लघुकथा

पलंग-पलंग स्वाहा

मेरे दादाजी कहा करते थे कि उनके दादाजी ‘पलंग’ पर कभी नहीं सोये, दादाजी के पिताजी यानी मेरे परदादा भी पलंग पर कभी नहीं सोये थे ! मेरे दादा तो पलंग पर सोये ही नहीं ! मेरे पिताजी ‘पलंग’ पर नहीं सो रहे हैं और मैं भी नहीं सो रहा हूँ और मैंने अबतक विवाह […]

लघुकथा

लघुकथा – अपनी भाषा

किशोर से रामु हरिया के बारे में कहते हुए बोला, “अरे किशोर, वह हरिया पता है”? “कौन सरपंच का लड़का” हामी भरते हुए रामु बोला “शहर से पढ़-लिखकर लौट के आया”। मैंने पूछा “कैसे हो हरिया? वह मुझसे कुछ अंग्रेजी में गिटर-पीटर करने लगा। किशोर ने जवाब देते हुए कहा “देख भाई रामु, हम लोग […]

लघुकथा

हीन दी

इंग्लिश मेम को हीन’दी डे की शुभकामनाएं ! अंग्रेजी के उजाले में, किसी नीली दुपट्टा और पीली सूट वाली इंग्लिश मेम साहिबा को ‘आई लव यू’ कहते हुए और अंगिका का ‘मरगिल्ला भात’ खाते हुए तीज़ के ठेकुआ वाली को ‘साढ़े 3 बजे मुन्नी जरूर  आना’ गाते हुए अब सिरफ साढ़े 8 घण्टे  के लिए […]

लघुकथा

सहाब कौन?

सहाब,दस रुपए दे दो। क्या करेंगा, दस रुपए का? सहाब,ने गरम चाय की चुस्की लेते हुए कहा। सहाब, मैं गरम चाय पी लूँगा। दस रुपए क्यों चाहिए, चाय पिला देता हूँ? सहाब,कहते-कहते, वह चुप हो गया। सहाब ने चाय वाले से कहा,इसे भी एक कप चाय दे दो। चाय वाले ने हाँ, में सिर हिलाया […]

लघुकथा

काबिल

आप भी कमाल कर रहे हो। इसमें कमाल की क्या बात है? समझतें क्यों नहीं,जिस आदमी की जात का पता नहीं, उसे अपनी इकलौती बेटी कहते-कहते वह कुछ गम्भीर हो गई? आखिर तुम कहना क्या चाहती हो? खुल कर कहो। सब कुछ मैं ही कहूँ। आप तो कुछ समझते ही नहीं हो। सारी दुनिया में […]

लघुकथा

आक्रोश का अंत

चारों तरफ आक्रोश फैल गया था, क्योंकि एक देश के जाने माने कलाकार की हत्या उसकी काबलियत को खत्म करने के लिये किया गया था,मेरे महल्लें में जो लोग अपने आसपास के चेहरे को पहचानते भी नहीं थे,न कभी एक-दूसरे से मिलते-जूलते थे, आज इस घटना की घोर निंदा करते नजर आ रहें थे. वे […]

लघुकथा

आखिर दोषी कौन?

प्रोफेसर साहब का सुबह से ही मूड कुछ उखड़ा हुआ था, यों तो प्रोफेसर साहब सौम्य और मृदुल स्वभाव के थे, लेकिन लाकडाउन के माहौल ने उनकों भी जड़ तक हिला दिया था. लाकडाउन खत्म होते ही आज कालेज में उन्हें बुलाया गया था,बहुत देर पहले से उनका नौकर को कुछ जरुरत का समान लाने […]

लघुकथा

लघुकथा : क्लास

अपने चेहरे को मेकअप की परतों में छुपाते हुए, माधुरी ने खुद को आईने में देखा। सुंदर लग रही थी वह। किसी के आने की आहट सुन कर झट से उसने आँखों पर बेशकीमती गॉगल्स चढ़ा लिए। उसका पति मोहित था। “हम्म्म… ठीक लग रही हो” उसे ऊपर से नीचे तक घूरते हुए मोहित बोला। […]

लघुकथा

ममता की पीठिका

आज अचानक ही डॉक्टर संचिता की स्मृति में डॉक्टर टक्कर की याद ने दस्तक दी. कोरोना की जंग जारी है. अपने-अपने तरीके से सभी उसका मुकाबला कर रहे हैं. संचिता और उसके पतिदेव बाकी सभी कोरोना वॉरियर्स की तरह अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद हैं. डॉक्टर का कर्त्तव्य इस समय सिर्फ और सिर्फ अपने पेशेंट्स की […]

लघुकथा

सच्चा हीरा

”कोरोना ने लाखों को कहीं का नहीं छोड़ा, भारत में दो करोड़ लोग फिर हो सकते हैं गरीब!” इस समाचार ने सबका दिल दहला दिया था. ”देख रहे हो हीरालाल! क्या समाचार आया है?” हीरालाल गॉर्ड के साथी झा ने समाचार दिखाते हुए चिंता जताई. ”अमीर-गरीब तो मन से होता है. अब मुसीबत आई है, […]