कुण्डली/छंद

कुंडलिया-बंदर के कर नारियल

-1- पढ़ना-लिखना छोड़कर, चमचा बनना ठीक नेता का अनुगमन कर,पकड़ एक ही लीक। पकड़ एक ही लीक,सियासत में घुस जाना। चार बगबगे सूट, शहर में जा सिलवाना।। ‘शुभम’न चला दिमाग़,भेड़ बन आगे बढ़ना। शिक्षा है बेकार, छोड़ दे लिखना – पढ़ना।। -2- नेता कभी न चाहते, पढ़ा- लिखा हो देश। चमचा बन पीछे चलें,बदल-बदल कर […]

कुण्डली/छंद

शुभमाल छंद

शिल्प विधान – जगण जगण , 121 121 चरण तुकांत, 6 वर्ण प्रति चरण 1. बढ़े हम वीर । बने सब धीर ।। रखे सुविचार । करें उपकार ।। 2. सदा रह साथ । लिए हम हाथ ।। न ही कर घात । यही सच बात ।। 3. लिए मन जात । पिया भर लाज […]

कुण्डली/छंद

मनहरण घनाक्षरी छंद

  मनहरण घनाक्षरी छंद विधान – 88,87 प्रथम नमन मेरा ,जन्म दायिनी माँ को है द्वितीय नमन मेरा, ईश सम तात को तृतीय नमन करूँ ,गौरीसुत गणेश कोचतुर्थ नमन मेरा, सरस्वती मात कोपंचम नमन मेरा, जग पालनहार कोषष्ठम् नमन करूँ , ज्ञान बरसात कोसप्तम नम करूँ, जवान किसान को तोअष्टम नमन करू, राष्ट्र की सौगात […]

कुण्डली/छंद

कुण्डलियाँ

:1: खाली करिए राजपथ, जनता है बेहाल । घर में सब ही कैद हैं, जीना हुआ मुहाल ।। जीना हुआ मुहाल, जाम सड़कों पर पाएं । ये सब ढलती शाम, टेन्ट में पिज्ज़ा खाएं । कहे जैन कविराय, ये धरने वाले जाली । सख़्ती करके आप, कराओ जन-पथ खाली ।। :2: सच की हर इक […]

कुण्डली/छंद

सूर्य पर केंद्रित छंद

दिव्य दिवाकर,नाथ प्रभाकर,देव आपको,नमन करूँ। धूप-ताप तुम,नित्य जाप तुम,करुणाकर हे!,तुम्हें वरूँ।। नियमित फेरे,पालक मेरे,उजियारा दो,पीर हरो। दर्द लड़ रहा,पाप अड़ रहा,नेह करो हे!,शक्ति भरो।। सबको वरते,जगमग करते,हे ! स्वामी तुम,सकल धरा। मन है गाया,जीवन पाया,नवल ताज़गी,लोक वरा।। तुम भाते हो,मुस्काते हो,जीव सभी ही,प्राण वरें। धूप लुभाती,मौसम लाती,किरणें सबका,शोक हरें।। शक्तिमान तुम,धैर्यवान तुम,,गति साधे हो,तेज बढ़ो। […]

कुण्डली/छंद

चाय दो अदरख वाली

अदरख वाली चाय से ,मन का मिटे विषाद ,बन्दर भालू जी कभी ,ना जाने ये स्वाद,ना जाने ये स्वाद,सदा उनको फल भाते ,भालू पा के शहद ,ख़ुशी से धूम मचाते ,कहें धीर कविराय ,करे जो मानव चख चख ,उसको देना चाय ,जिसमे घुली हो अदरख। —अदरख वाली चाय से ,मन में आता जोश ,उसकी प्यारी […]

कुण्डली/छंद

कहैं मलय कविराय

आज दिखाई ना पड़ी, सुंदर गोरी नार। उर व्याकुल देखे बिना, नैना हैं लाचार।। नैना हैं लाचार, सुख-चैन हृदय न पाये। मीत मिले तो कहें, हृदय की पीर दिखायें। कहैं मलय कविराय, जीवन शुभ सुंदर साज। कल होगा सुखद अति, मनमीत मिले जब आज।। गोरी नैनन बांटती, तन-गागर रस मीठ। यौवन अम्बर चूमता, चंचल दर्पण […]

कुण्डली/छंद

खानदानी

खानदानी हैं वो, खानदानी पसन्द है, हर कदम-कदम पर बेइमानी पसंद है, अवसान हिंदुओं का इस देश में होवे युवराज को चंगेज की कहानी पसंद है। बावन के हुए वह मगर बच्चे हैं अभी भी दादी नहीं ,इटली की नानी पसंद है। जो देश भक्त हैं उन्हें अच्छे नहीं लगते, लल्ला को चीन-पाक की बानी […]

कुण्डली/छंद

पुस्तक

1-पुस्तक ने इंसान को,दिये अनूठे ज्ञान।पुस्तक कहती है कभी पशु सा था इंसान।पशु सा था इंसान ,जंगलो में रहता था ।पशुओं को ही मार पेट अपना भरता था।पशुता शेष बची मानव में दिखती अबतक,युध्दों का इतिहास संजोये रोती पुस्तक । 2-पुस्तक कब मरती भला ?,मर जाते है लोग ।प्रलय ,महामारी , तथा प्राण छीनते रोग […]

कुण्डली/छंद

कुण्डली

देखो अपने आपको, समझो नही विशेष जिस दिन टूटेगा भरम, कुछ न बचेगा शेष कुछ न बचेगा शेष, लुटा ख़ुद को पाओगे नोचोगे निज बाल, हाथ मल पछताओगे कह बंसल कविराय, झूठ का पर्दा फैंको सपने छोड़ो और, सत्य का दर्पण देखो।। अन्तर्मन की बात का, जो करते प्रतिकार वे जीवन में अंततः, पछताते हैं […]