Category : कुण्डली/छंद


  • कुण्डली

    कुण्डली

    योगी साहब देखिए, मरकर भी कमलेश हमको, तुमको, सभी को, दे गै इक संदेश दे गै इक संदेश, ‘”हमें तो बैर नहीं है’। भारत में भी अब हिंदू की खैर नहीं है” । कह सुरेश करिए...


  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    चाहत दिल की लिख रहा, पढ़ लो तनिक सुजान सूरज बिन पश्चिम गए, करता नहीं बिहान करता नहीं बिहान, नादान बु-द्धि का पौना हँसता है दिल खोल, रुदन करता जस बौना कह गौतम कविराय, हाय रे...



  • जनता को नमन्

    जनता को नमन्

    जनता को मेरा नमन, रच डाला इतिहास मोदी को चुनकर पली, हर दिल में नवआस हर दिल में नव आस, भरोसा है अब दूना मोदी जिसने दुश्मन को घर घुसकर भूना यह ‘नीलम’ की बात, कर्म...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    धू धू कर के जल रहे, गेंहूँ डंठल बाल धरा झुलसलती हो विकल, नोच रहे हम खाल नोच रहे हम खाल, हाल बेहाल मवाली समझाए भी कौन, मौन मुँह जली पराली कह गौतम कविराय, चाय सब...