Category : गीत/नवगीत

  • गीत – चौकीदार चोर बतलाया

    गीत – चौकीदार चोर बतलाया

    (रफेल सौदे पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद राहुल गांधी जी को चुनावी परिणामो के मध्य आईना दिखाती मेरी नई कविता) चौकीदार चोर बतलाया, गला फाड़ कर चिल्लाए चोर चोर कहते कहते तुम तीन प्रदेश...

  • नवगीत – झाड़ रहे हैं पल्ला

    नवगीत – झाड़ रहे हैं पल्ला

    बेच रहे वे सपने कब से मचा-मचाकर हल्ला देखो कैसा खेल चल रहा उनका खुल्लम-खुल्ला आसमान के चाँद सितारे धरती पर लायेंगे बिजली की परवाह नहीं सूरज नया उगायेंगे चाहे कोई इनको कहता फिरता रहे निठल्ला...




  • हूँ मैं दीप माटी का

    हूँ मैं दीप माटी का

    हूँ मैं दीप माटी का किंतु अंधेरों से लड़ूँगा काट कर तम को जड़ से प्रकाश की ओर बढूँगा। चाँद की मनमानी है तारों ने भी ठानी है। लड़कर अमावस्या से पूर्णिमा की ओर बढूँगा। हूँ...

  • “राधेश्यामी गीत”

    “राधेश्यामी गीत”

    “राधेश्यामी गीत” अब मान और सम्मान बेच, मानव बन रहा निराला है। हर मुख पर खिलती गाली है, मन मोर हुआ मतवाला है।। किससे कहना किसको कहना, मानो यह गंदा नाला है। सुनने वाली भल जनता...

  • एक मुसाफ़िर चला गया

    एक मुसाफ़िर चला गया

    हम सबके नयनों का तारा, मेरा अपना राजदुलारा हमसे अपना हाथ छुड़ाकर , एक मुसाफ़िर चला गया । हर हर महादेव कहता वह प्रात:काल मिला मंदिर पर कुशलक्षेम हमने पूछा तो बोला अच्छा नहीं मित्रवर नहीं...