कविता

प्यार का मौसम

बात ही बात में चाँदनी रात में चल पड़े जिधर कदम जन्नत है वहीं सनम बादलों की इस गाँव में तारों की छॉव में खाई है जीने मरने की कसम आई प्यार की है मौसम घर है ना द्वार है बस तेरा ही प्यार है जी लेगें ये जीवन हम झेल कर सारे गम फूल […]

कविता

बसंत

बसंत आगमन की महक फिजा में महकने लगती है, ठंड की विदाई ,नव कोंपलों से हरे भरे पेड़ संवरने लगती है चहुंओर छा जाती हरियाली फूलों की रंगीनियां रंग बिरंगे फूलों की छटा कलकल करती नदियां, पक्षियों की चहचहाहट आनंद का सुखद अहसास चंद्र की मनमोहक चांदनी स्वच्छ निर्मल आकाश तरोताजा करती हवाएं पकती फसलें, […]

भजन/भावगीत

मेरे कान्हा जी

मुझे अपना  मीत बनाओ मेरे कान्हा जी, मुझे भी सखियों के संग रिझाओ मेरे कान्हा जी, मुझे भी रासिको का रास सिखाओ मेरे कान्हा जी, मुझे भी प्रेम की अनुभूति करवाओ मेरे कान्हा जी, मुझे भी माखन चुराना सिखाओ मेरे कान्हा जी, मुझे भी निर्गुण से सगुण का भेद समझाओ मेरे कान्हा जी, मुझे भी […]

कविता

हिंदी भाषा

संस्कृत भाषा से जो जन्मी है संपूर्ण विश्व में जानी जाती है सर्व प्रिय मान सम्मान है जिसका हिंदी भाषा है नाम उसी का प्रेम के धागे में  बंधी हुई है हर भाषा में समाई है। एकता की जान है हिंदी अपने देश की शान है हिंदी। जगत में जिस दिन आए हम कर्णों ने […]

गीत/नवगीत

मेरा भारत महान

भारत नित ही विश्वगुरू है,देता सबको ज्ञान, संस्कार भारत के पाते,सबसे ही सम्मान। नीति और नैतिकता मोहक,हम सबसे सुंदर, पश्चिम से भारत के बेहतर,कला और विज्ञान। मानवता को हमने जाना,हिंसा को त्यागा, करुणा,दया,सत्य,मर्यादा,सद्कर्मों की आन। पूजा हमने चाल-चलन को,जीना सिखलाया, देह नहीं है रूह की भाषा,नैतिकता का मान। तीज और त्यौहारों से तो,चोखा बना समाज, […]

कविता

तुम ही मेरे गीत हो

तुम मेरे गीत हो, मैं तुम्हारा स्वर हूँ। मेरे जीवन का तुमने अर्थ दिया अब तक मैं बिना अर्थ का था। मेरे जीवन में कितना कोलाहल था अब उर में कलरव तेरी पायल। तुम चंचल सी तितली हो प्रिय फूलों की डाली पर मंडराती हो। मेरे जीवन में मधुरस घोल दिया है इस जीवन को […]

कविता

कैसे भूलूं तुझे ए मां

छुटपन में आता न था खाना न ही चलना और बैठना पैदा हुए तो एहसास न था जीने का आगाज न था तूने ही संभाला था तूने ही संवारा था बड़े होने की व्यथा बड़ी सज़ा  बड़ी कड़ी थी दुःख की तपती धूप थी तब तुम ही तो छांव  शीत थी लिखी थी किस्मत रब […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

झूठों का सरदार दिखाई देता है। सोया पहरेदार दिखाई देता है। कोठी, बँगला, कारें, नौकर, चाकर हैं ऊँचा कारोबार दिखाई देता है। बातें करता जैसे संत – महात्मा हो कर देगा उद्धार दिखाई देता है। नीयत उसकी साफ नहीं हो सकती है हाथों में हथियार दिखाई देता है। जो बोलेगा, वह सारा छ्प जाएगा साथ […]

कुण्डली/छंद

झूठ महात्म्य

बोलो झूठ कभी नहीं ,ऐसा मत दो ज्ञान झूठ बोलते जो सदा ,वो पाते सम्मान वो पाते सम्मान ,झूठ को सदा भुनातेसच का सारा मूल्य, हजारों लोग चुकाते कहें ‘धीर’कविराय, झूठ सांसों में घोलो सच कहना है पाप ,झूठ की वाणी बोलो। — महेंद्र कुमार वर्मा

गीत/नवगीत

यह जीवन कितना देता है

यह जीवन कितना देता है यदि धैर्य रखे तू जीवन में। अमृत भी अनायास देता मदिरा के खाली बर्तन में।। परतों पर परतें लाद के तू जग में पावन अभिमानों की, अभिनयी शक्ति से हर पल ही नव मूर्ति गढ़े इंसानों की। यश अपयश हानि लाभ जीना मरना सब सौंप विधाता को,, जब आत्मगंग में […]