गीत/नवगीत

कर्म छोड़कर निर्भरता की,

शक्ति, धैर्य, प्रेम की देवी, समर्पण तेरी महानता है। कर्म छोड़कर निर्भरता की, ये कैसी समानता है?? नर से सदैव कर्म में आगे। तुझसे ही नर भाग्य हैं जागे। नर तेरे बिन सदा अधूरा, तू सदैव ही आगे-आगे। प्रतियोगी बनती हो क्यूँ? कैसी आज वाचालता है। कर्म छोड़कर निर्भरता की, ये कैसी समानता है?? कानूनों […]

गीत/नवगीत

देवी नहीं, मानवी ही समझो

देवी नहीं, मानवी ही समझो, देवी कहकर बहुत ठगा है। बेटी, बहिन, पत्नी, माता का, हर पल नर को प्रेम पगा है।। बेटी बनकर, पिता को पाया। पिता ने सुत पर प्यार लुटाया। भाई पर की, प्रेम की वर्षा, पत्नी बन, पति घर महकाया। पराया धन कह, दान कर दिया, कैसे समझे? कोई सगा है। […]

कविता

वक्त की किताब

वक्त की किताब के, पन्नों को, फिर से बांचना चाहता हूँ।  मैं आज फिर से , उन लम्हों में झांकना चाहता हूँ।  इतना मिला…… और कितना छूट गया । मैं उस हिसाब को , फिर से जांचना चाहता हूँ । वक्त की किताब के , उन पन्नों को , फिर से बांचना चाहता हूँ। खुशियों […]

कविता

बाध्यता के बीच

कई-कई जगह पशु-शृंखला भी देखने को मिले, खासकर “बोतु शृंखला” •••• जब गुरु द्रोण नहीं मिले, तब एकलव्य ने खुद के भीतर टैलेंट पैदा करके क्या बुराई की ? क्या खुद की प्रतिभा को बाहर निकालना अपराध है? •••• टैलेंट की यहाँ पहचान कहाँ हो रही है ? सिरफ़…. सुंदर कपड़े, मकान, गुंडई और तमाशा […]

कविता

दिल तो कभी मिला नहीं !

महिलाएँ अपने-अपने ‘वो’ को ‘जान’ कहती हैं, तो ‘वर’ (पति) भी कहती हैं, यानी घुमा -फिराकर उस ‘वो’ को ‘जानवर’ कह ही डालती हैं ! •••• होता है आध्यात्मिक सत्संग और आते हैं उद्घाटन को वैसे ‘नेता’, आध्यात्मिकता से दूर तलक नाता नहीं ! शायद उसने चंदा जो ज्यादा दिए ! •••• टैलेंट की यहाँ […]

कविता

यादें

बाद मुद्दतें तुम्हें मेरी याद अाई शायद कोई निशानी मिल गई होगी मेरी धुंधला गया था मैं तुम्हारी नजरों से फिर से कोई कहानी याद आ गई होगी भूल सकते हो मुझे तुम पर उस दिल का क्या करोगे जिसमें में बसा रसा था कभी सागर में लहरें उठती रहती हैं और कभी ले आती […]

गीतिका/ग़ज़ल

विधाता की निगाह में

ये जिंदगी गुजर रही है आह में जाएगी एक दिन मौत की पनाह में। कर लो चाहे जितने पाप यहां हो हर पल विधाता की निगाह में। मेरी कमी मुझे गिनाने वाले सुन शामिल तो तू भी है हर गुनाह में। छल प्रपंच से भरे मिले हैं लोग दगाबाजी मुस्काती मिली गवाह में। खोने के […]

गीत/नवगीत

उड़ ले पंक्षी मुक्त गगन में

तेरी खुशी में आज मगन में। उड़ ले पंक्षी मुक्त गगन में।। बचपन तेरा घुटकर बीता। मजबूरी में दूध था पीता। बंधन इतने किए आरोपित, साहस और उत्साह है रीता। छोड़ रहा अब खुले चमन में। उड़ ले पंक्षी मुक्त गगन में।। बचपन के दिन लौट न पाएं। बचा नहीं कुछ गाना गाएं। इच्छा तेरी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर वक़्त बोझ से मन भारी। लगता मन भर का कन भारी। मन ही चालक है जीवन का, सँभले न रोग तो तन भारी। जब दाल झूठ की गले नहीं, लगता सच का तृन-तृन भारी। कायर तो पीठ दिखाते हैं, लगता उनको हर रन भारी। जब साँपों में विष नहीं भरा, उनको है अपना फन […]

कविता

सोच बदलो गाँव बदलो

गाँव को गाँव ही रहने दो, इसे शहर न बनाओ । शहर की सुविधाओं को अब गाँव में ही ले आओ। माना शहर में रौनक होती है, मगर गाँव में अमन शान्ति भी होती है गाँव की मिट्टी की खुशबू फिर से ले आओ। गाँव को गाँव ही रहने दो शहर न बनाओ। अपनी सोच […]