Category : कुण्डली/छंद

  • कुंडलिया छन्द : लालू को जेल

    कुंडलिया छन्द : लालू को जेल

    चारा खाकर के चले, लालू भइया जेल रबड़ी भउजी सिसकतीं, कब तक होगी बेल कब तक होगी बेल,उधर तेजस्वी भइया पीकर ठर्रा आज,नाचते ता-ता थइया कह सुरेश मैंने भी माटी खाया यारा क्या माटी से ज्यादा...

  • कुंडली : हद कर दी आपने

    कुंडली : हद कर दी आपने

    बबुवा हारे अब तलक, ‘उन्तिस’ बार चुनाव चमचे फिर भी चहकते, जैसे ऊद बिलाव जैसे ऊद बिलाव, तनिक देखो बेशर्मी कहते ये चिल्लाय, ‘खतम मोदी की गर्मी’ कह सुरेश लतियाइ रहे हैं वोटर सारे फिर भी...

  • कुंडलियाँ छंद

    कुंडलियाँ छंद

    अपना भारत देश जो,लगे सुरक्षित आज। हर पल सेवारत् रहें,दृढ़ता से जांबाज। दृढ़ता से जांबाज,रहें जल-थल-अंबर में। तब जाकर सुख-चैन,प्राप्त करते हम घर में। कहता ‘कवि विकलांग’,यही मेरा है सपना। रहे सदा खुशहाल,देश में सैनिक अपना।।...

  • मुक्तहरा

    मुक्तहरा

    जिसे तुम देख रहे विकलांग उसे मत मान कभी कमजोर। करे यदि कोशिश ला सकता वह जीवन में कल नूतन भोर। रचे नित ही इतिहास यहाँ पर थाम चले कर जो श्रम डोर। सदा वह मंजिल प्राप्त...

  • बीजू के छक्के – पिज़्ज़ा

    बीजू के छक्के – पिज़्ज़ा

    डिब्बा है चौकोर पर, खुद है गोल-मटोल काट तिकोने प्यार से, उसको पिज़्ज़ा बोल उसको पिज़्ज़ा बोल, बेस है मोटा सूखा उस पर गीली पर्त, देख ललचाये भूखा “बीजू” यह है राजकुमार इटली का भाई गोरी...

  • सरसी छंद

    सरसी छंद

    1 – वाह वाह ही सब करते हैं ,कविता हुई फरार | फेसबुक ने दिया है सबको ,कैसा यह संसार || अपने मन की लिखते हैं सब , नहीं छंद का नाम| जाने कैसे बिक जाते...

  • “रथपद छंद”

    “रथपद छंद”

    छंद, विधान~[ नगण नगण सगण गुरु गुरु] ( 111 111 112 2 2 ) 11वर्ण,4 चरण, दो चरण समतुकांत सकल अवध सिय रामा जी सुखद मिलन अभि रामा जी। दसरथ ललन चलैया हैं रघुवर अवध बसैया...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    पानी भीगे बाढ़ में, छतरी बरसे धार कैसे तुझे जतन करूँ, रे जीवन जुझार रे जीवन जुझार, पाँव किस नाव बिठाऊँ जन जन माथे बोझ, रोज कस पाल बँधाऊँ ‘कह गौतम’ कविराय, मिला क्या कोई शानी...


  • कुंडलियां छंद

    कुंडलियां छंद

    माया का चक्कर अजब ,भटक रहा इंसान कोई लंदन जा बसा , कोई है जापान कोई है जापान , लौट कर देश न आता सब कुछ लगता दांव ,रकम मोटी तब पाता खेल यही बेमेल ,...