लघुकथा

संगम

”गौरव जी इस मंच पर कम ही आते हैं पर जब उनकी रचना आती है साहित्य का संस्कृति से संगम हो जाता है.” एक संदेश आया. उसके तुरंत बाद उसी मंच पर गौरव भाई का एक प्रेम-गीत अवतरित हुआ- ”प्रेम को प्रेम में हमने ऐसे गढ़ा!!” गौरव भाई ने यह गीत फरवरी के पहले सप्ताह […]

लघुकथा

माँ की ममता

माँ की ममता —————- ‘ भारत रिसर्च सेंटर ‘ के मशहूर वैज्ञानिक डॉ रस्तोगी आज बेहद प्रसन्न नजर आ रहे थे । उन्होंने यंत्रचालित मानव के सॉफ्टवेयर प्रोग्राम में तरह तरह की भावनाएं डालने की तकनीक विकसित कर ली थी । दुनिया भर के वैज्ञानिक उनकी इस उपलब्धि का साक्षात्कार करने के लिए भारत रिसर्च […]

लघुकथा

चुप्पी

अल्मारी की सफाई करते हुए उसे मिली वह 50 साल पुरानी चिट्ठी, जो उस जमाने के एक आने के पोस्ट कार्ड पर लिखी हुई थी। शादी के बाद वह फेरा करने पति के साथ पहली बार दो दिन के लिए मायके गई थी तब। बस से महज पांच घंटे की ही यात्रा थी। अभी घर […]

लघुकथा

चौथा बेटा

रामकली और फूलकली आज अपने ही घर में पराई हो गई हैं. तीन बेटों की मां रामकली ने कभी भी तीन बेटों के होने पर गर्व नहीं किया था, लेकिन इतना भी नहीं सोचा था, कि पति रामलुभाया का शरीर शांत होते ही तीन बेटे घर को बेचकर हिस्सा-पत्ती कर लेंगे और मां-बहिन को गेहूं […]

लघुकथा

आत्मिक सुख!

उसकी एक कविता ‘चौबारे पर कबूतर’ पर प्रकृति प्रेमी इंद्रेश उनियाल की प्रतिक्रिया आई थी- ”मैंने अपने घर में एक विशेष स्थान बनाया है जिसमें कबूतर आकर विश्राम करते हैं, विशेषकर गर्मियों के समय उन्हें छाया मिलती है. गौरेयाओं के घोंसले बनाने के लिये लकड़ी के घर लगाये हुए हैं. और वृक्षों पर भी विभिन्न […]

लघुकथा

हम सब साथ-साथ जो हैं!

”अगर मैं सूइसाइड करता हूं, तो इस अपराध की क्या सजा होगी.” समीर ने यह ट्विट देखा, जो नीलेश बेडेकर ने अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया था. ”कौन है यह नीलेश! क्यों आमादा है सूइसाइड करने को! क्या आदमी की जान इतनी सस्ती है!” ऐसे ही अनेक प्रश्न समीर के अंतर्मन को झिंझोड़ गए. […]

लघुकथा

लघुकथा – उम्मीद अभी ज़िन्दा है

“देखो मिस्टर राजेश हमें अपनी कंपनी के लिए एक अनुभवी आदमी की ज़रूरत है ।” “वो तो मैं हूं ।” “पर हमें मेहनती आदमी की रिक्वायरमेंट है ।” “डेफीनिटली मैं वैसा ही हूं ।” “पर आदमी पूरी तरह से ईमानदार भी होना चाहिए ।” “वो भी मैं हूं ।” “आदमी पूरी तरह से सच्चा भी […]

लघुकथा

वह भूखी होगी

“अरे आज लंच ब्रेक में छुट्टी लेकर घर जा रहे हो” ” हाँ यार ..आज टिफ़िन लाना भूल गया” “तो आ न …आज मेरे साथ खाना खालो ..मैनै तेरी पसंद के रैस्टोरेंट से ही मंगाया है …आ जा ” रमेश खाना प्लेट मे सर्व करते हुए बोला । ” नही यार ….वो क्या है न […]

लघुकथा

तरकीब!

”दादी मां, आज मैं अपने दोस्त को घर ला सकती हूं?” पोती ने पूछा. ”आजकल तो जमाना बदल गया है, पर तुम्हारी बात सुनकर मुझे 50 साल पुराना अपना किस्सा याद हो आया.” दादी मां की यादों का पिटारा खुल गया. पोती भी सुनने को उत्सुक थी. ”हुआ यह कि एक बार मैं जब कॉलेज […]

लघुकथा

टेनिस एल्बो

दो दिन में ही टेनिस एल्बो के दर्द में पूरी राहत पाने पर देवेश को दो दिन पहले की बात याद आ रही थी. ”थककर बैठा हूं, हारकर नहीं, सिर्फ बाजी हाथ से निकली है, जिंदगी नहीं.” मैंने अपने एक ग्रुप के सभी मित्रों को फेसबुक पर यह संदेश भेजा. ”मैं सचमुच घबरा ही गया […]