गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फ़िदा तुम पे दिल ये हमारा न होता अगर हुस्न इतना सँवारा न होता नहीं टूटता गर ये पतवार यारो बहुत दूर मुझसे किनारा न होता बदलता मैं किस्मत जो मेहनत के बल पे तो गर्दिश में मेरा सितारा न होता मिली होती मुझको ख़ता की मुआफी तो तन्हा ये जीवन गुज़ारा न होता अगर […]

गीत/नवगीत

किरणों ने धरा पर पैर पसारा

निशा  नाश की नीव लगी तब,  समझो उदिता हुआ उजियारा।  दैत्य प्रसंग विलुप्त भए तब, किरणों ने धरा पर पैर पसारा।। हुई यामिनी, लुप्त बिलख कर, तारे चांद को निद्रा आई। भोर की प्रीत, पड़ी अंबर से, शीतल मंद, पवन   उठ आई।।  पीत रंग, में रंगा दिवाकर,  जगा, जगत का पालनहारा,, दैत्य प्रसंग, विलुप्त भये […]

मुक्तक/दोहा

देश का जवान

देश रक्षा की खातिर जो अमित बलिदान देते हैं, चीर सीना हिमालय का शत्रु को मात देते हैं।  कई लाशें दफन है आज भी गुमनाम राहों पर, मगर भारत की सेवा में यह जीवन वार देते हैं।। देश भक्ति का यह चोला  उतारा जा नहीं सकता, इनके एहसान का गुणगान गाया जा नहीं सकता। जिंदगी खूबसूरत […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

उन्हें क़ातिल बताया जा रहा है। लहू जिनका बहाया जा रहा है।। समंदर से चला दरिया पलट कर, पहाड़ों पर चढ़ाया जा रहा है। नियत खोटी हुई है आदमी की, मुहब्बत को सताया जा रहा है। नहीं मालूम हैं जीवन के मानी, उसे तो बस बिताया जा रहा है । फ़क़त इंसान अंधा इस कदर […]

गीत/नवगीत

भादों की बारिश में

छिपी बहुत सी गहरी बातें, भादों की बारिश में। वसुंधरा की धानी चुनर से, निसर्ग हुआ नयनाभिराम। शीतल आर्द्र पवन ने देखा, गगन हुआ घनश्याम। दादुर ने कुछ सुना ही दिया, भादों की तारीफ में। छिपी बहुत सी…। लहरा उठे हैं आँचल, इठलाती हुई नदियों के। तन-मन प्रफुल्लित हैं आज, पहाड़-पर्वत घाटियों के। झूमना याद […]

गीतिका/ग़ज़ल

सन्तुष्टि

गरीबी को भी ओढ़ना और बिछाना जानता हूँ भूख से व्याकुल भले ही, मुस्कुराना जानता हूँ। अभावों में भी सन्तुष्टि, लक्ष्य जीवन का रहा, झोपड़ी में बच्चों संग, महल का सुख जानता हूँ। हैं बहुत तन्हां महल, सब रहें अलग अलग, बच्चों से हो बात कैसे, दर्द महल का जानता हूँ। अर्थ को समर्थ समझते, […]

कविता

बदलता हुआ वक्त

वक्त के पन्नों पर सब कुछ बदल जाएगा जो लिखा है नसीब में वो भी मिल जाएगा। सोचा न था जो कभी वो भी कुछ-कुछ खोकर मिल ही जाएगा। संभाल सकते हो तो संभाल लेना उस वक्त को जो खोने वाला है। क्योंकि खोए हुए वक्त के साथ अपने भी खो जाते हैं और पराए […]

कविता

जीवन की गाड़ी फिर से पटरी पर होगी

..…………………………………….. आज गम है जीवन में कल खुशी भी होगी तनिक ठहरो उदास चेहरों पर हँसी भी होगी ये लम्हे जो तुमको लग रहे हैं आज कठिन राहें चार कदमों के बाद आसान भी होगी। कुछ सपने जो देखे हैं तुम्हारी आंखों ने मंजिलें पाने की जिद की है ख़्वावों ने थोड़ी सी मेहनत और […]

गीत/नवगीत

गीत-खुशियों की सौगात

*पत्नी पर गीत* *खुशियों की सौगात* लेकर खुशियों की सौगात दिल में पत्नी बनकर तुम जब घर में आई जिंदगी बिन तुम्हारे अधूरी तुमको देखा तो यह मुस्कुराई। लेकर खुशियों की सौगात दिल में पत्नी बनकर तुम जब घर में आई। घर की लक्ष्मी तुम देवी का रूप हो ग़म की छाया में चमकती धूप […]

कविता

स्वास्तिक

      स्वास्तिक धर्म का प्रतीक जो सघन संवेदना का आधार जिससे होता मंगल हमारा कल्याण ही है आधार देवताओं की शक्ति जो शुभकामनाओ का प्रतीक नूतन निर्माण है जो कर्म-भावना का आधार चार भुजा धारी है जो अनंतता में गति आधार जड़-चेतन का संयोग जीव-जगत का विकास भारतीय संस्कृति का आधार मंगल कामनाओं का प्रतीक […]