Category : कहानी

  • कहानी – विकलांग

    कहानी – विकलांग

    काठगोदाम से बरेली जाने वाले रेल-मार्ग पर ‘किच्छा’ एक छोटा-सा रेलवे स्टेशन है, काठगोदाम लाइन के लालकुआँ जंकशन से इस लाइन पर बहुत सारी गाड़ियाँ आती-जाती हैं। खास तौर पर बरेली, मथुरा, लखनऊ आदि मार्गों की गाड़ियों का तो...


  • हवा पूरी है

    हवा पूरी है

    कुछ दिनों से आनन्द को परेशान देख कर आनन्दी से आखिर रहा न गया और पति से उदासी का कारण पूछ ही लिया। लेकिन आनन्द बात को टाल गया। सिर्फ इतना कहकर कि कोई खास बात...

  • मुक्ति !

    मुक्ति !

    सुबह सुबह ही रसोईघर से बढ़िया खाने की खुशबू सारे घर में फैल रही थी। सरला ने अपनी मधुर आवाज़ में सबको उठाना शुरु किया और डांटना भी  कि अगर मैं न जगाऊं तो क्या हो,...

  • कहानी – अहम् के गुलाम

    कहानी – अहम् के गुलाम

    रश्मि ने कलाई में बंधी घडी देखी।रात्रि के तीन बज रहा था।चारो तरफ निस्तब्तता छायी हुई थी।रश्मि को छोड़कर दुनियां में शायद सभी नर,नारी ,बाल ,वृद्ध गहरी नींद में सो रहे थे, लेकिन उसकी आँखों में...

  • आॅफिसर

    आॅफिसर

    विशाल समाहरणालय भवन की सीढियों पर एक किनारे पिछले कई घंटों से मैली-कुचैली अवस्था में राहुल के इन्तजार में बैठी बुढ़िया लगभग थक ही चुकी थी। प्रतीत होता था, मानो आधी नींद में ही वह अपनी...

  • आधार

    आधार

    रज्जो का पति कल्लू शहर में दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था । बहुत दिन हुए उसने शहर से कुछ नहीं भेजा था । जब पिछली बार फोन किया था , निराश लग रहा था ।...

  • जमानतदार

    जमानतदार

    अब मैं उसे हैरानी के साथ देखने लगा था..! और वह भी कपाल में गहरी धँसी मिचमिचाती आँखो से अपनी निगाह मुझ पर स्थिर किए हुए था…और इसी के साथ वातावरण में निस्तब्धता सी छा गई...


  • दो मुँहवाला साँप

    दो मुँहवाला साँप

    धीरे-धीरे शाम पसर रही थी और ठंड ने फैलना शुरु कर दिया था। सूरज ने अपना सुनहरा आँचल वापस खींच लिया था मगर रात ने अभी भी अपनी काली चादर नहीं ओढ़ाई थी। सिंक में अपने...