Category : पद्य साहित्य

  • बेटियां

    बेटियां

    ” बेटियां ” बेटी कैसे होती पराई बात ये मुझको समझ ना आई, बचपन बीता जिस आंगन में क्यों परायों सी होती उस आंगन में ? क्यों पावों में बेड़ियां पड़ जाती है करने दो उसे...


  • ” कर्ण “

    ” कर्ण “

    ” कर्ण ” कर्ण का भाग्य लिखते समय विधाता ने क्यों किया पक्षपात, सूर्यपुत्र एवं कौन्तेय होकर भी सूत पुत्र कहलाना था आघात । पर सच्चा वीर तो वही है जो विष पी सके अपमान का,...

  • गज़ल

    गज़ल

    याद गुज़रे ज़माने आ गए क्या फिर यादों के बादल छा गए क्या ===================== अक्स मेरा उभरा जब यकायक आईना देखकर शरमा गए क्या ===================== महफिल छोड़के जाने लगे हो मेरे आने से तुम घबरा गए...

  • पहले पत्थर हुआ होगा

    पहले पत्थर हुआ होगा

    पहले पत्थर हुआ होगा… पहले पत्थर हुआ होगा, फिर तराशा गया होगा। उसी के बाद लोगों ने खुदा जैसा कहा होगा।। लोग कहते हैं किस्मत में शोहरतें भर के वो लाया, मैं सोचता हूँ बैठा कि...



  • दिलों की दूरियाँ

    दिलों की दूरियाँ

    “जल्दी आ- जल्दी आ” दूर कर लोगो के दिलों के फासले दिन अब अच्छे आयेंगे इसमे कोई दो राय नहीं – दिलों के फासले, मिट जायेंगें दूरियाँ कम न होंगी ट्रेन की रफ्तार बढ़ा के दूरियाँ...

  • ठोकर

    ठोकर

    हमको अब सारी दुनिया को बताना है सभी चेहरों को मैंने पहचाना है यहाँ सभी ने नक़ाब पर नक़ाब पहने है ठोकर खाकर मैंने सबकुछ जाना है लोग बाहर से मीठे अंदर से विषैले हैं अपने...

  • आगो़श में

    आगो़श में

    आगो़श में ********* आ सुस्ता लें जिन्दगी के सफर से चुरा कर कुछ पल अहसास जी लें कुछ सपने तेरे कुछ मेरे बनके रह जाती हूँ बुत सी तेरी बांहों में आकर ठहर जाये ये सांसों...