Category : गीत/नवगीत


  • गीत “सावन में”

    गीत “सावन में”

    सपनों में ही पेंग बढ़ाते, झूला झूलें सावन में। मेघ-मल्हारों के गानें भी, हमने भूलें सावन में।। मँहगाई की मार पड़ी है, घी और तेल हुए महँगे, कैसे तलें पकौड़ी अब, पापड़ क्या भूनें सावन में।...

  • यादें

    यादें

    छिड़ जाता है एक युद्ध अंतर्मन में , बैठ जाती हूँ सब छोड़कर जब तेरी यादों में । कैसा अहसास है हर पल बिन तेरे , डूब जाती हूँ हर पल सिर्फ तेरे खवाबों में ।...



  • “दादरा गीत”

    “दादरा गीत”

    जा रे बदरिया, सौतन घर जा जा रे सौतन घर जा रे, सौतन घर जा जा रे, जा रे बदरिया……. नाहक बरस गई मोर अंगनइयाँ अगन लगी है सौतन घरे सइयाँ जा रे तू वहिका डूबा...

  • सावन विरह-गीत

    सावन विरह-गीत

    सावन विरह-गीत सावन मनभावन तन हरषावन आया। घायल कर पागल करता बादल छाया।। क्यों मोर पपीहा मन में आग लगाये। सोयी अभिलाषा तन की क्यों ये जगाये। पी को करके याद सखी जी घबराया। सावन —–...

  • गीत

    गीत

    फिर से वही रवैया अपना, फिर वो ही लाचारी है अमरनाथ के आंगन में जेहादी गोलीबारी है हिन्दू सात मारकर लश्कर, जश्न मनाता कायम है और सूरमा मोदी का दिल अब तक बहुत मुलायम है अमरीका...

  • हे भारत देश!

    हे भारत देश!

    हे भारत देश! हे असीम अशेष! तुम्हें कोटि-कोटि, वंदन है…वंदन है…। कश़्मीरी सौंदर्य से, उन्नत माथा है। रग-रग में, वीरगाथा है । हे सुख-शांति के भेष! तुम्हें कोटि-कोटि, वंदन है….वंदन है….। कल-कल बहते, गंगा-जमुना के नीर। विंध्य अरावली...