कहानी

पवित्र रिश्ता

ट्रेन को भी आज ही लेट होना था। स्टेशन की भीड़ देखकर उसका मन और भी उचाट हो कर रहा था।वह जल्दी से जल्दी इस शहर से दूर हो जाना चाहती थीं।भारी भीड़ में भी वह खुद को बहुत अकेला महसूस कर रही थी। उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था।चारों ओर उसे लोग […]

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फेसबुक

फेसबुक चलाने में मुझें इतना मजा नहीं आता था। पर रोज फेसबुक पर कोई ना कोई रिक्वेस्ट आ जाती थी।मुझें बड़ा अजीब लगता था,अनजान लोगों से जुड़ना।कभी-कभी मन में आता था कि डिलीट कर दूँ फेसबुक को।पर आजकल फेसबुक पर एक्टिवेट ना होना भी—-। सहकर्मी पूछ ही लेते थे,सर आप भी फेसबुक पर हो क्या? […]

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पितृवंचिता

अजीत शर्मा , सुबह सुबह उठे।  पत्नी शिखा ने गरम गरम प्याली चाय की पकड़ाई।  साथ ही उसने सासु माँ को भी कांसे के गिलास में ऊपर तक भरकर चाय दी।  चाय क्या थी ,दूध और इलायची सौंफ आदि का काढ़ा।  सासु माँ इसमें ऊपर से एक चम्मच असली घी डलवाती थीं मगर अब डॉक्टरों […]

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कहानी : छत

“मां, आखिर अब इस घर में बचा ही क्या है?पापा के जाने के बाद तुम भी बिल्कुल अकेली हो गई हो।मुझे रोज रोज छुट्टी नहीं मिलने वाली।सामान बांधो और चलो मेरे साथ”,रोहन ने लगभग चीखते हुए कहा सावित्री ने लम्बी सांस भरी और शांत भाव से बोली,”बेटा, मैं इस छत को छोड़कर कैसे चली जाऊं?इसमें […]

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पाठक की कलम से- 3

आँखें (कहानी) रोशनी पंद्रह-सोलह वर्षीय एक खूबसूरत लड़की तो थी ही, मगर इस से भी ज़्यादा फुर्तीली काम-काज में माहिर और गाने में सुरीली आवाज़ की मालिक थी। हर सुबह वह माँ के साथ बाबा नानक जी की फोटो के सामने खड़ी हो कर अरदास में शामिल होती, फिर वह बगीचे में जा कर फूलों […]

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किसान

‘​सिर्फ भाग-दौड़ भरी जिन्दगी, जिन्दगी नहीं होती साहब! जिन्दगी के कुछ वसूल है, कुछ सिद्धान्त है, जिन पर चलना और ढलना भी जरूरी है, और इतना ही नहीं साहब! साल के बारहों महीनें, छ: की छ: ऋतुएँ, तीनों मौसम की मार झेलने के बाद सुख दुख से लड़ना भी एक जीवन है, और यही जीवन […]

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पुश्तों से चली आ रही कोल्हा 

गांव के जमीन पर लहलहाती स्नेहयुक्त वातावरण पर न जाने किस मनहूस ने विष का प्याला धर दिया था.जिसके आगोश मे आकर पनप रहा भाईचारे का पौधा शनै-शनै झुलसने लगा था.आए दिन जाति-पाति, वर्ण-व्यवस्था, झगडा-फसाद को लेकर गांव अब शनै-शनै घमासान कोहराम का केंद्र बनता जा रहा था. मैं उन दिनों बी.ए.का विद्यार्थी था. गांव […]

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कहानी- गलतफहमियां

एक महोदय पार्टी में सीना चौड़ाकर कर बोल रहे थे कि मेरा बेटा मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है। पास में खड़े अन्य लोग उनकी बातों को सुन रहे थे, तभी एक दूसरे व्यक्ति ने किसी से पूछा कि शर्मा जी आपका बेटा भी तो किसी कंपनी में काम करता है? शर्मा जी ने जवाब […]

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जुड़वा बहनें

डॉ कोमल वर्मा ने नीता से कहा -” नीता अब वो पल आ गया जब तुम पहली बार अपनी आंखों से इस दुनिया को देखोगी! क्या तुम इस बेहतरीन लम्हें के लिए तैयार हो?” नीता बहुत ही खुश होकर बोली -” जी हां डॉक्टर दीदी ,मैं तैयार हूं!” डॉ वर्मा बोली -” तो बताओ नीता, […]

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नज़रिया

“नमिता, तुम बार-बार उन लोगों के पास क्यों चली जाती हो? क्या बात करती रहती हो उनसे। देखो, मैंने पहले भी तुमसे कहा है कि वह लोग हमारे स्तर के नहीं है। उनका रहन-सहन देखो। गंदगी देखो। अपने घर में बैठो या फिर पड़ोस में और भी लोग हैं, उन से मेलजोल रखकर समय बिता […]