Category : कहानी

  • ना का मतलब ना

    ना का मतलब ना

    शिल्पा का मन क्लास में जो पढ़ाया जा रहा था उसमें नहीं था। वह परेशान थी। क्लास खत्म होने के बाद फिर उसका सामना करना पड़ेगा। पिछले कई दिनों से फिर वह कोचिंग के बाहर खड़े...


  • संस्कार

    संस्कार

    जूही अपने ऑफिस में अपनी खूबसूरती के साथ साथ अपनी कार्यकुशलता एवं व्यवहार कुशलता के लिए जानी जाती है। उसके व्यक्तित्व की सौम्यता उसके परिधान से भी झलकती है। सुंदरता के साथ प्रतिभा का संयोग उसके...

  • पराई लड़की

    पराई लड़की

    कई महीनों से बेटे की कोई चिट्ठी नहीं आई, ना फोन आया। प्रत्येक महीने रघुनाथ को ₹१००० का माॅनी ऑर्डर आता था, वह भी कई महीनों से नहीं आया। रोज डाकघर का चक्कर लगाकर मायूस होकर...

  • आत्म संतुष्टि

    आत्म संतुष्टि

    आज मासूम निधि की धन की बेदी पर बलि चढ़ाई जाएगी। वह अब बड़ी हो चुकी है। इस बालिका अनाथ आश्रम की कलुषित परंपरा को समझने लगी है। जैसे ही उसके कानों में यह बात पड़ी...

  • प्रतीक्षित आँखें

    प्रतीक्षित आँखें

    ” तुम तीनों अगर लंदन चले गए तो मैं अकेली यहाँ पर क्या करूंगी? कैसे रहूंगी मैं तुम लोगों के बिना और किसके सहारे रहूंगी? तुम्हारे पिताजी होते तो कोई बात नहीं थी, दोनों मिल कर...

  • “भरोसा” अंतिम भाग

    “भरोसा” अंतिम भाग

    समय का चक्र इतनी तेजी से चल रहा था कि देखते ही देखते कितने साल निकल गए पता ही नहीं चला। अनु आठवीं क्लास में पहुंच गई। पढ़ाई में बहुत होशियार है वह। अनु अपनी पढ़ाई...


  • “भरोसा” भाग 3

    “भरोसा” भाग 3

    कंपनी चलाने के लिए रोज रोज पार्टी में जाना, नए नए लोगों से मिलना, उनके साथ डांस करना, मिल बैठकर पीना, यह सब करना पड़ेगा, यह तो ईशा ने सपने में भी नहीं सोचा था। एक...

  • “भरोसा” भाग 2

    “भरोसा” भाग 2

    डिनर टेबल पर ईशा खामोश बैठी मैन्यू देखने में व्यस्त थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था क्षितिज के साथ क्या बात करें और क्या नहीं। वह झिझक भी रही थी इसलिए स्वयँ को व्यस्त...