Category : क्षणिका

  • मन का भूगोल !!!

    मन का भूगोल !!!

    जिंदगी के जोड़ घटाने में रिश्तों का गणित अक्सर जरूरत के वक़्त जाने क्यों शून्य हो जाता है और मन का भूगोल सब समझ कर भी कुछ नया खोजने लग जाता है।

  • इंतजार है

    इंतजार है

    आते हैं, छा जाते हैं, पर बरसते नहीं बादल राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर को  बारिश का इंतजार है. आये बादल, छाये बादल, जी भरकर बरसे थे बादल बाढ़ के बाद आर्थिक राजधानी बंबई को  पीने...

  • बेचारा

    बेचारा

    बेचारा आदमी, जब सिर के बाल नहीं आते तो ढूंढता है दवाई, जब आ जाएं तो ढूंढता है नाई, सफेद हो जाएं तो ढूंढता है डाई, …और जब काले रहते हैं तो ढूंढता है लुगाई, सच...


  • ऊँचे

    ऊँचे

    ऊँची ईमारतें ऊँचे लोग जमीन पर रह गये बस भूखे लोग चढावा सोने-चांदी का अष्ट मिठाई का भोग पेड़ियों पर बैठे रहते लाचार, कुष्ठ रोग

  • हंसी खूबसूरती का ख़ज़ाना है

    हंसी खूबसूरती का ख़ज़ाना है

    जब दिल हंसता हैतो पूरी दुनिया खिल उठती हैहंसी बस खूबसूरत होती हैबेइंतहा खूबसूरत होती हैहंसी का हर रंग चटख होता हैहंसी के हर रूप का एक अर्थ होता हैहंसीझांझर-सी झनकती हैपायल-सी खनकती हैसच्चा दोस्त हंसी...

  • -क्षणिकाएँ –

    -क्षणिकाएँ –

    1 – आत्मा का उत्थान तै करता है आवागमन के पथ को प्रकाशमान !! 2 – जीवन -मरण जन्म -जन्मांतर के कर्मों का है अलग -अलग संस्करण | 3 – जन्म -जन्मांतरों के कर्मों का बीजगणित...

  • राखी और पंचवटी प्रसंग

    राखी और पंचवटी प्रसंग

    1.राखी राखी के कच्चे धागों में, बंधा हुआ है इतना प्यार, कर्मवती की राखी पाकर, हमायूं को हुआ गर्व अपार. झटपट उसकी रक्षा हेतु, सेना ले तैयार हुआ, राखी न जाने जन्म के बंधन, राखी का...


  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    ये चित्र चमक रंग अंग नभ दर्शन दृश्य आकर्षण सोलह शृंगार है॥-1 ये धुन मल्हार ऋतुराज दमक साज खटके किवाड़ बसंत बहार है॥-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी