लघुकथा

लघुकथा – माँ मरी नहीं

रविवार की सुनहरी धुपहरी दोपहर को बच्चों के साथ खेलती विनी सहसा चक्कर खा कर गिर पड़ी तो घबरा कर वसुधा उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर ने पूरी तरह जांच कर बताया,” बच्ची में खून की बहुत कमी है… कुपोषण की शिकार है। यह ठीक से खाती-पीती नहीं है क्या?” ” ऐसी […]

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लघुकथा – अंतर्मन की औरत

सर्दियों की एक सूनी सुरमई साँझ थी वह,रश्मि पीहर गई हुई थी,जब माँ ने रजत के सामने अपने मन की बात रखी,” रजत!बेटा! रश्मि हर बात में इक्कीस है तुमसे… सुंदर है,तुमसे ज़यादा पढ़ी-लिखी है, ऊँचे ओहदे पर है,ज़्यादा कमाती है और दिल तो देखो लड़की का कि अपनी कंपनी से लोन ले कर गाड़ी […]

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लघुकथा – वाह रे अपनत्व

झिनकू भैया दौड़-दौड़ के किसी को पानी पिला रहे हैं तो किसी को चाय और नमकीन का प्लेट पकड़ा रहें है। किसी को सीधे-सीधे दोपहर के खाने पर ही हाल- हवाल बतला रहे हैं। सुबह से शाम जब भी किसी का झोला उठ जाता तो उसको बस पकड़ा रहें होते हैं। कभी सामान से भरी […]

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लघुकथा – सब तन कपड़ा

‘एक तो घर में जगह नहीं ऊपर से नये कपड़े चाहिए, परन्तु पुराने किसी को देने को कहो तो मुहं बनता है |’ भुनभुनाते हुए थैले सहेजती | बच्चे सुनकर अनसुना कर देते | पुराने थैले को खोल देखती फिर छाँट कर एक-दो कपड़े निकाल बच्चों को पहनने को कहती रमा| लेकिन अलमारी के कोने […]

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लघुकथा : परिवर्तन

‘सुनो आज मैंने घर के बगल में वन बी एच के वाले दो फ्लैट्स देखे हैं एक मे हम लोग रहेंगे और एक में तुम्हारी माँ, मुझे उनकी सूरत कभी नही देखनी जब देखो तब हर वक़्त सामना हो ही जाता है ।’ ‘पर नेहा तुम समझती क्यों नहीं अब तो पापा भी नही हैं माँ […]

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दादी का दर्द

दादी दादी… कहता छोटा सा कृत्तिन भागता हुआ दादी के गले लगकर बोला दादी आप जल्दी से तैयार हो जाओ डाक्टर के पास जाना है। दादी को बहुत दर्द था पेट में, दादी जानती थी कि पता नहीं डाक्टर क्या करेंगे कोई सुई लगा देगा कोई कुछ कहेगा कहीं अस्पताल न भर्ती कर लें। वह […]

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लघुकथा – दिवा स्वप्न

मम्मी के मंगल-सूत्र , दादाजी की ड्रेस , भाई के मोबाइल और सेठजी के तकाजे के बीच रीना ने कहा, ” बापू ! मेरी १२ वी बोर्ड की परीक्षा की फीस जमा हो जाएगी ना ?” ” हाँ , रीना बिटिया ! देखता हूँ ,” बापू ने बेमौसम बरबाद हुई फसल के राहत के चैक को […]

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वफ़ा के दायरे

“बख्श दे ख़ता, गर ख़ता की सजा है ये जिंदगी। दुआ या बददुआ, अब सही नहीं जाती ये जिंदगी।” खाने की ओर नजर भर देख उस्मान मियां ने खुदा की इबादत में हाथ ऊपर उठा दिए। कभी जिंदगी को अपने अंदाज में जीने वाले उस्मान मियां अब पेट की आग भरने के लिए भी दुसरो […]

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पत्थर का शेर

पंडित लीलाधर मिश्र अपने पांच वर्षीय बेटे ओंकार के साथ मंदिर गए । एक विशाल प्रांगण के बीचोबीच भव्य मंदिर बना हुआ था । सीढियाँ चढ़कर मंदिर के दालान में एक शेर की पाषाण प्रतिमा दृष्टिगोचर हुयी । प्रतिमा बहुत ही सुन्दर और जीवंत शेर सा प्रतीत हो रही थी । पंडित लीलाधर ने आगे […]

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लघुकथा – भूल

सुबह होते ही रीतू का झुंझुलाना शुरु हो जाता है.और जब तक सो न जाये तब तक उसका यह नित्य कर्म चलता रहता है.बोली पता नहीं कहा से आ मरना था उन्हें भी खुद तो मौज कर रहे हैं और मेरा जीना मुश्किल कर दिये हैं. मेरा हंसता खेलता परिवार उजाड़ दिया.अब न चैन से […]