Category : कहानी



  • कहानी : फर्ज

    कहानी : फर्ज

    ट्रिन-ट्रिन अचानक फोन की घंटी घनघना उठी,पीहू ने फोन उठाया सामने से बेटे रंजन की आवाज आई- ”ममा, मै ,कल आ रहा हूँ;मेरा दीक्षांत समारोह सम्पन हो गया,अब मै आपके साथ कुछ दिन तो आराम से...

  • *काला कलंग*

    *काला कलंग*

      सोच तो रही हूँ ,अपने कुछ विचार , कुछ अनुभव भी लिखूँ , लेकिन शुरुआत कहाँ से करूं , भ्रूण ह्त्या , दहेज़-प्रथा , सास-बहु के झगडे के बाद जलाना ,पति-पत्नी के तलाक की ख़बरें...


  • सच्चा प्यार

    रविवार का दिन था, दयाल चंद अपनी आलीशान कोठी के बाहर अपनी कार धो रहा था। कार धोने में , उसके दोनों  बेटे रवि और दीपू  भी उसकी सहायता कर रहे थे ।  वो दोनों पिता...



  • घर का मोह

    घर का मोह

    चाचा (पड़ोसी ,हम 10 साल से साथ थे) की मिट्टी ( 29-07-2013)मिट्टी में मिल गई …. चाची अकेली रह गई …. चाची बहुत ,बहुत , बहुत जल्दी-जल्दी और अस्पष्ट बोलती हैं …. और … एक ही...