लघुकथा

लघुकथा : यादों का धरातल …

अचानक द्वार पर किसी ने दस्तक दी | रूपा देवी चौंकी ! इस वक्त कौन हो सकता है ? दीवार के सहारे से चल कर रूपा ने दरवाजा खोला | “अरे विमला तुम !” “हाँ माँ मुझे कल ही पडौसी रामू चाचा ने खबर करी कि आप बहुत दिनों से बीमार है.”, विमला ने चिन्तित्त […]

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लघुकथा : बच्चे मन के सच्चे

एक बार एक गाँव में एक बुढिया रहती थी । बहुत ही नेक और सरल थी । अपने सक्रिय जीवन काल में वो सबकी मदद किया करती थी । तन – मन और धन से जरूरत मंद लोगो की सेवा किया करती थी । अब उसकी असक्त अवस्था में उसके बेटे बहु उसकी देखभाल ठीक […]

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लघुकथा : बच्चा बड़ा हो गया है…

माँ की आँख लगी ही थी कि उसका 12 साल का बेटा स्कूल से घर आया और बोला : माँ , मैं अब बड़ा हो गया हूँ और स्कूल के बाकी बच्चे मुझे ये कहकर चिढ़ाते है कि मैं रोज ये फटी हुई शर्ट पहन कर आता हूँ !! मुझे नया शर्ट चाहिए !! दूसरों […]

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लघुकथा : भारतीय पुलिस

हमें भारतीय पुलिस पर गर्व तो होना ही चाहिए , हमारे सोते जागते यह हमारी रक्षा करती है . लेकिन ख़ास बात यह है कि  हमारी पुलिस दुनीआं में नंबर वन है , नंबर वन  ना भी हो लेकिन नंबर टू से कम भी हो नहीं सकती . आज जब भी हम किसी पुलिस मैंन […]

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खाली मुटठी

आज वो बहुत उदास थी , कुछ भी नहीं सूझ रहा था उसे……। क्या अब तक उस ने जो भोगा  वो सब वो भूल जाये?….इतना आसान होता है क्या सब कुछ भूल जाना?? अपने दुःख से ज्यादा वो इस बात से दुखी थी कि उस के अपने भी उस के दुःख को समझ नहीं पा रहे। एक […]

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++पिता लाडली ++

शिखा अपने पड़ोसन अमिता और बच्चो के साथ पार्क में घुमने गयी. चारो बच्चे दौड़ भाग करने में मशगुल हो गये. शिखा भी अमिता के साथ गपशप करने लगी. गाशिप करते हुए समय का पता ही ना चला. पता तब चला जब घर पर पहुँच शिखा के पति उमेश का फोन आया. शिखा अपने बच्चो […]

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बदनामी – लघुकथा

“देखिए जी, ऐसा करके आप हमारी बेटी की जिन्दगी ही तो बरबाद कर रहे हैं, छोड़ दीजिए न ये जिद” “तुम चुप रहो, समाज में मुझे मुँह दिखाना है। उस आवारा लड़के को अपनी बेटी नहीं दे सकता मैं, कुँवारी बैठी रहे सारी उम्र वो मंजूर है” “वो लड़का आवारा है? डॉक्टरी की पढ़ाई की […]

लघुकथा

भगवान का भोग

‘हे प्रभु !! क्षमा करना, आज मैं आपके लिये भोग नहीं ला पाया !! मजबूरी में खाली हाथों पूजा करना पड़ रही है !!’ किसी भक्त का कातर स्वर सुनकर मैंने पीछे मुड़कर देखा !! अरे !! ये तो वही सज्जन हैं जिन्होंने अभी मेरे साथ ही मिष्ठान्न भंडार से भोग के लिये मिठाई ली थी […]

लघुकथा

जियोतिशी जी की गणना

सोहन लाल और उस की पत्नी बेटी के रिश्ते के बारे में बहुत वर्षों से चिंतित चले आ रहे थे. बहुत लड़के देख चुके थे लेकिन कोई बात बन ही नहीं रही थी. जब हुआ तो अचानक ही हो गया. लड़का इंग्लैण्ड से अपने माता पिता के साथ इंडिया आया हुआ था. लड़के लड़की ने आपस […]

लघुकथा

क्या सेकुलरिज़्म का ठेका हिंदुओं का है ??

आज या यूं कहूँ की अभी अभी(29-06-2014) एक “थोथे” सेकुलरिज़्म जिसे pseudo सेकुलरिज़्म भी कहते हैं उसे देखने का अवसर मिला तो घटना कुछ ऐसी है की मेरे घर के बाहर एक छोटी से दीवार है तो कुछ लोग जो थक जाते हैं वो महिलाएं और वृद्ध लोग वहीं पर बैठ जाते हैं एक मराठीभाषी […]