Category : गीत/नवगीत


  • नवगीत – कहो कबीरा

    नवगीत – कहो कबीरा

    कहो कबीरा , इस जीवन में, सच पर ऐसा रोना कैसा । कहो कबीरा ………………..।। किसकी चैखट, किसकी खिड़की , किसका यह घर डेरा है । मिटने वाला माटी ढ़ेला , न तेरा……न मेरा है ।।...


  • बारिश

    बारिश

    बारिश का मौसम वैसे तो लगता है सबको सुखदाई पर गरीब के दुख को तो वर्षा रानी भी समझ न पाई उसकी छत का टपकना रातों का जागना टपकते पानी के नीचे नन्हें हाथों बर्तन रखना...

  • दिया जलाने हम आये हैं

    दिया जलाने हम आये हैं

    अपनी धरती की रक्षा को। आगे बढ़े कदम आये हैं। दिया जलाने हम आये हैं। माँ सीता को हरने वाले। स्वर्ण महल में रहने वाले। राम प्रभु की प्रत्यंचा से। दशकंधर वध कर आये हैं। दिया...

  • हे माँ गंगे

    हे माँ गंगे

    हे देवसरी, हे देवनदी। हे देवपगा, हे ध्रुवनन्दा। करती पितरों का तुम तारन। कहलाती हो तुम माँ गंगा।। गंगोत्री हिमनद से निकली। हिमगिरि के चरणों से फिसली। करती कल-कल, छल-छल निकली। उन्मत्त यूँ लहराकर निकली। करती...



  • चिंता छोड़ करो चिंतन…

    चिंता छोड़ करो चिंतन…

    कुछ भी नही असम्भव जग में, जब करने की ठाने मन। चिंता छोड़ करो चिंतन बस, चिंता छोड़ करो चिंतन।। जीवन के पथरीले पथ पर, कष्ट सहन कर चलते रहना। काली अँधियारी रातों में, दीपक बन...

  • उद्घोष करना है जरूरी…

    उद्घोष करना है जरूरी…

    हाकिमों का दंभ बढ़कर आसमां छूने लगे जब। देश में जन क्राँति का उदघोष करना है जरूरी।। भूल कर जब धर्म सत्ता, हो विमुख कर्त्तव्य पथ से न्याय कुचला जा रहा हो, हर घड़ी जब राज...