लघुकथा

लघुकथा — गरीब कौन

”  मसाले का  ,कपडे धोने का पत्थर लाया हूँ  बाई ….”  सामने के घर पर घंटी बजाकर  एक आदमी ने कहा . ” अच्छा ,कितने का है भैया ” ” 150रू  का सिल बटना है , 200 रू कपडे का ” ” सिल दे दो पर सही पैसे बताओ , यह बहुत ज्यादा है ” ” नहीं बाई , […]

लघुकथा

कोमलता एक वर, कठोरता एक श्राप

एक सन्त बहुत बूढ़े हो गए। मरने का समय निकट आया तो उनके सभी शिष्य उपदेश सुनने और अन्तिम प्रणाम करने एकत्रित हुए। उपदेश न देकर उन्होंने अपना मुँह खोला और शिष्यों से पूछा – ‘देखो इसमें दाँत है क्या?’ शिष्यों ने उत्तर दिया- ‘एक भी नहीं।’ दूसरी बार उन्होंने फिर मुँह खोला और पूछा […]

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लघुकथा : कक्षौन्नति

बात उन दिनों की है जब मैं चौथी कक्षा में थी | अंग्रेजी विषय तो जैसे अपने छोटी सी बुद्धि में घुसता ही ना था| और अंग्रेजी की टीचर भी बड़ी खूसट किस्म की थी| मारना और चिल्लाना ही उनका ध्येय था| उनके क्लास में आते ही सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती थी| जिस दिन रीडिंग […]

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लघुकथा : संस्कार

सुमन बदहवाश सी घटना स्थल पर पहुंची, अपने बेटे प्रणव की हालत देख बिलखने लगी| भीड़ की खुसफुस सुन वह सन्न सी रह गयी, एक नवयुवती की आवाज सुमन को तीर सी जा चुभी “लड़की छेड़ रहा था उसके भाई ने कितना मारा, कैसा जमाना आ गया ……|” “अरे नहीं, ‘भाई नहीं थे’, देखो वह […]

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अपनों से जीत की हार

चन्द्र बाबु के पैर कोर्ट जाते हुए कांप रहे थे। पर एक आदर्श शिक्षक के रूप में अपने जीवन को आदर्श सिधान्तो के साथ व्यतीत किया था। तो आज अन्याय कैसे सहते ? बेटे की शादी के तुरंत बाद ही वो बहू को लेकर विदेश चला गया । एक दिन बहू बेटे ने आकर पिता […]

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खड़ी फसल

शिक्षक दिवस की शुभ कामनाएं ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ गुरु के पद कमलो में देहूं सिर नवाय ज्ञान दे उपकार किया ईश्वर से मिलाय ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ खड़ी फसल ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ आज गाँव की विद्यालय में अर्धवार्षिक परीक्षा का प्रथम दिन था | सभी अध्यापक अपनी -अपनी कक्षाओ में पहुंच गये परीक्षा आरम्भ हो गयी थी | तभी कक्षा आठ का […]

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वफादार

चालीस वर्ष पहले की बात है कि मेरे पिता जी की मृत्यु हो गई। पता लगते ही हम गाँव जा पुहंचे। मेरे पिता जी सारी ज़िंदगी अफ्रीका में गुज़ार कर हमेशा के लिए गाँव आ गए थे और अपने खेतों में काम करने लग गए थे । पैंशन हो गई थी और वोह बहुत खुश […]

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लगाव (लघु कहानी)

“बुढऊ देख रहें हो न हमारे हँसते-खेलते घर की हालत!” कभी यही आशियाना गुलजार हुआ करता था! आज देखो खंडहर में तब्दील हो गया|” “हा बुढिया चारो लड़कों ने तो अपने-अपने आशियाने बगल में ही बना लिए है! वह क्यों भला यहाँ की देखभाल करते|” “रहते तो देखभाल करते न” चारो तो लड़लड़ा अलग-अलग हो […]

लघुकथा

नई राह

जब भी रीना ने अपनी माली हालत सुधारने के लिए घर से बाहर जाकर कुछ करना चाहा, सास हीरा देवी उसका रास्ता रोक लेती । अब रीना करे तो क्या करे! दो बच्चो और सास को खिलाना था । पति दुर्घटना में असमय ही काल कवलित हो गये। आखिर रीना ने रास्ता निकाल ही लिया। […]

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लघुकथा : भगवान की मर्जी

विमला मजदूरी कर घर पहुंची तो भड़क गयी भोलू पर, “कमाकर खिलाना नहीं था तो पैदा क्यों किया?” शराबी भोला “भगवान् की मर्जी कह” बड़ी बड़ी बातें करने लगा| भगवान सच में बड़ा कारसाज हैं, जिसके घर एक समय का ठीक से भोजन भी नहीं उसके घर हर साल बच्चे| और जिसके घर भण्डार भरा […]