Category : कुण्डली/छंद



  • जनता को नमन्

    जनता को नमन्

    जनता को मेरा नमन, रच डाला इतिहास मोदी को चुनकर पली, हर दिल में नवआस हर दिल में नव आस, भरोसा है अब दूना मोदी जिसने दुश्मन को घर घुसकर भूना यह ‘नीलम’ की बात, कर्म...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    धू धू कर के जल रहे, गेंहूँ डंठल बाल धरा झुलसलती हो विकल, नोच रहे हम खाल नोच रहे हम खाल, हाल बेहाल मवाली समझाए भी कौन, मौन मुँह जली पराली कह गौतम कविराय, चाय सब...




  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    चैत्री नव रात्रि परम, परम मातु नवरूप। एक्कम से नवमी सुदी, दर्शन दिव्य अनूप।। दर्शन दिव्य अनूप, आरती संध्या पावन। स्वागत पुष्प शृंगार, धार सर्वत्र सुहावन।। कह गौतम कविराय, धर्म से कर नर मैत्री। नव ऋतु...

  • महाभुजंगप्रयात सवैया

    महाभुजंगप्रयात सवैया

    8 यगण, 24वर्ण, सरल मापनी — 122/122/122/122/122/122/122/122 प्रभो का दिदारा मिला आज मोहीं, चली नाव मेरी मिली धार योंही। सभी मीत मेरे सभी साधनों का, सहारा मिला नाथ जी सार सोहीं।। न था को किनारा न...