Category : क्षणिका

  • क्षणिकाएं: आपकी-हमारी

    क्षणिकाएं: आपकी-हमारी

    क्षणिका- 1 होली के हुड़दंग में घुले, उल्लास और उमंग। वैर-भाव की जलायें होली, हर आंगन बिखरे प्रेम-रंग। द्वेष जलायें, स्नेह लुटायें, बहे प्रेमरस-धारा, सौंधी मिट्टी की खुशबू में सजे नवरंग-पिटारा। बेरंग-गमगीन जिंदगी में आये हर्ष-उजियारा,...



  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    सब के सब देख रहे थे लगी हुई थी आग जलता हुआ रावण दर्शनार्थी अस्त ब्यस्त ट्रेन की डरावनी चिंघाड़ दौड़ती हुई उतावली रफ्तार धुँआँ उड़ा आँखों के सामने शायद ही कोई देख रहा था।।-1 जमीन...

  • बोलती ही नहीं !!!

    बोलती ही नहीं !!!

    ये ख़ामोशी सिर्फ बोलती ही नहीं लड़ती भी है और कई बार जंग भी हो जाती है बिना किसी गोली बारूद के और सब ख़त्म हो जाता है ख़ामोशी से !!!!  

  • जुगत

    जुगत

    ठिठुर मरे न “गरीब” सर्दी से … राजनीतिज्ञों ने जुगत लगाई, दूर करके अपनी “गरीबी” महँगाई की आग जलाई ।। अंजु गुप्ता




  • पुरवैया

    पुरवैया

    जब दरख्तों से अठखेलियां करती है पुरवैया काले घनघोर बादलों के सीने में चमकती है बिजुरिया पिया तुम याद आते हो बहुत जी को तड़पाते हो — सुनीता कत्याल