कुण्डली/छंद

कुण्डली

शरद सुहानी सी लगे, मनहर अरु गुलजार । शशि को करके शुभ विदा, रवि जी झांके पार। रवि जी झांके पार, रोशनी बढ़ती जाय । दिन जैसे जैसे चढ़े, ठंढक मिटती जाय। जा तू पावस मास, कि तेरी खत्म कहानी। कर ले तू आराम, कि आई शरद सुहानी।

कुण्डली/छंद

प्रभात

तमस को पराजित कर उषा के संग में, हो गया दिवाकर, अवतरण देखिये। चांद सितारो से भरी चादर उतार के बदला है गगन ने आवरण देखिये गूंजे पंछी के सुर, फैला प्रकाश यूं खुशियों से भरा वातावरण देखिये। ईश्वर की कृपा तले “स्वाती”के संग में करें शुभकामना यूं वितरण देखिये। — पुष्पा अवस्थी “स्वाती”

कुण्डली/छंद

कुण्डलिया : यौवन के दिन चार

-1- बचपन के दो नयन में,ले भविष्य आकार। वर्तमान देखें युवा, जरा अतीताभार।। जरा अतीताभार, देखता बीते कल को। चखता बारंबार, मधुर-खट्टे रस फल को।। ‘शुभम’ सुहाना काल,लगे जब आता पचपन। जिज्ञासा में लीन,देखता कल को बचपन।। -2- बूढ़े की पहचान है , देखे काल अतीत। फूल सभी जब फल बनें, बाकी रहे न तीत।। […]

कुण्डली/छंद

डूबी सच नैया

सच नैया खेते रहे ,झूठ नदी पर यार,सच चप्पू करता रहा ,झूठ लहर से प्यार ,झूठ लहर से प्यार ,पवन उनको दुलरातीं ,जीवन के हर भेद ,पल पल उन्हें सिखातीं ,इक दिन टूटा प्यार ,दुखी हो गए खिवैया ,किया भंवर ने वार ,और डूबी सच नैया। — महेंद्र कुमार वर्मा

कुण्डली/छंद

घनाक्षरी

निज पहचान हिंदी, मान अभिमान हिंदी, भाषाओं की शान हिंदी, मोल पहचानिए। एकता की भाषा हिंदी, उच्च परिभाषा हिंदी, जगती की है आशा हिंदी, बात मेरी मानिए। ध्यानियों का ध्यान हिंदी, ज्ञानियों का ज्ञान हिंदी, सहज विधान हिंदी, सारी भाषा छानिये। माता के समान हिंदी, भारती की जान हिंदी, बोले संविधान हिंदी, प्रण ऐसा ठानिये।

कुण्डली/छंद

कुण्डलिया- गौ माँ

-1- गौ माँ!गौ माँ!!कर रहे, सुलभ न चारा घास। मारी-मारी फिर रहीं,गौ माँ आज निराश।। गौ माँ आज निराश, सड़क पर भटकें सारी। गली – गली में रोज, नरक झेलें बेचारी।। ‘शुभम’ खोखला नेह, झूठ वे कहते हैं माँ। खाती सभी अखाद्य,आज वे अपनी गौ माँ। -2- माता के सम्मान से, वंचित सारी गाय। दूध […]

कुण्डली/छंद

कुंडलिया

राधाकृष्णन ने किया, जग में ऊँचा नाम। पेशे से  शिक्षक स्वयं, किए  अनूठे काम।। किए  अनूठे  काम, ज्ञान की अलख जगाई। शिक्षाविद् के साथ, भूमिका कुशल निभाई।। करता है ‘शिव’ याद, और प्रणमान्जलि अर्पण। भारत के अभिमान, राष्ट्रपति राधाकृष्णन।। — शिवेन्द्र  मिश्र ‘शिव’

कुण्डली/छंद

गुरु

गुरु से गणना गुरु से गिनती,          गुरु से रस छंद समास सभी। गुरु से रसआयन भौतिक भी,      गुरु शिक्षक शीर्ष समाज सभी।। गुरु नैतिक अर्थ सुपथ्य कला,       सुर काव्य खगोल पुराण सभी। गुरु ईश्वर हैं अरु ईश गुरू,       गुरु से गण ज्ञान विधान […]

कुण्डली/छंद

गणेश – स्तुति (छंद गीतिका)

हे गजानन दीन बन्धू , नेह वर्षा कीजिए, पाप से कर मुक्त मुझको, पुण्य से भर दीजिए, मोह के बंधन कसीले, दब गयी है भावना, काट दे उर बन्ध मेरे, कर रहा हूँ प्रार्थना।।                 डॉ. शशिवल्लभ शर्मा

कुण्डली/छंद

कुण्डलीया छंद

  🌻कुण्डलीया छंद🌻 🌻१🌻 सुन्दर ऐसा चाहिए ;जो मन मंजुल होय सुंदर सदैव, मन भला ;तन छवि देता खोय तन छवि देता खोय; बूढ़ा तब तन ना भावै फीकी आंखें होय; गात श्वेत ना लुभावै अरूणिम अधर खोय :जर्जर हो काया मंदर कह सुनी बना रहे; सु मन सदा ही सुंदर 🌻२🌻 संतोष  उर धरे सदा:लोभ कभी […]