Category : पद्य साहित्य

  • खुशी को खुशी ही रहने दो, छोटा-बड़ा मत करो जीवन को जीवन ही रहने दो, खोटा-खरा मत करो। एक दिन मृत्यु तो आनी ही है, आनाकानी मत करो शर्म को शर्म ही रहने दो, पानी-पानी मत...

  • गज़ल

    गज़ल

    हरदम करता रहा सफर मैं बना न पाया कहीं भी घर मैं ================== लोगों ने आवाज़ बहुत दी लेकिन ठहरा नहीं किधर मैं ================== छोड़ गया जब तू ही मुझको क्या करता तनहा जीकर मैं ==================...

  • रंगो का त्योहार होली

    रंगो का त्योहार होली

    इधर भी रंग, उधर भी रंग, जिधर देखूँ रंग ही रंग, हर किसी के ऊपर छाया रंगों का त्योहार। पूछे जब कोई किसी से कुछ क्वेश्चन, तब चारों ओर से एक ही आवाज़ आये, आज़ है...

  • गजल

    गजल

    मैंने तुम दोनों को सोचा तो उभर आई गजल उँगलियाँ काँपीं तो कागज पे उतर आई गजल गुफ्तगू अपनों से करने को गजल कहते हैं इतना कहने के लिए छोड़ के घर आई गजल साधना ध्यान...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मुझे यह चाहत कहां पे लाई न मौत है ना ही जिंदगी है ये आग कैसी लगी है दिल मैं धुआं है ना कोई रोशनी है। किसीने ना पूछा हाल मेरा कि तंहा दिन कैसे हैं...

  • बेटी

    बेटी

    बेटी क्यो नही चाहिए? माँ चाहिए पत्नी चाहिए प्रेमिका चाहिए बहन चाहिए तो फिर बेटी क्यू नहीं चाहिए? बेटी अभिशाप नहीं वरदान है बेटी सृष्टि का मूल आधार है बेटी संस्कृति की संवहक हे बेटी सभ्यता...