लघुकथा

लघु कथा : सूखा पेड़

दरवाजे पर दस्तक हुई. “कौन आया होगा — अभी तो सुबह भी नहीं हुई ” आँखें मलते हुए चादर हटा कर उठी. दरवाजा खोला. “अरे यह क्या, कोई भी नहीं ” बंद करने ही लगी थी कि फिर दस्तक हुई  एक काँपता हुआ हाथ आगे बढ़ा- “बेटी, एक रोटी मिलेगी ?” गौर से देखा, 70-72 वर्ष के एक बुजुर्ग सामने खड़े थे. मांगने के तरीके […]

लघुकथा

क़दम

बहुत मुश्किल में फस गया विवेक… एक एक घडी उसे बेचैन किये जा रही थी कि जिस समस्या से वो बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है कोई भी रास्ता सूझ नहीं रहा और बिना किसी समाधान के वो इस समस्या से बाहर कैसे निकलेगा.. उसके कदम कामयाबी की राह पर रुक से गए थे.. चाहते हुए भी […]

लघुकथा

आखिरी साड़ी

अब तो विमला के लिए होली का त्यौहार मात्र एक रस्म निभाने जैसा है। उनके परिवार में होली के ही दिन बहुत बड़ा हादसा जो हो गया था। बड़े बेटे के बच्चे की पहली होली थी। धूम धाम से उसके लिए पूजन की तैयारी चल रही थी। बस अब तो बुआ के ससुराल से आने […]

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इंसानियत

अरे सुनीता तुम इतनी जल्दी कैसे आ गई? अभी परसो ही तो गांव का बोलकर गई थी कि दस दिन नही आऊंगी माता रानी को चुंदङी चढानी है ब्राह्मण भोज करवाना है।फिर आज कैसे आ गई? सुनीता मेरी कामवाली दो दिन पहले ही मुझसे दस दिन की छुट्टी और मेरे पास अपने जमा किये हुऐ […]

लघुकथा

जहाँ चाह वहाँ राह

चाहत पर ही सब निर्भर है। हम आप जो ठान लेते हैं उसे पूरा कर ही दम लेते हैं। सफलता विफलता हमारी इच्छा शक्ति पर ही निर्भर है। दो भाई थे। दोनों भाई को पढाने के लिए उनकी माँ बहुत मेहनत करती थी। लेकिन बडे भाई को पढने की ही इच्छा नहीं थी। उसकी माँ बहुत […]

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लघुकथा : वापसी

“यमदूत ! तुम किस ओमप्रकाश को ले आए. यह तो हमारी सूची में नहीं है. इसे तो अभी माता-पिता की सेवा करना है, भाई को पढाना है. भूखे को खाना खिलाना है और तो और इसे अभी अपना मानवधर्म निभाना है.” “जो आज्ञा, यमराज.” “जाओ ! इसे धरती पर छोड़ आओ और उस दुष्ट ओमप्रकाश […]

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चीनी : कितनी मीठी ?

लोग समझा रहे थे कि बेटा, चीनी सीख लो, किस्मत चमक जाएगी । चीन जाने का टिकट पक्का क्योंकि अपने देश मे चीनी जानने वाले बहुत कम हैं। पहली बार कनफ्यूज़न पैदा हूआ कि चीनी खायी जाती है या सीखी जाती है। खैर, ज्ञान का वर्धन हुआ तो जाना कि इसी नाम की एक भाषा […]

लघुकथा

लघुकथा : पछतावा

“बाबा आप अकेले यहाँ क्यों बैठे हैं, चलिए आपको आपके घर छोड़ दूँ | ” बुजुर्ग बोले: “बेटा जुग जुग जियो तुम्हारे माँ -बाप का समय बड़ा अच्छा जायेगा | और तुम्हारा समय तो बड़ा सुखमय होगा |” “आप ज्योतिषी हैं क्या बाबा |” हंसते हुय बाबा बोले – “समय ज्योतिषी बना देता हैं | गैरों […]

लघुकथा

बड़ी सोच

सेठानी रसोईघर में बरतन समेटते हुए बड़बड़ाए जा रही थी, तभी पड़ोसन आ धमकी जले पर नमक छिड़कने । “क्या हुआ पुरसोत्तम की माँ, ,क्यों सुबह-सुबह इन बेजान बरतनों पर बिगड़ रही हो?” “अरे सुमित्रा बहन, आओ….आओ, देख ना सूरज सिर पर चढ़ आया पर वो सु गना है कि अभी तक नहीं आई,,घर का […]

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अनुपस्थिति

तटीय उड़ीसा के एक छोटे से मछुआरों के गाँव में आज बीस दिन बाद स्कूल खुला था जिसे सुनामी के कारण बंद कर दिया गया था । तमाम बच्चे हाथों मे स्लेट और तखती लटकाये स्कूल में चले आ रहे थे। कुछ चहक रहे थे और कुछ गुमसुम। मास्टरनी ने आ कर अटेन्डेन्स रजिस्टर खोला […]