कविता

उस्तरे की धार

भारत के पोलिंग पार्टियों को 80 वर्ष और इनसे अधिक उम्रवाले तथा दिव्यांग मतदाताओं के ‘मत’ को उनके घर जाकर लेने चाहिए ! •••••• कुछ लोग ऐसे यहाँ जरूर हैं, जो हर मोड़ पर अपना रंग बदलते हैं कि गिरगिट भी शर्मिंदा हो जाय ! •••••• दुश्मन को लगे हुकाहुकी की तित्ति. यहाँ हाथ नहीं […]

कविता

अब तुम्हारे लिए

लेखनी बनकर बस तुम रहो साथ मैं लिखूं गीत बस अब तुम्हारे लिए..।। जो बचे खाली पन्ने हैं अरमानों के प्रीति उस पर लिखूं मैं तुम्हारे लिए..।। मेरी फीकी हंसी में मिला दो हंसी मुस्कुराउंगा मैं बस तुम्हारे लिए..।। रूठकर मुझसे तुम न सताया करो प्रेम मेरा है बस अब तुम्हारे लिए..।। साथ से साथी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खिल उठे हैं फूल प्यारे हर तरफ। खुशनुमा हैं अब नज़ारे हर तरफ। साथ जब से आपका मुझको मिला, ख़ूबसूरत से नज़ारे हर‌ तरफ। बाद बारिश के फ़ज़ा जगमग हुई, दिख रहे हैं अब सितारे हर तरफ़। इक ज़रासी आज धरती क्या हिली, खौफ़ में हैं लोग सारे हर तरफ़। जब नज़र अच्छाई की जानिब […]

गीत/नवगीत

बन सका न ये इंसान

देख तेरे इस जग की हालत क्या हो गई भगवान। ईंट-गारे के महल बने हैं बन सका न ये इंसान। अंहकार में डूबा प्राणी व्यर्थ करे इस जीवन को। चक्रव्यूह में फंसा हुआ समझे न इस उलझन को। न जाने क्या खोज रहा ये बन करके मेहमान। देख तेरे इस जग की हालत क्या हो […]

कविता

विजय पर्व

हम सब हर साल रावण के पुतले जलाते हैं विजय पर्व मनाते हैं, शायद मुगालते में हम खुद को ही भरमाते हैं। वो त्रेतायुग था जब राम ने रावण को मारा था, तब रावण अकेला ही रावण था इसीलिए राम से हारा था। अब तो कलयुग है रावणों की फौज हर ओर खड़ी है। अब […]

कविता

स्वदेशी

आपको खुद से अपने लोगों से अपने परिवार से अपने समाज से अपने राष्ट्र और राष्ट्रीयता से प्यार है तो विचार कीजिए स्वदेशी उपयोग का सौगंध लीजिए। विदेशी चमक धमक का मोह छोड़िए, स्वदेशी का उपयोग कीजिये। आपका एक कदम बहुतों को प्रेरणा देगा, अपने लोगों अपने देश का भला होगा। अपने देशी उत्पादों का […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अपनी बर्बादी के मंज़र नही देखे जाते, आंख में ठहरे समंदर नही देखे जाते गम से कुम्हलाए हुए चेहरों को देखूं कैसे, जाने क्या बात है? क्यों कर ,नही देखे जाते। जाफ़रानी सी महक आती थी जिनसे पहले, उनके बदले हुए तेवर नहीं देखे जाते। हाथ में जो लिए गुलदान फिरा करते थे, अब उन्ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अदावत बेसबब  मत कीजिये  अच्छा  नही लगता, ये नफरत बेसबब मत किजिये  अच्छा नही लगता। चलो  मंजूर   कीं  ये  बेसबब  की  नफ़रतें  लेकिन, मुहब्बत बेसबब मत  कीजिये  अच्छा  नही लगता। मेरी  पलकों  के  अंगारे  तेरे  दामन  न  झुलसा  दें, शरारत बेसबब मत  कीजिये  अच्छा  नही  लगता। सलाखें   तोड़   दीं   तो   ये   रिहाई  मार   डालेगी, जमानत […]

कविता

संदेश

एक जमाना था, राजाओं और महा राजाओं का। उस जमाने संदेश, कबूतर के जरीये पहुंचाया जाता था। फिर जमाना लेखों और अभिलेखों का आया…. संदेश उस जमाने पत्थर को गोदकर दिया जाता था। कई समय के बाद, जमाना पत्र का आया….. कोई स्याही लिखता, तो कोई लिखता था खून से। कोई लिखता था, दिल की […]

कविता

घर परिवार

घर प्यार का मंदिर है, घर ही पूजा है। परिवार ही दुनिया है, परिवार ही संसार है। परिवार के सदस्यों में, न हो आपसी उलझने। आपसी रंजिशों को रखना ही, मतभेदों को जन्म देता है। परिवार ऐसा हो जहाँ छोटो से प्यार, और बडों से स्नेह मिले। और हो सबका आपसी लगाव। परिवार वह नहीं […]