Category : लघुकथा

  • खोज

    खोज

    आत्महत्या करने के इरादे से वह घर से निकला था, लेकिन अब खोज में चल पड़ा था. उसे खुद भी हैरानी हो रही थी. स्मृतियों ने अपना पिटारा जो खोल दिया था. वह रात को आत्महत्या...

  • लघुकथा -बहकते कदम

    लघुकथा -बहकते कदम

    “देख नीति, तू ऐसा वैसा कुछ करने की सोचना भी मत| मनीष अच्छा लड़का नहीं है, माना कालिज में तुम्हारा अच्छा मित्र है | उसके साथ अधिक निकटता या विवाह का सोचना ठीक नहीं ,”उसके घरवाले...

  • कृपाशंकर

    कृपाशंकर

    आंसू किसी के भी हों, देखकर चुप रहना मुश्किल होता है. कृपाशंकर के साथ भी ऐसा ही था, हालांकि अपने आंसू पी लेने में वह बचपन से ही माहिर हो गया था. मरता करता भी क्या...

  • पार्सल।

    पार्सल।

    अवि दरवाजा खोलने के लिए उठा ही था कि रीना भागती पहले आ गई, वो… मेरा पार्सल आना था ” रीना की आवाज़ और चेहरे के भाव साफ़ बता रहे थे कि वो नहीं चाहती कि...

  • देर-सवेर

    देर-सवेर

    लोकसभा चुनाव के चलते अंधभक्ति के न जाने कितने उदाहरण देखने को मिल रहे थे. इस अंधभक्ति के चलते अभद्र भाषा की मानो होड़-सी लगी हुई थी. 70 साल से तो ऐसी अभद्र भाषा कभी देखी-सुनी...

  • तीसरी आंख

    तीसरी आंख

    एक आंख से धुंधला दिखने पर कैटरैक्ट के ऑपरेशन की सलाह दी गई थी. ऑपरेशन के बाद मनीषा की उस आंख पर पट्टी बांध दी गई थी. अब कुछ समय तक एक आंख से ही देखना...

  • राही

    राही

    वह फूलों के मेले देखता-गाता-गुनगुनाता चला जा रहा था और झमेले को भुलाने की कोशिश कर रहा था- ”यूं ही चला चल राही, यूं ही चला चल राही, कितनी हसीन है ये दुनिया भूल सारे झमेले,...


  • सात रंग का सावन

    सात रंग का सावन

    अनुज स्नेह। सात रंग मन में समाए हुए गत वर्ष जब पीहर में तुम्हारी कलाई पर राखी सजाई थी तो शगुन की साड़ी के साथ तुम्हारा पवित्र ममत्व स्नेह प्यार भी मिला था। कुछ महीनों पूर्व...

  • आज के घर

    आज के घर

    “कार्यक्रम मेें मिलकर अच्छा लगा ।” उसने कहा,”ऐसे कार्यक्रम जल्दी-जल्दी होना चाहिए, ताकि हम सब मिल सकें ।वैसे तो कहाँ मिलना हो पाता है ?” किसी ने भी, किसी को भी, भूले से भी अपने घर...