क्षणिका

खिचड़ी

खिचड़ियां पक रही दिमागों में किसको करना  चित और किसको करना पट है बर्तन में पकी खिचड़ियां करती  तन मन को स्वस्थ मस्तिष्क में पकी खिचड़ियां तन और मन दोनों को दें बीमारियां

क्षणिका

सड़क

बहुत देर करदी तूने यहां आते आते अब कौन मिलेगा तुझे यहां तेरे इंतजार में सब तो शहरों को चले गए अपना गांव छोड़ कर सड़क तूने बहुत देर कर दी आते आते

क्षणिका

क्षणिकाएं

बीता वो वक्त जब… ऋषि दधीचि हनुमान सम सेवक …पूजे थे जाते! और आज, मशीनी वक्त है जिधर मानव _ जज़्बात साधने को अपना स्वार्थ कुचले हैं जाते।। अंजु गुप्ता ✍🏻 *************** युद्ध विभीषिका   बना मानव मानव का हंता युद्ध विभीषिका मानवता पर धब्बा अंजु गुप्ता

क्षणिका

अमर लेखनी

कितनों ने  किया है त्याग , कितनों ने किया बलिदान। कितने मर  कर  जीवित है, कितनों  का  मिटा  निशान।। लेखनी  के  द्वारा , लोग  बने  महान। कोई बना देव तुल्य, कोई बना भगवान।। – अशर्फी लाल मिश्र 

क्षणिका

दूसरों को कोसते

जागरूकता, प्रगतिशीलता, समानता, स्वतंत्रता रह जाते केवल नारे हैं अंधविश्वास, परंपराओं, समाज व धर्म से जो हारे हैं किनारे पर बैठे अपने ही भय से हारे दूसरों को कोसते बेचारे हैं।

क्षणिका

योजना

योजना परमात्मा के पास आपको देने के लिए, हमेशा कुछ-न-कुछ होता है, हर समस्या का हल, हर परछाई के लिए प्रकाश, हर दुख से निज़ात के लिए कोई निदान और हर आने वाले कल के लिए कोई-न-कोई योजना.

क्षणिका

प्यार

प्यार एक मधुर भावना है, प्यार में न लेने न देने की कामना है, मन में मुहब्बत वाला सबसे ज्यादा खूबसूरत तब लगता है, जब उसमें न कोई विकार न वासना है.

क्षणिका

क्षणिका

कितने अभिमन्यु भेंट चढ़ेंगे कितनी माँयें रूदन करेंगीं ।। कब तक रक्ततलाई होंगे कितने वंशज युद्ध करेंगे।। एक निर्णायक युद्ध के लिए हे कृष्ण …. आप कब अवतरित होंगे ।। — रजनी चतुर्वेदी (बिलगैयां)

क्षणिका

संध्या बेला: एक सुरीला नग़मा

संध्या की बेला है, या है सुरीला नग़मा, या कि लगा हुआ है सजीले रंगों का मजमा, सुनहरी-रुपहली, लाल-पीले रंगों की नशीली रंगत ने, बांध दिया है खूबसूरत-नशीला-अद्भुत समां. दिन का अंत भी इतना खूबसूरत होता है, जाना न था, चाहे जाना भी हो, माना न था, शयन कक्ष की खिड़की से नमूदार खूबसूरत नजारों […]