Category : पद्य साहित्य

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    समान्त- अना, पदांत- जरुरी है, मापनी- 2122, 2122, 2222 हों कठिन राहें मगर चलना जरुरी है दूर हो मंजिल डगर दिखना जरुरी है बढ़ चलेंगे हर कदम अपने तरिके से हौसला हर हाल में रखना जरुरी...



  • गज़ल

    गज़ल

    सुनने के लिए है, ना सुनाने के लिए है, ये गज़ल फक्त उनको मनाने के लिए है, देखा जो चाँद को तो दिल को आसरा हुआ कोई हमें भी राह दिखाने के लिए है, इक बार...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    वज़्न – 221 1222 221 1222 पिजरे से परिंदे को आज़ाद नहीं करते । कुछ लोग मुहब्बत को आबाद नहीं करते ।। फ़ितरत है पतंगों की शम्मा पे मचलने की । ऐसे जुनूं पे आलिम इमदाद...


  • गीत

    गीत

    इन अश्कों को सियाही मैं आज कर डालूँ , चलो इस दिल को ही अब क़लम कर लूँ । जुबां अल्फ़ाज़ रख जो बयाँ कर नही पाती, वो हाल-ए-दिल मेरा तुमसे ए सनम कह लूँ ।।...

  • कुण्डलियाँ

    कुण्डलियाँ

    कपिलों ने इस देश को, दिया बहुत कुछ यार एक कपिल मुनि हुए थे, जाने ये संसार जाने ये संसार, कपिल शर्मा को भइया एक कपिल मिश्रा, अब करते ता-ता थइया कह सुरेश वो कपिलवस्तु, कपिला,कपि...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इस दुनियां में इंसानों के क़िस्से बड़े निराले हैं ऊपर से तो दिखते उजले, पर अंदर से काले हैं जिन हाथों ने पाला-पोसा उनको ही डँस लेते हैं धरती मां ने दूध पिलाकर, नाग कई ये...