कहानी

अमृत वृद्धाश्रम : एक नयी शुरुवात

मैंने धीरे से आँखे खोली, एम्बुलेंस शहर के एक बड़े हार्ट हॉस्पिटल की ओर जा रही थी। मेरी बगल में भारद्वाज जी, गौतम और सूरज बैठे थे। मुझे देखकर सूरज ने मेरा हाथ थपथपाया और कहा, “ईश्वर अंकल, आप चिंता न करे, मैंने हॉस्पिटल में डॉक्टर्स से बात कर ली है, मेरा ही एक दोस्त […]

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यौन कर्मी

दिल्ली का चांदनी चौक रोज की तरह आज भी कुछ सनसनीखेज करने के चाह अपने अंतस में छिपाए अनिल कुमार निकल पड़े अपने दफ्तर की राह पर… दफ्तर उनके घर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर था. तो रोजाना पैदल ही वहां तक का सफ़र तय किया करते थे. इसी दौरान अपने पत्रकारों वाले […]

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हकीकत

एक बार खाली सी शाम थी तो यूंही टहलने निकल पड़ा..बाज़ार शुरु होते ही चमचमाती लाइटें..गोलगप्पे खाती महिलाये..खोखे के पीछे छिपकर..सुट्टा लगाते कुछ लड़के..सपरिवार शापिंग..करके कारों में आते-जाते लोग..चाय की चुस्कियां लगाते ऑफिस..गोइंग पर्सन्स..एक दूसरे के आगे-पीछे भागती जिंदगियां… सब कितना अपना सा लगता है और कभी-कभी बेगाना भी. टहलते-टहलते सोचा कि आज घर पर […]

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करवाचौथ

बस अब इन दिनो मे और जमकर मेहनत करनी है ये सोचता हुआ रामू अपना साईकिल रिक्शा खिचे जा रहा था।पिछले 8-10हफ्तो से वो ज्यादा समय तक सवारी ले लेकर और पैसे कमाना चाह रहा था।अपनी धुन मे वो पिछले कितने समय से लगा हुआ था। ले भाई !तेरे पैसे ये कहते हुए सवारी वाले […]

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गिरवी

कॉलेज ख़त्म होने का आखिरी दिन, सभी लोग एक दूसरे से विदा ले रहे हैं. गले मिल रहे हैं. अपना फ़ोन नंबर बदल रहे हैं. एक दूसरे को भविष्य में न भूल जाने का प्रण ले रहे हैं. कहीं खुशियों के मारे लोग उछल कूद कर रहे हैं, तो कहीं आखों से आंसूं रुक नहीं […]

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रमा

ज़िन्दगी क्या चीज है, समझ न आए कभी — हँसी थमी नहीं, रुला देती है. बड़ी जटिल हैं इसकी राहें. आदमी बहुत कोशिश करता है कि अपनी राहों को हमेशा कंटकों से मुक्त रखे. लेकिन सबकुछ क्या अपने वश में होता है? बार-बार आदमी नियति के हाथों पराजित होता है, पर संघर्ष करना भी तो […]

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नकेल

 राधिका जी के सामने अख़बार पड़ा था। ख़बर कल की थी। यह खबर  उन्ही के शहर की एक दुर्घटना की थी। विचलित थी वह , अख़बार की  खबर  से नहीं बल्कि उनके सामने ही घटी थी वह दुर्घटना। वह कल दोपहर बाद भोजन के पश्चात घर से अपने ऑफिस आने को निकली थी कि राह में एक आवारा सांड ने […]

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कहानी : किसे अपना कहूँ?

गीता पुरोहित दीदी की कहानी इन दिनों सर्दियों की छुट्टियों मे घर मे बहुत चहल पहल थी। खाने मे बच्चों का फरमाइशी प्रोग्राम चालू था |सीता भी ये सब करके खुश थी पर कही मन थोडा उदास था |बहुत सोचने पर भी समझ नहीं आया। इसी सीजन मे पंतग भी उड़ाते है तो बच्चे छत […]

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कहानी : ढलती सांझ

रात के दो बज रहे होंगें। इस शांत नीरव वातावरण में किसी के क्रंदन की आवाज मानों आकाश गर्जना कर रही हो। जहां हल्की सी फुसफुसाहट भी रात में जोरों की आवाज लगती हों यह तो किसी के रोने की आवात थी। वैसे भी मेरी नींद काफी कमजोर है. कब खुल जाए कुछ कहा नहीं […]

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दिमागी उपज…या कुछ और…!!

बंगलौर… सुबह के लगभग 8 बज रहे होंगे… शर्मा जी रोज़ की ही तरह आज भी अपने बैंक की ओर अपनी गाडी लेकर चल पड़े… शर्मा जी एक सरकारी बैंक में मैनेजर के तौर पर कार्यरत हैं. बैंक 9 बजे के आसपास खुलना था आम लोगों के लिए, तो वह बैठकर अपने साथ मित्र से […]