Category : पद्य साहित्य

  • फिर सदाबहार काव्यालय- 49

    फिर सदाबहार काव्यालय- 49

    ‘उम्मीद अभी बाकी है’ चांद भी वहीं है, हम भी यहीं हैं उम्मीद अभी बाकी है क्या हुआ जो गुम हो गया इसरो परिवार का दूसरा बेटा नाम है जिसका चंद्रयान-2 होश अभी बाकी है जोश अभी...

  • दोहे – बेटी

    दोहे – बेटी

    बेटी तो कोमल कली ,बेटी तो  तलवार ! बेटी सचमुच धैर्य है,बेटी तो अंगार !! बेटी है संवेदना,बेटी है आवेश ! बेटी तो है लौह सम,बेटी भावावेश !! बेटी कर्मठता लिये,रचे नवल अध्याय ! बेटी चोखे...

  • गजल

    गजल

    गज़ल _____________________________ सलीके से छुपा रहीं हर अज़ाब आपका हैं ये मुस्कुराहटें या हिजाब आपका शाद हुस्न बेरहम क़यामती निगाह है कत्ल कर गया मेरा ये शबाब आपका इकअदा में है कज़ा इक अदा में जिंदगी...

  • गीतिका

    गीतिका

    समांत-अना पदांत-पूनम की है रात मौसम बड़ा सुहावना, पूनम की है रात। जागी मन में भावना, पूनम की है रात। पिया गए परदेस को, मनवा उठे हिलोर। कब आओगे साजना, पूनम की है रात। कैसे बीते...

  • सतरंगी यादें

    सतरंगी यादें

    जीवन की अमूल्य धरोहर सी , होती हैं यह सतरंगी यादें…….! बचपन की नादानियों को समेटे यादें, यौवन की अल्हड़ता से भरी यादें, प्रिय के प्रेम स्मृति को संजोती यादें, घर की किलकारियों से गूंजती यादें,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कभी अपने लिए कुछ शौक पाल जीना था, मौत का ज़िंदगी से डर निकाल जीना था। क्यूं अपने मन को मार इतने दिनों जीता रहा, क्या तुझको थी ये ख़बर कितने साल जीना था। बाद तेरे...

  • तुम साथ नही होते

    तुम साथ नही होते

    जब दिल आहें भरता है तुम साथ नही होते। जब आहें तुझे देती हैं सदा तुम साथ नहीं होते। यूं तो महफिल है संग मेरे दर्दों की जब तन्हाई सताए तुम साथ नही होते। रोम रोम...

  • गीतिका

    गीतिका

    खंड खंड आकाश देखिए रिश्तो का संत्रास देखिए रक्त जनित सारे रिश्तो में दरक रहा विश्वास देखिए भाई की जड भाई काटता करता है उपहास देखिए भावुक मन निरद्वंद भटकता रहता सदा निराश देखिए जाने कब...

  • माँ और मैं

    माँ और मैं

    मेरे  सर  पे  दुवाओं का घना साया है। ख़ुदा जन्नत से धरती पे उतर आया है।। फ़कीरी में  मुझे पैदा किया, पाला भी। अमीरी में लगा मुँह – पेट पे, ताला भी।। रखा हूँ पाल, घर...

  • यही हम बोलेंगे

    यही हम बोलेंगे

    इक बोगी में भर लो कई हजार। यही,हम बोलेंगे। जीवन जबकि,फंसा हुआ मजधार। यही,हम बोलेंगे। पटना जैसे स्टेशन पर। भीड़ लगी है भारी। मुंबई नगरी जाने वाले। जुटे हुए नर-नारी। इधर पसीने से भीगे,  सरकार। यही,हम...