लघुकथा

रिहाई 

अपने पति की नियुक्ति वाले शहर से ससुराल पहुँची मीरा जब रात में सोने का प्रयास कर रही थी तब कानों में किसी के सिसकने का स्वर पहुँचने लगा। स्वर का पीछा करते पहुँची तो वह अम्मा जी की घरेलू नौकरानी के सोने की जगह थी। पूछा, “क्या हुआ?” तो उस 13-14 साल की बच्ची […]

लघुकथा

जबाब

बहुत दिनों बाद आज अपनी एक बचपन की सखी के घर जाना हुआ।वो कुछ दिन पहले ही नए घर में शिफ्ट हुई थी और मुझे बार बार शिकायत कर रही थी कि तू मेरा घर देखने नहीं आई। बहुत दिनों बाद प्रोग्राम बनाते बनाते आखिर आज मैं पहुंच ही गयी उसके घर। घर तो उसका […]

लघुकथा

मन की शांति

एक राजा था जिसे पेटिंग्स से बहुत प्यार था। एक बार उसने घोषणा की कि जो कोई भी उसे एक ऐसी पेंटिंग बना कर देगा जो शांति को दर्शाती हो तो वह उसे मुंह माँगा इनाम देगा। फैसले के दिन एक से बढ़ कर एक चित्रकार इनाम जीतने की लालच में अपनी-अपनी पेंटिंग्स लेकर राजा […]

लघुकथा

कोरोना

“अरे रमेश ! वो अपने कालू अंकल नहीं दिखे पिछले कई दिनों से ? तुझे कुछ पता है ?” “कौन कालू अंकल ?” ” अरे वही …जो हरदम शेखी बघारते रहते हैं। मास्क लगानेवालों पर अक्सर हँसा करते हैं। अभी उस दिन तेरे सामने ही तो बोल रहे थे ‘ कोरोना वोरोना कुछ नहीं ,सब […]

लघुकथा

कोरोना

“अरे रमेश ! वो अपने कालू अंकल नहीं दिखे पिछले कई दिनों से ? तुझे कुछ पता है ?”  “कौन कालू अंकल ?” ” अरे वही …जो हरदम शेखी बघारते रहते हैं। मास्क लगानेवालों पर अक्सर हँसा करते हैं। अभी उस दिन तेरे सामने ही तो बोल रहे थे ‘ कोरोना वोरोना कुछ नहीं ,सब […]

लघुकथा

कर्ज

कैलाश ने एक व्यक्ति से कई वर्ष पूर्व दिए हुए उधार के रुपए वापिस करने के लिए अनुरोध किया। उसका उत्तर था ===== मैं तो आपको पितृतुल्य मानता हूं। और कोई भी संतान कितनी भी अच्छी हो माता पिता का कर्ज इस जन्म में तो कभी भी कोई भी नहीं चुका सकती है। फिर मैं […]

लघुकथा

प्रतिभा की जीत

लोग बताते हैं कि जब निशा पैदा हुई थी, तब परिवार का कोई भी सदस्य खुश नहीं हुआ। शायद लड़के की चाहत पूरी नहीं होने के कारण लोग निराश थे। निशा जब पांच साल की हुई तब उसका नन्हा सा प्यारा भाई पैदा हुआ। घर में सभी बहुत खुश थे। चंद दिनों बाद ही निशा […]

लघुकथा

आईना

बहुत प्यार से अपना नीड़ सजाया था सुमि ने। होनहार बच्चे आज सफलता का मुकाम छू रहे थे। इतने व्यस्त थे कि मां से भी कभी कभार ही बात हो पाती थी। समय बिताने के लिए अक्सर सुमि बंद खिड़कियों से बाहर झांक लेती थी। आज भी सुबह सुबह वह खिड़की से बाहर के दृश्य […]

लघुकथा

खुली खिड़कियां 

बहुत प्यार से अपना नीड़ सजाया था सुमि ने। होनहार बच्चे आज सफलता का मुकाम छू रहे थे। इतने व्यस्त थे कि मां से भी कभी कभार ही बात हो पाती थी। समय बिताने के लिए अक्सर सुमि बंद खिड़कियों से झांक लेती थी। आज भी सुबह – सुबह वह खिड़की से बाहर के दृश्य […]

लघुकथा

लघुकथा – क्षमा याचना

धार्मिक प्रवृति के कारोबारी आत्माराम हर हफ़्ते हाट के दिन अपने दुकान पर ज़रूरतमंदों को सब्ज़ी – रोटी बांटते थे । सुबह से लेकर शाम तक ये सिलसिला चलता रहता था। शाम के समय एक हट्‌टा – कट्‌टा नौजवान आत्माराम के दुकान पर सब्ज़ी – रोटी मांगने आया। आत्माराम ने हाथ जोड़कर उससे माफ़ी मांगते […]