Category : पद्य साहित्य

  • तू बेजुबान है….

    तू बेजुबान है….

    वेजुबान है रे ! तू वेजुबान है तेरी पीड़ा क्यों नहीं समझता इंसान है दौड़ता है तू केवल भूख की खातिर तेरे अंदर भी कोई ईमान है काटता है जीवन तू दुःख से भरा जो तेरा...

  • उम्मीदें

    उम्मीदें

    2212 2212 2212 बैसाखियों पर चलती उम्मीदें मेरी अब नफरतों पर पलती उम्मीदें मेरी न मिला शजर, न मिली कली कोई कभी बनकर परिंदा उड़ती उम्मीदें मेरी शब रो रही महताब के आगोश में तारों के...

  • तुमसे कुछ कहना है कब से बटोर रही हूँ शब्दों को एक पहाड़ सा बन गया है शब्दों का अब मुहिम है,छंटनी की… उलीच रही हूँ शब्दों को कि मिल जाये कोई ऐसा शब्द जो ज़ाहिर...

  • मुक्तक….

    मुक्तक….

      चरागों की पनाहों में मुहब्बत साँस भरती है। सितारों की निगाहों में अँधेरी रात चुभती है। ये माना है नही आसां मुहब्बत राह पर चलना- कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है। ________अनहद...


  • संतुष्टि…..

    संतुष्टि…..

    संतुष्टि सुनो! व्याप्त है अगर.. तुम्हारे हृदय में मेरे प्रेम का सुर्ख गुलाबी रंग तो तुम जरूर महसूस करोगे मेरे मन के अनकहे जज्बात कहते हैं.. प्रेम! मौन को दर्शाता है और खामोशी से दिल की...

  • माँ

    माँ

    माँ ममता की विशाल वट वृक्ष है माँ का हृदय असीम है माँ के आगोश में विश्वास है माँ के छाया में सपने हैं माँ की छाती में अमृत है माँ के लाड़ में जीवन है...


  • ग़ज़ल 2

    ग़ज़ल 2

    दिल से दिल की लगी छुपाने के लिए ज़ख़्म ए दिल छुप छुप नहीँ धोता कोई । ख्वाब ने नींद को खुलने न दिया शायद वर्ना इस तरह इस कदर नहीँ सोता कोई। जब तलक दिल...

  • ग़ज़ल 1

    ग़ज़ल 1

    सुन तेरे पास आने को जी चाहता है फिर गले से लगाने को जी चाहता है। मोहब्बत में हद से गुज़र जाएं आजा कि अब पार जाने को जी चाहता है। मैं आ कतरा  कतरा लिखूं...