कविता

पल बदलते हैं

पल बदलते हैं , संवत बदलते हैं और मन्वंतर बदलते हैं इंसान वही रहता है खुद को खोजता हुआ बाहर सब विलक्षण है आकर्षक , सम्मोहक तृष्णा, मृगमरीचिकाओं को बढ़ाता है ‘मैं’ से नहीं जब पा सके हैं मुक्ति अब तक मोह, मन में सागर सा घहराता है कुछ तो बदलें पारंपरिक प्रवृत्तियों को ‘मैं’ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आंँधियों से लड़ रहा है दीप इक जलता हुआ, हौसलों से जीत मुमकिन पाठ ये पढता हुआ। साथ मेरे चल के देखो पाओगे मंज़िल सदा, वक्त गुज़रा पास से इक बात ये कहता हुआ, जिसकी लहरों में किनारे और हैं मंझधार भी, वो समंदर मेरे भीतर हर घड़ी बहता हुआ। कल गुलाबों की बड़ी नज़दीकियांँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

भूलों का पछतावा कर ले। बात सीख की मन में धर ले।। बोता कीकर बीज रोज़ तू, खारों से निज दामन भर ले। करनी का फ़ल मिले ज़रूरी, वैतरणी के पार उतर ले। अहंकार सिर पर सवार है, इसकी भी तो खोज खबर ले। अपना दोष और पर टाले, ये घर छोड़ दूसरा घर ले। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आदमी की छाँव से बचने लगा है आदमी। आदमी को देखकर छिपने लगा है आदमी।। आँख से दिखता नहीं महसूस भी होता नहीं, क्या बला यों आग से तपने लगा है आदमी मूँ दिखा पाने केलायक रह न पाया शख्स ये चश्म दो अपने झुका झिपने लगा है आदमी। हाथ धो पीछे पड़ा आतंक का […]

मुक्तक/दोहा

स्वागत नव वर्ष नव संवत्सर 2078

हे काल-चक्र-प्रसूत नव वर्ष , संवत्सर अभ्यागत काल-खंड के नव सूत्र-धर प्रारब्ध के संकेत, भवितव्यता विचार स्वागत करें दूरस्थ हो, कर जोडकर विगत ने बहुत कुछ हमको सिखाया सो रहे थे तान चादर, उसने जगाया अखिलविश्व की तोड-तंद्रा,चैतन्य कर नश्वर, क्षण-भंगुरता का पाठ पढाया नहीं लौटता, जो भी बीता, खोया कल हर निशा पश्चात होता […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

नहीं खुद को यूँ बेख़बर रख के चल सफ़र में है मुश्किल नज़र रख के चल .. उजाले भी होंगे मुख़ातिब कभी न दिल में अँधेरे का डर रख के चल .. बुरा वक्त भी बीत ही जायेगा जरा सा तो दिल में सबर रख के चल .. बनेंगें सभी काम बिगड़े तेरे दुआओं में […]

कविता

पत्नी

तेरा मिजाज़ भी बरसात सा है पता नहीं कब झमाझम बरस जाए और कब बरस कर निकल जाए कभी आंधी सी चल पड़े कभी मंद पड़ जाएं बहुत मुश्किल है समझना तुझको कब धूप कब छांव हो जाए *

कविता

मैं श्मशान हूँ

मैं श्मशान हूँ जलाती हूँ, चांदनी रात के सफेद उजियारा में दहकते शव जल रहे थे, नदी की मध्यम धारा में शांत धुन मद कर रहे थे, कुछ जला,कुछ अधजल सा कुछ राख हुये, कुछ के पूर्ण कुछ के सपने जलकर खाक हुये, मैं श्मशान हूं जलाती हूं, सिर्फ उस मिट्टी को जिनमे ममता,मोह और […]

भजन/भावगीत

हे जग जननी

हे जगत जननी दुर्गे अंबे, हे महामाया अंबिका, तोडो ये चक्रव्यूह अब, मन जिसमें मेरा उलझ रहा, नहीं ज्ञान मुझको भाग्य का, जीवन मरण की चाल का, मन घिर रहा संताप से, बन जाओ अब तुम चंडिका। हर ओर जीवन के लिए, सब लड़ रहे संग्राम हैं, महिषासरों के भेष हैं, और रक्त रंजित प्राण […]

कविता

बदलते रिश्ते

सच मानों तो  दिल की बातें, और  किसी  को  न  बताना। जख्म चाहे हो  जितने  गहरे, दिल  खोलकर  न  दिखाना। झूठी    दुनियां  , झूठे   रिश्ते, मोल    समझ    न     पाएंगे। रो      रोकर     यह     पूछेगे, हंस  कर   सबको   बताएंगे। दस   मुखौटे  पहन  कर  यह, अपना     तुमको     बताएंगे। […]