कविता गीत/नवगीत पद्य साहित्य

आज मनुष्य की प्रकृति के आगे अंतिम हार हुई…!!

बारिश ने कल काल का अविचल रूप बनाया था, कृषकों के कंदुक स्वप्नों को बीती रात बहाया था, रीति गागर, रीते सपने लेकर बच्चे सोच रहे, झोंपड़िया में रोते रोते माँ-बापू को नोच रहे..! बाबा के नत-नीर बहे, खाने के लाले पड़ते है, एक-एक कौर की खातिर, घर में भूखे बच्चे लड़ते है, हाय! नियती […]

कविता गीत/नवगीत

प्यार ही प्यार

  प्यार राम में है प्यारा अल्लाह लगे, प्यार के सूर तुलसी ने किस्से लिखे प्यार बिन जीना दुनिया में बेकार है, प्यार बिन सूना सारा ये संसार है प्यार पाने को दुनिया में तरसे सभी, प्यार पाकर के हर्षित हुए हैं सभी प्यार से मिट गए सारे शिकबे गले, प्यारी बातों पर हमको ऐतबार […]

गीत/नवगीत

अरमाँ अधूरे रह गये

मेरे जीवन के सारे अरमां अधूरे रह गये जो देखे थे ख्वाब आँसू के संग बह गये दिल में मैंने ख्वाबों की बनाई आशियाँ रहने से पहले ही गम की चल गयी आँधियाँ उस हवा के साथ जीने की चाह उड़ गये जो देखे थे… जिसने साथ जीने मरने की खायी थी कसम छोड़ दिया […]

गीत/नवगीत

गीत : फांसी का फंदा…

कुदरत का अभिशाप हुआ है, कृषक होना पाप हुआ है। झूल रहा फांसी पर कृषक, चंहुओर संताप हुआ है। कुदरत के इस रौद्र रूप का, कोप बना है ग्राम देवता, मन दुखता है, कृषक के घर, करुणा भरा विलाप हुआ है। सरकारों की क्षति-पूर्ति, उसको ज्यादा से ज्यादा हो। न मिथ्या का अनुकरण हो, न […]

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दोहागीत – मतलब का है प्यार

दोहागीत — मतलब की है दोस्ती, मतलब का है प्यार। मतलब के ही वास्ते, होती है मनुहार।। दुनियाभर में प्यार की, बड़ी अनोखी रीत। गैरों को अपना करे, ऐसी होती प्रीत।। उपवन सींचो प्यार से, मुस्कायेंगे फूल। पौधों को भी चाहिए, नेह-नीर अनुकूल।। छोटे से इस शब्द की, महिमा अपरम्पार। मतलब के ही वास्ते, होती […]

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गीत : पल दो पल के मीत वेदना क्या समझेंगे

वे अंतस की पीर चेतना क्या समझेंगे । पल दो पल के मीत वेदना क्या समझेंगे।। सागर के अंतर में जब हो अग्नि प्रज्ज्वलित। मेघों को मधुमास करे जब भी आमन्त्रित।। जब धरती भी गहन तपन से अति अकुलाए । जब पुष्पों की गन्ध भ्रमर को मद में लाए ।। फिर नयनो से तीर भेदना […]

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गीत : प्रेम सार

तुम्हें भुला दूँ आखिर कैसे, तुमसे मन का तार जुड़ा है। तुम्हें देखकर दुनिया देखूं, तुमसे ही संसार जुड़ा है। रोज तुम्हारे एहसासों को, मैं चुपके से छू लेता हूँ, तुम लगती हो सबसे प्यारी, क्यूंकि तुमसे प्यार जुड़ा है। उजली धूप सुबह की तुमसे, ख्वाब रात के तुम लाती हो। तारे भी पुलकित होते […]

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गीत : पल दो पल के मीत वेदना क्या समझेंगे

वे अंतस की पीर चेतना क्या समझेंगे । पल दो पल के मीत वेदना क्या समझेंगे।। सागर के अंतर में जब हो अग्नि प्रज्ज्वलित। मेघों को मधुमास करे जब भी आमन्त्रित।। जब धरती भी गहन तपन से अति अकुलाए । जब पुष्पों की गन्ध भ्रमर को मद में लाए ।। फिर नयनो से तीर भेदना […]

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गीत : मन बावरा रे…

मन बावरा मेरा बावरा मन बावरा रे । मन माने ना माने ना मेरा बावरा रे ।। मन की बातें मन ही जाने , बात किसी की एक न माने , प्रीत जोड़ के मनमोहन से , ऊँच नीच कुछ ना पहचाने , मन का नहीं जाने दर्द मेरा साँवरा रे । मन माने ना […]

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राम-भजन : निर्गुन

छन्द: बचपन  बीता  खेल-खेल में, मस्ती  में  तरुणाई धन-दौलत,यश के पीछे; जीवन-भर दौड़ लगाई देख  बुढ़ापा  थर-थर  काँपा, भूल  गई  ठकुराई कभी राम का नाम लिया ना,बिरथा जनम गँवाई ००००००० उजली चादर  मैली  कर ली, कैसे  प्रभु-घर  जायेगा । राम-नाम का सुमिरन कर ले, भव-सागर  तर  जायेगा ।। कभी न की संतों की सेवा, कभी […]