Category : क्षणिका

  • क्षणिका

    क्षणिका

    हर हथेलियाँ जख्मी है हाथ आसमान से ऊँचे मीनारों के आगे फैले हुए क्या करे ? अब गरीबों को दूसरों की रोटी छीनने का सलीका भी तो नहीं आता अमित कु.अम्बष्ट ” आमिली “

  • मानवता

    मानवता

    क्षणिका : मानवता दबंगों के आगे, सब नतमस्तक ! अपराधियों से, मानवता भयभीत ! जीत के आये… गिरगिट और गुंडे लोकतंत्र की… कैसी ये जीत ? ? ? अंजु गुप्ता



  • कोहरा

    कोहरा

    जमीं से आसमान पर चढ़कर कोहरे की फितरत भी आदमी सी हो गई कल जिस सूरज ने फलक तक था पहुँचाया आज उसी को आंखे दिखाता है अमित कु.अम्बष्ट ” आमिली “


  • क्षणिका : नारी

    क्षणिका : नारी

    पुरजोर से करे रुदन वो बन ठूँठ फैला रीती बाँहें कहे पुकार – बँद करो अत्याचार ! ताकि जन्मे… इस ठूँठ में नवजीवन नई उम्मीद ! अंजु गुप्ता

  • क्षणिका : मौन

    क्षणिका : मौन

    मौन बर्फ़ से सर्द, हो चुके हैं रिश्ते पिघलाए, सहलाए कौन शब्द हो चुके हैं अब बौने ” समझदार” रह जाएँ मौन ! ! अंजु गुप्ता

  • अमन

    अमन

    भरे हैं हर वतन के परमाणु वाले गुल्लक और रोज सरहद पर बिछ रहीं लाशें मुल्क में चमन के लिए क्या जहर बंद कारतूस ही मुनासिब है अब अमन के लिए ? अमित कु अम्बष्ट ”...

  • क्षणिका

    क्षणिका

    कभी रिश्तेदारी में कभी दोस्ती यारी में और तो और कभी मेहरबानी में …. दुःख क्या .. टुटा तब पहाड़ रुपये-पैसे की चपत लगी यार जब कंगाली में ..सविता