Category : कुण्डली/छंद

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    मारे मन बैठी रही, पुतली आँखें मीच। लगा किसी ने खेलकर, फेंक दिया है कीच।। फेंक दिया है कीच, तड़फती है कठपुतली। हुई कहाँ आजाद, सुनहरी चंचल तितली।। कह गौतम कविराय, मोह मन लेते तारे। बचपन...

  • “मत्तगयन्द सवैया”

    “मत्तगयन्द सवैया”

    होकर मानव भूल गए तुम मान महान विचार बनाये। रावण दानव जन्म लियो नहिं बालक पंडित ज्ञान बढ़ाये।। अर्जुन नाहक वीर भयो नहिं नाहक ना दुरयोधन जायो। कर्म किताब पढ़ो नर नायक नाहक ना अहिरावण आयो।।...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    पाया प्रिय नवजात शिशु, अपनी माँ का साथ। है कुदरत की देन यह, लालन-पालन हाथ।। लालन-पालन हाथ, साथ में खुशियाँ आए। घर-घर का उत्साह, गाय निज बछड़ा धाए।। कह गौतम कविराय, ठुमुक जब लल्ला आया। हरी...

  • छंद मदिरा सवैया

    छंद मदिरा सवैया

    वाद हुआ न विवाद हुआ, सखि गाल फुला फिरती अँगना। मादक नैन चुराय रहीं, दिखलावत तैं हँसती कँगना।। नाचत गावत लाल लली, छुपि पाँव महावर का रँगना। भूलत भान बुझावत हौ, कस नारि दुलारि रह ना...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    चादर ओढ़े सो रहा, कुदरत का खलिहान। सूरज चंदा से कहे, ठिठुरा सकल जहान।। ठिठुरा सकल जहान, गिरी है बर्फ चमन में। घाँटी की पहचान, खलल मत डाल अमन में।। कह गौतम कविराय, करो ऋतुओं का...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    कुल्हण की रबड़ी सखे, और महकती चाय। दूध मलाई मारि के, चखना चुस्की हाय।। चखना चुस्की हाय, बहुत रसदार कड़ाही। मुँह में मगही पान, गजब है गला सुराही।। कह गौतम कविराय, न भूले यौवन हुल्लण। सट...


  • कुंडली

    कुंडली

    अफरीदी क्या कह रहा, सुन ले पाकिस्तान तू भी सुन हाफिज मियां, सुन ले ‘बे’ इमरान सुन ले ‘बे’ इमरान, अरे खल, पाकी टुच्चे जिस दिन सेना सनकी, नहीं बचेगा लुच्चे कह सुरेश आएंगे काम न...

  • कुण्डलिया

    कुण्डलिया

    1. होना गुण का श्रेष्ठ है, नहीं जाति का भ्रात अवगुण का जो घर बना, जन कुल पर आघात जन कुल पर आघात, दम्भ बस पाले रहता हुआ नशे में चूर, न समझे किस रो बहता...

  • कहमुकरी छंद

    कहमुकरी छंद

    प्रीत मिलन की याद सतावे दे दो दर्शन प्यास बुझावे उनके बिन कुछ भी न भाता ए सखि साजन? ना सखि यारा! — बिजया लक्ष्मी