गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल “फूल हो गये अंगारों से”

कहना है ये दरबारों सेपेट नहीं भरता नारों से—सूरज-चन्दा में उजास हैकाम नहीं चलता तारों से—आम आदमी ऊब गया हैआज दोगले किरदारों से—दरिया पार नहीं होता हैटूटी-फूटी पतवारों से—कोरोना की बीमारी मेंरौनक गायब बाजारों से—ईँधन पर महँगाई क्यों हैलोग पूछते सरकारों से—जनसेवक मनमानी करतेवंचित जनता अधिकारों से—नहीं पिघलता दिल दुनिया कामजदूरों की मनुहारों से—क्या होती […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

कुछ भी हो

कैसी हो गजल जलालत कुछ भी हो दलों की सियासत हजामत कुछ भी हो । जानवरों से भी बदतर है ये सब लोग , मरघट में बैठकर अदावत कुछ भी हो । देख रहे आँखें मूँद सरहद के सब नजारे , तू-तू मै-मै में लगे है नजाकत कुछ भी हो । मत उड नेपाल-पाक मसनवी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22 दिल सलामत भी नहीं और ये टूटा भी नहीं । दर्द बढ़ता ही गया ज़ख़्म कहीं था भी नहीं ।। काश वो साथ किसी का तो निभाया होता । क्या भरोसा करें जो शख़्स किसी का भी नहीं ।। क़त्ल का कैसा है अंदाज़ ये क़ातिल जाने । कोई दहशत भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेचैनियों का दौर बढा कर चली गयी । महफ़िल में वो बहार जब आ कर चली गयी ।। उसकी मुहब्बतों का ये अंदाज़ था नया । अल्फ़ाज़ दर्दो ग़म के छुपाकर चली गयी।। उसको कहो न बेवफ़ा जो मुश्क़िलात में । कुछ दूर मेरा साथ निभाकर चली गयी ।। साक़ी भुला सका न उसे चाहकर […]

इतिहास गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल-घर के जैसा ठौर कहाँ है

करके देखा गौर, कहाँ है?तुझ सा कोई और कहाँ है? क्या फल की उम्मीद करें हम,इन आमों में बौर कहाँ है? हाथ मिलाना भूल गये सब,अब पहले सा दौर कहाँ है? ख़ुद को वो चाहे जो कह ले,लेकिन अब सिरमौर कहाँ है? जो माँ के हाथों मिलता था,रोटी का वो कौर कहाँ है? जग में […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

जब भी देखता हूँ आईने में अपना चेहरा, न जाने क्यूँ मुझे यह शख्स अनजान सा लगता है, जानता हूँ मैं की यह प्रतिरूप है मेरा, फिर भी क्यूँ मुझे मेहमान सा लगता है, मेरा ही बन कर सदा रहता है मेरे संग, फिर क्यूँ मुझे घर वीरान सा लगता है, सदा बसाया था इसे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुल्क भर  का  दुलारा  हुआ। जीत कर  खेल  हारा   हुआ। जीत  लाये  अदालत से जब, तब    हमारा   हमारा   हुआ। आमद ए यार जिस  दम हुई, खूबसूरत    नज़ारा     हुआ। क्या  हुआ  है पता  कीजिये, फूल क्यों  कर  शरारा हुआ। आप जब   से गये  छोड़कर, गर्दिशों   में   सितारा   हुआ। था बना  खिदमते खल्क को, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर क़दम पर  इश्क़ की  देती मुझे  दावत  भी थी। प्यार करने  का उसे पर  इक सबब सूरत   भी थी। अब ज़रा फुर्सत नहीं तो  किस तरह से हो निबाह, तब नहीं आया  मुझे  जब  ढेर सी  फुर्सत भी थी। मंज़िलों  की  थी  तलब  यूँ  साथ  हम  चलते रहे, हमको उससे हरक़दमपर यूँ बहुत ज़हमत […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ए खुशी तुझे ता – उम्र तलाशा है बहुत नहीं नसीब में तू पर तुझे चाहा है बहुत ============================== ये मिट्टी यूँ ही नहीं नम है इस वीराने की सालों पहले यहां शायद कोई रोया है बहुत ============================== चलूँ किस सिम्त कोई राह नज़र नहीं आती चिराग दिल का जलाओ कि अँधेरा है बहुत ============================== […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हाथ अपने उठा के बैठा हूं, रब से अर्जी लगा के बैठा हूं। नींद उनको कहीं न लग जाए, ख़्वाब सारे जगा के बैठा हूं। दर्द दिल का कहीं न पढले वो, इसलिए मुस्करा के बैठा हूं। आजमाना न तिश्नगी मेरी, मैं समुंदर सुखा के बैठा हूं। जितनी तूने कमाई जीवन भर, उतनी तो मैं […]