Category : गीत/नवगीत






  • गीत – जनता ने ऐलान सुनाया

    गीत – जनता ने ऐलान सुनाया

    (यू पी में बीजेपी की प्रचंड विजय पर तात्कालिक प्रतिक्रिया व्यक्त करती कविता) जनता ने एलान सुनाया यूपी के दरबारों को नही चुनेंगे, लोकतंन्त्र के हैवानों हत्यारों को नहीं चुनेंगे, जाति वर्ग का जाल बिछाने वालों...


  • टूटे सपने

    टूटे सपने

    दर्पण जैसे टूटे सपने । भ्रमर कोई जलजात निहारे । इक चकोर विधु, रात निहारे । हो बैठे दीवाने सारे – गीत लिखे थे जितने हमने । दर्पण जैसे ……………….. इक विरहन ,की शाम हुआ मैं।...

  • सोच रहा हूँ ।

    सोच रहा हूँ ।

    सोच रहा हूँ ,एक कहानी लिख डालूँ । सोच रहा हूँ,पीड़ा का एक चित्र लिखूँ । सोच रहा हूँ,दुखड़ो को मैं मित्र लिखूँ । गम की कोई एक निशानी लिख डालूँ । सोच रहा हूँ…………………………. कलम...