गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : ****मेघा रे मेघा**********

उमड़ते घुमड़ते झूमते चले आओ रे मेघ उष्णता धरा की आकर बुझा जाओ रे मेघ प्यासी है धरा, बूँद बूँद जल को तरस रही कोख हो हरी धरा की, जम के बरसो रे मेघ कारे कारे बदरा दे रहे है बूँदों का प्रलोभन कण कण धरा का शीतल कर जाओ रे मेघ बरसो गगन से […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका….

उससे ही जहाँ गुलजार हैवह इतना बड़ा फ़नकार हैकण कण में दिखे उसका हुनरपल पल वक्त की रफ़्तार हैहै रमजान की पाकीज़गीढल जाओ अरुण, इफ़्तार है मंजिल तो बहारों में रही गुल का आज इन्तेजार है धरती की तपन से ना डरो सागर अब्र का आधार है सब जाने निशा रहती नहीं क्यूँ संजीदगी हर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गुनाह

कि मेरी आरजूएं जब से गुनाह हुई है ये आँखे आंसुओं की ही पनाह हुई है दर्द मेरे अब कैसे सुनायेंगे अफसाना अपना अब तो बेअसर मेरे हर ज़ख्म की आह हुई है कदम अब उठते ही नही ज़मीं में गड़े जाते है जुदा जब से तुमसे, मेरी राह हुई है कुछ और न भाया […]

गीतिका/ग़ज़ल

छुपा है राज ईशा में

घिरे है तन्हाई में हम, बचाने तुम चली आओ। सोती यादों को जगानें तुम चली आओ।। घिरे है तन्हाई में…..—–तुम चली आओ उदासी हर घड़ी रहती, तड़पती रूह मेंरी है- वो सरगम पायल की सुनानें तुम चली आओ। घिरे है तन्हाई में………तुम चली आओ समन्दर है यहां कितने, मगर नाकाम सारे हैं- तबस्सुम की बूंद […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : यूँ न मुझसे रूठ जाओ 

यूँ  न मुझसे रूठ  जाओ, मेरी जाँ निकल न जाये तेरे इश्क का जखीरा, मेरा दिल पिघल न जाये.   मेरी नज्म में गड़े है, तेरे प्यार के कसीदे मै जुबाँ पे कैसे लाऊं, कहीं राज खुल न जाये   मेरी खिड़की से निकलता, मेरा चाँद सबसे प्यारा न झुकाओ तुम निगाहे, कहीं रात ढल न जाये. […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : पा गए मंजिल मुसाफ़िर…

पा गए मंजिल मुसाफ़िर पर ये कोशिश व्यर्थ है वक्त ने आकर कहा ये जिंदगी की शर्त है आदमी में हैं कई कमियाँ खुदा कैसे कहें? इतनी सच्ची बात पर भी क्या तुम्हारा तर्क है मौत से मिलवा भी देगी पर अभी संघर्ष कर खो गया हो हम-सफ़र तो क्या सफ़र का अर्थ है बीच में […]

गीतिका/ग़ज़ल

क्यों हर कोई परेशां है

क्यों हर कोई परेशां है दिल के पास है लेकिन निगाहों से जो ओझल है ख्बाबों में अक्सर वह हमारे पास आती है अपनों संग समय गुजरे इससे बेहतर क्या होगा कोई तन्हा रहना नहीं चाहें मजबूरी बनाती है किसी के हाल पर यारों,कौन कब आसूँ बहाता है बिना मेहनत के मंजिल कब किसके हाथ […]

गीतिका/ग़ज़ल

……मुलाकात बाकी रह गयी।

है यहां बरसात फिर भी प्यास बाकी रह गयी। देख ली दुनियां सारी, तलाश बाकी रह गयी।। कुछ वफा मेरी थी उनपे, कुछ वफा उनकी थी मुझपे वायदा जिस दिन किये थे, बात बाकी रह गयी।। हर घड़ी हम साथ रहते, डरते जुदाई से रहे फिर भी लगता है मुझे, मुलाकात बाकी रह गयी। एक […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

पा गये मंजिल मुसाफिर पर ये कोशिश व्यर्थ है वक्त ने आकर कहा ये जिन्दगी की शर्त है आदमी में हैं कई कमियां खुदा कैसे कहें इतनी सच्ची बात पर भी क्या तुम्हारा तर्क है मौत से मिलवा भी देगी पर अभी संघर्ष कर खो गया हो हम-सफर तो क्या सफर का अर्थ है बीच […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : बजती नहीं कोई झंकार जाते जाते

बजती नहीं कोई झंकार जाते जातेटूटते हैं दिल के अब तार जाते जातेवक़्त ए रुखसती हो चली अब तो यूँ बस हो जाता तेरा दीदार जाते जातेपिंजरे से पंछी पल भर में उड़ने को तैयारटूटती हैं साँसे होता न इंतज़ार जाते जातेसज़ जाती हिना गर महबूब के नाम की शमा पा लेती परवाने का प्यार जाते […]