Category : क्षणिका

  • हंगामा

    हंगामा

    कल रात एक भूखी बकरी आई, पेड़ पर लिखी एक ग़ज़ल उसे भाई, पूरी-की-पूरी ग़ज़ल वह चबा गई, पूरे शहर में हंगामा मच गया, कल रात एक बकरी शेर को खा गई.

  • फेसबुक और जन्मदिन

    फेसबुक और जन्मदिन

    किसी का भी जन्मदिन हो, फेसबुक फूल बरसाता है, बहुमंजिला केक पर मोमबत्ती जलाता है, गिफ्ट पैक्स के दर्शन कराता है, जी हां, फेसबुक अपने सदस्यों का जन्मदिन मनाता है.


  • सिलवटें

    सिलवटें

    “चद्दर की सिलवटों को तो ठीक किया जा सकता है, जिंदगी की सिलवटों का क्या करें? सिलाई की सिलवटों को तो ठीक किया जा सकता है, रिश्तों की सिलवटों का क्या करें? ग़ैरों की सिलवटों को...

  • नकली बत्तीसी!

    नकली बत्तीसी!

    जोर-जोर से सबसे अधिक देर तक हंसने की रेस में उसे पहली बार किसी ने हराया, आयोजक का दिमाग चकराया, ‘यह कैसे हुआ भाई!” मुझे तो समझ में नहीं आया! इस बार नकली बत्तीसी ने अपना...

  • मैं माटी का दीप

    मैं माटी का दीप

      मैं माटी का दीप, स्नेह से सिक्त होकर, रुई की बाती का सहारा लेकर, जलूं निरंतर जग को रोशन करूं, आंधी-तूफान से नहीं डरूं, जब तक है जान, जग का तम हरूं, मिल जाए जो...

  • पांच क्षणिकाएं

    पांच क्षणिकाएं

    01- वे- राष्ट्र भाषा के सच्चे प्रचारक हैं इसीलिए अपने बच्चों को कान्वेंट से लेकर आ रहे हैं। 02- उनका प्रतिपल साया सा साथ रहा इसीलिए हिन्दी के प्रचार -प्रसार में कागजों तक हाथ रहा। 03-...

  • हिंदी हैं हम!

    हिंदी हैं हम!

    १. हर तरफ हमारी हिन्दी धूम मचाकर छू रही है बुलंद आसमान दूसरी ओर देश का दुर्भाग्य देखें आज भी कई हिंदुस्तानी हैं हिन्दी भाषा से बिलकुल अनजान। २. बोलीवुड ने अपनी फ़िल्मों की बदौलत हिन्दी...

  • क्षणिकाएँ

    क्षणिकाएँ

    क्षणिकाएँ १ . लीची और भूख सत्ताओं का निर्बल से सदा यही व्यवहार जैसे लीची भूखे को हिं करती है बीमार ।। २ . चमकी लीची बता रही भइया जीव जीभ का रेट भरे पेट को...

  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    क्रोध क्रोध जितना भी आप करेंगे श्रीमान इससे होगा खुद का नुकसान अतः भीतर के क्रोध को बाहर न आने दें उसे भीतर ही खत्म कर दो। आत्मीयता मन के भीतर यदि भरा हुआ हो छल...