कहानी

कहानी – कसरत वाला भगोड़ा

आज फिर बुधिया चार बजे भोर भादो को ढूंढने निकल पड़ी थी । मैं जान बूझ कर उसके रास्ते से हट गया और पेड़ के पीछे छिप कर उसे जाते हुए देखता रहा-दूर तक । डूबती चांद की ओड में वह लम्बे लम्बे डेग डालती लपलपाती हुई जा रही थी । यहां कृष्ण राधा मिलन […]

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कर्मफल

रीना और मीरा दो बहनें थी रीना की माँ बचपन में ही चल बसी. रीना के पापा ने दूसरी शादी कर ली, जब रीना 15 बरस की हुए तो उसके पापा भी बीमारी के चलते उनका भी देहांत हो गया ,अब रीना की  सौतेली मां ने उसको परेशान करना शुरू कर  दिया, उसकी पढ़ाई भी बंद करवा दी […]

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कलाकार

अख़बार खोला तो पहले ही पेज पर छपे एक विज्ञापन पर नज़र पड़ी। “फिरकी डांस ग्रुप” का विज्ञापन था। शहर में महीने भर से चल रही प्रदर्शनी में दो दिन बाद इनका शो होने वाला था। “फिरकी” शब्द पढ़कर दिमाग में कुछ चलने लगा। कुछ तो ऐसा था जो इस शब्द से जुड़ा था लेकिन […]

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मास्टर जी

अरविन्द दास हाईस्कूल शिक्षक हैं। जिनकी पोस्ंिटग एक छोटा-सा शहर में हुई है। वहाँ के लोगों को अपना परिचय देते हैं। फिर सब अरविन्द दास को मास्टरजी-मास्टरजी कहकर पुकारने लगते हैं। इस हाईस्कूल में पूर्व से केवल दो ही शिक्षक हैं। एक हेडमास्टर, जो सामाजिक विज्ञान पढ़ाते और दूसरा हिन्दी। बच्चों के भविष्य का निर्माण […]

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असंतोष

बचपन के वो दिन तो सबको ही याद होंगे जब हमारी गर्मियों की छुट्टियां होने से पहले ही हम अपने प्लान बना लेते थे यहां जाना है वहां जाना है नाना-नानी दादा-दादी के यहां हम सबको जाना है, मम्मी पापा भी कैसे अपनी अपनी तैयारी करते थे बच्चों को इतने दिन यहां छोड़ना है.। गांव […]

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सफर

सुहानी पिछले 1 घंटे से गुना से श्योपुर जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रही थी। आज मौसम के कारण ट्रेन लेट हो गयी थी। त्यौहार की वजह से घर आने जाने वालों की भीड़ बहुत थी। शनिवार को ही अधिकतर कामकाजी लोग जाना पसंद करते है क्योंकि रविवार का दिन होता है अगले दिन, […]

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कहानी – लव जिहाद

सोनल देखने में बहुत सुंदर थी वह मनोज और मंजू की इकलौती बेटी थी. दोनों उसको बहुत प्यार करते थे सोनल की सहेली सलमा  उनके पड़ोस में ही रहती थी .वह दोनों आपस में बहुत अच्छी मित्र थी सलमा का बुआ का बेटा इकबाल भी गाँव से शहर में पढ़ने आता  है. वह भी इसी […]

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असंतोष

समय कैसे भाग रहा है कुछ समझ में नहीं आ रहा समय दो भागों में बांट चुका है एक यंग जेनरेशन एक पुरानी जनरेशन, समय का यू तेजी से बदलना, प्रकृति का यूँ तेजी से बदलना बहुत कुछ बदलता जा रहा है यह किस दिशा में जा रहा है शायद हम अपने आपको ही नहीं […]

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संस्कारी दिव्यांग

अस्पताल के बेंच पर अकेला बैठा अरूण बार-बार ऑपरेशन थियेटर के बंद दरवाजे के खुलने की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा था। भीतर उसकी पत्नी को प्रसव हेतु ले जाया गया था। बैठे-बैठे वह अतीत की गहराइयों में डूबता गया। दुनिया वाले भले ही उसे दिव्यांग मानते थे, लेकिन अरूण ने शारीरिक अपंगता को कभी […]

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निक्की

उन्होंने मुझे पुछे बगैर एक सत्र का मुख्य वक्ता बता दिया था ऐसे मे नाराज होने के बावजूद मुझे अपने स्टेटस को बचाए रखने के लिए जाना ही था । दूसरी कोई स्थिति होती तो यह मेरे लिए सोभाग्य की बात थी की मैं जिस कालेज मे बीस साल पहले पढा था वहा हो रहे […]