Category : क्षणिका

  • दिवाली

    दिवाली

    इस दिवाली जलाना तो मिट्टी के दिये जलाना शायद किसी गरीब की झोपड़ी में अंधेरा ना रहे — आकाश राठोड

  • क्षणिका : दुशासन

    क्षणिका : दुशासन

    देवी चरणों में, शीश झुकाएँ, करें माँ का श्रंगार, न जाने ऐसे कितने सफेदपोश, मन से अब भी हैं दुशासन, लिए अंतस् में कुत्सित विचार !! अंजु गुप्ता

  • त्रासदी है….

    त्रासदी है….

    त्रासदी है…. क्या छोटा शहर, क्या महानगर… विकृत मानसिकता के व्यक्ति हर जगह पाए जाते हैं । समझ नहीं आता कि स्कूल जाने वाले अबोध बच्चों को पढ़ाई के बारे में समझाएँ या जीवन में आने...

  • क्षणिका

    क्षणिका

    तुम फिर बहला दोगे हमे बातों से हम जानते हुए भी सच मान लेंगे खामोश रहकर बस देखेंगे तुम्हें झूठ को सच बताते हुए । कामनी गुप्ता*** जम्मू !

  • बेबस बागबां

    बेबस बागबां

    तजुर्बे से लवरेज, बेबस बागबां ! उपेक्षित,,, स्नेहिल रिश्तों द्वारा ! नि:शब्द हो, चाहें,,, जीवन से रिहाई !! अंजु गुप्ता

  • हिन्दी दिवस

    हिन्दी दिवस

    गम्भीरता का ओढ़ लबादा, आज फिर एक वर्ष बाद हिन्दी दिवस पर, फिर बैठा,,, अभिजात्य वर्ग । दे अँग्रेजी में भाषण… कर रहा है चिंतन,,, हिन्दी और इसकी दुर्दशा का ॥ अंजु गुप्ता

  • क्षणिका

    क्षणिका

    तृण सी चुभे… नव पीढ़ी को । असमर्थ और वो निर्बल काया । सपने संजो कर… जोड़ के पाई जिसने था कभी आशियां सजाया ! ! अंजु गुप्ता

  • दर्द की नई परिभाषा

    दर्द की नई परिभाषा

    दर्द की नई परिभाषा है, तुम क्या जानो दर्द की क्या परिभाषा है? दर्द सिर्फ प्यार में नहीं होता, प्यार में दर्द तो एक दिलासा है, मोबाइल चार्जिंग में लगा हो और 1 घंटे बाद पता...

  • चंद पंक्तियाँ

    चंद पंक्तियाँ

    हर शाम का इंतज़ार करती हो तुम इस कदर जैसे पंछी की उड़ान होती है घोंसले की तरफ़ तुम्हारी हर बात नासिका में गंध भर देती है लगता है कि तुमने पुरानी शराब चढ़ा रखी है...

  • पप्पू पास ना हो पाया

    पप्पू पास ना हो पाया

    मोदी लहर से बचने को गठबंधन था बनाया साइकिल पे सवार होकर सड़क भी पार न कर पाया इतना कर के भी कुछ ना हो पाया फिर भी मम्मी का पप्पू पास ना हो पाया