Category : कुण्डली/छंद

  • छंद : मधुशाला

    छंद : मधुशाला

    विधान : 16/14=30,अंत 112/22 प्रथम, द्वितीय, व चतुर्थ चरण तुकांत,तृतीय चरण स्वतंत्र   आज सभी जन हुए लालची,छल कुदरत से करते हैं । छल  कुदरत  को  बाद स्वयं ही,मरने से भी डरते हैं । भूल  रहे ...


  • होगा

    होगा

    खोल के रख दी है संदूक दिल की मेरे पास अब छुपा हुआ राज क्या होगा? मौत से हमदर्दी है मेरी बेवफा से नहीं जिंदगी फिर से, तो मेरा जवाब क्या होगा? कलम से पक्के किये...

  • कहमुकरियाँ

    कहमुकरियाँ

    रात अँधेरी वो था आया मेरा मन कुछ कुछ घबराया देख भोर को छुपता मांद क्या सखि प्रेमी..? न सखि चाँद। अधरों की बढ़ती है प्यास। कैसे कह दूं सब अहसास मन में उठती प्रणय उमंग।...


  • कुंडली- पगलाई दीदी

    कुंडली- पगलाई दीदी

    दीदी दौरा कर रही, और भरे हुंकार एक मंच पर आइए, गदहे,श्वान, सियार गदहे,श्वान, सियार, रहे जो हिंदूद्रोही बिल्ली के गठबंधन में शामिल हों वो ही कह सुरेश काटें मिल शेर, मने बकरीदी पीएम बनने की...

  • कुंडलियाँ छ्न्द

    कुंडलियाँ छ्न्द

      #आधुनिकता नैतिक मूल्यों को रखा, बड़े गर्व से ताक। खूब उड़ाई धूल में, संस्कारों की खाक। संस्कारों की खाक, धूसरित करती माया। चकाचौंध पुरजोर, आधुनिकता की छाया। “अनहद” दौड़ें दौड़, करें भी काम अनैतिक। रखें...

  • नारियाँ

    नारियाँ

    ममतामयी है रूप ,मातृशक्ति का स्वरूप, प्रेम नीर से जगत ,पखारती है नारियाँ । पीढ़ियाँ चला रही हैं, दीप नव जला रही हैं, मनुसृष्टि अंक ले दुलारती हैं नारियाँ । मातु कहीं ,नारि कहीं, भगिनी का...


  • “सरस्वती वंदना”

    “सरस्वती वंदना”

      नमामि मात शारदे, नमामि मात शारदे। विनाश काम क्रोध मोह लोभ मात मार दे। सदैव सत्य लेखनी लिखे डरे न सार दे। अनेक भाव शब्द और शुद्ध से विचार दे। उपासना करूँ प्रभात से बनी...