क्षणिका

क्षणिकाएँ

1 आंसूओं ने भी सीख लिया है चुपचाप बहना, क्यों रुलाये और किसी को गम तो अकेले है सहना। 2 उदास रातों का कभी तो अंत होता काश वो सितारा हमारे संग होता। 3 पढ़ सके जो मुझ को आज तक न ऐसा चश्मा बना, मैं वो आँसू हूँ समंदर का जिसे कोई न ढूंढ […]

क्षणिका

फेसबुक और जन्मदिन

किसी का भी जन्मदिन हो, फेसबुक फूल बरसाता है, बहुमंजिला केक पर मोमबत्ती जलाता है, गिफ्ट पैक्स के दर्शन कराता है, जी हां, फेसबुक अपने सदस्यों का जन्मदिन मनाता है.

क्षणिका

सिलवटें

“चद्दर की सिलवटों को तो ठीक किया जा सकता है, जिंदगी की सिलवटों का क्या करें? सिलाई की सिलवटों को तो ठीक किया जा सकता है, रिश्तों की सिलवटों का क्या करें? ग़ैरों की सिलवटों को तो ठीक किया जा सकता है, अपनों की सिलवटों का क्या करें? दुश्मनी की सिलवटों को तो ठीक किया […]

क्षणिका

नकली बत्तीसी!

जोर-जोर से सबसे अधिक देर तक हंसने की रेस में उसे पहली बार किसी ने हराया, आयोजक का दिमाग चकराया, ‘यह कैसे हुआ भाई!” मुझे तो समझ में नहीं आया! इस बार नकली बत्तीसी ने अपना रंग दिखलाया.

क्षणिका

मैं माटी का दीप

  मैं माटी का दीप, स्नेह से सिक्त होकर, रुई की बाती का सहारा लेकर, जलूं निरंतर जग को रोशन करूं, आंधी-तूफान से नहीं डरूं, जब तक है जान, जग का तम हरूं, मिल जाए जो स्नेह तनिक फिर मुझे, खुद भी दिप-दिप हो, जग को जगमग करूं.

क्षणिका

पांच क्षणिकाएं

01- वे- राष्ट्र भाषा के सच्चे प्रचारक हैं इसीलिए अपने बच्चों को कान्वेंट से लेकर आ रहे हैं। 02- उनका प्रतिपल साया सा साथ रहा इसीलिए हिन्दी के प्रचार -प्रसार में कागजों तक हाथ रहा। 03- उन्होंने सत्यनिष्ठा दर्शायी है फ्रेम मे अपनी तस्वीर उनकी दीमकों ने खायी है। 04- उन्होंने कर्त्तव्य निष्ठा की ध्वजा […]

क्षणिका

हिंदी हैं हम!

१. हर तरफ हमारी हिन्दी धूम मचाकर छू रही है बुलंद आसमान दूसरी ओर देश का दुर्भाग्य देखें आज भी कई हिंदुस्तानी हैं हिन्दी भाषा से बिलकुल अनजान। २. बोलीवुड ने अपनी फ़िल्मों की बदौलत हिन्दी को विश्वस्तर तक पहुंचाने में दिया अपना अमूल्य योगदान हमने आधुनिकता की आड़ में अंग्रेजी का अंधानुकरण करते हमारी […]

क्षणिका

क्षणिकाएँ

क्षणिकाएँ १ . लीची और भूख सत्ताओं का निर्बल से सदा यही व्यवहार जैसे लीची भूखे को हिं करती है बीमार ।। २ . चमकी लीची बता रही भइया जीव जीभ का रेट भरे पेट को रसभरी ‘ चमकी ‘ खाली पेट ।। ३ . आदमी की चाल कुदरत भी चलने लगी लगता आदम चाल […]