Category : पद्य साहित्य



  • “गज़ल/गीतिका”

    “गज़ल/गीतिका”

    रोज मनाते बैठ दिवाली बचपन लाड़ दुलार सखी नन्हें हाथों रंग की प्याली दीया जले कतार सखी नीले पीले लाल बसंती हर फूल खिले अपनी डाली संग खेलना संग खुशाली नाहीं कोई दरार सखी॥   चौक...

  • “विधा- दोहा”

    “विधा- दोहा”

    रे रंगोली मोहिनी, कैसे करूँ बखान विन वाणी की है विधा, मानों तुझमे जान।।-1 भाई दूजी पर्व है, झाँक रहा है चाँद नभ तारे खुशहाल हैं, अपने अपने माँद।।-2 झूम रही है बालियाँ, झलक उठे खलिहान...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    नाचत गावत ग्वाल मुरारी माधव मोहन। गोवर्धन गिरि लपकि उचारी माधव मोहन। जय जय केशव गोविंद प्रभु महिमा गिरधारी- राधापति गोपाल कछारी माधव मोहन।।-1 नाम सहस्त्र रूप अलबेला माधव मोहन। मोहक मोहन अति प्रिय छैला माधव...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    जगमग अवली दीप हमारे सुंदर साख प्रदीप हमारे अनुपम पुंज प्रकाश पर्व यह रोशन चित नवदीप हमारे।। चाँद छुपा है रात दिवाली आभा अति प्रियदीप हमारे।। शोर शराबा किलक पटाखे हरषित प्रिय कुलदीप हमारे।। रंगोली घर...

  • यादें….

    यादें….

    कुछ यादें पुकारती है बहुत दूर से कभी बचपन से..… कभी जवानी से…. बनती है आँखों में धुंधली धुंधली सी तस्वीर कोई बुदबुदाती है कानों में यादों की मीठी पुकार बहुत दूर निकल जाती हूँ यादों...

  • “गुरूनानक का दरबार”

    “गुरूनानक का दरबार”

    ये गुरूनानक का दरबार। दर्शन कर लो बारम्बार।। लगा हुआ नानकमत्ता में, दीवाली का मेला, कृपाणों की दूकानें और फूलों का है ठेला, मनचाहा ले लो उपहार। दर्शन कर लो बारम्बार।। देखो-देखो कितने सुन्दर कंघे, कड़े-खिलौने,...

  • geet

    geet

    तेरी यादों मे मै तो यू पागल हुआ रे तुमने आशिक मुझे पागल किया रे तेरी यादों में………. मेरी ये बाहे तुझको पुकारे मिलने आजा नदीया किनारे कैसे बताउं तुझको में अब निंद ना आयें बिन...