Category : कुण्डली/छंद

  • कुंडलियाँ छंद

    कुंडलियाँ छंद

    अपना भारत देश जो,लगे सुरक्षित आज। हर पल सेवारत् रहें,दृढ़ता से जांबाज। दृढ़ता से जांबाज,रहें जल-थल-अंबर में। तब जाकर सुख-चैन,प्राप्त करते हम घर में। कहता ‘कवि विकलांग’,यही मेरा है सपना। रहे सदा खुशहाल,देश में सैनिक अपना।।...

  • मुक्तहरा

    मुक्तहरा

    जिसे तुम देख रहे विकलांग उसे मत मान कभी कमजोर। करे यदि कोशिश ला सकता वह जीवन में कल नूतन भोर। रचे नित ही इतिहास यहाँ पर थाम चले कर जो श्रम डोर। सदा वह मंजिल प्राप्त...

  • बीजू के छक्के – पिज़्ज़ा

    बीजू के छक्के – पिज़्ज़ा

    डिब्बा है चौकोर पर, खुद है गोल-मटोल काट तिकोने प्यार से, उसको पिज़्ज़ा बोल उसको पिज़्ज़ा बोल, बेस है मोटा सूखा उस पर गीली पर्त, देख ललचाये भूखा “बीजू” यह है राजकुमार इटली का भाई गोरी...

  • सरसी छंद

    सरसी छंद

    1 – वाह वाह ही सब करते हैं ,कविता हुई फरार | फेसबुक ने दिया है सबको ,कैसा यह संसार || अपने मन की लिखते हैं सब , नहीं छंद का नाम| जाने कैसे बिक जाते...

  • “रथपद छंद”

    “रथपद छंद”

    छंद, विधान~[ नगण नगण सगण गुरु गुरु] ( 111 111 112 2 2 ) 11वर्ण,4 चरण, दो चरण समतुकांत सकल अवध सिय रामा जी सुखद मिलन अभि रामा जी। दसरथ ललन चलैया हैं रघुवर अवध बसैया...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    पानी भीगे बाढ़ में, छतरी बरसे धार कैसे तुझे जतन करूँ, रे जीवन जुझार रे जीवन जुझार, पाँव किस नाव बिठाऊँ जन जन माथे बोझ, रोज कस पाल बँधाऊँ ‘कह गौतम’ कविराय, मिला क्या कोई शानी...


  • कुंडलियां छंद

    कुंडलियां छंद

    माया का चक्कर अजब ,भटक रहा इंसान कोई लंदन जा बसा , कोई है जापान कोई है जापान , लौट कर देश न आता सब कुछ लगता दांव ,रकम मोटी तब पाता खेल यही बेमेल ,...

  • कुण्डलिया

    कुण्डलिया

    कुण्डलिया * १- सावन आया झूम के ,महक उठे वन बाग । हर्षित दादुर मोर सब ,झींगुर गायें राग । झींगुर गायें राग ,चली पुरवा मस्तानी । धरती के परिधान हो गये सारे धानी । कहैं...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    खुशी शाम नभ की लड़ी, लाल रंग इतराय शुभ्र हंस प्रिय हंसिनी, कमल कमलिनी छाय कमल कमलिनी छाय, मिलन पिय राग सुनारी सुंदरता खिली जाय, किनारी नयन निहारी ‘गौतम’ करत किलोल, सुलोल बरखा की हँसी मंद...