Category : क्षणिका

  • जाओ पहले आप सुधर लो

    जाओ पहले आप सुधर लो

    बेटा टाॅफी मत खा दाँत गल जाएंगे झड़ जाएंगे सड़ जाएंगे दर्द होगा कीड़ा लग जाएगा मुझे भी दुख होगा। बेटा तिलमिलाया बोला, अंकल आप ठीक कहते हो मुझे शिक्षा देते हो मगर भूल जाते हो...

  • राजनीति

    राजनीति

    कल के मौसम आज के मौसम में अन्तर है और कल भी होगा जब मांगने वाले की देने वाले की परिभाषा बदल जायेगी नीति और नियत भी यही चुनाव है या कहूं राजनीति। — शशांक मिश्र...

  • क्षणिकाएं: आपकी-हमारी

    क्षणिकाएं: आपकी-हमारी

    क्षणिका- 1 होली के हुड़दंग में घुले, उल्लास और उमंग। वैर-भाव की जलायें होली, हर आंगन बिखरे प्रेम-रंग। द्वेष जलायें, स्नेह लुटायें, बहे प्रेमरस-धारा, सौंधी मिट्टी की खुशबू में सजे नवरंग-पिटारा। बेरंग-गमगीन जिंदगी में आये हर्ष-उजियारा,...



  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    सब के सब देख रहे थे लगी हुई थी आग जलता हुआ रावण दर्शनार्थी अस्त ब्यस्त ट्रेन की डरावनी चिंघाड़ दौड़ती हुई उतावली रफ्तार धुँआँ उड़ा आँखों के सामने शायद ही कोई देख रहा था।।-1 जमीन...

  • बोलती ही नहीं !!!

    बोलती ही नहीं !!!

    ये ख़ामोशी सिर्फ बोलती ही नहीं लड़ती भी है और कई बार जंग भी हो जाती है बिना किसी गोली बारूद के और सब ख़त्म हो जाता है ख़ामोशी से !!!!  

  • जुगत

    जुगत

    ठिठुर मरे न “गरीब” सर्दी से … राजनीतिज्ञों ने जुगत लगाई, दूर करके अपनी “गरीबी” महँगाई की आग जलाई ।। अंजु गुप्ता