कुण्डली/छंद

ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

फर्जी डिग्री ले किया, काम बड़ा ही खास। पता हकीकत अब चली, हुआ जो पर्दाफाश। हुआ जो पर्दाफाश, ‘आप’ का मंत्री दागी। ऐसे भ्रष्टाचार, बताओ मिटता त्यागी? कह ‘पूतू’ कविराय, केजरी क्या है मर्जी? जनता करे सवाल, सभी क्या वादे फर्जी??

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करारी हास्य कुण्डलियाँ

दुनिया जबसे कर रही मोदी मोदी जाप। सभी विरोधी पार्टियों के लोटें दिल पे सांप। लोटें दिल पे सांप कांग्रेस हक्का बक्का। आउल हिट विकेट औ’ मोदी मारे छक्का। कह पुनीत कवि केजरी सटके खून के घूँट। आखिर तो आ ही गया नीचे पहाड़ के ऊँट। डॉगविजय हों, ‘कपि’ल हों, हों चाहे “खुर”शीद। टुकड़खोर ये […]

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कुछ कुंडलियाँ

दिन ने खोले नयन जब , बड़ा विकट था हाल , पवन, पुष्प, तरु, ताल, भू , सबके सब बेहाल | सबके सब बेहाल, कुपित कुछ लगते ज्यादा , ले आँखों अंगार, खड़े थे सूरज दादा | घोल रहा विष कौन, गरज कर जब वह बोले , लज्जित मन हैं मौन, नयन जब दिन ने […]

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ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

  लालू औ’ नीतीश कर, गठबंधन स्वीकार। लगता ऐसा चाहते, करे विकास बिहार। करे विकास बिहार, चले या दाँव चुनावी। साफ नहीं तस्वीर, जाल फैला मायावी। कह ‘पूतू’ कविराय, बड़े हैं नेता चालू। अब खेलेंगे खेल, मगर बस छुपकर लालू॥ पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’

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ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

कहता पीपल आम से, चुपके-चुपके बात। आज दिवस है कौन सा, जो है लगी जमात। जो है लगी जमात, शुरू है भाषणबाजी। झूम-झूमकर आम, बोलता देखा हाँ जी। कह ‘पूतू’ कविराय, नीर सा पैसा बहता। पर्यावरण दिवस मना, नहीं फिर कोई कहता॥

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ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

हमला जो छुपकर किए, सभी बड़े हैरान। मौत हुई है बीस की, घायल और जवान। घायल और जवान, उग्रवादी क्या चाहें। आखिर करें विकास, भला क्यों रोके राहेँ। कह ‘पूतू’ कविराय, हृदय में अटका जुमला। कहाँ मिलें हथियार, भयंकर कितना हमला॥

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ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

गरमी से बेहाल हैं, पशु-पंक्षी-इंसान। तड़प रहे दिन-रात अब, सूझे नहीं निदान। सूझे नहीं निदान, हाल लाइट के ऐसे। झलक दिखाने सिर्फ, रोज आती हो जैसे। कह ‘पूतू’ कविराय, मनो लादे बेशरमी। खींच रही जो खाल, मार निज कोडे गरमी॥

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ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

बारिश अबकी बार कम, होने का अनुमान। बेचारे इस सोच में, बैठे मरे किसान। बैठे मरे किसान, फसल कैसे बोएंगे। शीश धरा जो कर्ज, भला कैसे ढोएंगे। कह ‘पूतू’ कविराय, थमी हैं साँसें सबकी। और मरेगे लोग, अगर कम बारिश अबकी॥ पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’

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ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

मैगी वाला मामला, पकड़ चुका है तूल। मानव धन के सामने, भूला सभी वसूल। भूला सभी वसूल, नहीं चिंता बंदोँ की। जो भी करें प्रचार, कहें क्या उन अंधोँ की। कह ‘पूतू’ कविराय, लगाना मुँह में ताला। जहर परोसे रोज, सुनो जी मैगी वाला॥

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ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

मौका था यह आठवाँ, जब कर मन की बात। प्रकट किए गहरे तनिक, अबकी वो जज्बात। अबकी वो जज्बात, सफलता हासिल करना। मौसम कितना गर्म, ध्यान पशु-खग का रखना। कह ‘पूतू’ कविराय, बड़ाई खुद सुन चौंका। कोर कसर मत छोड़, मिला जो सुंदर मौका॥