गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : ख्वाब

  ख्बाब था मेहनत के बल पर , हम बदल डालेंगे किस्मत ख्बाब केवल ख्बाब बनकर, अब हमारे रह गए हैं कामचोरी , धूर्तता, चमचागिरी का अब चलन है बेअरथ से लगने लगे है ,युग पुरुष जो कह गए हैं दूसरो का किस तरह नुकसान हो सब सोचते है त्याग , करुना, प्रेम , क्यों […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : इश्क क्या है?

ग़ज़ल : इश्क क्या है? हर सुबह रंगीन अपनी शाम हर मदहोश है वक़्त की रंगीनियों का चल रहा है सिलसिला चार पल की जिंदगी में , मिल गयी सदियों की दौलत जब मिल गयी नजरें हमारी ,दिल से दिल अपना मिला नाज अपनी जिंदगी पर ,क्यों न हो हमको भला कई मुद्द्दतों के बाद […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

प्रभु का स्पर्श अहिल्या को हुआ शाप मुक्तक शापित तन हुआ शाप तापित काया आभा युक्त हुई भरी थी आँखे कंठ अवरुद्ध हुआ मस्तक नत वाणी निशब्द हुई प्राणों में ख़ुशी का अतिरेक हुआ कहा राम ने उठो अब दुःख काहे का समय का खेल अपना ही पराया हुआ कहीं अहिल्या कहीं सीता छली गयी […]

गीतिका/ग़ज़ल

मोहब्बत इक खजाना है!

  के अक्सर सोचते है हम, मोहब्बत इक खजाना है. खजाना जब था मोहब्बत, जमाना वो पुराना है.   बदल रही है चाहतें, बदल रही है मोहब्बत. आज हर कोई दुनिया में, खुद में ही सयाना है.   जिसे गाते थे याद करके, सुकून मिलता था हमें. सीने पर लोबान रखकर भुलाया वो तराना है. […]

गीतिका/ग़ज़ल

उन्वान तुम हो

तुम आ बसों जो मुझमे तो साँसे चल पड़े फिर से फ़क़त एक जिस्म हम मैं, मेरी जान तुम हो नहीं मालूम मेरा मज़हब मेरी जात क्या है बस इतना याद है मुझे कि, मेरी अज़ान तुम हो मैं इक खद हूँ गुमनाम हा शायद यहाँ मगर जानता हूँ मेरे खद की पहचान तुम हो […]

गीतिका/ग़ज़ल

जिंदगी

नहीं जो जिंदगी में साज़-ए-तरब तो सैलाब-ए-गम भी मंजूर है हमें , नहीं जो छाया नसीब किसी शजर की तो धूप में तपते पांव भी मंजूर है हमें , नहीं जो मय्यसर साथ तेरा बख्त-ए-रसा तो बज़म-ए-ख्याल में साथ मंजूर है हमें , नहीं कबूल दयार-ए-गैर का मोती भी अपनी ज़मीं का कंकर भी मंजूर […]

गीतिका/ग़ज़ल

सबक क्या क्या सिखाता है

किसको आज फुर्सत है किसी की बात सुनने की अपने ख्बाबों और ख़यालों में सभी मशगूल दिखतें हैं जीबन का सफ़र यारों ,सबक क्या क्या सिखाता है मुश्किल में बहुत मुश्किल से अपने दोस्त दिखतें हैं क्यों सच्ची और दिल की बात ख़बरों में नहीं दिखती नहीं लेना हक़ीक़त से क्यों मन से आज लिखतें […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

जाम भरा था जिंदगी का मगर हमें पीना नहीं आया , सांसें तो लेते रहे हम मगर हमें जीना नहीं आया , ताउम्र रहे लब मेरे कुछ इस कदर सिले हुए कि , लब तो हिले मगर, दर्द लफ्जों में बयां करना नहीं आया , कई साज़ कई तराने गाये जिंदगी ने हर राह हर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल (याराना)

ग़ज़ल(याराना) कभी गर्दिशो से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ. इस आस में बीती उम्र कोई हमे अपना कहे अब आज के इस दौर में ये दिल भी बेगाना हुआ जिस रोज से देखा उन्हें मिलने लगी मेरी नजर आखो से माय पीने लगे मानो की […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल – अरविन्द कुमार साहू

बदलते हालात में हम घर से गाफिल हो गये गाँव की मासूमियत में शहर शामिल हो गये आधुनिकता ने बदल दी गाँव की आबो – हवा नीम , पीपल , नदी , पनघट सभी फाजिल हो गये गाँव की चौपाल के जो पंच परमेश्वर रहे सीख कर परपंच वो संसद के काबिल हो गये गाँव […]