क्षणिका

घेरा

घेरा तो आखिर घेरा है, हसरत का हो या बेरुखी का, वफा का हो या बेखुदी का, प्यार का हो या तिरस्कार का, काम या व्यापार का, पुष्पों का हो या कंटकों का, खुशियों का हो या गमों का, आशा का हो या निराशा का, या कि गरीबी-अमीरी की परिभाषा का. घेरा तो घेरा होता […]

क्षणिका

जिंदगी: चार काव्यमय पहलू

जिंदगी जिंदगी को सलीके से जीना है, तो मत रखो मन में मलाल, बजने दो आनंद के बाजों को, नाचो मिलाके सुर-से-सुर और ताल-से-ताल. जिंदगी सुख-दुःख का मेला है, मत समझो ये झमेला है, समय के पहिए हैं ये इसके चलते रहेंगे, जो न समझे वो रह जाता अकेला है. अनेक रंग दिखाती है जिंदगी, […]

क्षणिका

जिंदगी

जिंदगी एक छोटा-सा कमरा है जिसमें या सपने रह सकते हैं या बहाने जिनके कमरे में सपनों का निवास है वे भर सकते हैं ऊंची उड़ानें बहानों के निवास वाले क्या कर सकते हैं वे जानें और सिर्फ़ वे ही जानें! लक्ष्य न ओझल होने पाए सपनों को साकार करने को कदम मिलाकर चल अपनों […]

क्षणिका

समय

आदमी की रीढ़ और कुत्ते की पूँछ बताती है पता बुढ़ापे का। रीढ़ झुकती जाती है और पूँछ खुलती जाती है। होता जाता है ज्यों-ज्यों उमरदार आदमी टेढ़ा और कुत्ते की पूँछ सीधी। — डॉ. दीपक आचार्य

क्षणिका

दर्द की नई परिभाषा

दर्द की नई परिभाषा है, तुम क्या जानो दर्द की क्या परिभाषा है? दर्द सिर्फ प्यार में नहीं होता, प्यार में दर्द तो एक दिलासा है, मोबाइल चार्जिंग में लगा हो और 1 घंटे बाद पता चले कि लाइट बोर्ड का स्विच ही ऑन नहीं था, तब पता लगता है कि असली दर्द क्या होता […]

क्षणिका

दीपक

दीपक सबको समान रूप से रोशन करता है, स्नेह (तेल) की आखिरी बूंद तक अनवरत चलता है, तेज़ हवाओं से भी साहस से लड़ता है, निस्तेज होने से पहले अधिक तेज जलता है. सदियों तक जिंदा रहनेवाली बात लिख गए, रोज पढ़ता है जमाना वो इबारत लिख गए, शहर की बिजली में क्या लिख पाते […]

क्षणिका

घेरा

घेरा तो आखिर घेरा है, हसरत का या बेरुखी का, वफा का या बेखुदी का, प्यार का या तिरस्कार का, तकरार का या इंकार का, काम का या व्यापार का, आहट के इंतजार का, पुष्पों का या कंटकों का, खुशियों का या गमों का, कोशिश का या नाकामयाबी के रंज का, हार-जीत तो होनी ही […]

क्षणिका

संध्या-बेला

संध्या की बेला है या रंगों का मेला है नभ ने बनाई है रंगोली या खेल रहे हैं बादल होली बादल हैं मोहन लिए पिचकारी बदरिया है राधा लिए कटि में कमोरी गगन बना है वृंदावन, गोप-गोपियां प्यारे चंदा है मनभावन रसिया रास रचा रहे तारे