गीत/नवगीत

गरज उठा फिर ! सिंह आज

गरज उठा फिर ! सिंह आज कायर स्यार छिपा है माद गड़ी है आँँखें उल्लू की सरहद पर लोमड़ नाद मची भगदड़ अरिदल में होंगे ढेर वहीं खंदल में कफन मिला हिम-गरल में शव मिले गलवान तरल में क्यों ! गरज उठा फिर ! सिंह आज हुई शहादत वीरों की खौला खून जवानों का निहत्थे […]

गीत/नवगीत

सीमा ! तुम प्यार की सीमा हो

सीमा ! तुम प्यार की सीमा हो । सीमा ! तुम प्यार की सीमा हो ।। सृष्टि सीमा से परे ! दृष्टि सीमा से परे !! परम सृष्टि अदृश्य दृष्टि से तृप्त , अतुलनीय रहस्यमय महिमा हो । सीमा ! तुम प्यार की सीमा हो । -२ धरती पर ना पैर पड़े ! बिन साजन […]

गीत/नवगीत

देश को तब मिली आजादी

आबाद होने को जब हुई बरबादी। देश   को   तब  मिली  आजादी।। दो   सौ   वर्षों  तक ,  देश   रहा   गुलाम। छिनी शांति लोगों की , जीना हुआ हराम। सन  संतावन  ने  जब   आग   लगा  दी , देश को…. माथे से पसीना टपका, खून गिरा सीने से। मौत  तो  बेहतर है ,  घुट-घुट के जीने से।। यह     […]

गीत/नवगीत

गुरु पूर्णिमा पर गुरु को समर्पित  प्रार्थना

गुरुवर तुम ही बने सहारा ,जब जीवन छाया अँधियारा । अंतर्मन में ज्ञान दीप से ,तुमने फैलाया उजियारा । शिक्षक दुविधा  हरते हिय की  ,मन को नित नव चेतन करते । भाव सरस् मन में उपजाकर ,संस्कार हिय भीतर भरते । मन नैया जब डगमग डोले ,तब गुरुवर ने पर उतारा । अंतर्मन में ज्ञान […]

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नर बने दानव खड़े हैं

है नज़र जिस ओर जाती,नर बने दानव खड़े हैं । खून पीने  को जिगर का, जान के पीछे  पड़े हैं ।। काज  करते  हैं  घिनौने, बोल  मीठे  बोलते  हैं, आम जन की जिंदगी  में, विष यही तो घोलते हैं। हो गए साधन सुलभ पर,क्यों विकल हर आदमी है, खुश धनिक हर ओर है अरु,दीन के […]

गीत/नवगीत

भोजपुरी, होली गीत

“होली गीत” होरी खेलन हम जईबे हो मैया गाँव की गलियाँ सरसों के खेतवा फुलईबे हो मैया गाँव की गलियाँ।। रंग लगईबें, गुलाल उड़ेईबें, सखियन संग चुनर लहरैबें भौजी के चोलिया भिगेईबें हो मैया गाँव की गलियाँ…..होरी खेलन….. पूवा अरु पकवान बनेईबें, नईहर ढंग हुनर दिखलईबें बाबुल के महिमा बढ़ेईबें हो मैया गाँव की गलियाँ…..होरी […]

गीत/नवगीत

गीत “प्रीत का व्याकरण”

घूमते शब्द कानन में उन्मुक्त से,जान पाये नहीं प्रीत का व्याकरण।बस दिशाहीन सी चल रही लेखिनीकण्टकाकीर्ण पथ नापते हैं चरण।।—ताल बनती नहीं, राग कैसे सजे,बेसुरे हो गये साज-संगीत हैं।ढाई-आखर बिना है अधूरी ग़ज़ल,प्यार के बिन अधूरे प्रणयगीत हैंनेह के स्रोत सूखे हुए हैं सभी,खो गये हैं सभी आजकल आचरण।कण्टकाकीर्ण पथ नापते हैं चरण।।—सूदखोरों की आबाद […]

गीत/नवगीत

लावणी छन्द गीत- कलम आज जय गाती है

अरि की सुन ललकार युद्ध में,उठे हिलोर जहां हृद में । सज्य लुटाने प्राण उन्ही की,कलम आज जय गाती है । सीने  पर  गोली  खाकर भी, डटे रहे  बांके  रण में, धीर,वीर वो कहां रुके थे,मातृ भूमि  जिनके प्रण में, धन्य किया  है जनम वीर ने, मान बढ़ाया माता  का, त्याग दिया घर बार उसी […]

गीत/नवगीत

सुगत सवैया – गरमी

आतप,ताप भरा भू,अम्बर, विकट रूप ग्रीष्म ऋतु आयी । रुद्र रूप दिनकर ने धारा,देह तपी धरणी अकुलायी । जेठ मास की तपिश कँटीली, सूख गए वन उपवन सारे । लू के घायल करे थपेड़े ,त्राहि माम हर प्राण पुकारे । महासमर का दृश्य डराता,उग्र अगन दे रही दिखाई । रुद्र रूप दिनकर ने धारा,देह तपी […]

गीत/नवगीत

गीत

दिनकर ने शोले बरसाये,पर अब तो राहत है । बहुत दिनों के बाद सभी की,खिली खिली तबियत है ।। ताल-तलैयां रीत गये थे नदियां भी थीं सूखी बुझा-बुझा मन रहता था और काया भी थी रूखी बारिश की बूंदों से पर अब,हर उर आनंदित है । बहुत दिनों के बाद सभी की,खिली खिली तबियत है […]