गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जब कोई अपना नहीं  ज़माने में। क्या  रक्खा   है   दिल  लगाने में.. रिश्ते  बनते  हैं बिगड़   जाते   हैं। ऐसा होता   है   क्यूं  ज़माने  में।। बातें नज़रों  से किया  करते   हैं। पर   डरते  हैं   वो    जताने   में।। अब   न  किसी  से  दिल लगायेंगे। हैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

इक घडी भी जियो इक सदी की तरह

इक घडी भी जियो इक सदी की तरह जिंदगी को जियो जिंदगी की तरह रास्ते खुदबखुद ही निकल आयेंगे जब बहो तो बहो इक नदी की तरह क्यों परेशान होते हो कल के लिए जब खिलो तो खिलो इक कली की तरह दूसरों के लिए भी उजाला बनो जब जलो तो जलो रोशनी की तरह […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हसरत मैं  माहताब की  रखता भी कहाँ तक, बे पंख -औ- परवाज़ के उड़ता भी कहाँ तक।   था  चश्मे – बेवफा को कोई  और ही मनसूब, मैं  उसके इत्मिनान को सजता भी कहाँ तक।   ज़िन्दान के पिंजर में था दिल,  सब्र कर गया, पागल खुशी से हो के उछलता भी कहाँ तक।   […]

गीतिका/ग़ज़ल

प्यार मुझको भावना तक ले गया

प्यार मुझको भावना तक ले गया कामना को वन्दना तक ले गया रूप आॅखौं मे किसी का यॅू बसा अश्रु को आराधना तक ले गया दर्द से रिश्ता कभी टूटा नहीं पीर को संवेदना तक ले गया हारना मैने कभी सीखा नहीें जीत को संभावना तक ले गया मैं न साधक हॅू न कोई सन्त […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

फूल बागों में खिले ये सबके मन भाते भी हैं। मंदिरों के नाम तोड़े रोज ये जाते भी हैं। चाहे माला में गुंथे या केश की शोभा बने टूट कर फिर डाल से ये फूल मुरझाते भी हैं। इन का हर रूप-रंग और सुरभि भी पहचान है डालियों पर खिल के ये भौरों को ललचाते […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जिंदगी जब से सधी होने लगी जाने क्यूँ उनकी कमी होने लगी डूब कर हमने जिया हर काम को काम से ही अब अली होने लगी हारना सीखा नहीं हमने यदा दुश्मनो में खलबली होने लगी नेक दिल की बात करते है चतुर हर कहे अक से बदी होने लगी चाँद पूनम का खिला जब […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका : चाँद आया था…..

चाँद आया था मेरे साथ-साथ बाग में विस्मित हो जा छुपा रंगों की फाग में ॥ उछलता रहा रात भर वो वल्लरियों में थका हारा जा गिरा झरनों के झाग में ॥ उड़तीं रहीं तितलियाँ पराग की प्यास में झूमती रहीं वो दर-बदर प्रेम के राग में ॥ नाचती रही चाँदनी बिन थके हुए बाग […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : दर्दे दिल

जाना जिनको कल अपना, वे आज हुए पराये हैं दुनिया भर के सारे गम आज मेरे पास आए हैं ना पीने का है आज मौसम , ना काली सी घटाए हैं आज फिर से नैनो में क्यों अश्क बहके आए हैं रोशनी से आशियाना यारो अक्सर जलता है अँधेरे मेरे मन को आज बहुत ज्यादा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : मुसीबत यार अच्छी है

मुसीबत यार अच्छी है पता तो यार चलता है कैसे कौन कब कितना, रंग अपना बदलता है किसकी कुर्बानी को किसने याद रक्खा है दुनिया में जलता तेल और बाती है कहते दीपक जलता है मुहब्बत को बयाँ करना किसके यार बश में है उसकी यादों का दिया अपने दिल में यार जलता है बैसे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अजीब शोर हैं एहसास के मिरे दिल में, ग़ुबार दिल का ये आँखों से निकाल देते हैं। ज़हर पियेगा भला कौन इन हवाओं का, मिज़ाजे शिव सा साँसों में खुद की ढाल देते हैं। अगर यक़ीन को हो खौफ बेवफ़ाई का, तो इस ख़याल पे मिटटी ही डाल देते हैं । ये दर्दो ग़म भी […]