गीत/नवगीत

भाग दौड़ है, बहुत हो चुकी

भाग दौड़ है, बहुत हो चुकी, आओ बैठें बाते कर लें। मन की कहें, मन की सुनें, मन से मन की चिंता हर लें।। जब से हम हैं, मिले थे पथ में। क्षण ना बैठे मन के रथ में। साथ रहे पर मन न बसे हम, भटके बहुत हैं जीवन जगत में। इक-दूजे के दिल […]

गीत/नवगीत

मरता देखा है बसन्त!!

दुःखो का है नहीं अन्त! नहीं जानता मैं बसन्त!! बचपन कैसा सिसक रहा? बुढ़ापा भी तो दुबक रहा। जिस पर भोजन वस्त्र नहीं, अलावों को भी तरस रहा। मजबूरी में बना सन्त! मरता देखा है बसन्त!! प्रेम नाम से घृणा हुई। जीवन है बस छुई-मुई। साथ किसी का पा न सका, सपने बन उड़ गए […]

गीत/नवगीत

मुद्दों को देखा ज्वलन्त!

मैंने ना देखा बसन्त! मुद्दों को देखा ज्वलन्त! बच्चे को ना प्यार मिला। साथी को ना एतबार मिला। शिक्षा नाम बस तथ्य मिले, नहीं कहीं संस्कार मिला। नारी ने ही लगाया हलन्त! मुद्दों को देखा ज्वलन्त! कली से नहीं है फूल खिला। खिलना था जो धूल मिला। पोषण उसको मिल न सका, गरीबी का उसे […]

गीत/नवगीत

बेटी के कोमल सपनों को

बेटी के कोमल सपनों को , शिक्षा के दो पंख लगादो | सपनो को पूरा कर पाए, पंखो को परवाज़ भरादो | बेटी के ………. नहीं खिलौने घोड़ा गाड़ी , भाए कोई नहीं सवारी | मैं स्तम्भ बनूँ शिक्षा का , शिक्षा का हर पाठ पढ़ा दो | बेटी के ……… नहीं कीमती मागूँ कपड़े […]

गीत/नवगीत

सिंधु सा गहरा प्रणय है

सिंधु सा गहरा प्रणय है, थाह जिसकी है नहीं | प्रणय परणित साधाना बिन ,सृष्टि फलती है नहीं | पुष्प परिमल यह खिला दे, थार और कछार में , यह न ऐसी वस्तु है जो प्राप्त हो बाजार में , आदि मध्य न अंत जिसका ,कब कहां किसको मिले , पालिया जिसने इसे दृग बिंदु […]

गीत/नवगीत

घर में घुस कर मारेंगे

अगर सनातन पर अब कीच उछालेंगे हम सब उनके घर में घुस कर मारेंगे। माफी मांगें तो भी काम नहीं होगा, कर्म करेंगे जो परिणाम वही होगा, बहुत हुआ हंस-हंस कर हमने टाला है जहां रहेगें रिपु, कोहराम वहीं होगा। आस्तीन में अब हम सांप ने पालेंगे, हम सब उनके घर में घुस कर मारेंगे। […]

गीत/नवगीत

कर्म छोड़कर निर्भरता की,

शक्ति, धैर्य, प्रेम की देवी, समर्पण तेरी महानता है। कर्म छोड़कर निर्भरता की, ये कैसी समानता है?? नर से सदैव कर्म में आगे। तुझसे ही नर भाग्य हैं जागे। नर तेरे बिन सदा अधूरा, तू सदैव ही आगे-आगे। प्रतियोगी बनती हो क्यूँ? कैसी आज वाचालता है। कर्म छोड़कर निर्भरता की, ये कैसी समानता है?? कानूनों […]

गीत/नवगीत

देवी नहीं, मानवी ही समझो

देवी नहीं, मानवी ही समझो, देवी कहकर बहुत ठगा है। बेटी, बहिन, पत्नी, माता का, हर पल नर को प्रेम पगा है।। बेटी बनकर, पिता को पाया। पिता ने सुत पर प्यार लुटाया। भाई पर की, प्रेम की वर्षा, पत्नी बन, पति घर महकाया। पराया धन कह, दान कर दिया, कैसे समझे? कोई सगा है। […]

गीत/नवगीत

उड़ ले पंक्षी मुक्त गगन में

तेरी खुशी में आज मगन में। उड़ ले पंक्षी मुक्त गगन में।। बचपन तेरा घुटकर बीता। मजबूरी में दूध था पीता। बंधन इतने किए आरोपित, साहस और उत्साह है रीता। छोड़ रहा अब खुले चमन में। उड़ ले पंक्षी मुक्त गगन में।। बचपन के दिन लौट न पाएं। बचा नहीं कुछ गाना गाएं। इच्छा तेरी […]

गीत/नवगीत

नींद चैन की सोई नहीं है

अतीत पीछे छूट गया है, वर्तमान में कोई नहीं है। नर से दूर रहकर नारी, नींद चैन की सोई नहीं है।। संग साथ से चलता है जग। कभी कभी मिल जाते हैं ठग। विश्वासघात की चोट से देखो, दिल की भी हिल जाती है रग। जीवन अमृत चाह सभी की, चाहता कोई छोई नहीं है। […]