Category : कुण्डली/छंद

  • कहमुकरी छंद

    कहमुकरी छंद

    प्रीत मिलन की याद सतावे दे दो दर्शन प्यास बुझावे उनके बिन कुछ भी न भाता ए सखि साजन? ना सखि यारा! — बिजया लक्ष्मी



  • कुंडलियां

    कुंडलियां

    १:/ भारत का दर्शन,गणित,ज्योतिष और विज्ञान । कभी विश्व में थे यही ,भारत की पहचान । भारत की पहचान,विश्वगुरु देश हमारा । कहाँ खो गया वह प्रतिभा का सागर सारा ? प्रतिभाओं का हनन,राष्ट्र को करता...

  • कुंडलियां छंद

    कुंडलियां छंद

    आजादी को देश की, बीते कितने साल वीरों के बलिदान से, हुई धरा ये लाल हुई धरा ये लाल, दर्द में डूबी जाए खोया जो सुख चैन, कौन वो फिर से लाए गौरों का था खेल,...

  • घनाक्षरी

    घनाक्षरी

    प्रेम के भी रंग – ढंग कैसे हैं प्रसंग सब। बात – बात पर चल जाती यहाँ गोली है।। ऋद्धि-सिद्धि सुख-शांति कैसे आये पास जब। फणि फुँफकार जैसी विष भरी बोली है।। सारा सत ज्ञान लिये...

  • मित्रता

    मित्रता

    खून का नही है ,पर प्रेम अनुबंध है ये, दोस्ती के रिश्ते को नेह से निभाइये। मीत जो गरीब हो या ,कष्ट में हो,दुख मे हो, मीत को सुदामा मान,कृष्ण बन जाइये। ऊँच-नीच,गुरु-लघु,श्वेत-श्याम सब त्याग, मीत...


  • कुंडलियाँ….

    कुंडलियाँ….

    आँगन मन  इठला रहा, एक अधखिला फूल। घात अमित्र सम वात की, चुभा गयी थी शूल। चुभा गयी थी शूल, फूल मुरझाया ऐसे। यत्न वृथा सब आज, खिला न पहले जैसे। “अनहद” महत विषाद, लगे ये...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    बादल घिरा आकाश में, डरा रहा है मोहिं। दिल दरवाजा खोल के, जतन करूँ कस तोहिं॥ जतन करूँ कस तोहिं, चाँदनी चाँद चकोरी। खिला हुआ है रूप, भिगाए बूँद निगोरी॥ कह गौतम कविराय, हो रहा मौसम...