Category : गीत/नवगीत

  • गीत

    गीत

    मेरी विधा से इतर एक प्रयास,,,,,,, दिन के बाद रात का आना ये सच है, ये अटल भी है, तेरे इसी आज में शामिल, आने वाला कल भी है, हकीकत पर जीवन की रुककर कुछ विचार...

  • पीड़ा का गीत

    पीड़ा का गीत

    उजियारे को तरस रहा हूं, अँधियारे हरसाते हैं ! अधरों से मुस्कानें गायब, आंसू भर-भर आते हैं !! अपने सब अब दूर हो रहे, हर इक पथ पर भटक रहा कोई भी अब नहीं है यहां,...


  • गीत-आखिर-क्या-मजबूरी-थी?

    गीत-आखिर-क्या-मजबूरी-थी?

    आखिर-क्या-मजबूरी-थी? तेरे इश्क की आरजू-ए-उल्फ़त में, दिल की दिलकशी में बेदर्दी जरूरी थी! आखरी तेरी क्या मजबूरी थी? मदहोशी तेरी मुहोब्बत की, आँखों के रस्ते बहनी भी जरूरी थी, आखिर तेरी क्या मजबूरी थी? हद से...


  • “गीत”

    “गीत”

    छंद – मोदक (वार्णिक) शिल्प विधान –भगण ×4, मापनी 211 211 211 211 भाव लिखो जब आप सभी जन मान गुमान विचार लियो मन ठेस लगे न कलेश भरे जिय सुंदर शब्द खिले रचना प्रिय॥ गागर...

  • शर्वरी धीरे चलो!!

    शर्वरी धीरे चलो!!

    (कल्पना कुछ ऐसी है- देर रात थक कर लौटे पति को पत्नी नहीं चाहती कि वह जल्दी उठे ऐसे में वह ‘तारों भरी रात(शर्वरी)’से जल्दी ना ढलने का निवेदन कर रही है!) शर्वरी! धीरे चलो कि मेरे...

  • गीत

    गीत

    पीड़ा पारावार हुई है, टूटे उर तंत्री के बंधन । समय व्याध तू गर रुक जाता ! तो यह निर्मम क्षण न आता । तूने युगल न तोड़ा होता – तन्हा क्रौंच न अश्रु बहाता ।...

  • कविता – धरती राजस्थान की

    कविता – धरती राजस्थान की

    कण कण जिसका यश गाता वह धरती राजस्थान की….. राणा प्रताप से स्वाभिमानी पन्ना जैसी स्वामिभक्त यहाँ भामाशाह से हुए दानी जहाँ वह धरती राजस्थान की….. पद्मनी सी सुंदर महारानी आन बान की जिसने ठानी मीराँ...