लघुकथा

उसकी उम्र बढ़ गई

गर्मी के दिनों में छत पर सोया था। सपने में देखा कि गर्मियों की छुट्टियों में श्यामलाल के यहाँ उनकी साली आई । श्यामलाल की पत्नी की आवाज बहुत ही सुरीली थी। वो अपनी नन्ही सी बेटी को अक्सर  लोरी गाकर सुलाती थी। पहले जब  वो लोरी गा रही  थी। तब श्यामलाल की सालीजी ने उस लोरी को […]

लघुकथा

चरणबद्ध परीक्षा

आप अपने बच्चों को रूस से डॉक्टरी पढ़ाइये या एम्स से ! बशर्त्ते, उसे डॉक्टरी आनी चाहिए ! मेरे लिए उमा डॉक्टर ही ठीक थे, जो पढ़े कहीं नहीं थे, अभ्यास के दम पर सटीक दवा देते थे और इंजेक्शन देने में उन्हें महारत हासिल था, हम उफ तक नहीं कहते थे और हमें पड़ […]

लघुकथा

तीसरा हाथ

रोज रोज की कलह से उकता चुकी थी नीरू। सास के तानों से उसके कान पकने लगे थे। हर झार मंगरैले पर की तर्ज पर किसी भी बात को वह नीरू को बदजात कह उसकी ओर ठेल देती थी। अपने बेटे की मौत का कारण भी नीरू को ही मानते हुए कहती रहती थी कि […]

लघुकथा

आज जो बीता

हरिशंकर नायक में वर्मा जी और सुमंत जी मिले. BD भी साथ थे. वर्मा जी और सुमंत जी का रिस्पांस ठीक नहीं था. सुमंत तो बगैर किसी अभिवादन के टोक दिया कि श्वेता जी के मार्फत आपको ड्राफ़्ट के लिए कहा था, परंतु आपने नहीं किया. पहली मुलाकात में सुमंत जी के इस व्यवहार को […]

लघुकथा

लघुकथा : भाभी – माँ

          पिता के देहावसान के बाद संजय की स्थिति बद से बदतर हो गयी थी। घर-परिवार, गली-मुहल्ले व सगे-सम्बंधियों में अपनी शराबखोरी के चलते वह सबकी नजरों से गिर हो चुका था। जब बड़े भाई निहाल को ही वह फूटी आँख नहीं सुहाता; तो भाभी अरूणा का पुछो ही मत। यह […]

लघुकथा

लघुकथा – मंहगाई

आज फिर बढ़ गये गैस के दाम अब आजका खाना कैसे बनेगा। लकड़ी की व्यवस्था तो हो जाएंगी।पर उसके धुएं से मेरा दम ही घुट जाएगा।वोट लेने का समय आते हैं।फिर नहीं आते अपने मुंह दिखाने अरे बेटा मंहगाई आज से नहीं बढ़ी वो तो बहुत दिन हो गए हैं। हां पापा हो तो गये हैं लेकिन उस समय सिलेंडर 900 […]

लघुकथा

कांच की दीवार

आज माधवी और अमर में फिर वाद विवाद होगया । इतनी उम्र साथ साथ व्यतीत होने के बाद भी कभी कभी तकरार भयंकर रुप ले लेती है। ऐसा नहीं कि दोनों में प्यार नहीं। एक के बिना दूसरा नहीं रह सकता।  दोनों बेटियों की शादियाँ होगयी । बेटे की भी शादी हो गयी फिर भी […]

लघुकथा

हरतालिका तीज

“अच्छा-खासा मूड था आपका, यूँ अकस्मात आपके सलोने चेहरे पर तनाव की बदलियाँ क्यों मँडराने लगी मोहतरमा? आपकी शान में कोई गुस्ताखी की हो, याद नहीं। समस्या को जुबाँ तक आने का कष्ट दें तो मदद करूँ।” “यह सास बहू का मामला है, यहाँ आपकी पैंतरेबाजी काम नहीं आएगी।” “बताओगी तब समझूँगा। तुम्हारी पहेलियों से […]

लघुकथा

बन्दिशें

पूर्वाकी शादी को अभी 6 महीने ही हुये थे पर उसके चेहरे की रौनक और हंसी पता न कहां चली गयी । एक उन्मुक्त चंचल हिरणी की स्वतंत्रता पर जैसे अंकुश लगा दिया हो ससुराल में उसके हंसने बोलने सब पर बन्दिशे लग गयी ।एक महीना तो घूमने फिरने में निकल गया पर उसके बाद […]

लघुकथा

लाल दाग

कमली और उसका बड़ा भाई मुन्ना दोनों नट थे । दोनों के पिता एक दुर्घटना में खत्म हो गये । दोनों अपने पिता से ही ये करतब दिखाने की कला सीखे थे। अक्सर नट कहीं भी ये करतब दिखाने शुरू करते हैं और भीड़ इकठ्ठा हो जाती है , फिर जब खेल खत्म होता है […]