Category : क्षणिका


  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    ये चित्र चमक रंग अंग नभ दर्शन दृश्य आकर्षण सोलह शृंगार है॥-1 ये धुन मल्हार ऋतुराज दमक साज खटके किवाड़ बसंत बहार है॥-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

  • बिन तुम्हारे

    बिन तुम्हारे

    अर्थ का अनर्थ है , बिन तुम्हारे जीवन ये व्यर्थ है। शब्द सिर्फ शब्द हैं। बिन तुम्हारे जिंदगी ये अव्यक्त है। गूँज है नाद की। बिन तुम्हारे गूँज भी सिर्फ दर्द है । दर्द ही दर्द...


  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    01. मेरा है , मेरा है , सब मेरा है इसको निकालो उसको बसाओ धरा रहा सब धरा पै बंद हुई पलकें अनेकानेक कहानियाँ इति हुई लील जाती रश्मियाँ पत्तों पै बूँदें तब भी न क्षणभंगुर...

  • प्रेरणा

    प्रेरणा

    प्रेरणा लेना चाहूं तो प्रकृति का हर सृजन प्रस्तुत है, मुझे प्रेरणा देने को. लंबे-लंबे डग भरकर चलते हुए किसी लंबे व्यक्ति को तेज़ी से चलते देखकर प्रेरणा मिलती है लंबे डग भरकर चलने की, किसी...

  • क्षणिकाएँ…

    क्षणिकाएँ…

    1) अपनेपन की ऊँगली !! बदल जाने के लिए वक़्त होता है रिश्ते नहीं रूठें तो मनाओ मन की गिरह खोलो अपनेपन की ऊँगली पकड़कर पार कर लो हर मुश्किल को !! 2) उम्मीद की हथेली !! कुछ...