Category : पद्य साहित्य



  • रिश्ता

    रिश्ता

    कैसा रिश्ता है अपना… कुछ कच्चा, कुछ पक्का सा… पानी के बुलबुले पे तैर आकाश छूने की ख्वाहिश इरादे मजबूत इतने कि पहाड़ से भी टकरा जाए और नाजुक इतना कि ज़रा सी छुअन से भी...

  • फ़ौजी-किसान  

    फ़ौजी-किसान  

    1. कर्म पे डटा कभी नहीं थकता फ़ौजी-किसान! 2. किसान हारे ख़ुदकुशी करते, बेबस सारे! 3. सत्ता बेशर्म राजनीति करती, मरे किसान! 4. बिकता मोल पसीना अनमोल, भूखा किसान! 5. कोई न सुने किससे कहे हाल...


  • गीत : जातिवाद का जहर

    गीत : जातिवाद का जहर

    जातिवाद का जहर, थोड़ा इधर-थोड़ा उधर सम्प्रदायों का कहर, थोड़ा इधर-थोड़ा उधर खेल ऐसा  स्वार्थी, सत्तालोलुप ही  खेल रहे सीना ज्यों खखोरता थोड़ा ठहर-थोड़ा ठहर। करनी से गद्दी गई अब जाएं तो जाएं किधर जातिवाद का...

  • न ना पिया

    न ना पिया

    न ना पिया आज मैं तुमको नहीं बाहों में भरने दूँगी नयनों में भरे लाज मेरे शर्म की घूंघट नहीं खोलूँगी न ना पिया आज मैं तुमको नहीं बाहों में भरने दूँगी मेरा तन है जैसे...

  • वादा

    वादा

    बहुत आसां है तोड़कर वादे को अपने आगे निकल जाना पर कभी फुर्सत में सोचना बैठकर इसकी एहमियत जब हम गर्भ में अंकुरित होते है तो माँ खुद से करती है वादा कि असहनीय पीड़ा के...

  • गीत

    गीत

    (कश्मीर में मस्जिद के बाहर मुसलमानों की भीड़ द्वारा मारे गए निर्दोष DSP अयूब जी की शहादत पर दिल से निकली एक कविता) कश्मीर में आतंक का सामान नहीं हूँ, अच्छा हुआ काफिर हूँ, मुसलमान नहीं...