कुण्डली/छंद

धरती माता पर कुण्डलिया

(1) धरती माता लाड़ का,है असीम भंडार। संतति की सेवा करे,है सुख का आगार।। है सुख का आगार,धरा है सुख की छाती। जो व्यापक संपन्न,प्रचुर है जिसकी थाती।। कौन गिने उपकार,मातु जो हम पर करती। सचमुच में है धन्य,हमारी माता धरती।। (2) धरती देती प्यार नित,गाती नेहिल गान। संतानों का भाग्य यह,गूँजे मंगलगान।। गूँजे मंगलगान,पेड़-पौधों […]

कुण्डली/छंद

छंद

तुल ने तुल को मार कर, स्थापित तुल राज, तुल मर्यादा रूप हैं, कुंभ दिये बिसराए। मेष सदा संग में रहे, बन सेवक का पर्याय, कर्क औषधि लाय क़र, मेष दियो बचाये। मीन बहुत विचलित हुई, सुन मिथुन की बात, तुल के बिछुडन अहसास से, प्राण दिये गँवाये। मेष कुटनीतिज्ञ बहुत, तुल को दिये ललकार, […]

कुण्डली/छंद

मन हरण घनाक्षरी

मंद सुगंध पवन,       भरे आज प्रेम घन, सघन घनघोर में,         व्यथा सुन लीजिए।  भरी चित उलझन,        प्रीत की कैसी लगन, साँवरे सुन ले जरा,          प्रेम भर  लीजिए। प्रेम  ध्वनि कल -कल,        भरी वसुधा  कोमल, प्रीत के तीखे ये […]

कुण्डली/छंद

हिंदी

हिंदी,जैसे सजी है बिंदी माथे पर शोभित जिससे मेरी माँ भारत है अनेक भाषाओं के पहने वो गहने सभी से सुंदर बस उनकी मूरत है सरल सुलझी ये मेरी माँ के जैसी बड़ी प्यारी देखो इसकी सीरत है सभी भावों की छवि इस दर्पण में आसान इतनी कि सभी को हैरत है — आशीष शर्मा […]

कुण्डली/छंद

सावन की कुण्डलियां

1. सावन महीना आ गया, मन है भाव विभोर। पपीहे कुहू-कुहू कर रहे, नृत्य कर रहे मोर। नृत्य कर रहे मोर, छायी चहुँ दिश हरियाली। मेघ कर रहे नाद, घटाएँ छायी काली। कहे विनय सज गए, शिवालय मंदिर पावन। आया शिव का प्रिय, महीना रिमझिम सावन। 2. राधा रानी झूला झूलें, नन्हीं पड़े फुआर। झोंटे […]

कुण्डली/छंद

देश प्रेम को जगा

-1- देश प्रेम को जगा न जाति भेद में मलीन। रंच मात्र राग द्वेष के न हो कभी अधीन।। पेट पालते हुए बनें न ढोर कीर मीन। जाग! जाग!!जीव मूढ़ चेत हो बनें प्रवीन।। -2- देह को न रंग मीत रंग चित्त का सु- गेह। गेह हाड़ माँस में न लीन हो बने विदेह।। शेष […]

कुण्डली/छंद

कुण्डलिया छंद

चोरी नैनों से करे, लूटे मन का चैन। जब तब पलके मूंद कर, दिन को कर दे रैन ।। दिन को कर दे रैन , पिया की है छवि प्यारी । मनमोहे मनमीत, और मैं मन से हारी ।। कहे साधना बात , प्रीत की है जो डोरी। बाँधे तोड़े आज, हृदय की कर के […]

कुण्डली/छंद

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस

योग से निरोग बने,बने रहें स्वस्थ सब, सबको ही योग का, प्रण लेना चाहिए । भारत जनक है, योग की परंपरा का, विश्व नमन करे, अब सीख लेनी चाहिए । योग अपना के लाभ पा रहा जहां,…… भारत का भी हर घर स्वस्थ होना चाहिए । सबको ही योग का, प्रण लेना चाहिए । भोग […]

कुण्डली/छंद

प्रभुवंदना की कुंडलियाँ

(1) अंतर में शुचिता पले,तो हो प्रभु का भान। वरना मानव मूर्ख है,कर ले निज अवसान।। कर ले निज अवसान,विधाता को नहिं जाने। चिंतन का उत्थान,तभी विधि को पहचाने।। सच का हो संसार,यही सद्गति का मंतर। सपने हों साकार,चेतना है यदि अंतर।। (2) खिलता है जीवन तभी,जब है उर निष्पाप। कर्म अगर होते बुरे,तो जीवन […]

कुण्डली/छंद

प्रेम के सवैया

जब प्रेम दिखा तब रूप सजा,जब रूप सजा तब प्रेम महान। मन है चहका,दिल है बहका,जब दे नित ही कुछ तो अवदान। अनुमान नहीं कुछ प्रेमसुरा,कितनी महिमा गरिमा पहचान। जब रात सजे,कुछ बात बढ़े,महके चहके झलके मतिमान।। सहगान सुमंगल प्रीत लिये,अनुगीत लिये नवगीत कमान। झनकार बहार सुहावन है,मन भोर सुप्रीति रचे सुखखान।। नित भान पले […]