Category : लघुकथा

  • लघुकथा : पिछलग्गू

    लघुकथा : पिछलग्गू

    पिछलग्गू =========== सुरेश, किशोर के पीछे-पीछे लगा रहता था, वह कुछ भी बोलते, उनको दाद देता कि “वाह सर क्या बात कहीं आपने” वह उसके सीनियर जो थे| सभी आफिस वाले उसके इस हद से ज्यादा...

  • लघुकथा —   गरीब कौन

    लघुकथा — गरीब कौन

    ”  मसाले का  ,कपडे धोने का पत्थर लाया हूँ  बाई ….”  सामने के घर पर घंटी बजाकर  एक आदमी ने कहा . ” अच्छा ,कितने का है भैया ” ” 150रू  का सिल बटना है , 200 रू कपडे...


  • लघुकथा : कक्षौन्नति

    लघुकथा : कक्षौन्नति

    बात उन दिनों की है जब मैं चौथी कक्षा में थी | अंग्रेजी विषय तो जैसे अपने छोटी सी बुद्धि में घुसता ही ना था| और अंग्रेजी की टीचर भी बड़ी खूसट किस्म की थी| मारना...

  • लघुकथा : संस्कार

    लघुकथा : संस्कार

    सुमन बदहवाश सी घटना स्थल पर पहुंची, अपने बेटे प्रणव की हालत देख बिलखने लगी| भीड़ की खुसफुस सुन वह सन्न सी रह गयी, एक नवयुवती की आवाज सुमन को तीर सी जा चुभी “लड़की छेड़...

  • अपनों से जीत की हार

    अपनों से जीत की हार

    चन्द्र बाबु के पैर कोर्ट जाते हुए कांप रहे थे। पर एक आदर्श शिक्षक के रूप में अपने जीवन को आदर्श सिधान्तो के साथ व्यतीत किया था। तो आज अन्याय कैसे सहते ? बेटे की शादी...

  • खड़ी फसल

    खड़ी फसल

    शिक्षक दिवस की शुभ कामनाएं ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ गुरु के पद कमलो में देहूं सिर नवाय ज्ञान दे उपकार किया ईश्वर से मिलाय ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ खड़ी फसल ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ आज गाँव की विद्यालय में अर्धवार्षिक परीक्षा का प्रथम दिन था...

  • वफादार

    वफादार

    चालीस वर्ष पहले की बात है कि मेरे पिता जी की मृत्यु हो गई। पता लगते ही हम गाँव जा पुहंचे। मेरे पिता जी सारी ज़िंदगी अफ्रीका में गुज़ार कर हमेशा के लिए गाँव आ गए...

  • लगाव (लघु कहानी)

    लगाव (लघु कहानी)

    “बुढऊ देख रहें हो न हमारे हँसते-खेलते घर की हालत!” कभी यही आशियाना गुलजार हुआ करता था! आज देखो खंडहर में तब्दील हो गया|” “हा बुढिया चारो लड़कों ने तो अपने-अपने आशियाने बगल में ही बना...

  • नई राह

    नई राह

    जब भी रीना ने अपनी माली हालत सुधारने के लिए घर से बाहर जाकर कुछ करना चाहा, सास हीरा देवी उसका रास्ता रोक लेती । अब रीना करे तो क्या करे! दो बच्चो और सास को...