Category : पद्य साहित्य

  • मातृभूमि ********* मातृभूमि के लिये नित्य ही, अभय हो जीवन दे दूंगा । तन ,मन , धन निस्वार्थ भाव, सर्वस्व समर्पित कर दूंगा। जिस मातृभूमि में जन्म लिया है, जिसके अंक नित खेल हूँ। शिवा जी...

  • मेरे हिस्से आंँसू आये **************** मेरे मन की पीड़ा आखिर जाकर तुमको कौन सुनाये तुमको हँसी खुदा ने सौपी मेरे हिस्से आंँसू आये । आशाओं के सूने पथ पर थक -थक कर चल लेता हूं एक...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    दहकां के दुख दर्द का,तनिक नहीं आभास। वोटन  खातिर  गाँव  में , झूठा  करें  प्रवास। जनता किस बूते करे, इन पर फिर विश्वास। वर्तमान को  खोद कर , बदल रहे इतिहास। खास ज़हनियत  के रहे ,...

  • कुंडली

    कुंडली

    अफरीदी क्या कह रहा, सुन ले पाकिस्तान तू भी सुन हाफिज मियां, सुन ले ‘बे’ इमरान सुन ले ‘बे’ इमरान, अरे खल, पाकी टुच्चे जिस दिन सेना सनकी, नहीं बचेगा लुच्चे कह सुरेश आएंगे काम न...


  • तू कब इंसान बनेगी

    तू कब इंसान बनेगी

    भारतीय औरत तू कब तक डरती दबती रहेगी कब तक गुलामी की जंजीरों में जकड़ी रहेगी क्यों नहीं पहचानती तू अपने वजूद को कब तू औरत से इंसान बनेगी तेरी भी इच्छाएं अभिलाषाएं हैं क्यों रखती...

  • ईश्वर

    ईश्वर

    जब मेंने आंख खोली तो देखा संसार को समझने की कोशिश की बनाने वाले को लोग अनेक नामों से याद करते हैं देखे बिना ही अपना समझते हैं ऐसे ही में भी ईश्वर को अपना माना...

  • अंधेरा

    अंधेरा

    अंधेरा बहुत है मेरे जीवन में मैंने ही बुलाया है आंगन में सच कडुआ होता ही है पर मानना पड़ता है माने बिना बदलाव आता नहीं बदलाव का अंत होता नहीं अंधेरा दूसरों व्दारा प्रायोजित होता...


  • ऊर्जा

    ऊर्जा

    कदम-कदम पर रोज़-रोज़ हम ऊर्जा करते नष्ट, थोड़ा भी कम हो जाए यह तो होने लगता कष्ट। बिजली गैस कोयला ईंधन काम बहुत आते हैं, जैव, सौर, भू-ताप, पवन, जल ऊर्जा दे जाते हैं। ऊर्जा है...