Category : कुण्डली/छंद

  • कुंडलियां छंद

    कुंडलियां छंद

    माया का चक्कर अजब ,भटक रहा इंसान कोई लंदन जा बसा , कोई है जापान कोई है जापान , लौट कर देश न आता सब कुछ लगता दांव ,रकम मोटी तब पाता खेल यही बेमेल ,...

  • कुण्डलिया

    कुण्डलिया

    कुण्डलिया * १- सावन आया झूम के ,महक उठे वन बाग । हर्षित दादुर मोर सब ,झींगुर गायें राग । झींगुर गायें राग ,चली पुरवा मस्तानी । धरती के परिधान हो गये सारे धानी । कहैं...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    खुशी शाम नभ की लड़ी, लाल रंग इतराय शुभ्र हंस प्रिय हंसिनी, कमल कमलिनी छाय कमल कमलिनी छाय, मिलन पिय राग सुनारी सुंदरता खिली जाय, किनारी नयन निहारी ‘गौतम’ करत किलोल, सुलोल बरखा की हँसी मंद...


  • मत्तगयन्द सवैया

    मत्तगयन्द सवैया

    योग भोग भगा मन योग सज़ा तन जीवन ज्योति प्रभाकर धामा। मंत्र महा मनरोग निवारक साधक साधु दिवाकर नामा। पाठक पाठ करे दिन रात विशुद्ध रमा कमलाकर श्यामा । योग सुधा कलिकाल प्रभाव मिटावत भोग सुधाकर...

  • कुंडलिया- ज्ञानी

    कुंडलिया- ज्ञानी

    ज्ञानी ज्ञानिक ढूढ़ता, सतत पंथ ज्यों संत माया मोह विराग में , गुण गति कैसा अंत गुणगति कैसा अंत , पन्थ देखे नित सज्जन माया करे प्रलाप , काम क्रोधी मन दुर्जन जपत संत हरि नाम,...



  • घनाक्षरी (छंद)

    घनाक्षरी (छंद)

    हिन्दुओं की आस्था भी मखौल बनी भारत में । देख राजनीति का ये रंग रोष छा रहा ।। ईश्वर की मूरत को पत्थर बताए कोई । कोई पुष्ट भोजन गोमाँस को बता रहा ।। . धर्म...

  • दोहा (छंद)

    दोहा (छंद)

    १. तुलसी का बिरवा नहीं, दिखता आँगन माँहि ।     संस्क्‌ति, आस्था त्याग सब, नए दौर में जाहिं ।। २. नागफनी को रोप कर, मन में अति हरषाय । मन भी मरुथल हो गए, प्रेम...