Category : गीत/नवगीत

  • गीत

    गीत

    सबने केवल गीत लिखे है ,लैला शीरीं हीर के कोई गीत नही लिखता है , भारत माँ की पीर के   सब ग़ज़ले लिखने में रहते ,  शेरों में  श्रृंगार लिखे आशिक लिखते, राँझा लिखते ,...


  • मेरी भी सुनो

    मेरी भी सुनो

    हाड़ मांस की गठरी ना हूँ  मैं मेरा एक दिल भी है चंचल ,चितवन नैन नशीले और अदा कातिल भी है हिरणी जैसी चाल है मेरी  काले लंबे बाल भी है क्या ये खता है मेरी...



  • मुक्ति में है मौज बड़ी

    मुक्ति में है मौज बड़ी

    मुक्ति में है मौज बड़ी लाती है खुशियों की झड़ी, मुक्ति ही अनमोल रतन है, क्या सुख दे हीरों की लड़ी! मुक्ति का सुख वह ही जाने, जो इसका मधुरस पहचाने, मुक्ति का सुख देने में...

  • समकालीन गीत

    समकालीन गीत

    धुंध हो गया सारा जीवन,कुछ भी नज़र नहीं आता ! आशाएं अब रोज़ सिसकतीं,कुछ भी नज़र नहीं आता !! बाहर भी है,अंदर भी है, सभी जगह कोहरा छाया न तुम सुधरे,न हम सुधरे, कुछ भी संवर...


  • सम्प्रभुता हमारी

    सम्प्रभुता हमारी

    हिम्मत,ताक़त,शौर्य विहंसते,तीन रंग हर्षाये हैं ! सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काये हैं !! क़ुर्बानी ने नग़मे गाये, आज़ादी का वंदन है ज़ज़्बातों की बगिया महकी, राष्ट्रधर्म -अभिनंदन है सत्य,प्रेम और सद्भावों के,बादल तो नित छाये हैं...