गीतिका/ग़ज़ल

लब पे तबस्सुम…..

  लब पे तबस्सुम रुख़ पे मासूमियत पास तेरे है वो खुशउस्लूबी वाली अच्छी नीयत पास तेरे है मैं तेरे ख्वाबों ख्याल का हमराज हमदर्द बन गया हूँ मेरे खातिर इतनी ज़्यादा अहम्मीयत पास तेरे है मैं संग तेरे साये सा रहता हूँ तू मेरी परछाई सी है मुझमे जो उमंग जगा दे ऐसी सुहबत […]

गीतिका/ग़ज़ल

अब तुमसे मुलाकात…..

  अब तुमसे मुलाकात होगी नही कभी अब तुमसे मेरी बात होगी नही कभी आबे रवाँ सा गुजर जाउँगा  मैं चुपचाप पहले सी वो  दावते जज़्बात होगी नहीं कभी मेरे अक्स को ख्वाब मे रखना संभाल के तेरे ख्यालों से मेरी निजात होगी नहीं कभी तेरा नूर ए रुख़ माहे ताबाँ सा लगता रहा मुझे […]

गीतिका/ग़ज़ल

सपनों में…..

  सपनों में अख़बार के गमगीन पन्ने फड़फड़ाते रहे ख्वाब में रक्त से सने वो मरहूम बच्चे आते रहे सज़ा ए मौत भी कम है उन सभी दरिंदों के लिए सख़्त दीवारों में एक एक कर हम उन्हें चुनवाते रहे अंधेरे में चिता की उँची उँची लपटें दिखाई देती रहीं बदला ले के रहेंगे उनसे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल (ऐतवार)

बोलेंगे जो भी हमसे बो ,हम ऐतवार कर लेगें जो कुछ भी उनको प्यारा है ,हम उनसे प्यार कर लेगें बो मेरे पास आयेंगे ये सुनकर के ही सपनो में क़यामत से क़यामत तक हम इंतजार कर लेगें मेरे जो भी सपने है और सपनों में जो सूरत है उसे दिल में हम सज़ा करके […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल- *****सौ बार लिखें*****

फूल लिखें या खार लिखें? बोलो क्या इस बार लिखें? तुम बिन जीना मुश्किल है, क्या खुद को लाचार लिखें? जीत तुम्हारी चाहें तो, पर क्या अपनी हार लिखें? गम में भी जो साथ न दे, उसको क्यों परिवार लिखें? नाव डुबोना चाहे वो, हम उसको पतवार लिखें? जब हर खिड़की बन्द हुई, क्यों न […]

गीतिका/ग़ज़ल

दिल तोड़ने के…..

  दिल तोड़ने के आजकल कई बहाने होते हैं मोहब्बत करने वाले आजकल सयाने होते हैं तोहफे में जख्मे जिगर देना अदा ए हुश्न है दिले बेकरार लिए हम जैसे दीवाने होते हैं ख्वाबों ख्याल में साये सा तुम्हें रख लिया हूँ अनलिखे से भी इस जहाँ में अफ़साने होते हैं निसारे यार तक मुहब्बत […]

गीतिका/ग़ज़ल

उन्हें जितना……

  उन्हें जितना याद रखने की कोशिश करने लगे हैं वो हमें उतना ही भूलाने की साजिश करने लगे हैं वो जबसे परदे की ओट में छुप छुपकर रहने लगे हैं हम तबसे उन्हें रूबरू देखने की ख्वाहिश करने लगे हैं उनकी निगाहे रहम में आश्नाई की एक चिंगारी दिखी हैं हम उनके सामने अपने […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल : जिंदगी जिंदगी

  तुझे पा लिया है जग पा लिया है अब दिल में समाने लगी जिंदगी है कभी गर्दिशों की कहानी लगी थी मगर आज भाने लगी जिंदगी है समय कैसे जाता समझ मैं ना पाता अब समय को चुराने लगी जिंदगी है कभी ख्बाब में तू हमारे थी आती अब सपने सजाने लगी जिंदगी है […]

गीतिका/ग़ज़ल

वो जब भी ….

  वो जब भी मुझसे मिलता है दीवाने की तरह उसमें फ़ना होने की चाह है परवाने की तरह उसे नजर अंदाज करूँ भी तो किस तरह करूँ मैं नज़र बंद हूँ उसकी आँखें हैं आईने की तरह उसके लिए मेरी रुसवाई भी हो जाये तो गम नहीं इस जहाँ में मिला है मुझे वह […]

गीतिका/ग़ज़ल

वक़्त ऐसे ही अपना ना जाया करो

वक़्त ऐसे ही अपना ना जाया करो दूर रह कर हमेशा हुए फासले ,चाहें रिश्तें कितने क़रीबी क्यों ना हों कर लिए बहुत काम लेन देन के ,विन मतलब कभी तो जाया करो पद पैसे की इच्छा बुरी तो नहीं मार डालो जमीर कहाँ ये सही जैसा देखेंगे बच्चे वही सीखेंगें ,पैर अपने माँ बाप […]