गीत/नवगीत

कैसे गाऊँ

कैसे गाऊँ गीत प्रेम का ~~~~~~~~~~~~~~~~ कैसे गाऊँ गीत प्रेम के पिय का प्रीत कलश रीता | हृदय पटल पर हे प्रिय हमने , अंकित तेरा नाम किया | सेंदुर माँग सजाया हमने , काजल बिंदिया सजा लिया | श्वेत पत्र सा हृदय तुम्हारा , पर रंगों से नहीं रंगा | कैसे गाऊँ – – […]

गीत/नवगीत

गीत

जैसे कान्हा भूल न पाये राधा की उन यादों को। प्रियतम याद हमेशा रखना प्रेम राह के वादों को! मेरा हाल हुआ राधा सा लेकिन तुम कान्हा ठहरे। मेरे हर इक अश्क से प्रियतम घाव मिले तुमको घहरे। आकर गले लगा लो मुझको, दूर करो अवसादों को। प्रियतम याद हमेशा रखना प्रेम राह के वादों […]

गीत/नवगीत

भव भय से मुक्त अनासक्त

भव भय से मुक्त अनासक्त, विचरि जो पाबत; बाधा औ व्याधि पार करत, स्मित रहबत ! वह झँझावात झेल जात, झँकृत कर उर; वो सोंपि देत जो है आत, उनके बृहत सुर ! जग उनकौ लहर उनकी हरेक, प्राणी थिरकत; पल बदलि ज्वार-भाटा देत, चितवन चाहत ! चहुँ ओर प्रलय कबहु लखे, लय कभू लगे; […]

गीत/नवगीत

अनुरोध

हिय!निवेदन एक तुमसे,मत व्यथा के गीत गाना। प्राण में भरकर अमिय प्रिय,इस जगत को है हँसाना।। स्वार्थ में डूबे मनुज को, आभास है क्या त्याग का। मीत को जो छ्ल रहा नित, है अरि वही अनुराग का। सुप्त क्यों शुचि भावनाएँ,मन! तनिक इनको जगाना।। प्राण में भरकर अमिय प्रिय,इस जगत को हैै हँसाना।। ईश की […]

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निर्भया और स्वर्ग

निर्भया और स्वर्ग ____________ बादल बीच लगाकर सीढ़ी ,स्वर्ग द्वार खोला| किरणों से ले ज्योति पुंज ,घर में अपार घोला| स्वर्णिम आभा ले धरती पर स्वर्ग बसाया हमने – पर हैवानों से जीवन का तार-तार डोला| मैंने अपने सपनों को परवान चढ़ाया था| अरमानों की लगा सीढियाँ स्वर्ग बसाया था| बीच बैठ बादल के रथ […]

गीत/नवगीत

चार दिन की जिन्दगी है

हर दिन जिन्दगी तेरा एक पत्ता टूट रहा। तेरे संग चलकर एक एक दिन छूट रहा।। काँटे ही बिछे हैं क्या तेरी राहों  में , कितने पहाड़ छुपे हैं तेरी पनाहों में। कहीं तू झील है, कहीं तू सागर के जैसी- कोई पार करता है, कोई यहाँ पर ढूब रहा। हर दिन जिन्दगी…………..एक दिन छूट […]

गीत/नवगीत

जीवन ही अब भार मुझे

मेरा अपना इस जग में , आज़ अगर प्रिय होता कोई। मैंने प्यार किया जीवन में, जीवन ही अब भार मुझे। रख दूं पैर कहां अब संगिनी, मिल जाए आधार मुझे। दुनिया की इस दुनियादारी, करती है लाचार मुझे। भाव भरे उर से चल पड़ता, मिलता क्या उपहार मुझे। स्वप्न किसी के आज उजाडूं, इसका […]

गीत/नवगीत

नफ़रत

लहू बनकर बहती है मोहब्बत जहाँ आज भी जिस्म में , जाने कैसे नफरत से यारी कर लेते हैं लोग ? तन्हाइयों से सहम कर टूट जाते हैं पत्ते भी पेड़ की शाख से , जाने कैसे अपनों को भुला देते हैं लोग ? हमको नहीं था इल्म दूर दूर तक जमाने की बदलती हवाओं […]

गीत/नवगीत

गुनगुना रहा हूं गीति के लिए

न राग के लिए न रीति के लिए, कि दीप जल रहा अनीति के लिए। न सांझ में सिमट सकती मधुर ये ज़िन्दगी, न भोर में विहँस सकी निठुर ये ज़िन्दगी, न कल्पना के कोर पर हँसा भोर का दीया, न चांदनी से बुझ सका चकोर का हिया। न हार के लिए न जीत के […]

गीत/नवगीत

जग को जीत सकूँगा मैं

जग को जीत सकूँगा मैं, यदि दृढ़ प्रतिज्ञ हो जाऊँ। कड़ी मशक्कत व लगन से, करके ही दिखलाऊँ।। सिकंदर एक मनुज था,जिसने इस ख़्वाब को देखा। कोई भी कितना रोके मुझे, करना है उसे अनदेखा।। दृढ़ संकल्पित हो कर मैं, सत्पथ पर बढ़ता जाऊँ। सपना जो देखा है मैंने, सच करके उसे दिखलाऊँ।। पथ में […]