Category : गीत/नवगीत

  • वीरों का सम्मान

    वीरों का सम्मान

    वे वीर हमारी थाती हैं, जो आजादी के शैदाई, जो आजादी-हित तड़पे थे, थी खून में जिनके गर्माई. कुछ जाने थे कुछ अनजाने, पर भारत मां के पूत खरे, सीने पर गोली खाई थी, इतिहास उन्हीं...

  • आजा़दी हमारी

    आजा़दी हमारी

    हिम्मत,ताक़त,शौर्य विहंसते,तीन रंग हर्षाये हैं ! सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काये हैं !! क़ुर्बानी ने नग़मे गाये, आज़ादी का वंदन है ज़ज़्बातों की बगिया महकी, राष्ट्रधर्म -अभिनंदन है सत्य,प्रेम और सद्भावों के,बादल तो नित छाये हैं...

  • स्वप्न…अंतर्मन की एक ग़ज़ल!!

    स्वप्न…अंतर्मन की एक ग़ज़ल!!

    मन के उद्वेलित सरवर में स्वप्न भाव के नीलकमल हैं नैनों के पृष्ठों पर अंकित अन्तर्मन की एक ग़ज़ल हैं। स्वप्न निराशा के आॅगन में आशाओं की परिभाषा हैं स्वप्नों के सागर में हरदम रह कर...


  • आजादी

    आजादी

    वीरों ने अपना लहू बहाया तब जाके ये सुबह आई आबो हवा स्वतंत्रता की, तब हमने है पाई। आजादी की कीमत, कोई क्या जानेगा, जिसने प्राण गंवाए, वो ही पहचानेगा, हंसते हंसते कितनों ने, अपनी जान...

  • “गीत”

    “गीत”

    शीतल झरना बहता पानी, फूलों सजी बहार सखी कितना दृश्य मनोरम लगता बगिया है गुलजार सखी मौसम झूम रहा मतवाला मनमयूर नर्तकी बना नीले पीले लाल बसंती प्रिय रंगो का बाग घना नाचे मोर मयूरी देखे,...

  • प्रेम की गंगा

    प्रेम की गंगा

    जब-जब छाती है हरियाली, झूमके सावन आता है। सरसाते हैं सरगम के सुर, मौसम गीत सुनाता है॥ सावन की इस मधुऋतु में ही, मिली थी हमको आज़ादी। पंद्रह अगस्त को लाल किले से, गूंजी थी जय-घोष...

  • रोते बादल

    रोते बादल

    सारी रैना रोते बादल । घूमा करते हैं, आवारा । जैसे कोई गम का मारा । थक कर फिर ये झुक जाते हैं, जैसे कोई पथिक हो हारा। रात रात चपला चिल्लाती , भला कहाँ हैं,सोते...