उपन्यास अंश

लघु उपन्यास – षड्यंत्र (कड़ी 16)

इस प्रकार कणिक ने महाराज धृतराष्ट्र को राजनीति की मुख्य बातें समझायीं और शत्रुओं को वश में करने के उपाय बताये। परन्तु यह सब तो धृतराष्ट्र पहले से ही जानते थे। उनको इससे संतुष्टि नहीं हुई, क्योंकि जिस उद्देश्य से उन्होंने कणिक को परामर्श हेतु बुलाया था, वह उद्देश्य पूरा होता नहीं लग रहा था। […]

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लघु उपन्यास – षड्यंत्र (कड़ी 15)

शकुनि की बातें सुनकर धृतराष्ट्र की चिन्ता और अधिक बढ़ गयी। पांडवों के प्रति उनके मन में द्वेष तो पहले से ही था, लेकिन अब इस संभावना को सोचकर उनकी चिन्ता चरम पर पहुँच गयी कि उनको राजसिंहासन छोड़ना पड़ेगा और उनके पुत्रों को पांडवों की दया पर रहना पड़ेगा। इस संभावना के कारण उनको […]

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लघु उपन्यास – षड्यंत्र (कड़ी 14)

सामान्यतया राज्य में होने वाली घटनाओं की सभी बातें शकुनि महाराज धृतराष्ट्र तक पहुँचा देता था और अपनी ओर से भी झूठी-सच्ची कहानियाँ जोड़कर उनके मन में पांडवों के प्रति ईर्ष्या को पुष्ट किया करता था। इसका परिणाम यह हुआ था कि धृतराष्ट्र प्रत्यक्ष में पांडवों के प्रति प्रेम होने का दिखावा करते हुए भी […]

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लघु उपन्यास – षड्यंत्र (कड़ी 13)

पांडवों की कीर्ति से दुर्योधन आदि कौरव राजकुमारों को बहुत ईर्ष्या होती थी। यों तो प्रत्यक्ष में उनको कोई कष्ट नहीं था, लेकिन पांडवों का बढता प्रभुत्व उनकी आँखों में दिन-रात खटकता था। धृतराष्ट्र के अति महत्वाकांक्षी पुत्र दुर्योधन ने शकुनि की सहायता से अपना गुप्तचर तंत्र विकसित कर रखा था, जो जनमानस में व्याप्त […]

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लघु उपन्यास – षड्यंत्र (कड़ी 12)

युधिष्ठिर द्वारा युवराज पद सँभालने से हस्तिनापुर का वातावरण बदलने लगा। सबसे पहले तो उन्होंने न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ किया। उन्होंने अपने गुप्तचरों द्वारा पता लगाया कि कौन-से राजकुमार व्यापारियों का सामान बिना मूल्य दिये उठा ले जाते हैं। उन्होंने उन राजकुमारों को अपने सामने बुलाकर कड़ी फटकार लगायी और व्यावसायियों को क्षतिपूर्ति दिलवायी। इसके […]

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लघु उपन्यास – षड्यंत्र (कड़ी 11)

दुर्योधन की यह बात सुनकर सारी राजसभा सन्न रह गयी। तभी भीष्म पुनः खड़े हुए और दुर्योधन की ओर मुँह करके बोले- ”वत्स दुर्योधन! ऐसी बातें मत करो। यदि वैध-अवैध सन्तानों की चर्चा करोगे, तो तुम्हारा पक्ष और अधिक निर्बल हो जाएगा। यह मत भूलो कि तुम्हारे पिता भी नियोग से ही उत्पन्न हुए थे। […]

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लघु उपन्यास – षड्यंत्र (कड़ी 10)

अगले दिन जैसे ही राजसभा की बैठक प्रारम्भ हुई, महामंत्री विदुर ने सूचित किया कि पितामह भीष्म एक विशेष विषय पर विचार करना चाहते हैं। महाराज धृतराष्ट्र ने तत्काल अनुमति दे दी- ”पितृव्य, आप किस विषय पर विचार करना चाहते हैं, उसे प्रस्तुत कीजिए।“ अनुमति पाते ही तत्काल भीष्म अपने स्थान पर खड़े हो गये […]

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लघु उपन्यास: षड्यत्र (कड़ी 9)

भीष्म विदुर की प्रतीक्षा ही कर रहे थे। विदुर को आया देखकर उनका मुखमंडल खिल गया। औपचारिक अभिवादन और कुशलक्षेम के उपरान्त वे गम्भीर चर्चा प्रारम्भ करने के लिए तैयार हो गये। ”हाँ विदुर! कहो क्या समाचार हैं?“ ”समाचार चिंतित करने वाले हैं पितृव्य! जनसाधारण बिना देरी किए ज्येष्ठ राजकुमार युधिष्ठिर को युवराज के रूप […]

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लघु उपन्यास: षड्यन्त्र (कड़ी 8 )

उधर गुप्तचरों द्वारा विदुर को जनभावनाओं की पूरी सूचना मिल रही थी। युधिष्ठिर की शिक्षा पूर्ण हुए एक वर्ष से अधिक हो चला था, लेकिन अभी तक उनको युवराज घोषित नहीं किया गया था, यह बात सामान्य जन को खल रही थी। एक दिन विदुर स्वयं साधारण वेष में गुप्त रूप से नगर में भ्रमण […]

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लघु उपन्यास: षड्यन्त्र (कड़ी 7)

लेकिन दुर्योधन को कुछ न कुछ राय तो देनी ही थी, इसलिए शकुनि बोला- ”भाग्नेय! अभी तो यह विषय राजसभा में विचार के लिए आया ही नहीं है, लेकिन इसमें कोई सन्देह नहीं कि शीघ्र ही आएगा और अधिकतम संभावना यही है कि युधिष्ठिर का युवराज पद पर अभिषेक करने का निर्णय कर लिया जाएगा। […]