Category : कुण्डली/छंद

  • मदिरा सवैया

    मदिरा सवैया

    मदिरा सवैया … ७ भगण एक गुरू 211 211 211 211 211 211 211 2 (1) लेप दियो वृषभान सुता ,नवनीत मनोहर गाल सखी रूठ गये नटनागर ली पग -धूरि उछालत ग्वाल सखी खोंस लई मटकी...



  • होली के रंग

    होली के रंग

    “होली के रंग” होली की मची है धूम, रहे होलियार झूम, मस्त है मलंग जैसे, डफली बजात है। हाथ उठा आँख मींच, जोगीड़ा की तान खींच, मुख से अजीब कोई, स्वाँग को बनात है। रंगों में...

  • चार कहार

    चार कहार

    चार कहार उठाय चले छवि आज पिया घर जाय रही है । चार चराचर रूप लुभाय विनोद करे मन भाय रही है । कन्त बसंत भयो सतसंग जमी गुण मोहन गाय रही है । शाम ढली...


  • ये पब्लिक है, सब जानती है

    ये पब्लिक है, सब जानती है

    चोरी करके चोर ही,करने लगे बवाल डाट रहा है लुटेरा, सहमा है कोतवाल सहमा है कोतवाल, सड़क के गड्ढे रोएं हरिश्चंद के लाल,देखिए आपा खोएं कह सुरेश भाऊ पापों से भरी ‘कमोरी’ धंधा संकट में ,अब...

  • बन्दना

    बन्दना

    मैय्या सरस्वती आय के विराजो कंठ,मस्तक मे बैठि मेरे ज्ञान को बढ़ाइये। लेखनी चले तो कटे न कोई शब्द,ज्ञान इतना,बढ़ाय के स्वमहिमा दिखाइए।। स्वेत हंसवाहिनी बीणा कर स्वेत ले,आय झनकार कर मम ज्ञान को जगाइए। तेरी...

  • छंद

    छंद

    दमकैं चमकैं निशिवासर ही निधि नेह नही तनिकौ हियमे है। घरमा रहिकै नहि बैर करै पर प्रीति नही तनिकौ पियमे है। निशि नींद नही जब प्रात उठै,तब टीस उठै प्रिय की जियमे है। यह देखि सबेरेस...

  • अजीब से हालात है

    अजीब से हालात है

    अजीब से हालात है मेरी जिंदगी के दिन ढलता भी नहीं और रात होती हैं.. मुस्कुराना काफी नहीं है इस महफ़िल में, यहां तो आंसुओ के जरिये बात होती है.. इश्क के बाजीगरों को रोते देखा...