लघुकथा

लघुकथा – अर्धांगिनी

” सुनंदा!ओ सुनंदा !पानी ही डालती रहोगी या भोजन भी परोसोगी।” आंगन में तुलसी के पौधों को पानी डाल जब सुनंदा पीछे की ओर मुड़ी तो उसे अपने पति की वही झल्लाहट भरी आवाज सुनाई पड़ी। सुनंदा एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार की अकेली लड़की थी । वह कम पढ़ी- लिखी सांवली सूरत वाली थी । सुनंदा […]

लघुकथा

लघुकथा – पाचन शक्ति

          तरबूज़ खाते-खाते निहारिका बार-बार दादी से तरबूज़ खाने का इसरार किए जा रही थी और दादी बार-बार खाने से इन्कार कर रही थी। तभी निहारिका की मांँ ने कहा, “रहने दे न बेटा। तुम्हें पता है इस उम्र में पाचन शक्ति कमज़ोर हो जाती है।”           […]

लघुकथा

कुत्ते की वफादारी

हमीर ने जैसे ही घण्टी बजाई, कुत्ता भोकने लगा । रघुवीर ने कहा – “आ जाओ, डरो मत, ये काटेगा नही ।” बैठते हुए हमीर ने पूछा – “आपको कुत्ता पालने का शौक कब से हो गया ?” रघुवीर -“एक दिन पड़ौसी परिवार के साथ हम पिकनिक मनाने गए हुए थे । अचानक पड़ौसी की […]

लघुकथा

देहदान

परिवार की पुरानी एलबम देखते-देखते अचानक दादी-दादा जी की खुद द्वारा खींची गई एक तस्वीर देखकर मनीषा अतीत की विस्मृतियों में खो-सी गई. ”कितनी प्यारी लग रही है दादी-दादा जी की यह जोड़ी! जीवन की सांध्य-वेला में सिडनी की सांध्य-वेला के चांद को निहारते हुए, लिए हाथों में हाथ, निभाते हुए एक दूसरे का साथ.” […]

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बहार खिल उठी थी!

वीरेन की वीरान जिंदगी में बहार आ गई थी. कुछ दिन पहले ही वह बड़ी मग्नता से अपने खेतों में हल चला रहा था. उसके दोनों प्यारे-प्यारे बैल गोलू-मोलू भी खुश नजर आ रहे थे. तभी एक नौजवान बड़ा-सा कैमरा संभाले आया और उसने वीरेन का फोटो उतारकर वीरेन को दिखाया. फोटो देखकर वीरेन हैरान […]

लघुकथा

बेघर

मीना और अजय  अपने घर- बार छोड़ कर प्रदेश कमाने आये थे|दोनों पति-पत्नी ईट के भट्टे मे काम किया करता  था |दोनों की सोच थी हम मिलकर काम करेंगे और रूपये को इकट्ठा कर अपना एक अच्छा मकान बनाएंगे |इस आशा से मिना और अजय दिलों जान से काम किया करता था |ईट भट्टे के […]

लघुकथा

‘हाड़… हाड़’

”आप जैसे विचार करेंगे वैसे आप हो जाएंगे, अगर अपने आप को निर्बल मानेंगे तो आप निर्बल बन जाएंगे, और यदि आप अपने को समर्थ मानेंगे तो आप समर्थ बन जाएंगे.” उसने पढ़ा और खुद को समर्थ बनाने के लिए डर को भगाने का संकल्प उसके मन में उमड़ा. उसने खुद से कहा. ”डर एक […]

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लघुकथा – मां होना कोई गुनाह नहीं

देवपुरा निवासी पुनीत ने पत्नी संध्या से कहा! देखो घर के बाहर कोई बैल बजा रहा है। संध्या ने दरवाज़ा खोला कर देखा तो एक 23 वर्षीय युवती थी l जिसके आंसू  रुक नहीं पा रहे थे। संध्या ने पूछा! क्या हुआ रो क्यों रही हो। चुप होकर बताओ क्या बात हुई है। और नाम क्या […]

लघुकथा

बाबूजी

बाबूजी को तब से जान रहा हूँ, जब मैं कक्षा 3 या 4 का छात्र था ! वे हमारे यहाँ अक्सर आते थे, रात भी ठहरते थे, तब सिर्फ स्वजाति के विकास से संबंधित बातें ही होती, जिनमें मेरे दादाजी, उनके भाई नवीन दादा, कृष्णमोहन दादा, अयोध्या दादा, फणीभूषण दादा, चंद्रमोहन फूफा, मेरे चाचा इत्यादि […]

लघुकथा

यशोदा

डोरबैल बजते ही मैने दरवाजा खोला सामने मुश्किल से दो महीने के बच्चे को गोद में लिए मेरे घर में काम की सहायिका यशोदा खड़ी थी। मैं हतप्रभ सी देखती रही और उसे अन्दर आने को कहा। मैने एकदम पूछा , अरे यह किसके बच्चे को लेकर आई हो। इतना छोटा और मुझे तो यह […]