लघुकथा

ईमान- धरम

दल बदल कर आए हुए सत्तर वर्षीय चिर युवा वरिष्ठ नेता पार्टी से अपनी निष्ठा दर्शाने के लिए धुआँधार रैलियाँ कर रहे थे। चुनावी रैली में देर हो जाने के कारण एक दिन उनको रात्रि विश्राम के लिए शहर के सर्किट हाउस में रुकना पड़ा।    कार्यकर्ता उनके लिए शराब और शबाब का इंतजाम करने में जुट […]

लघुकथा

हास्य लघुकथा -` एक दो तीन चार

मेरे दफ्तर के एक सहयोगी पटना जं. रेलवे स्टेशन पर मिल गए। उनके अब तक ग्यारह संस्करण धरती पर प्रकट हो चुके थे। बारहवें की तैयारी भी उन्होंने पूरी कर ली थी। वे अपनी बेगम और पूरी पलटन के साथ कहीं बाहर जा रहे थे। गाड़ी में चढ़ने से पहले उन्होंने तसल्ली के लिए गिनती […]

लघुकथा

साहचर्य

अभी-अभी एक समाचार पढ़ा- “मोरनी के अंडे चुराने पहुंची थी महिला, लेकिन बहादुर मोर ने उसे जमीन पर पटक दिया” मोर सिर्फ खूबसूरत ही नहीं बल्कि बहुत बहादुर भी होता है और उसे भी अपने परिवार की चिंता होती है. बात जब बच्चों के घात पर पहुंचे, तो मोर का महिला को दो-तीन पटखनियां देना […]

लघुकथा

दुखती रग

सुबह-सुबह न जाने  रोहित किस बात से  झुंझलाया हुआ था. शालिनी का भी मन अच्छा नहीं था। ‘इस घर में कोई भी चीज जगह पर नहीं मिलती’ रोहित बड़बड़ाया ‘मेरी एक फाईल नहीं मिल रही है शालिनी तुम ने देखी है’? ‘वही रखी होगी अपनी कोई सामान जगह पर नहीं रखते और मुझ पर चिल्लाते हैं’ […]

लघुकथा

आज कल इंसाफ

परी और मौर्य मोटर साइकिल पर जा रहे थे। परी और मौर्य की नई नई शादी हुई थी तो कुछ गहने भी पहन रखे थे।दोनों मस्ती से चलचित्र देख घर की ओर जा रहे थे।नई शादी और दोनों का साथ में मोटर साइकिल पर बतियाते हुए जाना दोनों के लिए काफी रोमांचक था।हल्की बारिश भी […]

लघुकथा

एक विद्रोह ऐसा भी!

जहां राजनीति में, समाज में, घर में, देश में जहां देखें उधेड़बुन और उठापटक के कारण रक्तरंजित विद्रोह का ही राज दिखाई दे रहा था, श्यामापुर सौहार्दपूर्ण विद्रोह की मिसाल बना हुआ था. यह विद्रोह एक चौपाल से शुरू हुआ था और देखते-ही-देखते पूरे श्यामापुर में व्याप्त हो गया. चौपाल में शादी-ब्याह में फिजूल खर्ची […]

लघुकथा

स्कूल चलें हम

स्कूल चलें हम 💼✏️ टकटकी बांधे सलोनी की लड़की स्कूल जाते बच्चों को देखा करती l उसकी आंखों में स्कूल न जाने पाने का दर्द संध्या सदैव महसूस करती थी l सलोनी घर में काम करने वाली एक बाई थी l एक दिन अरे सलोनी कितने बच्चे हैं तुम्हारे संध्या ने पूंछा ? जी छः,तीन […]

लघुकथा

सुर का जादू

एक शहर में चूहों का आतंक बहुत बढ़ गया था।घर,खेत और खलिहानों में खाद्य सामग्री को खा तो जाते थे और खाने से ज्यादा  व्यय करतें थे।पूरा गांव परेशान रहता था और गांव के बुजुर्गों का मानना था कि अगर यही हाल रहा तो गांव भुखमरी की चपेट में आ जायेगा।गांव का एक आदमी व्योपार […]

लघुकथा

साहस

“मनू मेरा तो हुआ अब तेरा क्या होगा” गाना चल रहा था. संगीता के मन में विचार-लहरियां आ-जाकर अपनी झलक दिखा रही थीं. संगीता के घर में और चैंबर में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता है “एडवोकेट संगीता”. पढ़ने में रुचि न लेने वाली सामान्य घराने की संगीता ऐसे ही एडवोकेट नहीं बन पाई! पिता […]

लघुकथा

बुनावट

मीनल यों तो बहुत मिलनसार थी, पर उसकी थोड़ी-सी ईर्ष्यालुता ऐसे थी जैसे चंद्रमा की खूबसूरती में छोटा-सा दाग! उसके पड़ोसी हितेश के परिवार में चार बहनें थीं और चार भाई. कोई भी शादी-गमी हो आठों भाई-बहन सपरिवार इकट्ठे होकर खुशी को द्विगुणित-अगणित कर देते और गम को गला देते. मीनल के लिए बस यही […]