गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तुझे पा लिया है जग पा लिया है अब दिल में समाने लगी जिंदगी है कभी गर्दिशों की कहानी लगी थी मगर आज भाने लगी जिंदगी है समय कैसे जाता समझ मैं ना पाता अब समय को चुराने लगी जिंदगी है कभी ख्बाब में तू हमारे थी आती अब सपने सजाने लगी जिंदगी है तेरे […]

गीतिका/ग़ज़ल

नज्म

अजीब नादां हो तुम भी नादानियों की हद करते हो, बेवफाई तक का जिन्हें शऊर नहीं, उनसे वफा की उम्मीद करते हो. कैरम की गोटियां तो संभाली नहीं जातीं तुमसे, समय की कीलियों को साधने की जिद्द करते हो. कितनी खूबसूरती से मुझी को गैर कह दिया, अपनापन निभाने की बात शिद्दत से करते हो. […]

गीतिका/ग़ज़ल

नज्म

दिल की हालत क्या है, कैसे बताएं उलझन बड़ी है, बताई भी नहीं जाती, छिपाई भी नहीं जाती. दिल तो आईना है, खुद ही सब दिखा देता है, ये वो शै है अलम की जिसको, छुपम-छुपाई भी नहीं आती. ग़म के मारों से क्यों पूछते हो, तुम्हें ग़म क्या है, ग़मगीनों का आलम है यह, […]

गीतिका/ग़ज़ल

हरी-भरी वसुंधरा

हरी-भरी वसुंधरा ।। खिली-खिली वसुंधरा।। कुदरत ने सजाया इसे तब ही सजी वसुंधरा।। बसन्त जब भी आता है बनकर बाहर छाता है।। सरसों के फूल-फूल से धानी-धानी वसुंधरा।। अनेक रंग  पुष्पों से आँचल सजा धजा रहे। भंवर भी गुनगुना रहे झूमी-झूमी वसुंधरा।। सावन के जब झूले पड़ें बूंदे पडी बादल हंसे। धरती गगन तभी मिलें […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

किसी नाखुदा के न आगे झुकेंगे। खुदा के रहे हैं खुदा के रहेंगे। न कल हम दबे थे न अब हम दबेंगे। न कल हम डरे थे न अब हम डरेंगे। बड़ा काम करने का दिल में इरादा, नया एक इतिहास रच कर रहेंगे। ज़माने में जिनका है ईमान पक्का, हवादिस के आगे वही बस […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेशुमार हादसों से गुज़रा हूँ मैं! वक़्त इसलिए ही सहमा हूँ मैं! लहू लहू जिस्म है रूह के साथ, अहले जवानी झुक सा गया हूँ मैं! मुस्कुराहट ने छीन लिया चेहरा, ओढ़ कर सारे दर्द चल रहा हूँ मै! तंहाँ तंहाँ बयांबा तंहाँ ज़िंदगी से, जाने क्या क्या अब ढूंढता हूँ मैं! अहसास की आग […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

झूठी मुस्कुराहट चेहरे पर सजाए हुए हम लौट आए अश्कों को दबाए हुए ============================== तेरी निगाह-ए-करम की उम्मीद दिल में लिए कब तक बैठते तेरे दर पे सर झुकाए हुए ============================== न जाने कैसी आग तू लगाता है ए इश्क़ न जी सकें न मर सकें तेरे जलाए हुए ============================== गले जब उनसे मिलो तो […]

गीतिका/ग़ज़ल

प्यार मेरा है

खुशबुओं की बस्ती में रहता प्यार मेरा है आज प्यारे प्यारे सपनो ने आकर के मुझको घेरा है उनकी सूरत का आँखों में हर पल हुआ यूँ बसेरा है अब काली काली रातो में मुझको दीखता नहीं अँधेरा है जब जब देखा हमने दिल को ,ये लगता नहीं मेरा है प्यार पाया जब से उनका […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेशर्म थी वो तुम तो शर्म कर ही सकते थे दामन में उसके इज्जतें भर भी सकते थे। माना के बेबसी में वो बदन बेचती रही समझौता हालातों से तुम कर भी सकते थे। लाज शर्म की उसने तुम्हें पतवार सौंप दी रहमो करम की उसपे नजर कर भी सकते थे। रिश्ता बनाके उसका तुम […]

गीतिका/ग़ज़ल

देश के ग़द्दारो

देश के ग़द्दारो अब तुमसे बग़ावत ज़रूरी है, वतन की ख़ातिर मिट जाने को चाहत ज़रूरी है ।  गुनाह किया है तूने जो तिरंगे के पास जाके अब, तुझे सबक़ सिखाने को अब थोड़ी हिमाक़त ज़रूरी है । क्यों तू चल रहा भेड़ों में छिप ये भेड़िए सी चाल, तेरे होश उड़ाने को अब थोड़ी […]