कहानी

बिम्ब प्रतिबिम्ब (भाग 7 अंतिम)

चार दिनों बाद, दर्शन और हरमीत को भारत लौट आना था. इस बीच, वे पत्रकारों और मीडिया के कैमरों से बचने के लिए ग्लासगो चले गए, जहां हरमीत के कुछ रिश्तेदार रहते थे. ग्लासगो पंहुचते ही दर्शन को पेट में बायीं तरफ दर्द होना आरम्भ हुआ. हरमीत ने उसे एक परिचित डॉक्टर को दिखाया. सामान्यतया […]

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रैगिंग से हमसफर तक

कॉलेज का पहला दिन था… कॉलेज के गेट पर पहुंचते ही दिल अन्दर से धक-धक कर रहा था, मानो दिल बाहर ही आ जाएगा, यूनिवर्सिटी मे चारों तरफ लड़के अपनी गाड़ियों से आ …जा रहे थे। धीरे-धीरे कालेज के अन्दर की तरफ हम लोगों ने कदम बढाया, तभी एक लड़के को देखकर अनामिका ने धीरे […]

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बिम्ब प्रतिबिम्ब (भाग 6)

अंतिम टेस्ट मैच की हम सभी को प्रतीक्षा थी. इंग्लैंड की टीम में एक बदलाव था, एक नया, बाएं हाथ का स्पिन गेंदबाज उनकी टीम में खेल रहा था. दोपहर में नियत समय पर हम सभी अपने अपने टीवी सेट के सामने जम गए थे और मैच का आनंद ले रहे थे. यह मैच दर्शन […]

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बिम्ब प्रतिबिम्ब (भाग 5)

लेकिन समस्याएँ तो अब शुरु होने लगीं थीं. दर्शन को कपड़े बदलने में दिक्कत आने लगी. जो बटन वह दायें हाथ से खोलता था, उन्हें अब बायाँ हाथ से खोलने का प्रयास कर रहा था, लेकिन शर्ट और पैंट तो वही पुरानी ही थीं, उनके बटन जिप आदि दर्शन के लिये उलट चुके थे. इसी […]

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मर्जी

मिस्टर बख्शी, क्या आप मुझे बतायेंगें कि मेरी मर्जी के बिना आपने आज १० बजे मीटिंग कैसे बुला ली? बेचारे बख्शी जी  जो पिछले दो सालों से मिसेज माथुर के साथ से सह प्राध्यापक के रूप में काम कर रहे थे, नियत और धीरे स्वर में बस इतना ही कह सके मैडम, आप हमेशा ही १० बजे […]

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बिम्ब प्रतिबिम्ब (भाग 4)

प्रयोग की सफलता को लेकर हमारी शंका के बीच, उम्मीद की सिर्फ एक किरण थी कि जिन चूहों पर प्रयोग किया गया था, वे शीघ्र अपना संतुलन बनाना सीख लेते, भोजन की गंध पहचान लेते, टेढ़े मेढ़े रास्तों से गुजरने में फिर से दक्षता प्राप्त कर लेते, और सबसे बड़ी बात ध्वनि पहचानने में उन्हें […]

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कहानी – चिरकुंवारी नदी

इसे कहानी कहूं भी तो कैसे ? कहीं नदी भी कभी कहानी बनती है क्या ? नदी को तो सिर्फ़ बहते रहना होता है–उद्गम से लेकर सागर तक निरंतर, बिना रुके बिना थके। यही तो नियति है नदी की–कभी न मिल पाने वाले दो किनारों का बंधन और आदि से अनंत की ओर नदी का […]

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कहानी – नई चेतना

उसका जन्म हुआ होगा तो शायद उसके घर वाले जरुर मातम मनाये होंगे। ईश्वर ने उसे जरूर इस धरती पर भेजा पर एक अभिशाप के रूप में। जैसे उसके पूर्व जन्मों के पापों के परिणाम स्वरूप।वह जब भी अपने बारे में सोचता सारे नकारात्मक विचार आते। उसने जब से होश सम्भाला है,तब से समाज का तिरस्कार, […]

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बिम्ब प्रतिबिम्ब (भाग 3)

शेखर ने हमें एक जादू सा दिखाया था, मुझे उसके सम्मोहन से निकलने में कुछ समय लगा, पर हरमीत का मन तबतक कुछ निश्चित कर चुका था. “शेखर, प्राऽ… तुस्सी छा गये… मैं आ रिया सी तैनूं झफ्फी देने…” और हरमीत तुरंत मेरी लैब से बाहर निकल गये… हरमीत झफ्फी देने अकेले जायेँ, ऐसा होना […]

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बिम्ब प्रतिबिम्ब (भाग 2)

मैंने टीवी बंद किया. सन्नाटा पसर गया. दर्शन ने चुप्पी तोड़ी. “ताया जी, इस सीरिज के बाद नी खेलांगे, ये लास्ट होंदी…”. यह सुन कर हरमीत की आँख में आँसू आ गये. फिर भी वे काफी संयमित रहे. दर्शन को उन्होंने घर जाने को कहा. दर्शन के निकलने के बाद उन्होंने कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष […]