कुण्डली/छंद

हे कोरोना अंकल

टेंशन में हैं इंडिया, दहशत में संसार गले पड़ा यूं कोरोना,लाज रखें करतार लाज रखें करतार, मगर सबका है रोना नेता घर जाने से क्यूं डर रहा ‘कोरोना’ ? कह सुरेश ‘वायरस’दादा तुम यार डरो ना! ‘पाकपरस्त’ सभी नेता से प्यार करो ना। — सुरेश मिश्र

कुण्डली/छंद

कुंडलिनी छंद : कोरोना विकट महामारी

पीड़ित सकल समाज है,कोरोना से आज | ड्रैगन की करतूत से, गिरी सभी पर गाज | गिरी सभी पर गाज ,विश्व को इसने मारा | जीना है दुस्वार,समय की बदली धारा | * संयम सद्संकलप से, बनते काम तमाम | बार बार धों हाथ को,लें विवेक से काम | लें विवेक से काम ,रहें अपने […]

कुण्डली/छंद

कुण्डलिया छंद : कोरोना

कोरोना से डर नहीं , भीड़ में नहीं काम । कोरोना से बच रहो , लेना प्रभु का नाम ।। लेना प्रभु का नाम , करें कष्ट दूर सारे । घर के अंदर रहो , सभी बंद करो द्वारे ।। छूना जो कुछ सुनो , तभी रगड़ हाथ धोना । मज़ाल जो अब छुए , […]

कुण्डली/छंद

छंद

कोरोना का रोना नहीं, रोना बारबार भाई करो ना कोरोना, मँहगाई मार डालेगी धरोना कदम फूँक-फूँककर, यहाँ-वहाँ करो ना निभाओ ये मिताई, मार डालेगी धोना हाथ , हाथ ना मिलाना अनजान संग पहचानवालों से जुदाई मार डालेगी डरो ना कोरोना से ना होना जाना कुछ नहीं कोरोना को आपकी, ढिठाई मार डालेगी। कोरोना की मार […]

कुण्डली/छंद

कुण्डली

कोरोना की सूचना, छिपती कब है यार। छुपम छुपाई खेलता,राही खाता मार। राही खाता मार,घड़ी अलबेली आई। कानूनन अपराध,कहें सब ही अब साईं। वाम भजे श्री राम,हुआ क्या बोलो टोना। नमन करें कर जोड़,जय जय तेरी करोना। — निवेदिता श्री

कुण्डली/छंद

छन्द

भारत की नारियां सभी हो राधिका के तुल्य, मानंव हो जैसे वासुदेव कृष्ण श्याम से।। कष्ट कट जाये दुःख दूर रहे जिंदगी से, प्यार से मनाये होली दूर रहे जाम से।। रंग रंग से रंगो कुरंग से बचो सदा, लुटाते रहो प्रीती का गुलाल सुबह शाम में। देश की अखण्डता व् एकता सलामती हो, नीरज […]

कुण्डली/छंद

हे कोरोना अंकल

टेंशन में हैं इंडिया, दहशत में संसार गले पड़ा यूं कोरोना,लाज रखें करतार लाज रखें करतार, मगर सबका है रोना नेता घर जाने से क्यूं डर रहा ‘कोरोना’ ? कह सुरेश ‘वायरस’दादा तुम यार डरो ना! पाक परस्त सभी नेता से प्यार करो ना। — सुरेश मिश्र

कुण्डली/छंद

छन्द

दिल से लगाने की जो बात मैने की हो कोई दिल से लगा के वही बात ले जाइये कितना भी कीजिए विरोध किसी बात का मगर ना घरो को ना दुकानो को जलाइये हिल मिल खुशियां त्योहार सब मनाये सदा विष ना घृणा का यहाँ आप फैलाइये ऐसा हो प्रयास यहाँ दूरियां कभी ना बढ़े […]

कुण्डली/छंद

बसंत

पीली सरसों खेत में, नाच रही चहुँ ओर। मानो पीली शाटिका, लहराती पुरजोर।। लहराती पुरजोर, चढ़ी है नयन – खुमारी। कामदेव की टेर , कर रही रती कुमारी।। ‘शुभम’ झुका आकाश, ओढ़कर चादर नीली। इठलाती है भूमि, धारकर साड़ी पीली।।1।। पीले पल्लव झर रहे, बिखरी – बिखरी छाँव। उधर लाल कोंपल उगीं, निखरे – सुथरे […]

कुण्डली/छंद

दुर्मिल सवैया – फाग बयार

भँवरे कलियाँ तरु झूम उठें जब फाग बयार करे बतियाँ| दिन रैन कहाँ फिर चैन पड़े कतरा- कतरा कटती रतियाँ| कविता, वनिता, सविता, सरिता ढक के मुखड़ा छुपती फिरती| जब रंग अबीर लिए कर में निकले किसना धड़के छतियाँ| नव लाल गुलाल मले मितवा हँसती सखियाँ हँसती नगरी| कजरा लहका गज़रा महका मुख लाल हुआ […]