लघुकथा

आधुनिकता

आधुनिकता छुट्टी का दिन था. सभी अपने घर में ही थे. बिल्डिंग के बच्चे हमारे फ्लोर पर ही खेल रहे थे. निशा का घर ऐसा था, जहां बिल्डिंग के सभी बच्चे अपनी मनमानी और खेल-कूद किया करते थे. निशा और राहुल को बच्चों से बहुत लगाव था, ऐसा नहीं कि उनका अपना खुद का कोई […]

लघुकथा

सनम तेरी कसम!

आत्महत्या करने का वह पल टल गया था. निधि बहुत खुश थी. उसे दादी के फोन की बात याद आ रही थी. ”सात समंदर पार मैं तेरे पीछे-पीछे आ गई.” रेडियो पर गाना चल रहा था. ”सचमुच मैंने यही तो किया था!” निधि सोच के समंदर में डूब गई थी. निमेष के लिए उसने सारे […]

आत्मकथा लघुकथा संस्मरण

पड़ोसियत

आज सुबह उठतेही, मैं मेरा रोज का काम करने मतलब पानी भरने घर के बाहर निकली| अपने दो गुंडी उठाके बड़ी माँ के घर के नल के पास पोहच गई| नल के टाके में मैंने देखा तो पानी कुछ ज्यादा ही भर गया था| इसके वजह से गुंडी भरने में मुझे दिक्कत हो रही थी […]

लघुकथा

प्रवाह

”हिंदी दिवस मना लिया?” उसने पूछा. ”अन्य दिवसों की तरह मनाने को तो हिंदी दिवस मना लिया, पर हमारे लिए तो हर रोज हिंदी दिवस होता है.” नम्रता ने नम्रतापूर्वक कहा. ”पर आप कौन हैं? और आप इतनी उदास क्यों हैं?” ”मैं हिंदी हूं, जिसे तुम लोग भारतमाता के मस्तक की बिंदी कहते हो.” हिंदी […]

लघुकथा

लघकथा : धर्मनिरपेक्ष

धर्मनिरपेक्ष (कहानी में मुहावरों का प्रयोग) *नफरत की आग* से सारा शहर *धू-धू करके जल* रहा था और *गिरगिट की तरह रंग बदलने* वाला विपक्ष एक जुट हो सत्तारूढ़ पार्टी को *पानी पी पी कर कोस* रहा था। आखिरकार सौहार्द की कमान *दो धारी तलवार* वाले आपके नेता जी ने संभाली और *एड़ी चोटी का […]

लघुकथा

लघुकथा- नाॅन खटाई

मम्मी ….आज तो मैं  सोच ही ली हूँ ….मैं  उसे मना ही कर दूंगी….रोज-रोज  मेरी गली न आया करे। तभी गली के नुक्कड़ से तेज आवाज…..आइये …आइये गरमा-गरम ……..मेरठ की मशहूर-स्वादिष्ट  नाॅन-खटाई बिस्कुट आ गयी ……बच्चों का दिलखुश बिस्कुट ….जी न ललचाए …मुन्ने की बात मानिये….  तभी मिट्ठू …मम्मी देखो न…आ गयी नाॅन-खटाई आज ज्यादा […]

लघुकथा

लघु कथा – श्रद्धा या श्राद्ध

पास वाले कमरे से बर्तन को जोर जोर से पीटने की आवाज आ रही थी ,लेकिन सुधा अपनी बहन से बात करने में मगन थी । बहू ने पास आकर सासू माँ से कहा ….माँ जी ,लगता है अम्माजी को कुछ चाहिए ।आप जाकर देख लीजिए मैं रसोईघर में हूँ ।सुधा ने बड़े ही अनमने […]

लघुकथा

वेस्ट से बेस्ट

कुछ दिनों से सविता देख रही थी. सोसाइटी के पॉर्क में माली काम कर रहा था. बारिश में दूब बहुत बढ़ गई थी, वह उखाड़ता जा रहा था. बीच-बीच की दूब तो उसने उखाड़ ली, लेकिन किनारों पर उसने क्रिकेट की पिचें-सी बना दीं. एक बारिश पड़ते ही पूरा पॉर्क हरी-हरी दूब से पट गया. […]

लघुकथा

पत्र

मेरे जीवन साथी हृदय की गहराईयों में तुम्हारे अहसास की खुशबू समेटे आखिरकार अपनी बात कहने का प्रयास कर रहा हूँ।यह सही है कि मुझे गुस्सा कुछ अधिक ही आता है,मैं समझता भी हू्ँ, पर क्या करूँ तुम साथ होती तो शायद कुछ बदलाव हो भी जाता ,पर ये नापाक पाक के समझ में कहाँ […]

लघुकथा

तृप्ति

पंडित जी सुबह से आज बहुत खुश है ।उनके पुराने यजमान के यहां उनके बेटे ने यजमान के श्राद्ध के उपलक्ष में बड़ी पूजा रखी है और उनको बुलाया है। पंडित जी अपने दैनिक क्रिया से निवृत्त हो समय पर पहुंच जाते हैं ।आज के इस कलयुग में पुराना विशाल हवेली जैसा घर जिसके अंदर […]