Category : पद्य साहित्य

  • इंद्रधनुष रूपी प्रेम

    विधा- कविता शीर्षक- इंद्रधनुष रूपी प्रेम रचनाकार- जयति जैन “नूतन” इंद्रधनुष सा प्रेम मेरा रंगों से परिपूर्ण है ठीक वैसे ही जैसे जिन्द्गी एक रंगमंच जहा रोज़ नये रंग मंच पर उभर आते हैं ! ठीक...


  • आज की नारी

    आज की नारी

    मर्यादा की बेड़ियाँ… तोड़ती सड़ी-गली परम्पराएँ… पीछे छोड़ती । सदियों से बिछे हुए… जाल हटाती तोड़ चक्रव्यू… नये ख्वाब सजाती। पितृसत्ता को देती चुनौती… आज की नारी अक्सर,,, घोषित कर दी जाती है … “बे-पर्दा” औरत...


  • दोहे – “रखो रेडियो पास में”

    दोहे – “रखो रेडियो पास में”

    भूल गया है रेडियो, अब तो सारा देश। टीवी पर ही देखते, दुनिया के सन्देश।। लाये फिर से रेडियो, मेरे भाई साब। मिलता हमको है नहीं, इसका कोई जवाब।। सुनने में अच्छे लगें, भूले बिसरे गीत।...

  • जीवन के अनमोल पल

    जीवन के अनमोल पल

    जीवन के अनमोल पल को व्यर्थ नही गवाना चाहिएँ समय का सदुपयोग सदी कर नित आगे बढ़ना चाहिएँ साथी संगी सबके साथ मिलजुल कर रहना चाहिएँ जीवन ने क्या – क्या सिखलाया नित चिंतन करना चाहिएँ...

  • कोई  समझाओ तो……

    कोई समझाओ तो……

    खिज़ा निकली है तलाश में बहारों की मौसम गमों से सरद है कोई समझाओ तो… यूं ही कोई उदास नहीं होता किसी को खोने का गम है इसे बताओ तो… क्यों करे गिले शिकवे यह वक्त...

  • गीत : गुजरात में कांग्रेस की हार

    गीत : गुजरात में कांग्रेस की हार

    (गुजरात और हिमाचल में कांग्रेस की हार पर राहुल खान गांधी को समर्पित मेरी ताज़ी कविता) खूब लगाया ज़ोर कुंवर ने, बाहें खूब समेटी थीं, कुछ पटेल की भटकी नस्लें, जातिवाद पर ऐंठी थीं, इक फ़िरोज़ का पोता, जबरन...

  • पुकार

    पुकार

    हर वक्त पुकारा है भगवान, आपको मैंने जब द्रोपदी की तरह चीर हरण हो रहा था मेरा राज सभा हंस रही थी मुझ पर तब भी, जब सीता की तरह त्यक्त कर दी गई थी मैं...