप्ति के मन में, चौकीदार के बार बार मना करने के बावजूद अभी भी आस का दीया जल रहा था...

  • मैं आज़ाद नहीं !

    मैं आज़ाद नहीं !

    रीना स्कूल से घर के लिए निकली थी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस के खूब रंगारग कार्यक्रम हुए थे, उन सबकी यादें लिए रीना मुस्काती आज़ादी के गानों को गुणगुनाती जा रही थी तभी सुनसान गली जो...


  • लघुकथा : ठहरा हुआ स्वप्न

    लघुकथा : ठहरा हुआ स्वप्न

    चार पहिया वाहन की आवाज सुन बाहर जाकर देखा रक्षा ने । उसके अम्मा-बाऊजी ही थे । नौकर को गाड़ी से सामान उतारने को कह रक्षा भीगे नयनों से भीतर आ गई । सुबह माँ का...

  • लघुकथा : जुगाड़

    लघुकथा : जुगाड़

    न्यू जर्सी के एयरपोर्ट पर लेने आई मिशी को देखते ही वसुधा को अपनी ननद इना की चतुराई का भान हो गया था क्यों की मिशी गर्भवती दिखाई दे रही थी वो भी लगभग पूरे दिन...

  • रक्षाबंधन (लघु कथा)

    रक्षाबंधन (लघु कथा)

    ‘अरे सुनती हो!….. छोटी नहीं आयी क्या राखी बांधने?’ उसे मालूम था, कि उसकी गरीबी के कारण छोटी बहन पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन पर उसे राखी बांधने नहीं आती। वह छोटे के यहाँ जाती है।...

  • लघु कथा : भूखी जान

    लघु कथा : भूखी जान

    उसे भूख लगी थी, परंतु जेब में पैसे न होने के कारण टाउन पार्क में जा प्रकृति के सौंदर्य का नयन सुख और आराम करना ही उसे उचित लगा। पार्क में लगे वाटरकूलर से पानी पी...