गीत/नवगीत

गीत

सासू के घर जाकर तेरा प्यार ना भूला माँ। बापू की गोदी का वो दीदार ना भूला माँ। बचपन की इक-इक याद अब भी बहुत तड़पाती, बीते हुए लम्हों की इक रूत जाने क्या गाती। भाइयों और भाभियों का सत्कार ना भूला माँ, सासू के घर जाकर तेरा प्यार ना भूला माँ। मुँह से इक […]

गीत/नवगीत

मंज़र हैं यहां तबाही के

मंज़र हैं यहां तबाही के। फंसी हुई दुनिया कैसे अपने ही पांसों में एक वायरस टहल रहा आदमी की सांसों में कितने खौफ़नाक मंज़र हैं यहां तबाही के। हर ओर जहां सन्नाटा है हर रोज फासले बढ़ते हैं हर रोज मौतें बढ़ रहीं हैं हर ओर दुख के काफिले है कैसी महामारी चली पांव थम […]

गीत/नवगीत

धरती पर न रहे अंधेरा

बाहर दीप जलाने से पहले, अंतर्मन में इक दीप जला लें। नेह सुधा-जल से अभिसिंचित कर, बंजर मन में रस, प्रीति उगा लें। अविवेक अंधेरा को अब त्यागें। जोड़ें जीवन के बिखरे धागे। सुख-शांति है आधार विकास का, तरु-तटिनी तट मत काट अभागे। हृदयांगन की हम करें सफाई, सत्कर्मों को मनमीत बना ले।। सब अपने […]

गीत/नवगीत

गीत- मन-तिमिर को दूर भगाएं

आओ मिल के दीप जलाएं मन-तिमिर को दूर भगाएं। प्रेम-प्रीति की ज्योति से धरणी का कण-कण महकाएं। पर्व दिवाली का आया खुशियों का सागर लहराया। उल्लासित हो पात-पात धरती-अंबर सब महकाया। जाति-धर्म की तोड़े भीत सबको अपना मीत बनाएं। प्रेम-प्रीति की ज्योति से धरणी का कण-कण महकाएं। देखो दीपों की अवली को चमक रहीं हैं […]

गीत/नवगीत

गीत – नीर प्रीति का बरसा दो

गीत गाते गुनगुनाते वेदना को तुम को सुला दो। दीन-अकिंचन के जीवन में नीर प्रीति का बरसा दो। झोंपड़ी में बैठा एक तरस रहा दाने-दाने को दूजा बैठ महल के अंदर ऊब गया उस खाने कोे। सब उसकी ही लीला है उस लीला में जीवन भर दो दीन-अकिंचन के जीवन में नीर प्रीति का बरसा […]

गीत/नवगीत

प्रकृति हमें सिखाती है।

परिवर्तन के साथ खुद को ढालना, जीवन में ना कभी हार मानना, शांति, संघर्ष,उम्मीद, उदारता, गरिमा का पाठ पढ़ाती है, जीवन के प्रारंभ से अंत तक, प्रकृति हमें सिखाती है।   आए तूफान तो पेड़ झुक जाते, जो ना झुकते हैं वो उखड़ जाते , वो अल्प वक़्त गुजरने के बाद, नई सुबह फिर आती […]

गीत/नवगीत

नारी जीवन (रिश्तों का ताना बाना )

नारी जीवन होता शायद कुछ रिश्तों का ताना- बाना इसके इतर पुरुष-नारी के सम्बन्धों को कब जग माना त्याग,धरम, अनुशासन, लज्जा बचपन से हर कोई सिखाता कुछ अपनो की खुशियों खातिर नारी का बचपन मुरझाता समझ न पाता फिर भी कोई उस के मन का दुखद फ़साना इसके इतर पुरुष नारी के सम्बन्धों को कब […]

गीत/नवगीत

नारी

जीवन की जननी है कुदरत का अभिमान है कहलाए नारी वो ईश्वर भी करता उसका सम्मान है, मां बनकर तुम्हें बुरी नज़रों से बचाती कोई भी दुख तुम्हारा देख नहीं पाती तुम्हारे में ही बस्ती हरदम उसकी जान है, बहन बनकर मांगती तुम्हारे लिए दुआएं सुनती तुम्हें और अपने सर लेती तुम्हारी बलाएं सह नहीं […]

गीत/नवगीत

गीत

इसमें उसका ही सब है दोष नौ दिन चढ़े अढ़ाई कोस, बेमन से जब आगे बढ़ता मंजिल का क्या इसमें दोष? मंजिल कहीं है,ध्यान कहीं है लगता केवल विश्राम सही है, मंजिल मिलेगी कब और कैसे? बोलो इसमें किसका है दोष? आगे बढ़ो मन खूब लगाकर पहुँचोगे तब ही मंजिल पर, भरो स्वयं के मन […]

गीत/नवगीत

गीत – माँ तुझको मैं सीस झुकाता हूँ

तेरी फूलों जैसी गोदी में। तेरी ठंडी मीठी लोरी में। श्रद्धा वाले फूल चढ़ाता हूँ। माँ तुझ को मैं सीस झुकाता हूँ। बचपन को तड़क सवेरे दिए। सुख ही सुख चार चुफेरे दिए। मैं तुझ से बलिहारे जाता हूँ माँ तुझ को मैं सीस झुकाता हूँ। उंगली पकड़ कर चलना सीखाया। प्रथम जीवन का पाठ् […]