गीत/नवगीत

नव साल

हर झोली में वृद्धि पाए इस युग में नव साल। एक क्रान्ति लेकर आए इस युग में नव साल। नव युवकों में बौद्धक शक्ति उत्तम विद्या आए। जैसे अम्बर भीतर तारे, सूरज चाँद समाए। कूड़ नशा छल कपट भगाए इस युग में नव साल। एक क्रान्ति लेकर आए इस युग में नव साल। भिन्न-भिन्न फूलों […]

गीत/नवगीत

हार न जायें

मन जब अन्तर्द्वन्द से घिर जाये, तब हार न जायें जीवन में। हार न जायें जीवन में। कोयल सी वाणी जब कौए की भाँति कानों को चुभ जाये, हृदय की विदीर्णता पर जब कोई लेप न लगाये। टूटती आस जब बचाने को कोई हाथ पंख ना बन पाये, सफलता की राहों में जब शूल ही […]

गीत/नवगीत

बगिया मेरे गांव की

बाग-बगीचे वाले दिन, बचपन के मतवाले दिन। कितने भोले भाले दिन, लगते बहुत निराले दिन। बगिया की याद आती है, हमको बहुत सताती है। तनिक भी नहीं डरते थे, चील्होरि खेला करते थे। तरुवर की तरुड़ाई में, पत्तों की परछाईं में । खेल अनेकों होते थे, गिरकर भी ना रोते थे। सत्तोड़ि और सुटुर्र हमारे, […]

गीत/नवगीत

वतन के नाम कर जाऊं

मैं अपनी चंद सांसों को, वतन के नाम कर जाऊं। मैं अगले सात जन्मों तक, जन्म भारत में ही पाऊं। इसी की आन पर जीना, इसी की शान पर मरना, जिसे जग भूल ना पाए, कुछ ऐसा काम कर जाऊं। मैं अपनी चंद सांसों को……। गली,हर मोड़, नुक्कड़ पर, शहीदों की निशानी हो। हमारे गीत, […]

गीत/नवगीत

गीत “गौरय्या के गाँव में”

सन्नाटा पसरा है अब तो,गौरय्या के गाँव में।दम घुटता है आज चमन की,ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।—नहीं रहा अब समय सलोना,बिखर गया ताना-बाना,आगत का स्वागत-अभिनन्दन,आज हो गया बेगाना,कंकड़-काँटे चुभते अब तो,पनिहारी के पाँव में।दम घुटता है आज चमन की,ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।—परम्परा के गीत नहीं हैं,अब अपने त्यौहारों में,भुला दिये है देशी व्यञ्जन,पूरब के आहारों में,दबा सुरीला कोयल […]

गीत/नवगीत

चुनाव बीता, आँगन खीसा रीता

  जेशा किया चुनाव आयोग ए चुनाव रा एलान। कार्यकरता ए शुरू किया पार्टी रा गुणगान ॥ कूण जीतदा एथे दा कूण जीतदा तेथेदा। कोसकी बोणयो सरकार होंदा बेड़ा पार ॥ ऐशा चाला जी प्रचारो रा दौर। घोरे नी होयी कोलोयी बी बौर ॥ रोज कुणिये ना कुणिये एशना आऊं । हाथ बी जोड़ों औरो […]

गीत/नवगीत

रौद्र नाद

हे पाखण्ड खण्डिनी कविते तापिक राग जगा दे तू। सारा कलुष सोख ले सूरज ऐसी आग लगा दे तू।। कविता सुनने आने वाले हर श्रोता का वन्दन है। लेकिन उससे पहले सबसे मेरा एक निवेदन है।। आज माधुरी घोल शब्द के रस में न तो डुबोऊँगा। न मैं नाज नखरों से उपजी मीठी कथा पिरोऊँगा।। […]

गीत/नवगीत

कब ये दूरी हो गई

पास रहते  ना  जाने  कब  ये दूरी  हो गई ना जाने क्यूँ ये कहानी फिर अधूरी हो गई समय के फेरों में  न जाने  फंसते  ही  गये फंसा   क्या  कहें   उसमे  धंसते   ही  गये छल के दलदल  से मुझपे  कीचड़  उछाले जो आजतक न  जाने क्यूँ  नही धुलते गये धूप पड़ी पुरानी धूल पे वो  […]

गीत/नवगीत

उर उजास बढ़ायें

बहुत हुआ आराम काम अब करना होगा। सत्पथ पर चंचल चपल चरण धरना होगा।। रहे न कोई भूखा प्यासा छाया हो सर पर। सुजला सरिताएं शुभ धरा सुवासित अम्बर। प्रमुदित उपवन कानन फल औषधि सुख बांटें, धन-धान्य पूरित हों गेह, नेह उगे घर-घर।। मानव मन की पीर, नीर बन हरना होगा। गली, द्वार-घर समरसता के […]

गीत/नवगीत

कैसा नया जमाना है

समझ न आती चाल समय की, कैसा नया जमाना है ! शंकित हर आदमी परस्पर, संदेहों के घेरे हैं, थर -थर भय से काँप रहे वे, ज्यों बेरी सँग केरे हैं, जंगल ही जंगल है, कहाँ लोकमंगल है? रसना पर आदर्श थिरकते, राम राज्य ले आना है। भूखी मरती गाय सड़क पर, खाली सब गौशाला […]