कविता पद्य साहित्य

मेरी 16 प्रासंगिक कविताएँ

डॉ. सदानंद पॉल की कविताएँ 1. इंद्राणी मुखर्जी किसी कुरूप पर कितने मर्दों को मरते देखा है प्रेम की देहलीला सुंदर युवती पर ही आ ठहरती है द्रोपदी सुंदरी थी राजकुमारी थी पाँच-पाँच पति पाई थी फिर भी दुश्शासन ने छेड़ने का साहस किया ऐसे में इंद्राणी मुखर्जी फ़ख्त तीन पतियों की रानी सिर्फ इतिहास […]

कविता

आज़ गगन में चांद हँसा है

******************** प्रिय तुम मुझसे दूर न जाओ, मेरे मन में आज नशा है। घूंघट खोल रही है कलियाँ , झूम रही है मतवाली अलियाँ , नन्दन वन की वायु चली है, सुरभित दीखी आज गली है, लगती सुखमय मधुरिम वेला, जीवन नन्दन मंजुल मेला, उठती मन में मधुरिम आशा, मिटती सारी थकित पिपासा, तुम भी […]

इतिहास कविता

*गौ माता की महिमा*

******************* पुत्र दिलाता दाल रोटियां गौ माता दूध पिलाती है, इसी लिए गौ को माता कहते है और जग में पूजी जाती है। पाप भार जब बड़े धरती पर तब रूप गऊ का धरती है, चार पांव में चार धाम है और अंग अंग में है तीर्थ। मां ने हमें ममत्व दिया है दूध नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बात कुछ ना थी बवंडर हो गए, महल आलीशान खंडहर हो गए, ======================= वक्त के हाथों बचा ना कोई भी, दफन कितने ही सिकंदर हो गए, ======================= थोड़ी शोहरत थोड़ी इज्ज़त क्या मिली, वो जो कतरा थे समंदर हो गए, ======================= हो गए सीने से मेरे आर पार, लफ्ज़ तेरे आज खंजर हो गए, ======================= […]

मुक्तक/दोहा

दोहे “सच्चाई का अंश”

जब भी लड़ने के लिए, लहरें हों तैयार।कस कर तब मैं थामता, हाथों में पतवार।।—बैरी के हर ख्वाब को, कर दूँ चकनाचूर।जब अपने हो सामने, हो जाता मजबूर।।—जब भी लड़ने के लिए, होता हूँ तैयार।धोखा दे जाते तभी, मेरे सब हथियार।।—साधन हो पैसा भले, मगर नहीं है साध्य।हिरती-फिरती छाँव को, मत समझो आराध्य।।—राज़-राज़ जब तक […]

कविता

इस घड़ी ने …घड़े की

इस घड़ी ने घड़े की, कीमत बता दी। जो लोग… मिट्टी से टूट चुके थे। मिट्टी ने , आज अपनी , उनको अहमियत बता दी। इस घड़ी ने, घड़े की कीमत बता दी। युगों- युगों से यह बताते रहे। साथ मिट्टी के जीवन गीत गाते रहे। इस घड़ी ने,  घड़े की कीमत बता दी। जो […]

कविता

मरुस्थल सा मैं

  मरुस्थल सा जीवन है मेरा,पूर्णतया निराशा भरा, फिर भी कभी-कभी कुछ ओश की बूंदों से मिलता हूँ। सोचता हूँ , समेट लू सबको अपनी आगोश में, मेरे गर्म एहसास से मिलकर बूंदे भाँप बन उड़ जाती है। गर्म रेतीले मरुस्थल सा मौन जीवन के साथ चल रहा है। कभी-कभी शाम की ठंडी हवा के […]

कविता

इंतजार

  तस्वीरो ने संजोयी है , बहुत सी आवाजे अपने अंदर, लेकिन हकीकत ने आज मौन का कफन ओढ़ रखा है। आँगन जो लीपा जाता था , प्यार की मिट्टी से कभी, झूठे,दिखावटी संगमरमर के पत्थरों से ढक रखा है। शाम की चाय की भीनी खुशबू आज भी वैसी ही है, लेकिन अब सगे भाइयो […]

कविता

मां सबसे प्यारी लगती है

आँचल की मृदुल हवा से खुशियां हम सबको देती है। नेह लुटाती जीवन भर क्या बदले में कुछ लेती है। उस ममता की दौलत से, हर दौलत छोटी लगती है। मां होती जब साथ हमारे कुटिया कोठी लगती है। करुणा, दया, समर्पण से, बच्चों का हर कष्ट मिटाती। दुख-दर्द में अपने बच्चों की, वो मरहम […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सियासत में सभी कहते बदी है। जो डूबा तर नहीं पाया कमी है। क़यामत ये नयी दुनियाँ कहूँ क्या इसे कुछ कह न पाना बेकसी है। अदीबों का यहाँ है क़त्ल होता यहाँ गंगा सदा उल्टी बही है। कहें देखो सभी साक़ी को’ रानी महारानी भुलायी सी गयी है। भगत सिंहों तुम्हें खोजे जमाना। तुम्हीं […]