Category : लघुकथा

  • चॉकलेट

    चॉकलेट

     किशोर की एक छोटी सी परचून की दुकान थी । अचानक उसकी नजर दुकान के सामने रखे खोखे में से चॉकलेट के  चोरी की कोशिश कर रहे दो अधनंगे गंदे से भिखारी जैसे बच्चों पर पड़ी...

  • “धीमी गति का समाचार”

    “धीमी गति का समाचार”

    आज कल दूरदर्शन पर जितने मनोरंजन के चैनल हैं उससे कहीं अधिक समाचार के चैनल उपलब्ध हैं। हों भी क्यों नहीं, यही एक ऐसा पुख्ता माध्यम है जिससे आम से लेकर ख़ास तरह के लोग अपने...

  • सीख

    सीख

    “गुरु जी एक लघुकथा लिखने का विचार आया है” “तो लिख डालो, किस उलझन में हो! आधार बिंदु क्या है लेखन का?” “एक लड़का और एक लड़की बचपन से पड़ोस में रहते हैं… दोनों के बीच...

  • आधे पति परमेश्वर

    आधे पति परमेश्वर

    धनराज जी अपने बड़े सुपुत्र के लिए लड़की देखने आए हुए थे । मानसी को देखते ही उन्होंने उसे अपने बड़े बेटे हिमेश के लिए पसंद कर लिया था । नाश्ते के दौरान अपने घर और...

  • फर्क नजरिये का

    फर्क नजरिये का

    “तुम्हें हमेशा चाहा वही मिला फिर भी मन में इतना रोष क्यों? ये कैसी पेंटिंग बनाई तुमने,लगा जैसे बेटियाँ आत्मघात कर रही है” चित्र प्रर्दशनी में नैना के पेंटिंग पर छवि ने प्रश्न किया। “आत्मघात ?”नैना...

  • खुशी हो या गम

    खुशी हो या गम

    आज हरिया बहुत खुश था । आज बड़े दिनों बाद बड़े जुगाड़ से उसकी पदोन्नति हुई थी । उसके साथी कमल ‘ अमीर ‘ सरजू और गणेश भी उसकी खुशी में शामिल होने उसके घर आ...

  • मां-बाप का दिल

    मां-बाप का दिल

    कहते हैं कि, एक मिनट में ज़िंदगी नहीं बदलती पर, एक मिनट में सोचकर लिया हुआ फैसला पूरी ज़िंदगी बदल देता है. ऐसा ही किस्सा एक शहर में रहने वाले नरेंद्र के परिवार के साथ हुआ....

  • ऐतराज़

    ऐतराज़

    “एक बात बताइए योगिता जी, जब हमारी शादी तय होकर सगाई की रस्म भी पूरी हो चुकी है, तो फिर आपके माँ-पिता ने हमें बाहर घूमने जाने की अनुमति क्यों नहीं दी? अगर उन्हें अपने होने...


  • माँ

    माँ

    एक गांव में एक किसान दम्पति रहता था। तमाम दरिद्रता के बावजूद वे गँवई जीवन शैली में मस्त रहते थे बस दुःख था की ४०-४२ की उम्र हो जाने के बाद भी कोई संतान नहीं था...