कहानी

बदसूरती

दुनियां वालों से अपनी बदसूरती के ताने सुनते आ रही नैना को ज़रा पहले ही मालूम हो गया होता कि उसके प्रति सहानुभूति दिखाने वाले दिनेश के मन में उसके लिए इतनी घिनोनी मानसिकता भरी हुई हैं तो वो कभी भी उसके लिए दोस्ती का हाथ न बढ़ाती और फिर सुजीत देवदूत बनकर नैना के […]

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सड़क के किनारे

आजकल हर इंसान के दिमाग में चालाक बनने का गुण भरा जा रहा है जो कि आज की परिस्थितियों के हिसाब से बहुत आवश्यक भी है, पर कई स्थितियों में चालाकी और इंसानियत के बीच के फर्क को पहचानना भी बहुत जरूरी हो जाता है, नहीं तो कभी-कभी आपका चालाकी दिखाना इंसानियत से शत्रुता करना […]

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कारीगर

ज्येष्ठ का महीना अपनी प्रचंड गर्मी को धरती को बाँटने में व्यस्त है। गर्म धरती के जैसे होंठ सूख रहे हैं पक्षी तुच्छ उड़ाने उड़कर पेड़ों की छाँव में दुबक रहे थे। घास के एक छोटे से टेल्ले में वह सुबह तपस के जागने से पहले ही बैठ गया है। पहले आते ही उसने सप्पड़ […]

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कहानी – माँ के प्रेम का चमत्कार 

कुंती के विवाह को चार साल हो चुके थे, पर उसके कोई संतान न थी। उसके ससुराल के लोग उससे बहुत नाराज रहते थे। वह कहती थी कि जब तक भगवान की मर्जी न हो, तब तक कुछ नहीं होता है। दिन बीतते जा रहे थे। सात साल हो गए विवाह को लेकिन गोद नहीं […]

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आत्मसम्मान

अस्पताल में अफ़रा तफ़री मच गई एक्सिडेंट में बहुत बुरी तरह ज़ख़्मी कोई पेशन्ट आया था। दीप्ति ने देखा वो पेशन्ट शशांक था जिससे दीप्ति कभी बेइन्तहाँ प्यार करती थी, अपनी जान से ज़्यादा चाहती थी। बेशक शशांक को इस हालत में देखकर दीप्ति का दिल चर्रा उठा पर लहू-लुहान पूरी तरह से ज़ख़्मी शशांक […]

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लपंडूक बेटों ने ज्योतिषी की नाक कटवाई

अपने घर बच्चों को बेरोजगारी से बिहार के एक जिले के एक गांव संजौली के सीधे-साधे किसान हरेराम गोप जिन्होंने ने कड़ी मेहनत कर अपने घर के सभी बच्चों को देश के जाने-माने यूनिवर्सिटियों से शिक्षा दिलवाई थी बहुत परेशान रहते थे।उनके दरवाजे पर एक दिन वह ज्योतिषी पुनः पधारा जिसने कहा था तुम्हारे बच्चे […]

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अंधविश्वास

इक्कीसवीं सदी की पढ़ी लिखी तेज़ तर्रार लड़की रिया आसमान में उड़ रही थी जैसा सोच रखा था वैसा ही ससुराल पाया था। सुखी संपन्न और सबसे महत्वपूर्ण घर के सारे लोग पढ़े लिखे और प्रबुद्ध है। रिया का मानना था की पढ़े लिखे लोगों से तालमेल बिठाना सहज हो जाता है। मानसिक खटराग नहीं […]

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आशादीप

मालती का आज विद्यालय में पहला दिन था।वह पहले दिन ही देर से नहीं पहुँचना चाहती थीं।उसने एक रिक्शा वाले को धीरे से आवाज लगाई।हाँ मैडम जी कहाँ छोड़ दूँ,आपको?मुझें विद्यालय जाना हैं। विद्यालय, मैडम जी दस रुपए लगेंगे रिक्शा वाले ने गम्भीर होते हुए कहा।दस रुपए तो बहुत ज्यादा हैं,भईया।नहीं मैडम जी,कहाँ ज्यादा है […]

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जिम्मेदारी

घर पर खुशियों का माहौल था। सभी ओर से बधाई मिल रही थी। रमेश और सुरेश ने अपनी माँ का नाम रोशन कर दिया था। उनकी सफलता का श्रेय उनकी माँ को जाता था। आरती देवी स्वभाव से बड़ी ही शान्त थी। वह बच्चों की सफलता का श्रेय उनकी मेहनत को ही देती थी। सब […]

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शिखर

माला जी, आज आप कला के शिखर पर हैं। कृपया अपने चाहने वालों को भी बताएं।कैसा लगता है आपको इस शिखर पर पहुंचकर?अच्छा लगता है।आपकी कलाकृतियां सबको इतनी पसंद आती हैं। मैं तो आपका सबसे बड़ा चाहने वाला हूँ।पत्रकार ने मुस्कुराते हुए कहा।जी,आप सभी कला पारखियों का बहुत-बहुत धन्यवाद। अखबार में छपे माला के इंटरव्यू […]