Category : क्षणिका

  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    १-तेरा पता तुम्हें खत रोज लिखता हूँ तेरा पता मालूम नहीं तेरी खुश्बू से महकता हूँ रूबरू तुझसे मिला नहीं   २-बात बात नहीं होती तब भी बात होती है बात करने के लिए अब सामने...

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    क्षणिकायें

    १-इंतज़ार हम रुके रहे तेरे इंतज़ार में सदियाँ बीत गयी पता ही नहीं चला २-हुस्न हुस्न पर इतना भी न किया करो ऐतबार बिना खता किये बन जाओगे गुनाहगार 3-तुम” तुम्हें देखने से मुझे अब कौन...

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    क्षणिकायें

    १-दोस्ती धीरे धीरे गहरी होती है दोस्ती सीप के भीतर बरसों रहने के बाद ही एक बून्द बनती है मोती २-चेहरा एक चेहरा तेरा मुझे याद रहता है हमेशा सलोना जिसे मेरी स्मृति नहीं चाहती है...

  • क्षणिकाएं

    क्षणिकाएं

    1. रंजिश थी तुम को ख़ुद से निशाना था कोई और तुम ख़ुद ना ख़ुद के हो सके ज़माना तो ग़ैर था 2. नौ महीने जिसने जिस्म तुम्हारा ढोया था नौ मिनट उसको तुम कांधा ना दे...

  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    १. ठोकर लगी तो पत्थर औरत बन गया यहीं से सिलसिला शुरू हुआ औरत को ठोकर मैं रखने का फिर सभी ने मान लिया शापित है स्त्री २. यूँ ही नहीं पूजा जाता कोई ना जाने...



  • क्षणिकाएँ

    क्षणिकाएँ

    अभिलाषाएँ !! पतंग सी उड़ती चीरती मन क्षितिज गिरती पड़ती मरती न कभी नित नए रूप में धरना दिए बैठती रहे सदैव अपूर्ण पूर्णता को व्याकुल अतृप्त अभिलाषाएँ धूप !! जो थी व्याकुल झरोखे दे दस्तक...