Category : पद्य साहित्य



  • तुम बिन डसता दिन

    तुम बिन डसता दिन

    तुझ बिन मेरा पहला-दिन, बेहद सूना-सूना निकला दिन। था सब कुछ पहले जैसा पर, मुझे लगा बदला-बदला दिन। हर पल तुझको ढूंढ़ रहा था, पागल सा मैं और पगला दिन। घोर उदासी के सन्नाटों में, गुजरा...

  • मानव हूँ

    मानव हूँ

    मानव हूँ मानवता की बात करुँगा, एक बार नहीं मैं तो दिन-रात करुँगा | बैर मेरा तम भरी काली रातों से – मैं उज्ज्वल प्रकाश की बात करुँगा || भेदभाव, आडंबर का हो विनाश, फैले जग...

  • राह तुम्हारी तकती हूँ

    राह तुम्हारी तकती हूँ

    राहे वफा में दीप जलाकर राह तुम्हारी तकती हूँ हाँ राह तुम्हारी तकती हूँ दुनिया की लापरवाही से दूर परवाह तुम्हारी करती हूँ हाँ परवाह तुम्हारी करती हूँ आता नहीं मुझे जमाने का चलन मैं तो...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    सभी  दिखावा  कर  रहे , दिल से करें न काम। मिशन विज़न सब खेल हैं, फकत चाहते नाम। कूड़ा करकट तो फकत , टुकड़ा टुकड़़ा  शैल। छीन  रहा  है  ज़िन्दगी , मानव  मन का  मैल। जाति...

  • कविता

    कविता

    बरसती बरसातों में बह जाऊंगा मैं भी, तेरी याद आती यादों के संग। टूटकर बिखर जाऊंगा, किसी गुमनाम पत्थर की तरह, और बह जाऊँगा किसी चीखती नदी में ले तेरी यादों को संग। लोग ढूंढेंगे मुझे...

  • जज्बात

    जज्बात

    जज्बातों का जब कोई मोल नहीं , बाजार है ये यहाँ कोई जोर नहीं । बिकते हैं हर मोड़ पे ईमान ओ आँसू मुस्कराहट का यहाँ कोई दौर नहीं । फ़र्ज और कर्ज में खो जाते...

  • स्त्री

    स्त्री

    चित्रित की जाती है सदियों से कागज और कैनवास पर बारीकी से सजाई जाती है घर की दहलीज पर रंगोली और रोली के शृंगार से बहन, बेटी, माँ, पत्नी,और प्रेयसी सभी पवित्र और प्यारे नामों से...

  • गीत

    गीत

    कितना मुश्किल है पलकों पे अश्कों का  बोझ उठाना हर घड़ी हर पल हर लम्हा बस अपनी ख्वाहिशों को जलाना भीगी पलकें जलता हुआ दिल मिली है मुझको दर्द की महफ़िल मंझधार ने मुझे बचाया तब...