कुण्डली/छंद

मन मोर भयौ मथुरा बिंदरावन

-1- रँग लाल गुलाल उड़े ब्रज में, डफ ढोल धमाधम बाजत वादन। चुनरी पट ओढ़ि चली तरुणी, चलती पिचकारिहु धार सनासन।। पथ कान्ह मिले गहि बाँह लई, लिपटाय लई तर अंग मनावन। चलि कुंजनु खेल करें रस के, मन मोर भयौ मथुरा बिंदरावन।। -2- रस चूसि करै खिलवाड़ अली, कलिकावलि नाचाति झूमि रिझावति। तितली उत […]

कुण्डली/छंद

कुंडलिया छन्द

नेता करते हैं यहां, बस अपना उत्थान जनता को ही देखिए, करने सब बलिदान करने सब बलिदान, गिला मत करना कोई चुप बस रहे जुबान, कसम जो आँखे रोई देकर हमको कोर, चपाती सारी लेता सूखी खाओ तुम, चुपडी खायेगा नेता — शालिनी शर्मा

कुण्डली/छंद

समझो द्वारे पर है बसन्त

मद्धिम कुहरे की छटा चीर पूरब से आते रश्मिरथी उनके स्वागत में भर उड़ान आकाश भेदते कलरव से खग वंश बेलि के उच्चारण जब अर्थ बदलने लगें और बहुरंग तितलियाँ चटक मटक आ फूल फूल पर मँडराएँ जब मौन तोड़ कोयलें गीत अमराई में गा उठें और मधुकर के गुंजित राग उठें पड़कुलिया गमकाए ढोलक […]

कुण्डली/छंद

सूर्य पर केंद्रित छंद

दिव्य दिवाकर,नाथ प्रभाकर,देव आपको,नमन करूँ। धूप-ताप तुम,नित्य जाप तुम,करुणाकर हे!,तुम्हें वरूँ।। नियमित फेरे,पालक मेरे,उजियारा दो,पीर हरो।  दर्द लड़ रहा,पाप अड़ रहा,नेह करो हे!,शक्ति भरो।। सबको वरते,जगमग करते,हे ! स्वामी तुम,सकल धरा। मन है गाया,जीवन पाया,नवल ताज़गी,लोक वरा।। तुम भाते हो,मुस्काते हो,जीव सभी ही,प्राण वरें। धूप लुभाती,मौसम लाती,किरणें सबका,शोक हरें।। शक्तिमान तुम,धैर्यवान तुम,,गति साधे हो,तेज बढ़ो। […]

कुण्डली/छंद

आल्हा छंद : नारी का जग पर उपकार

साहस शौर्य शक्ति की प्रतिमा, नारी का जग पर उपकार दुर्गा लक्ष्मी राजपुतानी, की गाथाये कहें पुकार जग को जीवन देने वाली, जिससे है जग में पहचान त्याग तपस्या की मूरत सी, नारी जग का है आधार लक्ष्मी बाई, दुर्गा बन कर, करे शत्रुओं का संहार विकट परिस्थितियाँ हों चाहें, करती नहीं हार स्वीकार मानव […]

कुण्डली/छंद

ठंड पर चौकड़िया छंद

(१) ठंडी की तो रुत है आई,माँगें सभी रजाई। मौसम ने मारा है सबको,व्याकुल दद्दा-माई।। हवा चल रही बेहद शीतल,देते सभी दुहाई। कैसी ये है आई विपदा,आँख करती रुलाई।। (२) ठंडी ने है ताव दिखाया,हर जन है घबराया। गरम चाय की माँग बढ़ गई,ऊनी सबको भाया।। कम्बल की तो पूछ बढ़ गई,स्वेटर है इतराया। मौसम […]

कुण्डली/छंद

धरती माता पर कुण्डलिया

(1) धरती माता लाड़ का,है असीम भंडार। संतति की सेवा करे,है सुख का आगार।। है सुख का आगार,धरा है सुख की छाती। जो व्यापक संपन्न,प्रचुर है जिसकी थाती।। कौन गिने उपकार,मातु जो हम पर करती। सचमुच में है धन्य,हमारी माता धरती।। (2) धरती देती प्यार नित,गाती नेहिल गान। संतानों का भाग्य यह,गूँजे मंगलगान।। गूँजे मंगलगान,पेड़-पौधों […]

कुण्डली/छंद

छंद

तुल ने तुल को मार कर, स्थापित तुल राज, तुल मर्यादा रूप हैं, कुंभ दिये बिसराए। मेष सदा संग में रहे, बन सेवक का पर्याय, कर्क औषधि लाय क़र, मेष दियो बचाये। मीन बहुत विचलित हुई, सुन मिथुन की बात, तुल के बिछुडन अहसास से, प्राण दिये गँवाये। मेष कुटनीतिज्ञ बहुत, तुल को दिये ललकार, […]

कुण्डली/छंद

मन हरण घनाक्षरी

मंद सुगंध पवन,       भरे आज प्रेम घन, सघन घनघोर में,         व्यथा सुन लीजिए।  भरी चित उलझन,        प्रीत की कैसी लगन, साँवरे सुन ले जरा,          प्रेम भर  लीजिए। प्रेम  ध्वनि कल -कल,        भरी वसुधा  कोमल, प्रीत के तीखे ये […]

कुण्डली/छंद

हिंदी

हिंदी,जैसे सजी है बिंदी माथे पर शोभित जिससे मेरी माँ भारत है अनेक भाषाओं के पहने वो गहने सभी से सुंदर बस उनकी मूरत है सरल सुलझी ये मेरी माँ के जैसी बड़ी प्यारी देखो इसकी सीरत है सभी भावों की छवि इस दर्पण में आसान इतनी कि सभी को हैरत है — आशीष शर्मा […]