Category : कुण्डली/छंद







  • ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

    ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

    गरमी का पारा गया,सीमा को कर पार। मरे सैकड़ों आदमी,चहुँ दिश हाहाकार। चहुँ दिश हाहाकार,हाल हैं खस्ता सबके। पशु-पक्षी-इंसान,हार माने हैं कब के। कह ‘पूतू’ कविराय,न बरते थोड़ी नरमी। करती अत्याचार,दिनोदिन जालिम गरमी।। पीयूष कुमार द्विवेदी...