कविता

गलतियां हमारी तू माफ़ कर

हे प्रभु क्षमा कर, गलतियां हमारी तू माफ़ कर, मानवता दिखलाने का तू एक हमें दे दे अवसर, नहीं रुक रहे आंसू, ऐसा दर्दनाक ना घात कर, पश्चाताप करने का, एक अवसर हमें प्रदान कर, दिखा कर दया, गलतियां हमारी तू माफ़ कर। हर तरफ़ लाशों के ढेर, अश्कों में डूब रहा संसार, अंतिम विदाई […]

कविता

शहर अंजान हो गया

कोरोना के  कहर में  , अपना ही शहर अंजान हो गया सुनसान हुए चौक – चौराहे बाजार वीरान हो गया , तिनके – तिनके से जहां थी दोस्ती , पहचान ही गुमनाम हो गया , लापता हो गई यारी – दोस्ती , मुल्तवी हर काम हो गया , एक अंजाने  – अनचिन्हे डर के आगे […]

गीत/नवगीत

कोशिशें

खुशी की बात है खुशियां दूर तक महक लुटाती हैं कि बुलबुल आशियां से आसमां तक उड़ती जाती है- किरण दीपक की कहती है पतंगों से चले आओ किरण सूरज की चुपके-से चमक छितराती जाती है- महक फूलों की कहती है ये भौंरों से चले आओ महक बगिया की चुपके-से महक बिखराती जाती है- ललक […]

कविता

आज मौत से लड़ना होगा

गहन तिमिर संग सूनी राहें काल खड़ा फैलाकर बाँहें नयी इबारत गढ़ना होगा आज मौत से लड़ना होगा। मृत्युदेव ने लिखी कहानी नयी लिपि पर बात पुरानी जीवन-पुस्तक पर अंकित ये पृष्ठ सभी को पढ़ना होगा आज मौत से लड़ना होगा।1। राजा-रंक सभी पर भारी कब लड़ पायी? दुनिया हारी लक्ष्मण-रेखा में रहकर ही नये […]

कविता

देखता हूँ रोज उसे

देखता हूँ रोज उसे चौराहे पर -और लाल बत्ती के पास अपने हाथों में लेकर रंग बिरंगे गुब्बारों को घूम घूम कर बेचती है वह , भोली सी सूरत वाली सांवली सी लड़की है जो …, आँखों में लिए एक चमक और -चेहरे पर भोली सी मुस्कान के साथ देखता हूँ रोज उसे गुब्बारों को […]

कविता

खुशियाँ तुमसे हैं

जीवन में खुशियाँ तुमसे हैं यह जाना मैने  आज  सही, जीवन  के  आँगन  में -थे अगणित तारे …, जो लगते थे कितने प्यारे से कुछ हँसते थे कुछ रोते थे कुछ  दूर  रहे-कुछ  पास  रहे कुछ टूट गये-कुछ बिछुड़ गये पर,हमने कभी न शोक किया जीवन में खुशियाँ तुमसे हैं यह जाना मैने  आज  सही […]

कविता

आतंकवाद 

क्यों ढाहते हो तुम जुल्म इतना, क्यों करते हो तुम अपनी मनमानी, बस इतनी सी बात बता दो तुम, क्या तुम्हारे अंदर इंसानियत नहीं रह गया है बांकी । आये दिन अखबारों के पन्ने, भरे रहते हैं तुम्हारे कारनामों से, तुम कहते हो लेते हो तुम बदला, क्या है यह सही तुम्हारा इरादा। करते हो […]

कविता

अपने घरों में रहो

जीवन है अनमोल इसकी कीमत तो समझ, अपना न सही अपने घरवालों की तो सोचो, ये वक्त नहीं  है लोगों से मिलने जुलने का, आप मानव हो वक्त की नजाकत को तो समझो। बस कुछ दिनों की तो बात है दोस्तों, इस अंधेरी रात के बाद एक खुशनुमा सवेरा है दोस्तों, अगर जिना है अपने […]

कविता

कोरोना तुम कहाँ से आए हो और क्यों?

कोरोना तुम कहाँ से आए हो और क्यों? मैंने चीन में लिया है जन्म, मानव को सद्बुद्धि देने आया हूँ मैं, डरो नहीं मुझसे! बस रखो थोड़ा ध्यान, स्वच्छता और सफ़ाई का। ज़रूरी हो तभी निकलो घर से, मुँह पर लगाकर मास्क, और हाथों में पहनकर दस्ताने, जेब में रखो साबुन या सेनिटाईजर। करलो ध्यान […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चार पैसे के लिए जो छोड़कर घर-द्वार आये। सोचते हैं वो मुलाज़िम क्यों यहाँ बेकार आये? कल उजाले से मिटेगी ये भयावह रात काली, ये न समझो ज़िंदगी की हर ख़ुशी को हार आये। ख़्वाहिशें कुछ ख़्वाब लेकर उड़ चले थे जो पखेरू, फड़फड़ाते जाँ बचाते लौटकर लाचार आये। कैद करना चाहता जब आदमी आबो-हवा […]