गीत/नवगीत

गीत – इंसानों में इंसान नहीं

कण कण में भगवान यहाँ किंतु इंसानों में इंसान नहीं मिले संवेदना मूक प्राणी मे मानव ही अब दयावान नहीं स्वार्थहित बेचा निज धर्म को कायरता में जीता है जीवन वृक्ष काट, शहर बसा लिये मन को काटा, काटे है वन दूसरे के धन घर हड़प रहा खुद का अपना मकान नहीं अश्रु का कारण […]

गीत/नवगीत

हमारी हिंदी

कोटि-कोटि कंठों से गूंजी, हिंदी की नव कोकिल तान, इस हिंदी पर न्योछावर हैं, तन-मन-धन और ये प्राण. हिंदी आन हमारी है अब, हिंदी ही है सबकी शान. एक साथ सब मिलकर, जय हिंदी जय भाषा महान. तुलसी-मीरा-सूर-रहीमन, कुतुबन-मंझन इसकी शान, इसी में छेड़ी तान जिन्होंने, कबीर-दादू इसकी आन. पंत-निराला इसके गौरव, दिनकर-माखन इसके लाल, […]

गीत/नवगीत

हिंदी भाषा

हिंदी भाषा अपनाने में, किंचित भी न शरम करना अंग्रेजी से होय तरक्की, बिल्कुल भी न भ्रम रखना अंग्रेजी भाषा सीखो पर,निज भाषा का ज्ञान रहे मान बढा़ना हिंदी मां का,हर संभव यह ध्यान रहे हिंदी, संस्कृत की पुत्री,सरल स्वभाविक भाषा है निज भाषा से होय तरक्की, बाकी सभी तमाशा है हिंदी,हिंदुस्तान की भाषा,अंतःकरण से […]

गीत/नवगीत

स्पंदन का गीत

दिल के स्पंदन में बसता है,प्रियवर का बस नाम। रात-दिवस हो,कोई बेला,प्रियवर तुम अभिराम।। स्पंदन के हर स्वर गाते,नित तेरा ही गीत। तू है जब तक साथ मेरे तो,पाऊँगा मैैं जीत।। मेरा यह जीवन लगता है,तेरा ही उपहार। जीवन को हरसाकर मेरे,कर दे तू उपकार।। जबसे तुझको पाया तबसे,जीवन ललित ललाम। रात-दिवस हो,कोई बेला,प्रियवर तू […]

गीत/नवगीत

नारी

नारी, तुम इतना क्यों सहती हो… क्यों दो धारे में बहती हो… तेरे आंचल में गंगा जल… मन में तेरे अमृत है… पावनता सी माया तेरी… कोमल सहृदय काया तेरी… तन – मन के इस बंधन को, तर्पण करदो अर्पण करदो । नारी… गुमसुम सी तुम सोचमयी हो… मीरा सी तुम भक्तिमयी हो… राधा सी […]

गीत/नवगीत

हे ! मेरे परमेश्वर

(शिक्षक दिवस पर) वंदन है,नित अभिनंदन है, हे शिक्षक जी तेरा । फूल बिछाये पथ में मेरे,सौंपा नया सबेरा ।। भटक रहा था भ्रम के पथ पर, राह दिखाई मुझको गहन तिमिर को परे हटाया, नमन् करूं मैं तुझको आशाओं के सावन में है अरमानों का डेरा । शीश झुकाऊं हे परमेश्वर,भाग्य मिरा यूं फेरा […]

गीत/नवगीत

आज वही सौगात लिखूं

बैठी बैठी सोचा करतीक्यों न प्रकृति की बात लिखूं।मानव को जो मिली प्रकृति से,आज वही सौगात लिखूं।शीतल सघन वृक्ष है,आश्रयखग मृग  का है यह बरगद।देख-देख हरदम ही प्रमुदित,रहता मेरा  मन  है गदगद।इसे देखकर मन कहता हैईश्वर की खैरात लिखूंमानव को जो मिली प्रकृति से,आज वही सौगात लिखूं।रंग बिरंगी तितली का मैंफूलों संग विलास लिखूं।या बसंत […]

गीत/नवगीत

राष्ट्र – आराधना [ गीत ]

लहराता है केतु तिरंगा, भारत की है शान। करती नमन नित्य तव संतति, मेरा देश महान।। मस्तक ऊँचा किए हिमाचल, अपना पहरेदार। उत्तर में कंचन -किरीट वह, प्रकृति दत्त उपहार।। गंगाजल से पावन धरती, मोहक साँझ विहान। ऊँचा कर ललाट रहता है, अपना हिंदुस्तान।। करती नमन नित्य तव संतति, मेरा देश महान।। दक्षिण में चरणों […]

गीत/नवगीत

गीत

द्रोण,भीष्म गर बोले होते , शायद महासमर टल जाता । सोंचो बीच सभा में नारी , दुष्ट दुःशासन खींचे सारी । कोई नही विरोध कर सका, थी शायद सबकी मति मारी। जब चोपड़ का खेल सजा था, काश समय वो गर टल जाता। द्रोण भीष्म गर……………………………….. भूमि न होती रक्तवर्ण कीं, लाशें गिद्ध सियार न […]

गीत/नवगीत

वेदना

स्वर प्रकंम्पित है अधरपर  अश्रुओ के धार कितने  प्रलय है पीड़ा की उर में, वेदना के तार कितने। दीप है कितने प्रज्वलित, मन शलभ सा है यह चंचल। खेल रहे हैं पुष्प कितने, बैठी फैलाकर मैं अंचल। कुछ नहीं है भाग्य में अब, पुष्प के हैं हार कितने। उठ रहा है ज्वार कोई, इस हृदय […]