Category : कुण्डली/छंद








  • कुंडली : ओलों की बरसात

    ओलों की बरसात से फसल हुई है नष्ट          देख फसल की दुर्दशा बहुत हुआ है कष्ट बहुत हुआ है कष्ट सोचता कृषक बिचारा , बिना कनक के भगवन कैसे होय गुजारा कुछ...

  • कुंडलियाँ

    कुंडलियाँ

    १ कठिनाई के सामने, झुके न जिनके माथ। जोड़े हैं उनको सदा, क़िस्मत ने भी हाथ।। क़िस्मत ने भी हाथ, बढ़ाकर दिया सहारा मंज़िल ने ख़ुद राह, दिखाकर उन्हें पुकारा खिले ख़ुशी के फूल, सरस बगिया...