Category : कुण्डली/छंद

  • प्याज के अच्छे दिन आए

    प्याज के अच्छे दिन आए

    प्याज बेचारी क्या करे, लोग करें बदनाम ‘महबूबा’-सा किया है गोडाउन में जाम गोडाउन में जाम, मचा कोहराम देखिए सपनों मे अब यही आ रही राम देखिए कह सुरेश कल थी सड़कों पर मारी-मारी तरकारी की...


  • रूपमाला छंद

    रूपमाला छंद

    बचपने की ढल गयी है ,खूबसूरत शाम । करवटें बदली  उमर ने ,तज सुखद आराम । खो गए वो दिन पुराने ,खो गए सब खेल । एक दिन लड़ना झगड़ना ,दूसरे दिन मेल । मीत वो...

  • मधुशाला

    मधुशाला

    केवल श्रम की चाबी से ही, खुलता किस्मत का ताला कर्तव्यों से ही मिलती है, अधिकारों वाली हाला। जो साहस के साथ मथेगा, कठिनाई के सागर को उसके जीवन में छलकेगी, सुख सपनों की मधुशाला।। चलने...

  • सवैया

    सवैया

    राम कौ नामु जपौ जितनों, उतनी मन कों सुख शांति मिलैगी। राम कों भूलि गयौ मनवा, आजमाय लै रे दुख भ्रांति मिलैगी।। राम ही राम ही राम जपौ, तन में मन में नव कांति मिलैगी। इतराय...

  • बच्चो करना माफ

    बच्चो करना माफ

    राम कसम इस बार तो, बच्चो करना माफ दिल में भारी टीस है, बतलाता हूँ साफ बतलाता हूँ साफ, शरम थी नहीं जरा सी जिसे वतन से बढ़कर लगती थी ऐय्याशी कह सुरेश जिसको अच्छी न...

  • कुण्डलियाँ

    कुण्डलियाँ

    १) चाय बेचकर बन गया, भक्तजनों पी एम । पीने वाले बन गये, जनपद के डी एम।। जनपद के डी एम, लगाते घर का पहरा। थाम केतली हाथ, बँधा है सर पर सहरा।। देख अनौखा काम,...



  • कुण्डली

    कुण्डली

    योगी साहब देखिए, मरकर भी कमलेश हमको, तुमको, सभी को, दे गै इक संदेश दे गै इक संदेश, ‘”हमें तो बैर नहीं है’। भारत में भी अब हिंदू की खैर नहीं है” । कह सुरेश करिए...