Category : कुण्डली/छंद

  • कुंडलियाँ छ्न्द……

    कुंडलियाँ छ्न्द……

      लगता मेघों ने किया, गठबंधन मजबूत। इंद्रदेव का आज तो, बना दिवाकर दूत। बना दिवाकर दूत, समय पर हर दिन आता। तांडव करता रोज, उगल के ज्वाला जाता। जले जलाशय कुंड, विकल हो मानव जलता।...

  • कुण्डलियाँ

    कुण्डलियाँ

    महबूबा को दे दिए, भइया अमित तलाक छाती पीट सिसक रहा, नीच निकम्मा पाक नीच निकम्मा पाक, शॉक पंजे को लागा अब्दुल्ला गद्दार, पुनः सोते से जागा कह सुरेश सैनिक के हाथ थमाओ सूबा बिना ‘हलाला’...


  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    पलड़ा जब समतल हुआ, न्याय तराजू तोल पहले अपने आप को, फिर दूजे को बोल फिर दूजे को बोल, खोल रे बंद किवाड़ी उछल न जाए देख, छुपी है चतुर बिलाड़ी कह गौतम कविराय, झपट्टा मारे...

  • कुंडली – गर्मी में

    कुंडली – गर्मी में

    मनवां अइसा बावरा, पल-पल भरे कुलेल खेल रहा है आजकल, जियरा के सँग खेल जियरा के सँग खेल, भावनाओं की मंडी नैना खुद को समझे, दादा कागभुसुंडी कह सुरेश धक-धक दिल बोले कटे न दिनवां गर्मी...

  • कुण्डलियाँ

    कुण्डलियाँ

    भावी पीएम देश के, देखो एक कतार सबके सब उन्नीस में, कुर्सी चढ़ेंगे यार कुर्सी चढ़ेंगे यार, जो जनता देगी तोफ़ा पीएम की कुर्सी का, बन जाएगा सोफ़ा कह पुनीत कविहाय, देश पे होंगे हावी इक...

  • छंद : मधुशाला

    छंद : मधुशाला

    विधान : 16/14=30,अंत 112/22 प्रथम, द्वितीय, व चतुर्थ चरण तुकांत,तृतीय चरण स्वतंत्र   आज सभी जन हुए लालची,छल कुदरत से करते हैं । छल  कुदरत  को  बाद स्वयं ही,मरने से भी डरते हैं । भूल  रहे ...


  • होगा

    होगा

    खोल के रख दी है संदूक दिल की मेरे पास अब छुपा हुआ राज क्या होगा? मौत से हमदर्दी है मेरी बेवफा से नहीं जिंदगी फिर से, तो मेरा जवाब क्या होगा? कलम से पक्के किये...

  • कहमुकरियाँ

    कहमुकरियाँ

    रात अँधेरी वो था आया मेरा मन कुछ कुछ घबराया देख भोर को छुपता मांद क्या सखि प्रेमी..? न सखि चाँद। अधरों की बढ़ती है प्यास। कैसे कह दूं सब अहसास मन में उठती प्रणय उमंग।...