गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेसबब दीपक जलाया धूप में, और सितारों को बुलाया धूप में। दिन उजाले छोड़कर सोता रहा, रात आई और जगाया धूप में। कैसा नकली ये ज़माना हो गया, कुछ कहा और कुछ दिखाया धूप में। इश्क़ भी झुलसा हुआ जैसा लगे, फिर किसी ने दिल लगाया धूप मे सिर्फ बेटा इसलिए नाराज़ है, बाप ने […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

आज गुलाब को गुलाब बेचते देखा मैंने, खुली सड़कों पर ख्वाब बेचते देखा मैंने। नन्हीं आँखों में लिए हुए छोटी सी हसरत, उसे जिंदगी की किताब बेचते देखा मैंने। पंखुड़ियों से नाजुक हाथों में थामे गुलाब, दो रोटी के लिए बेहिसाब बेचते देखा मैंने। गरीबी की मार ने मुरझाया दिया था चेहरा, कांपती जुबान से […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कभी दर्द लिखा कभी प्यार लिखा। खता भूलकर खत कई बार लिखा। न आया सनम तू न खत आये तेरे। तेरी ये खता आज ही यार लिखा।। मेरी आँखों से छलकतें हैं जो मोती। वो आँसू नही उनको तो हार लिखा।। मुझे याद आयी तेरी चलते चलते। तो कातिल तुझे मैने सरकार लिखा।। सजा क्या […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

झूठें सब फसाने सुनाने से क्या फायदा बेवज़ह किसी को सताने में क्या फायदा. बड़े बोल को सुनाने से भला क्या फायदा दूसरें मसलों में टांग अड़ाने में क्या फायदा. हिम्मत है तो जाओ तुम मदद सुझाब को बातें उसकी बढ़-चढ़ फैलाने में क्या फायदा. दो अधिकार भी बेटी को भी बराबर का सा वरना […]

गीतिका/ग़ज़ल

झील में खिलते कमल दल की कतारों की तरह

झील में खिलते कमल दल की कतारों की तरह तुम हसीं लगती हो बर्फीले पहाड़ों की तरह चांदनी आयेगी,खेलेगी कभी लहरों से राह हम देखते दरिया के किनारों की तरह मेरे जैसे यहां कितने ही है दीवाने और रात भर जागते रहते जो सितारों की तरह मेरे महबूब की लहराती घनेरी जुल्फें मेरे शानों पे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल -बेख़ुदी में आपको क्या क्या समझ बैठे थे हम

गुल ,सितारा ,चाँद का टुकड़ा समझ बैठे थे हम बेख़ुदी में आपको क्या क्या समझ बैठे थे हम ।। यहभी इक धोका ही था जो धूप में तुझको सराब। तिश्नगी के वास्ते दरिया समझ बैठे थे हम।। अब मुहब्बत से वहीं आबाद है वो गुलसिताँ । जिस ज़मीं को वक्त पर सहरा समझ बैठे थे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तेरी जफ़ाओं से मुझे कोई गिला नहीं चाहा मैंने जो भी वो अक्सर मिला नहीं मुश्किल है राह फिर भी पा ही लूँगा मैं मंज़िल कमर खमीदा है मेरी हौसला नहीं रस्ता मेरे घर का बहार भूल चुकी है मुद्दत से इस वीराने में कोई गुल खिला नहीं हर आँख नम सी है यहाँ हर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर कोई सिर्फ रौशनी से मिले। भूल कर भी न तीरगी से मिले। सादगी से उन्हें बड़ी उल्फत, जब मिले उनसे सादगी से मिले। उससे जब से हुई मेरी अनबन, फिरनहरगिज़ कभीकिसी सेमिले। आज लहजा अजीब था उसका, ये लगा एक अजनबी से मिले। बात अच्छी बुरी कहूँ हँस कर, ये हुनर मुझ को शायरी […]

गीतिका/ग़ज़ल

वफ़ा ने मेरे

वफ़ा ने मेरे ———————————————— ख़फा ख़फा से हैं सब अपने बेगाने मेरे यही इनआम की है मुझको अदा ने मेरे इश्क उसने भी किया है वो मजे लेते हैं वो तो बरबाद किया मुझको वफ़ा ने मेरे दिया रकीब को कुछ ऐसे तआऱुफ मेरा शहर में दो चार ही हैं ऐसे दिवाने मेरे ख़त उनके […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इश्क में तेरे कुछ ऐसे मर मिटा हूँ मैं तू ही तू है मुझमें अब कहाँ बचा हूँ मैं ऊगेंगे देख लेना कुछ दरख्त पानियों के तेरी गली में अश्क थोड़े बो चला हूँ मैं तमन्ना तुझसे मिलने की दिल में लिए हुए आग में तन्हाई की बरसों जला हूँ मैं दीवाने तेरे और भी […]