Category : क्षणिका

  • क्षणिका – तुम

    क्षणिका – तुम

    तुम घर आ गयी? कैसी हो तुम? कुछ खाना खाया था या नहीं? थकी भी होगी न? यही सारे सवाल करने के लिए मैं दिनभर तड़पता रहा हूँ ! * पंकज त्रिवेदी

  • सच कहूँ

    सच कहूँ

    {1}गरीब की टूटी थाली में झाँक कर देखना नेता जी कभी फुटपाथ पर रोटी माँगकर देखना {2} नेताओं को 5 साल में बस एक ही बार नजर आते!!! फुटपाथ पर रात गुजारने को मजबूर मुद्दे अक्सर...

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    ये मकाँ जर्जर जीर्ण शीर्ण अति संकीर्ण भुतहा महल झपटती बिल्लियाँ।।-1 जी जान ईमान इम्तहान सहारा होगा आँख तारा होगा पल गुजारा होगा।।-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

  • दिवाली

    दिवाली

    इस दिवाली जलाना तो मिट्टी के दिये जलाना शायद किसी गरीब की झोपड़ी में अंधेरा ना रहे — आकाश राठोड

  • क्षणिका : दुशासन

    क्षणिका : दुशासन

    देवी चरणों में, शीश झुकाएँ, करें माँ का श्रंगार, न जाने ऐसे कितने सफेदपोश, मन से अब भी हैं दुशासन, लिए अंतस् में कुत्सित विचार !! अंजु गुप्ता

  • त्रासदी है….

    त्रासदी है….

    त्रासदी है…. क्या छोटा शहर, क्या महानगर… विकृत मानसिकता के व्यक्ति हर जगह पाए जाते हैं । समझ नहीं आता कि स्कूल जाने वाले अबोध बच्चों को पढ़ाई के बारे में समझाएँ या जीवन में आने...

  • क्षणिका

    क्षणिका

    तुम फिर बहला दोगे हमे बातों से हम जानते हुए भी सच मान लेंगे खामोश रहकर बस देखेंगे तुम्हें झूठ को सच बताते हुए । कामनी गुप्ता*** जम्मू !

  • बेबस बागबां

    बेबस बागबां

    तजुर्बे से लवरेज, बेबस बागबां ! उपेक्षित,,, स्नेहिल रिश्तों द्वारा ! नि:शब्द हो, चाहें,,, जीवन से रिहाई !! अंजु गुप्ता

  • हिन्दी दिवस

    हिन्दी दिवस

    गम्भीरता का ओढ़ लबादा, आज फिर एक वर्ष बाद हिन्दी दिवस पर, फिर बैठा,,, अभिजात्य वर्ग । दे अँग्रेजी में भाषण… कर रहा है चिंतन,,, हिन्दी और इसकी दुर्दशा का ॥ अंजु गुप्ता

  • क्षणिका

    क्षणिका

    तृण सी चुभे… नव पीढ़ी को । असमर्थ और वो निर्बल काया । सपने संजो कर… जोड़ के पाई जिसने था कभी आशियां सजाया ! ! अंजु गुप्ता