Category : पद्य साहित्य

  • कविता

    कविता

    नारी और भाग्य ________________________ मनआशा की मूरत जिसका आज निराशा छाई कैसे | दिल में इतना प्यार संजोए फ़िर ये नफ़रत पाई कैसे | पल- पल होती रही उपेक्षित सहती है रूसवाई कैसे | नारी मन...

  • ये कैसी बारिश आई है

    ये कैसी बारिश आई है

    नभ के हर कोने पर,तेरी ही रानाई है, ये कैसी बारिश आई है। अधरों के तपते शोलों पर,शबनम की बूँद लुभाई है, सदियों से प्यासे तन-मन की, प्यास और भड़काई है। पर मैने मन की उत्कृन्ठा,मन...

  • हम ज़िदा कब थे?

    हम ज़िदा कब थे?

    हम ज़िंदा कब थे? अगर हम ज़िंदा होते तो किसी औरत को बलात्कार नहीं सहते किसी व्यक्ति की निंदा नहीं करते भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाते न कि उसमे भागीदारी बनते अगर हम ज़िंदा होते तो...

  • गुजारिश….

    गुजारिश….

    आओ प्रिये! बैठो न पल दो पल साथ मेरे करनी है कुछ गुफ्तगू कुछ शिकवे हैं कुछ शिकायतें करनी है कुछ गुजारिशें सुनो न! कुछ लिखी हैं मैंने मन में उमड़ते घुमड़ते कितने ही भावों को...

  • “छंद मुक्तामणि, मुक्तक”

    “छंद मुक्तामणि, मुक्तक”

    विधान – 25 मात्रा, 13,12 पर यति, यति से पूर्व वाचिक 12/लगा, अंत में वाचिक 22/गागा, क्रमागत दो-दो चरण तुकान्त, कुल चार चरण, पर मुक्तक में तीसरा चरण का तुक विषम अतिशय चतुर सुजान का, छद्मी...

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    बह्र- 2122 2122 2122 2, काफ़िया- अर, रदीफ़- दिया मैंने क्या लिखा क्योंकर लिखा क्या भर दिया मैंने कुछ समझ आया नहीं क्या डर दिया मैंने आज भी लेकर कलम कुछ सोचता हूँ मैं वो खड़ी...

  • हसरत न पालिये

    हसरत न पालिये

    जितना हो सके हाँ दूर ही से टालिये। इस बेजुबान दिल में हसरत न पालिये।। बैठा के उसको सामने करते रहे हिसाब, दिल में छुपाएं कितनी कितनी निकालिये। किराए की सांसें लिए बैठे हैं आप हम,...

  • ———पर्यावरण बचाएं—— पेड़ों से इस धरा को सजाएँ वातावरण स्वच्छ बनाये आओ पर्यावरण बचाएं सब मिल के पेड़ लगाएं प्रदूषित कर दिया नदियों का पानी और तबाह हो रही है जिंदगानी जहाँ तहाँ मत कूड़ा फेंको...

  • 💦🔥विरह🌷🌴 ****************** प्रियतम तुम आयी थी, जीवन को महकाने, सूनी आँखो में फिर से नये सपने सजाने। वह बसन्त की स्वर्णिम बेला,वह मादक अँगडाई, दरवाजे पर घनी छाँव में , वह झूला पुरवाई। कुछ हरषाती तुम...

  • 🌹🌹प्यार🌷🌷 प्यार रिश्तों की धरोहर है, और इस धरोहर को बनाये रखना हमारी संस्कृति एकता और अंखडता है। यह अनमोल है। प्यार अमूल्य निधि है, इसकी अनुभूति किसी योग साधना से कम नहीं इसके रूप अनेक...