Category : कुण्डली/छंद



  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    चैत्री नव रात्रि परम, परम मातु नवरूप। एक्कम से नवमी सुदी, दर्शन दिव्य अनूप।। दर्शन दिव्य अनूप, आरती संध्या पावन। स्वागत पुष्प शृंगार, धार सर्वत्र सुहावन।। कह गौतम कविराय, धर्म से कर नर मैत्री। नव ऋतु...

  • महाभुजंगप्रयात सवैया

    महाभुजंगप्रयात सवैया

    8 यगण, 24वर्ण, सरल मापनी — 122/122/122/122/122/122/122/122 प्रभो का दिदारा मिला आज मोहीं, चली नाव मेरी मिली धार योंही। सभी मीत मेरे सभी साधनों का, सहारा मिला नाथ जी सार सोहीं।। न था को किनारा न...



  • घनाक्षरी

    घनाक्षरी

    भक्ति जो करे तो मीराबाई बन जाये नारी , कोप जो करे तो रणचंडी बन जाती है । तोड़ती मिथक सारे नारी शक्ति नित्यप्रति, कल्पना बने तो अंतरिक्ष तक जाती है । नारी है तो सृष्टि...


  • मुकरियाँ

    मुकरियाँ

    खरी खरी वह बातें करता । सच कहने में कभी न डरता । सदा सत्य के लिए समर्पण। क्या सखि ,साधू ? ना  सखि, दर्पण । हाट दिखाये , सैर कराता । जो चाहूँ वह मुझे...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    चादर ओढ़े सो रहा, कुदरत का खलिहान। सूरज चंदा से कहे, ठिठुरा सकल जहान।। ठिठुरा सकल जहान, गिरी है बर्फ चमन में। घाटी की पहचान, खलल मत डाल अमन में।। कह गौतम कविराय, करो ऋतुओं का...