लघुकथा

समय

  अभी बस दो साल पहले की ही बात है।कि शर्मा जी के पड़ोस में एक घर में चोरी हो गई थी।चोरी कोई बड़ी नहीं थी।केवल गुप्ता जी की काफी पुरानी कार चोरी हो गयी थी। शर्मा जी ने फिर भी पड़ोस वालों को समझाया।कि अपने मोहल्ले के दोनों तरफ लोहे के बड़े-बड़े गेट लगवा […]

लघुकथा

तिनकों की चुभन

उसकी प्रिय पत्रिका सुबह सुबह डाक से आ गई थी , स्वरचित लघुकथा को भी स्थान मिला था ,समीक्षक के विचार पढ़ने लगी  होठों पर मंद मंद मुस्कान तैरने लगे,  पलंग के दूसरे किनारे पर सत्या भी अखबार पढ़ रहे थे ,उन्होंने एक कप चाय की फरमाइश की । सुगंधा के मुंह से बस इतना ही […]

लघुकथा

सर्वोत्तम

सर्वोत्तम अमित का मन कल से ही परेशान था।वह अतीत में हुई घटना में इस तरह खो गया था कि उसे समय का ध्यान ही नहीं रहा।पिता जी की आवाज ने उसे झकझोर कर रख दिया था।बेटा, तुम परेशान लग रहे हो।जी,पापा कल सुधीर मिल गया था।ओह,पापा हैरान हो उठे,क्या कह रहा था? पापा, आपको […]

लघुकथा

सेल्फी

वह पुल की दीवार पर कोहनी टिकाए हथेलियों के मध्य अपना चेहरा रख कर नदी को निहार रहा था, किसी यादों में खोया हुआ। एकटक, अपलक दृष्टि नदी के जल पर गड़ी हुई थी। तभी छपाक की ध्वनि के साथ उसकी तंद्रा टूटी। उसकी दृष्टि आवाज की दिशा में मुड़ी। जहाँ एक बालिका अभी-अभी गिरकर […]

लघुकथा

कथनी और करनी

कथनी और करनी मधु को अपना टीचर बनने का सपना धूमिल होता नजर आ रहा था।वह सारा दिन सपने देखती रहती थीं।वह एक बड़े स्कूल में पढ़ा रही है।उसके चारों ओर विद्यर्थियों का जमावड़ा लगा हुआ है।वह बड़े चाव से उनके अन-सुलझे सवालों के जवाब दे रही है।वह रात में भी यहीं बड़बड़ाती रहती।उसका सारा […]

लघुकथा

स्वस्थ अहसास

”महामारी का रूप लेती कोरोना जैसी बीमारी को हमारे बचपन में ही आना था?” सोचते-सोचते किंशुक मायूसी से मोबाइल को स्क्रोल करता जा रहा था. ”मायूसी और किंशुक!” किंशुक ने खुद से ही सवाल किया. ”मैं तो किंशुक हूं. किंशुक यानी फूल. फूल हर हाल में हमेशा मुस्कुराता रहता है और मुस्कुराना सिखाता है. फिर […]

लघुकथा

एक और बली

बाप अभी जिंदा है सड़क किनारे गुब्बारे बेचने वाला एक परिवार महामारी के चलते अपने घर की ओर पलायन कर जाता है। पैसे न होने की वज़ह से उन्होंने पैदल ही चलने की सोची।अभी थोड़ी दूर ही पहुंचे थे कि बच्चों की मां शांति की तबीयत बिगड़ जाती है और वह भगवान को प्यारी हो […]

लघुकथा

लघुकथा – हिंदी टीचर

गौरी मेडम के क्लास में आते ही सब बच्चों के मुँह लटक जाते । “लो आ गई अपने भारी भरकम शब्दों के साथ हिन्दी पढ़ाने”। “हिन्दी न हो गई जी का जंजाल हो गयी “,गौरी गुस्से में बड़बड़ाते हुए क्लास से बाहर आ गयी। क्या हुआ गौरी ?इतनीं परेशान क्यों हो ,आज फिर बच्चों ने […]

लघुकथा

रोशनी की दस्तक

”कोरोना, कोरोना, कोरोना—— हर जगह कोरोना, रेडियो पर कोरोना, टी. व्ही, पर कोरोना, समाचारों में कोरोना, बातों में कोरोना, मुलाकातों में कोरोना, कोरोना और संक्रमण के सिवाय अब और बचा ही क्या है?’ पल भर में कितना कुछ सोच गया पंकज! ”हर पांचवें व्यक्ति को कोरोना संक्रमण का खतरा! स्टडी में दावा.” लो आ गए […]

लघुकथा

तूफान

तूफान रवि ने गुस्से में फोन पटक दिया| इसने कभी मेरी बात नहीं मानी। विदेश में जॉब करने की जिद्द लगा रखी थी।यही चाहत थी,इसकी।वह बिस्तर पर लेट गया, उसकी आँख लग गई। रवि उठो,कब तक सोते रहोगें?माँ की आवाज में नाराजगी साफ झलक रही थी।हाँ, माँ उठ रहा हूँ।रोज-रोज देर तक बिस्तर में पड़े […]