गीत/नवगीत

लक्ष्य का गीत

ज़िद पर आओ,तभी विजय है,नित उजियार वरो। करना है जो,कर ही डालो,प्रिय तुम लक्ष्य वरो।। साहस लेकर,संग आत्मबल बढ़ना ही होगा जो भी बाधाएँ राहों में,लड़ना ही होगा काँटे ही तो फूलों का नित मोल बताते हैं जो योद्धा हैं वे तूफ़ाँ से नित भिड़ जाते हैं मन का आशाओं से प्रियवर अब श्रंगार करो। […]

गीत/नवगीत

दुख की उमर बहुत है छोटी

दुख की उमर  बहुत छोटी है, सुख ने हँस यह बात बतायी सूखे नयना हुए बावरे , पलकें भीगी और मुसकाईं । हाथी पर चढ़ आया था दुख,  उल्लू ने थी बाट सजायी पर जब सुख ने कदम धरा तो, तारों ने भी आँख बिछायी हटी बदरिया काले दुख की, मुसकाई सुख की जुनहाई दुख […]

गीत/नवगीत

श्रमिकों का गीत

श्रम करने वालों के आगे,गहन तिमिर हारा है। श्रमिकों के कारण ही तो देखो,हरदम उजियारा है।। खेत और खलिहानों में जो, राष्ट्रप्रगति के वाहक हैं अन्न उगाते,स्वेद बहाते, जो सचमुच फलदायक हैं श्रम के आगे सभी पराजित,श्रम का जयकारा है। श्रमिकों के कारण ही तो देखो,हरदम उजियारा है।। सड़कों,पाँतों,जलयानों को, जिन ने नित्य सँवारा यंत्रों […]

गीत/नवगीत

गीत

गिर रही है रोज़ ही,क़ीमत यहाँ इंसान की बढ़ रही है रोज़ ही,आफ़त यहाँ इंसान की न सत्य है,न नीति है, बस झूठ का बाज़ार है न रीति है,न प्रीति है, बस मौत का व्यापार है श्मशान में भी लूट है,दुर्गति यहाँ इंसान की। गिर रही है रोज़ ही,क़ीमत यहाँ इंसान की।। बिक रहीं नकली […]

गीत/नवगीत

घास में कीड़े

हरी घास में कीड़े पनपे, हर पल्लव छलनी होता। सुमन खिलें शाखा पर कैसे, सूखा है सुगंध – सोता।। पादप की सूखी शाखा पर, सुमन नहीं, फल क्यों आएँ? जैसे बोए बीज बाग में, वे बबूल बस चुभ पाएँ।। घुड़शाला में गधे पले हैं, खड़ा – खड़ा हाथी रोता।। हरी घास में कीड़े पनपे, हर […]

गीत/नवगीत

जलता है देश हमारा

जलता जाता देश,चुप्प हैं देखो सारे। नौजवान को समझाकर के,सब ही हारे।। नीति,नियति की बातें होतीं,हिंसा फैली। देखो तो सबकी ही चादर दिखती मैली।। शासक दोषी,नौजवान भी,कुछ तो देख तमाशे। दूर बैठकर चुप हो खाते,शक्कर पगे बताशे।। देशभक्ति की बातें करते,पर लाते अँधियारे। जलता जाता देश,चुप्प हैं देखो सारे।। आग बुझेगी कैसे अब यह,कोई तो […]

गीत/नवगीत

दर्द का गीत

रोदन करती आज दिशाएं,मौसम पर पहरे हैं । अपनों ने जो सौंपे हैं वो,घाव बहुत गहरे हैं ।। बढ़ता जाता दर्द नित्य ही, संतापों का मेला कहने को है भीड़,हक़ीक़त, में हर एक अकेला रौनक तो अब शेष रही ना,बादल भी ठहरे हैं । अपनों ने जो सौंपे वो,घाव बहुत गहरे हैं ।। मायूसी है,बढ़ी […]

गीत/नवगीत

पावन बेला फिर आई है

किसने उगला ज़हर यहाँ और, किसने आग लगाई है? धर्म धरा पर यह किसने, नफरत की फसल उगाई है? आस्तीन का साँप कभी, माता का लाल नहीं होता जयचंद अगर न होते तो, कलुषित ये भाल नहीं होता हाथों में पत्थर थामे क्यों, फिर बहकी ये तरुणाई है? धर्म धरा पर यह किसने, नफरत की […]

गीत/नवगीत

पल पल सरक रहा है जीवन

  पल पल सरक रहा है जीवन रेत घड़ी के जैसे याद करे दुनिया सदियों तक जीवन जी लो ऐसे पल पल सरक रहा है जीवन … क्या लेकर आया था जग में क्या लेकर जाएगा तेरे कर्मों का फल ही बस साथ तेरे जाएगा सद्कर्मों से भरो खजाना क्या करना है पैसे याद करे […]

गीत/नवगीत

गीत

सब कुछ भुला दिया है एक नाम बाकी है। तेरी गली में गुजरी थी वो आखरी शाम बाकी है।। मिटा दिया हमने जला दिया हमने, दिल का मेरा बस आखरी सलाम बाकी है। छोड़ के तेरे शहर को हम निकल पड़े हैं यूँ, भूल के सारी दुनिया को चल पड़े हैं यूँ, अब मेरा यहाँ […]