Category : क्षणिका

  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    १. ठोकर लगी तो पत्थर औरत बन गया यहीं से सिलसिला शुरू हुआ औरत को ठोकर मैं रखने का फिर सभी ने मान लिया शापित है स्त्री २. यूँ ही नहीं पूजा जाता कोई ना जाने...



  • क्षणिकाएँ

    क्षणिकाएँ

    अभिलाषाएँ !! पतंग सी उड़ती चीरती मन क्षितिज गिरती पड़ती मरती न कभी नित नए रूप में धरना दिए बैठती रहे सदैव अपूर्ण पूर्णता को व्याकुल अतृप्त अभिलाषाएँ धूप !! जो थी व्याकुल झरोखे दे दस्तक...