Category : लघुकथा


  • गतिमान

    गतिमान

    ”मौसम की तपिश को तो हम कूलर-ए.सी. से नियंत्रित कर सकते हैं, तपिश बुखार की हो तो उसे दवाई से दूर किया जा सकता है, लेकिन मन की तपिश को सहना भी मुश्किल और किसी से...

  • बिछड़ते अपने

    बिछड़ते अपने

      रमेश की मां इन दिनों बहुत खुश है 55 साल की आयु में बेटे के यहाँ बच्चे होने की खुशी में रमेश की मां बहुत खुश है और धरती पर अपने पोते पोती के आने...

  • रिश्ते

    रिश्ते

    कुछ रिश्ते आदर, अपनापन, अनौपचारिकता और आकर्षण के रेशमी धागे इतनी कारीगरी से गुंथे होते हैं कि बिना नाम के ही इसकी खूबसूरती बनी रहती है ! ऐसे ही कुछ रिश्ते से बंधे थे जीनत और...


  • घाटे का सौदा

    घाटे का सौदा

    लाटरी लग गयी थी रानी की । एकदम खरा सौदा । कोई नीच काम भी नहीं था कि उसकी आत्मा उसको कोसती। करना ही क्या था… बस अपनी कोख किराए पर ही तो देनी थी, वो...

  • नदी का पुनर्जन्म

    नदी का पुनर्जन्म

    पुनर्जन्म के अनेक किस्से सुने हैं, पर नदी के पुनर्जन्म के बारे में आज पहली बार सुना. यह पुनर्जन्म उत्तर प्रदेश के सीतापुर में हुआ. एक समय सीतापुर में सरायन नदी का प्रवाह हुआ करता था,...

  • बदलते रिश्ते

    बदलते रिश्ते

    बाहर बादल अनवरत बह रहे थे और खिड़की पर बैठी सुमि की आँखें भी उसी तीव्रता से बह रहीं थीं मानो बादलों से होड़ ले रही हों ! याद है उसे आज भी वो दिन, जब...

  • दो बातें

    दो बातें

    “रानी तुझे कितनी बार कहा कि तु ज्यादा समय ऑनलाइन मत रहा कर । लोग इसका अर्थ गलत निकालते है। लोग तेरे लिए कितना कुछ बोल रहे है”।। “मां , तुम जानती हो कि मैं ऑनलाइन...

  • वार्निंग

    वार्निंग

    आज एक समाचार पढ़ने को मिला- ”50 डिग्री सेल्सियस तापमान में तप रहा है चुरू, तंदूरी हैं दिन यहां और तंदूरी हैं रातें” और फिर ”महाराष्ट्र: पशु कैंप में रहने को मजबूर हैं सूखे की मार...