Category : पद्य साहित्य

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    विधाता छंद, मापनी- 1222 1222 1222 1222…… ॐ जय माँ शारदे…….! उठा कर गिन, रहे टुकड़े, जिसे तुमने, गिराया है तुम्ही जिसमें, ललक तकते, रहे किसने, डराया है छिटककर अब, पड़ें है जो, नुकीले हो, गए...


  • बाल संहार

    बाल संहार

    रो पड़ा था गोरखपुर रोया सारा हिन्दुस्तान था बेरहम व्यवस्था ने छिना जब बच्चों का आसमां था बिखल पड़ी मां की ममता पिता के अश्रु रुक न पाये थे जब बच्चों के मुर्दा शव सधे हाथों...

  • आलिंगन

    आलिंगन

    नारी के आलिंगन में  सुप्त है ममता‚ हमदर्दी प्रेम का अथाह समंदर बेशक‚ नर के आलिंगन में हिम्मत‚ साहस व जज्ब़े की गंध है लेकिन‚ नारी के चुंबकीय आलिंगन के आगे नर आलिंगन के अस्तित्व का...

  • आगे बढ़ते जाएंगे

    आगे बढ़ते जाएंगे

    कांटों भरा हो पथ चाहे हम तनिक नहीं घबराएँगे लाँघ मार्ग की बाधाएँ विजय का ध्वज लहराएँगे चलते रहेंगे, बढ़ते रहेंगे, आत्मविश्वास न डिगाएँगे हम वीर,धीर,गंभीर बनेंगे विजयी गान ही गाएँगे पथ की स्वर्णमयी शिलाओं पर...


  • लापरवाही

    लापरवाही

    जहां जन्म सड़क पर होता है, और कंधे पर लाशें ढोईं जायें। वहां मुफ्त में डाटा बंटता है, आंटो पर इज्जत खोई जाये।। धन का अभाव दुर्भाग्य बना, ऐसा ही सब बतलाते हैं। जीवन रक्षक गैस...

  • जन्मभूमि

    जन्मभूमि

    ये वीरान खंडहर मेरी जन्मभूमि है, मेरी ही नहीं मेरे मां की मातृभूमि है। नानी ने जन्म पाया, एक वंश को खिलाया, जिसकी मिट रही पहचान मेरी जन्मभूमि है।।१।। ऐसा नहीं की अक्षम है, सारे संरक्षक...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बात शिकवे की’ करो तो वो’ खफ़ा होता है किन्तु उनका कहा’ पेंचीदा’ गिला होता है | आड़ होती गो’ की’ रक्षा, छिपा रहता मुखड़ा मारना पीटना हत्या, वो’ जफ़ा होता है | वो दुकाने खुली’...

  • दोषी कौन……..?

    दोषी कौन……..?

    दे दूं मैं दोष किसे यह बतलाओ, मिटती मानवता का कारण बतलाओ। अभी-अभी जो जन्मा उसका दोषी कौन, कैसा विकास? जन्म सड़क पर समझाओ।। तन का रक्त बहा सड़क पर, शर्म हया बह गया सड़क पर।...