Category : क्षणिका

  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    01. मेरा है , मेरा है , सब मेरा है इसको निकालो उसको बसाओ धरा रहा सब धरा पै बंद हुई पलकें अनेकानेक कहानियाँ इति हुई लील जाती रश्मियाँ पत्तों पै बूँदें तब भी न क्षणभंगुर...

  • प्रेरणा

    प्रेरणा

    प्रेरणा लेना चाहूं तो प्रकृति का हर सृजन प्रस्तुत है, मुझे प्रेरणा देने को. लंबे-लंबे डग भरकर चलते हुए किसी लंबे व्यक्ति को तेज़ी से चलते देखकर प्रेरणा मिलती है लंबे डग भरकर चलने की, किसी...

  • क्षणिकाएँ…

    क्षणिकाएँ…

    1) अपनेपन की ऊँगली !! बदल जाने के लिए वक़्त होता है रिश्ते नहीं रूठें तो मनाओ मन की गिरह खोलो अपनेपन की ऊँगली पकड़कर पार कर लो हर मुश्किल को !! 2) उम्मीद की हथेली !! कुछ...




  • क्षणिका – तुम

    क्षणिका – तुम

    तुम घर आ गयी? कैसी हो तुम? कुछ खाना खाया था या नहीं? थकी भी होगी न? यही सारे सवाल करने के लिए मैं दिनभर तड़पता रहा हूँ ! * पंकज त्रिवेदी

  • सच कहूँ

    सच कहूँ

    {1}गरीब की टूटी थाली में झाँक कर देखना नेता जी कभी फुटपाथ पर रोटी माँगकर देखना {2} नेताओं को 5 साल में बस एक ही बार नजर आते!!! फुटपाथ पर रात गुजारने को मजबूर मुद्दे अक्सर...

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    ये मकाँ जर्जर जीर्ण शीर्ण अति संकीर्ण भुतहा महल झपटती बिल्लियाँ।।-1 जी जान ईमान इम्तहान सहारा होगा आँख तारा होगा पल गुजारा होगा।।-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

  • दिवाली

    दिवाली

    इस दिवाली जलाना तो मिट्टी के दिये जलाना शायद किसी गरीब की झोपड़ी में अंधेरा ना रहे — आकाश राठोड