लघुकथा

पुनर्जन्म

आज सुकन्या जल्दी जल्दी घर से निकलने की तैयारी में थी ,कुछ बङबङाती जा रही थी ,तबतक माँ की आवाज आ पहुँची………. सुकू !! अरे मेरे लिए एक कप चाय बना दे ? ये माँ भी!!!! अब चाय तो बनानी ही पङेगी ! उधर चाय का पानी जल रहा था और इधर सुकू जल के […]

लघुकथा

लघुकथा : आई एम सॉरी सर

“हैलो नव्या, एकबार फिर तुमने अच्छी कविता पेश की, वाहहह क्या बात है” “थैंक्स अ लॉट हितेश सर, आपलोगों से ही सीख रही हूँ.” “वैसे किस रस में लिखना पसंद करती हो?” “श्रृंगार में वैसे तो…” “वियोग या संयोग??” “जी संयोग में ही ज्यादा…” “मस्त हो एकदम, कुछ इश्क मोहब्बत का लफड़ा है कहीं??” “सर […]

लघुकथा

सीख

घर के बाहर नुक्कड़ पर परी जैसे कपड़े पहने एक छोटी सी बहुत ही प्यारी बच्ची खड़ी थी वही एक पान की दुकान थी जो कोई भी वहां से सिगरेट लेता उससे कहती अंकल मुझे भी एक सिगरेट दिला दो प्लीज सिगरेट बड़े शौक से पीने वाले उसे डाँटते और ‘सिगरेट बुरी चीज़ हैं’ की नसीहत जरुर देते […]

लघुकथा

लघुकथा —- रोज दिवाली

रामू धन्नी सेठ के यहाँ मजूरी के हिसाब से काम करता था. सेठ रामू के काम और ईमानदारी से खुश रहता था, परन्तु काम के हिसाब से वह मजूरी कम देता था. रामू  को  जितना मिलता उसमें ही संतुष्ट रहता था. इस बार सेठ को त्यौहार के कारण अनाज में तीन गुना मुनाफा हुआ, तो ख़ुशी […]

लघुकथा

लघुकथा : कुत्ता

हमारे घर के पास एक मरियल कुत्ता पड़ा रहता है, अक्सर एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठा रहता है. उसके बाल पूरे जले हुए हैं (कभी किसी भयंकर आग में कूद गया होगा या कहीं कचरे में पड़ा होगा तो किसी ने आग लगा दी होगी) और उसकी चमड़ी साफ़ नजर आती है, पूरा […]

लघुकथा

लक्ष्मी

लछमी अपने घर में बैठी सोच रही थी क़ि आखिर माँ ने उस का नाम लछमी किया सोच कर रख दिया था। सारी उमर विधवा की तरह और गरीबी में गुज़ार दी , उस की बेटी लता चार वर्ष की थी जब उस का पति संजीव मामूली झगडे के कारण उसे छोड़ कर पता नहीं […]

लघुकथा

बेटी तो होनी चाहिए….

बेटी तो होनी चाहिए  ……. चलो माँ मै तुम्हे लेने आया हूँ, बरसों बाद उसे किसी ने माँ कहा| विश्वास ही नही हुआ कानो पर ! टूटी डंडी का डोरी से जोड़कर लगाने लायक चश्मा लगा कर देखा तो मदिया था | गोमती देवी को अपनी आँखों पर विश्वास ही नही हुआ| जबसे मदिया के […]

लघुकथा

चेहरे की लकीर

दीपावली को अब चार ही दिन बाकी रह गये थे। पिंकू को आज उसके दादा जी अपने साथ बाजार ले गये थे। पूरा बाजार त्योहारी सीजन के कारण सजा हुआ था। जूते,कपड़े,पटाखे और तरह- तरह के पकवान और भी बहुत कुछ था। पर पिंकू को कुछ भी लेने का मन नही हुआ। दादा जी बराबर […]

लघुकथा

जलती हुई मोमबत्ती

“शरीर जल (ख़त्म हो) रहा है, लेकिन आत्मा तो अमर है | मोमबत्ती की तरह मैं भले काल कवलित हो गया हूँ, पर इस लौ की भांति तुम सब की आत्माओं में बसा हूँ |” जब सरकारी स्कूल में गाँधी जयंती पर हिंदी के प्राध्यापक महोदय ने मोमबत्ती की ओर इशारा करके कहा तो रूचि भयभीत हो गयी | दादी से आत्माओं […]

लघुकथा

शौक

कृष्ण बचपन में पढने के साथ-साथ मूर्तिकला में भी निपुण था | उसके मम्मी-पापा उसके इस शौक को पढाई में बाधा मानते थे | लेकिन जब स्कूल में मूर्तिकला की प्रतियोगिता जो कि जिला स्तर की थी, उसमे कृष्ण ने भाग लिया और उसकी बनाई राधा कृष्ण की मूर्ति ने प्रथम स्थान पाया | स्कूल […]